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1999 था। गाँव वैशाली की मिट्टी में उस समय भी एक अजीब सी दहशत घुली हुई थी। लोग कह...
Confucius was a practitioner and political philosopher who lived during the Zhou...
त्रिपिंड चित्त-दर्शन(The Tri-Pinda Consciousness Model)प्रस्तावना: मानव और ब्रह्...
શુક્રવારનો દિવસ હતો. સવારના લગભગ નવ વાગ્યા હશે. સ્ટેશનના પ્લેટફોર્મ પર ઠંડી હવા...
“હેય આશુતોષ...તારું આજનું કામ: ઓછામાં ઓછા દસ માણસોને તું ગાળ બોલીશ!જૂના મિત્રો,...
पुत्र सुखमनु खाना खाने बैठा - थाली की सब्जी में बाल उसे फिर दिखगया, बाल देखते ही...
सुबह की ताज़ा धूप जब सुल्तान मेंशन के आँगन में उतरी, तो घर में चहल-पहल शुरू हो चु...
मध्य रात्रि का समय था. सन्नाटे से घिरी बीच सडक पर एक लंबे कद का आदमी धीमे- धीमे...
સવારે છ વાગ્યાનો સમય હતો.સવારના સોનેરી કિરણો જ્યારે સિનિયર સિટિઝન પાર્કના લીલાછમ...
मायेची कुशी: जीवनाचं पहिलं आणि शेवटचं हक्काचं घरमाणूस या जगात येतो तेव्हा त्याच्...
આજના સમયમાં જે પ્રમાણે ટેકનોલોજીનો વિકાસ થઇ રહ્યો છે, તેટલી જ ઝડપથી માહિતીનું પણ આદાન પ્રદાન થઇ રહ્યું છે. એક સમયે એવો હતો કે, માહિતી સંતાડવી અને તેણે જાહેર થતી રોકવી ખુબ જ સહેલું...
( ⚠️ पढ़ने से पहले ज़रूर जानें! धार्मिक नहीं, तार्किक: यह किताब किसी धर्म या संप्रदाय के लिए नहीं, बल्कि मानव मनोविज्ञान और व्यावहारिक जीवन जीने के विज्ञान पर आधारित है। शैली...
संत कबीर जी के इस दोहे को अक्सर लोग गलत समझ लेते हैं। वे सोचते हैं कि कबीर जी हमें डरा रहे हैं या जीवन से निराश कर रहे हैं कि “जब अंत में मिट्टी ही होना है, तो मेहनत क्यों करें?” ल...
कमरे में एसी चल रहा था, फिर भी संजना की हथेलियां पसीने से तर थीं। फोन को इतनी जोर से पकड़ा हुआ था कि उंगलियों के पोर सफेद पड़ गए थे — जैसे अगर उसने ज़रा भी ढील दी, तो कुछ छूट जाएगा...
खामोश हवेली का रहस्य रात के सन्नाटे को चीरती हुई अयान मल्होत्रा की महँगी एसयूवी (SUV) शहर के शोर-शराबे से दूर, उस सुनसान इलाके की ओर बढ़ रही थी जहाँ बरसों पुरानी 'ब्लैकवुड हवे...
डोंबिवली स्टेशनच्या प्लॅटफॉर्म नंबर ३ वर सकाळी ९:१५ वाजता पाय ठेवायलाही जागा नव्हती. मध्य रेल्वेची ही सर्वात भयानक वेळ. प्लॅटफॉर्मवर उसळलेला तो मानवी समुद्र पाहून कोणाही नवख्या माण...
एपिसोड 1: वीरान हवेली की अनकही दस्तक पहाड़ों की ऊँचाइयों पर, घने चीड़ के पेड़ों के बीच छिपी हुई थी— नीलगिरी हवेली। लेकिन अब— यहाँ सिर्फ सन्नाटा था। ऐसा सन्नाटा, जो कानों...
ఇక్కడివరకూ నచ్చిందనే ఆశిస్తా. ఆ మర్నాడు తన పద్దెనిమిదో పుట్టినరోజు అనగా తన తల్లి మీద మర్డర్ అటెంప్ట్ చేసింది సారిక తనకేమాత్రం ఆ విషయమై స్పృహ లేకుండా. ఆ తరువాత కొన్నిరోజులకే తమ ఇ...
क्षितिज के उस पार तक फैला आकाश आज नीले रंग का नहीं, बल्कि ताजे बहते रक्त के समान गहरा लाल था। हवा भारी और बोझिल हो चुकी थी, जिसमें लोहे जैसी तीखी खून की महक और जलते हुए मांस की दुर...
Chapter 1 दिल्ली। सुबह के सात बजे। अलार्म की तेज़ आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी। बिस्तर पर चादर में लिपटी अवंतिका शर्मा ने करवट बदली और तकिया अपने कानों पर रख लिया।...
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