Best Comedy stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Comedy stories in All books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cultu...Read More


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चोलबे ना - 8 - गाली ही आशीर्वाद है By Rajeev Upadhyay

मुझे भाषण देने की आदत जो है कि लोग देखा नहीं कि बस उड़ेलना शुरू कर देता हूँ। बस कुछ दोस्त मिल गये तो मैं लग गया झाड़ने। खैर झाड़ते वक्त ये देख लेता हूँ कि सामने कौन है। खैर दोस्तों को...

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पुतला (व्यंग्य ) By Alok Mishra

‘‘पुतला’’ मैं पुतला हूँ। यदि आप न समझें हो तो मैं वही पुतला हूँ, जो दशहरे में रावण के रूप में और होली में होलिका के रूप में अनेक वर्षों से जलता रहा हूँ। मेरे अंगों के रूप में...

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गरीबी और गरीब ( व्यंग्य ) By Alok Mishra

गरीबी और गरीब ( व्यंग्य ) गरीबी और मंहगाई दो बहनें आजादी के मेले में एक दूसरे का हाथ पकड़े भारत के पीछे-पीछे लग गई । तब से लेकर आज तक इन दोनों ने ही देश की राजनीति और चुनावों...

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सत्य मोहे न सोहते ( व्यंग्य ) By Alok Mishra

सत्य मोहे न सोहते ( व्यंग्य ) बचपन से एक ही पाठ पढ़ा है ‘‘सत्य बोलो’’ क्योंकि ‘‘सत्यमेव जयते।’’ सत्य की विजय को लेकर अनेकों काल्पनिक कहानिया‌ॅ बचपन से केवल इसलिए स...

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ગુજરાતી કહેવતો અને તેનો અર્થ ગમ્મત સાથે - 2 By Yuvrajsinh jadeja

સહેજે વીચાર આવેલો કે કહેવતોનો વપરાશ કેટલો ઘટી ગયો છે ને "ગુજરાતી કહેવતો અને તેનો અર્થ ગમ્મત સાથે" લખેલું અને ખૂબ સારો પ્રતિસાદ મળ્યો એટલે હવે થોડી બીજી કહેવતો સાથે " ગુજરાતી કહેવતો...

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व्हीप......व्हीप......व्हीप.... (व्यंग्य) By Alok Mishra

व्हीप......व्हीप......व्हीप.... ‘‘आज के समाचार यह है कि राम प्रसाद जो कि गधा पार्टी के नेता हैं, से सुअर पार्टी पर प्रहार करते हुये व्हीप.......व्हीप.......व्हीप कहा। इसके...

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होली का दिन ( होली स्पेशल) By RACHNA ROY

दीपू होली के पहले दिन ही पापा के साथ जाकर तरह-तरह के रंग, पिचकारी, गुब्बारे सब कुछ खरीद कर ले आया।दीपू होली के पहले दिन ही पापा के साथ जाकर तरह-तरह के रंग, पिचकारी, गुब्बारे सब कुछ...

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यमराज का आगमन By Alok Mishra

यमराज का आगमन अचानक एक धमाकेदार खबर सुर्खियाॅ बन गई । बनती भी क्यों न , खबर ही ऐसी थी । खबर आई कि यमदूत आने वाले है । बस , सब तरफ कोहराम मच गया । यमदूत कब आते है और कब चले जाते...

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होली कब है ? By Alok Mishra

होली कब है ? रामलाल एक दिन बाजार में मिल गए । बाताे - बातों में वे बोले ''होली कब है ? हम सोचने लगे कि ये तो ठहरे पुलिस वाले इन्हें कोर्इ रामगढ -वामगढ तो लूटना है न...

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उपवास कैसे रखें ....  (व्यंग्य) By Alok Mishra

उपवास कैसे रखें ...... व्यंग्य अब साहब आपके ये दिन आ गए कि कोई मुझ जैसा अदना सा व्यक्ति आपको यह बताए कि उपवास कैसे रखें ? बात बिलकुल भी वैसी नहीं है जैसी आप समझ रहें ह...

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दावत-अदावत (व्यंग्य ) By Alok Mishra

दावत-अदावत (व्यंग्य ) दावत शब्द सुनते ही लज़ीज पकवानों के की महक से मुंह में पानी आना स्वाभाविक ही है । शादी - ब्याह हो , जन्म दिवस या कोई और ही दिवस बिना दावत के सब अधूरा...

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बिना मुद्दे की बकवास (व्यंग्य) By Alok Mishra

बिना मुद्दे की बकवास ( व्यंग्य) नमस्ते ....आदाब....सत्तश्रीअकाल....आज फिर शाम के छः बज रहे है और मैं खवीश हाजिर हुँ बिना मुद्दे की बकवास के साथ । आप को बता दें कि यही एक शो...

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धंधा मारा जाएगा By Kishanlal Sharma

इक्कीसवीं सदी साइंस का जमाना।शिक्षा के प्रसार के साथ लोगो का ज्ञान बढ़ा है।लोग जागरूक हुए है और उनमें समझदारी आयी है।पहलेकी तरह लोग अज्ञानी और कूप मण्डूक नही रहे।सोशल मीडिया ने क्रा...

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मन चिंती ते..... By लता

मार्चमध्ये कोरोना आला आणि लाॅकडाऊन सुरू झाले. तेव्हापासून आम्ही सगळे घरीचं अडकलो होतो.ते बंद दार आणि वर्क फार्म होम करून जीव मेतकुटीस आला होता. घरात बायको,मी आणि मुलगा तिघंच...

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2 મિનીટ માં રેડી... By Bansi Modha

બંસી મોઢા..????પત્ની: વાહ! સરસ રેસ્ટોરન્ટ માં લાવ્યા હોપતિ: સારું ચાલ ધક્કો મારપત્ની: અરે આટલાં બધાં લોકો ની વચ્ચે તમને ધક્કો કેમ મારું? ઘર થોડું છે આ?પતિ: અરે ભાગ્યવાન! આ દરવાજા પ...

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मेरी कीमत क्या है ? (व्यंग्य) By Alok Mishra

मेरी कीमत क्या है ? (व्यंग्य) हम ठहरे एक आम आदमी ........नहीं ... नहीं , जनता..... अरे......नहीं...... फिर राजनैतिक हो गया । खैर आप तो समझ ही गए है कि हम और आप एक जैसे...

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How are you, Mr. Khiladi ? By BRIJESH PREM GOPINATH

देर रात शिफ्ट पूरी कर घर पहुंचा तो हालत देखकर भौंचक्का रह गया.ऐसा लगा मानो भूकंप आया हो.एक जूता बाथरूम के पास तो दूसरा किचन के दरवाज़े पर,अख़बार के टुकड़े बिखरे हुए,मैं हैरान कमरे...

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ફ્રોમ સિંગાપુર વિથ લવ.. By Writer Unknown

ફ્લાઇટ ૩૩૮A નાં યાત્રીઓને વિનંતી કરવામાં અાવે છે કે કન્વેયર બેલ્ટ નં ૬ ઉપરથી પોતાનો સામાન લેવા માટે કતારમાં ઉભા રહો. અાભાર.. અમદાવાદ ઇન્ટરનેશનલ એરપોર્ટ ઉપર પગ મુકતાં જ મારું બત્રીસ...

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पांडे जी की सायकिल (व्यंग्य कथा) By Alok Mishra

पांडे जी की सायकिल (व्यंग्य कथा) अब साहब आपका पूछना जायज ही होगा कि पांडे जी कौन ? आपने पूछ ही लिया है तो हम बताएं देते है। पांडे जी हमारे शहर की कोई नामचीन हस्ती तो है नहीं।...

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कलयुग में भगवान By Kishanlal Sharma

"नारायण नारायण---घोर कलयुग है"क्या हुआ नारद,"भगवान विष्णु, नारद को देेेखते ही बोले," चितित नज़र आ रहेे हो।कहाँ से आ रहे हो?"प्रभु भूलोक में गया था।पूरी पृथ्वी का भृमण करके आ रहा...

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अंग्रेजी में बैठना कुत्ते का By कृष्ण विहारी लाल पांडेय

मैं काफी मॉडर्न थे। इस लिए उनके पास एक कुत्ता था। वे उससे हिंदी नहीं बोलते थे ।अंग्रेजी में आदेश देते थे - कम , गो, यस, नो , स्टैंड, सिट। वे गुस्सा ना बोल कर चलते थे । उन्हें लगता...

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बुरा तो मानों .... होली है ( व्यंग्य ) By Alok Mishra

बुरा तो मानों...... होली है ( व्यंग्य) लो साहब होली आ गई । सब ओर नारा लगने लगा ‘ बुरा न मानो .... होली है । वैसे भी हम भारतियों की परंपरा रही है कि होली हो या न हो हम बुरा नहीं...

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હસતા નહીં હો! - 17 - પથારી તારા પ્રેમમાં... By પ્રથમ પરમાર

નવા નવા વિવાહ થયા હોય ત્યારે પતિને તેની પત્ની,કોલેજમાં ભણતી પ્રેમિકાને તેનો પ્રેમી,'શ્રવણ' ફિલ્મ જોયા બાદ સંવેદનશીલ છોકરાને તેના માતા પિતા,દેશભક્તિનું ગીત સાંભળ્યા બાદ બ...

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काली पुतली  By Alok Mishra

काली पुतली ये गाँव से विकसित होता छोटा सा कस्बा था । इस शहर में कुछ सड़कें ऐसी भी थी जिन पर रातों को लोग जाने से कतराते थे । आज मै जहाँ हूँ वहाँ से ही कभी शहर का वीराना प्रा...

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ચાલો ઠીઠીયા કાઢીએ - ભાગ - 9 By Shailesh Joshi

ભાગ - 9વાચક મિત્રો ઘણાં લાંબા સમયના અંતરાલ પછી, હું આ કાલ્પનિક રમુજી વાર્તાનો ભાગ 9 લખી રહ્યો છું.કેમકે, આજ પ્લેટફોમ પર મારી બીજી બે નવલકથા ચાલુ કરી હતી, જે પુરી થવા આવતા, હું ફરી...

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लोटन का शौचालय ( व्यंग्य ) By Alok Mishra

लोटन का शौचालय एक गाँव में एक बुजुर्ग रहते थे, नाम था लोटनलाल। पहले उनका भरा-पूरा परिवार था। फिर धीरे-धीरे सब साथ छोड़ते गए, कुछ मौत के कारण और कुछ लोग शहर की ओर दौड़ के क...

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सेवा-भाव की अपनी-अपनी सोच By r k lal

सेवा-भाव की अपनी-अपनी सोच आर० के० लाल पार्क में एक शाम बैठे कई बुजुर्ग समाजसेवा करने की बात पर ज़ोर दे रहे थे परंतु उनमे से दो चार लोग कह रहे थे कि उनका अनुभव अच्छा न...

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सब्जी बाजार By Alok Mishra

सब्जी बाजार हम सामाजिक रुप से बहुत ही समृद्ध होते जा रहे है । अब हमारी सामाजिक समृद्धता चाय-पान के ठेलों ढाबों और सब्जी बाजारों में दिखार्इ देती है। सामान्यत: मध्यमवर्गीय व्...

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મોજીસ્તાન - 10 By bharat chaklashiya

મોજીસ્તાન (10)હુકમચંદ સરપંચને ટેમુ ઉપર બરાબરની દાઝ ચડી હતી. સવારના પહોરમાં એની દુકાને બીડી, બાક્સ લેવા ઊભા રહેવા જેવું નહોતું. સાલી ધમૂડી પણ એ જ વખતે તેલ લેવા ગુડાણી અને એની બાકી ર...

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મૂડ By Jatin Bhatt... NIJ

આજ સવારથી જ એને કામ માં કાંઈ સૂઝ પડતી નહોતી, સવારે ઉઠયો ત્યારે તો મૂડ હતો. પણ પછી ગાયબ થઈ ગયો,એવું પણ નોતું કે રાત્રે મોડો ઊંઘી ગયો હોય, ઉજાગરો હોય , પણ ખબર...

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हमारे घर छापा By Alok Mishra

हमारे घर छापा एक दिन अचानक ही मेरे मोहल्ले में हड़कम्प मच गई । पुलिस के एक बड़े से दस्ते का एक बड़ा सा फौज-फाटा हमारे मोहल्ले में दाखिल हुआ । हमें लगा , पड़ोस के वर्मा जी के घ...

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होम मिनिस्टर (अंतिम भाग) By preeti sawant dalvi

रेवा घरात खरंच सगळ्यांची लाडकी होती. तेवढी ती सुगरण ही होती म्हणा. नीलिमाचे लग्न झाल्यापासून ती रेवावर खूप जळत असे. तिला रेवाचे कौतुक केलेले अजिबात आवडत नसे. रेवाचे लग्न झाल्यावर त...

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गड्ढा By Alok Mishra

गड्ढा पहले चुनाव और अब कौन जीतेगा या कौन हारेगा के शोर में हम और आप लोकतंत्र की सड़क पर पड़े उस बड़े से गड़्ढे को भूल ही गए थे , जिसका इतिहास है कि सरकार कोई भी बने...

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अतिक्रमण -एक राष्ट्रीय खेल By कृष्ण विहारी लाल पांडेय

छोटी चिन्ता /वही चिन्ता अतिक्रमण : एक राष्ट्रीय खेल हमारे देश में खेलों की गौरवशाली परम्परा है। गौरव यह है कि और हमारे में खेलों में भी खेल खेला जाता है बल्कि यहां जो कुछ भी होता ह...

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बीबी के ऐ जी By Alok Mishra

बीबी के" ऐ जी" सुरेन्द्र शर्मा बड़ा भला सा नाम था उनका छैल- छबीले, बांके जवान उन्होंने शादी क्या की जैसे अपना नाम ही खो दिया जब उनकी पत्नी उन्हें ऐ जी........., सुनते हो...

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જો જીતા વો સિકંદર..! By Ramesh Champaneri

જો જીતા વો સિકંદર..! મોડે મોડે અને ઉમરની છેલ્લી ઓવરમાં શ્રીશ્રી ભગાને પણ રાજકારણનો ચટાકો લાગ્યો. મા-બાપ ને પરિવારની સેવા કરવાનું ક્ષેત્ર નાનું લાગ્યું, ને નેતા બની...

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जूते की आत्मकथा  By Alok Mishra

जूते की आत्मकथा मैं एक जूता हुँ , अरे साहब वही जूता जो आप सर्दी,गर्मी और बरसात में बिना मुर्रवत के रगड़ते रहते है , अरे वही जूता जो सम्मान का प्रतीक बन कर आप के चरणों में सजता...

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मैं बजट क्यूं देखूं? By Suvidha Gupta

कुछ दिन पहले मेरे एक परिचित का फोन आया। किसान आंदोलन की वजह से उनके यहां, नेट नहीं चल रहा था। तो उन्होंने मुझसे पूछा,"क्या आपने बजट देखा?" मैंने कहा,"नहीं"। नहीं सु...

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डाइनिंग टेबल का महत्व-व्यंग्य By Rishi Katiyar

नहीं ,नहीं। मैं सफिस्टिकैटड होने की ऐक्टिंग नहीं कर रहा, ना ही अमीरों जैसे रुतबा दिखाने की कोशिश कर रहा हूँ और न ही मेरे ‘पर’ निकल आए हैं, फिर भी अक्सर मुझे तो यह सोच के भी हैरानी...

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હાસ્યનો મારગ છે શૂરાનો...! By Ramesh Champaneri

હાસ્યનો મારગ છે શૂરાનો...! લોકોને હસાવવા એટલે, રણ ખોદીને પાણી કાઢવા જેટલું અઘરું હોંકેએએએ..? લોકોને સાલી શ...

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कोतवाल की गर्दन (व्यंग्य कथा ) By Alok Mishra

कोतवाल की गर्दन एक नगर था, छोटा सा । इस नगर में रहने वाले लोग बहुत ही भोले- भाले थे । वे सुनी बातों को सत्य समझते और जो दिखता उसे परमसत्य । इस नगर का कोतवाल भोला सा दिख...

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चोलबे ना - 8 - गाली ही आशीर्वाद है By Rajeev Upadhyay

मुझे भाषण देने की आदत जो है कि लोग देखा नहीं कि बस उड़ेलना शुरू कर देता हूँ। बस कुछ दोस्त मिल गये तो मैं लग गया झाड़ने। खैर झाड़ते वक्त ये देख लेता हूँ कि सामने कौन है। खैर दोस्तों को...

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पुतला (व्यंग्य ) By Alok Mishra

‘‘पुतला’’ मैं पुतला हूँ। यदि आप न समझें हो तो मैं वही पुतला हूँ, जो दशहरे में रावण के रूप में और होली में होलिका के रूप में अनेक वर्षों से जलता रहा हूँ। मेरे अंगों के रूप में...

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गरीबी और गरीब ( व्यंग्य ) By Alok Mishra

गरीबी और गरीब ( व्यंग्य ) गरीबी और मंहगाई दो बहनें आजादी के मेले में एक दूसरे का हाथ पकड़े भारत के पीछे-पीछे लग गई । तब से लेकर आज तक इन दोनों ने ही देश की राजनीति और चुनावों...

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सत्य मोहे न सोहते ( व्यंग्य ) By Alok Mishra

सत्य मोहे न सोहते ( व्यंग्य ) बचपन से एक ही पाठ पढ़ा है ‘‘सत्य बोलो’’ क्योंकि ‘‘सत्यमेव जयते।’’ सत्य की विजय को लेकर अनेकों काल्पनिक कहानिया‌ॅ बचपन से केवल इसलिए स...

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ગુજરાતી કહેવતો અને તેનો અર્થ ગમ્મત સાથે - 2 By Yuvrajsinh jadeja

સહેજે વીચાર આવેલો કે કહેવતોનો વપરાશ કેટલો ઘટી ગયો છે ને "ગુજરાતી કહેવતો અને તેનો અર્થ ગમ્મત સાથે" લખેલું અને ખૂબ સારો પ્રતિસાદ મળ્યો એટલે હવે થોડી બીજી કહેવતો સાથે " ગુજરાતી કહેવતો...

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व्हीप......व्हीप......व्हीप.... (व्यंग्य) By Alok Mishra

व्हीप......व्हीप......व्हीप.... ‘‘आज के समाचार यह है कि राम प्रसाद जो कि गधा पार्टी के नेता हैं, से सुअर पार्टी पर प्रहार करते हुये व्हीप.......व्हीप.......व्हीप कहा। इसके...

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होली का दिन ( होली स्पेशल) By RACHNA ROY

दीपू होली के पहले दिन ही पापा के साथ जाकर तरह-तरह के रंग, पिचकारी, गुब्बारे सब कुछ खरीद कर ले आया।दीपू होली के पहले दिन ही पापा के साथ जाकर तरह-तरह के रंग, पिचकारी, गुब्बारे सब कुछ...

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यमराज का आगमन By Alok Mishra

यमराज का आगमन अचानक एक धमाकेदार खबर सुर्खियाॅ बन गई । बनती भी क्यों न , खबर ही ऐसी थी । खबर आई कि यमदूत आने वाले है । बस , सब तरफ कोहराम मच गया । यमदूत कब आते है और कब चले जाते...

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होली कब है ? By Alok Mishra

होली कब है ? रामलाल एक दिन बाजार में मिल गए । बाताे - बातों में वे बोले ''होली कब है ? हम सोचने लगे कि ये तो ठहरे पुलिस वाले इन्हें कोर्इ रामगढ -वामगढ तो लूटना है न...

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उपवास कैसे रखें ....  (व्यंग्य) By Alok Mishra

उपवास कैसे रखें ...... व्यंग्य अब साहब आपके ये दिन आ गए कि कोई मुझ जैसा अदना सा व्यक्ति आपको यह बताए कि उपवास कैसे रखें ? बात बिलकुल भी वैसी नहीं है जैसी आप समझ रहें ह...

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दावत-अदावत (व्यंग्य ) By Alok Mishra

दावत-अदावत (व्यंग्य ) दावत शब्द सुनते ही लज़ीज पकवानों के की महक से मुंह में पानी आना स्वाभाविक ही है । शादी - ब्याह हो , जन्म दिवस या कोई और ही दिवस बिना दावत के सब अधूरा...

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बिना मुद्दे की बकवास (व्यंग्य) By Alok Mishra

बिना मुद्दे की बकवास ( व्यंग्य) नमस्ते ....आदाब....सत्तश्रीअकाल....आज फिर शाम के छः बज रहे है और मैं खवीश हाजिर हुँ बिना मुद्दे की बकवास के साथ । आप को बता दें कि यही एक शो...

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धंधा मारा जाएगा By Kishanlal Sharma

इक्कीसवीं सदी साइंस का जमाना।शिक्षा के प्रसार के साथ लोगो का ज्ञान बढ़ा है।लोग जागरूक हुए है और उनमें समझदारी आयी है।पहलेकी तरह लोग अज्ञानी और कूप मण्डूक नही रहे।सोशल मीडिया ने क्रा...

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मन चिंती ते..... By लता

मार्चमध्ये कोरोना आला आणि लाॅकडाऊन सुरू झाले. तेव्हापासून आम्ही सगळे घरीचं अडकलो होतो.ते बंद दार आणि वर्क फार्म होम करून जीव मेतकुटीस आला होता. घरात बायको,मी आणि मुलगा तिघंच...

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2 મિનીટ માં રેડી... By Bansi Modha

બંસી મોઢા..????પત્ની: વાહ! સરસ રેસ્ટોરન્ટ માં લાવ્યા હોપતિ: સારું ચાલ ધક્કો મારપત્ની: અરે આટલાં બધાં લોકો ની વચ્ચે તમને ધક્કો કેમ મારું? ઘર થોડું છે આ?પતિ: અરે ભાગ્યવાન! આ દરવાજા પ...

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मेरी कीमत क्या है ? (व्यंग्य) By Alok Mishra

मेरी कीमत क्या है ? (व्यंग्य) हम ठहरे एक आम आदमी ........नहीं ... नहीं , जनता..... अरे......नहीं...... फिर राजनैतिक हो गया । खैर आप तो समझ ही गए है कि हम और आप एक जैसे...

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How are you, Mr. Khiladi ? By BRIJESH PREM GOPINATH

देर रात शिफ्ट पूरी कर घर पहुंचा तो हालत देखकर भौंचक्का रह गया.ऐसा लगा मानो भूकंप आया हो.एक जूता बाथरूम के पास तो दूसरा किचन के दरवाज़े पर,अख़बार के टुकड़े बिखरे हुए,मैं हैरान कमरे...

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ફ્રોમ સિંગાપુર વિથ લવ.. By Writer Unknown

ફ્લાઇટ ૩૩૮A નાં યાત્રીઓને વિનંતી કરવામાં અાવે છે કે કન્વેયર બેલ્ટ નં ૬ ઉપરથી પોતાનો સામાન લેવા માટે કતારમાં ઉભા રહો. અાભાર.. અમદાવાદ ઇન્ટરનેશનલ એરપોર્ટ ઉપર પગ મુકતાં જ મારું બત્રીસ...

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पांडे जी की सायकिल (व्यंग्य कथा) By Alok Mishra

पांडे जी की सायकिल (व्यंग्य कथा) अब साहब आपका पूछना जायज ही होगा कि पांडे जी कौन ? आपने पूछ ही लिया है तो हम बताएं देते है। पांडे जी हमारे शहर की कोई नामचीन हस्ती तो है नहीं।...

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कलयुग में भगवान By Kishanlal Sharma

"नारायण नारायण---घोर कलयुग है"क्या हुआ नारद,"भगवान विष्णु, नारद को देेेखते ही बोले," चितित नज़र आ रहेे हो।कहाँ से आ रहे हो?"प्रभु भूलोक में गया था।पूरी पृथ्वी का भृमण करके आ रहा...

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अंग्रेजी में बैठना कुत्ते का By कृष्ण विहारी लाल पांडेय

मैं काफी मॉडर्न थे। इस लिए उनके पास एक कुत्ता था। वे उससे हिंदी नहीं बोलते थे ।अंग्रेजी में आदेश देते थे - कम , गो, यस, नो , स्टैंड, सिट। वे गुस्सा ना बोल कर चलते थे । उन्हें लगता...

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बुरा तो मानों .... होली है ( व्यंग्य ) By Alok Mishra

बुरा तो मानों...... होली है ( व्यंग्य) लो साहब होली आ गई । सब ओर नारा लगने लगा ‘ बुरा न मानो .... होली है । वैसे भी हम भारतियों की परंपरा रही है कि होली हो या न हो हम बुरा नहीं...

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હસતા નહીં હો! - 17 - પથારી તારા પ્રેમમાં... By પ્રથમ પરમાર

નવા નવા વિવાહ થયા હોય ત્યારે પતિને તેની પત્ની,કોલેજમાં ભણતી પ્રેમિકાને તેનો પ્રેમી,'શ્રવણ' ફિલ્મ જોયા બાદ સંવેદનશીલ છોકરાને તેના માતા પિતા,દેશભક્તિનું ગીત સાંભળ્યા બાદ બ...

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काली पुतली  By Alok Mishra

काली पुतली ये गाँव से विकसित होता छोटा सा कस्बा था । इस शहर में कुछ सड़कें ऐसी भी थी जिन पर रातों को लोग जाने से कतराते थे । आज मै जहाँ हूँ वहाँ से ही कभी शहर का वीराना प्रा...

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ચાલો ઠીઠીયા કાઢીએ - ભાગ - 9 By Shailesh Joshi

ભાગ - 9વાચક મિત્રો ઘણાં લાંબા સમયના અંતરાલ પછી, હું આ કાલ્પનિક રમુજી વાર્તાનો ભાગ 9 લખી રહ્યો છું.કેમકે, આજ પ્લેટફોમ પર મારી બીજી બે નવલકથા ચાલુ કરી હતી, જે પુરી થવા આવતા, હું ફરી...

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लोटन का शौचालय ( व्यंग्य ) By Alok Mishra

लोटन का शौचालय एक गाँव में एक बुजुर्ग रहते थे, नाम था लोटनलाल। पहले उनका भरा-पूरा परिवार था। फिर धीरे-धीरे सब साथ छोड़ते गए, कुछ मौत के कारण और कुछ लोग शहर की ओर दौड़ के क...

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सेवा-भाव की अपनी-अपनी सोच By r k lal

सेवा-भाव की अपनी-अपनी सोच आर० के० लाल पार्क में एक शाम बैठे कई बुजुर्ग समाजसेवा करने की बात पर ज़ोर दे रहे थे परंतु उनमे से दो चार लोग कह रहे थे कि उनका अनुभव अच्छा न...

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सब्जी बाजार By Alok Mishra

सब्जी बाजार हम सामाजिक रुप से बहुत ही समृद्ध होते जा रहे है । अब हमारी सामाजिक समृद्धता चाय-पान के ठेलों ढाबों और सब्जी बाजारों में दिखार्इ देती है। सामान्यत: मध्यमवर्गीय व्...

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મોજીસ્તાન - 10 By bharat chaklashiya

મોજીસ્તાન (10)હુકમચંદ સરપંચને ટેમુ ઉપર બરાબરની દાઝ ચડી હતી. સવારના પહોરમાં એની દુકાને બીડી, બાક્સ લેવા ઊભા રહેવા જેવું નહોતું. સાલી ધમૂડી પણ એ જ વખતે તેલ લેવા ગુડાણી અને એની બાકી ર...

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મૂડ By Jatin Bhatt... NIJ

આજ સવારથી જ એને કામ માં કાંઈ સૂઝ પડતી નહોતી, સવારે ઉઠયો ત્યારે તો મૂડ હતો. પણ પછી ગાયબ થઈ ગયો,એવું પણ નોતું કે રાત્રે મોડો ઊંઘી ગયો હોય, ઉજાગરો હોય , પણ ખબર...

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हमारे घर छापा By Alok Mishra

हमारे घर छापा एक दिन अचानक ही मेरे मोहल्ले में हड़कम्प मच गई । पुलिस के एक बड़े से दस्ते का एक बड़ा सा फौज-फाटा हमारे मोहल्ले में दाखिल हुआ । हमें लगा , पड़ोस के वर्मा जी के घ...

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होम मिनिस्टर (अंतिम भाग) By preeti sawant dalvi

रेवा घरात खरंच सगळ्यांची लाडकी होती. तेवढी ती सुगरण ही होती म्हणा. नीलिमाचे लग्न झाल्यापासून ती रेवावर खूप जळत असे. तिला रेवाचे कौतुक केलेले अजिबात आवडत नसे. रेवाचे लग्न झाल्यावर त...

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गड्ढा By Alok Mishra

गड्ढा पहले चुनाव और अब कौन जीतेगा या कौन हारेगा के शोर में हम और आप लोकतंत्र की सड़क पर पड़े उस बड़े से गड़्ढे को भूल ही गए थे , जिसका इतिहास है कि सरकार कोई भी बने...

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अतिक्रमण -एक राष्ट्रीय खेल By कृष्ण विहारी लाल पांडेय

छोटी चिन्ता /वही चिन्ता अतिक्रमण : एक राष्ट्रीय खेल हमारे देश में खेलों की गौरवशाली परम्परा है। गौरव यह है कि और हमारे में खेलों में भी खेल खेला जाता है बल्कि यहां जो कुछ भी होता ह...

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बीबी के ऐ जी By Alok Mishra

बीबी के" ऐ जी" सुरेन्द्र शर्मा बड़ा भला सा नाम था उनका छैल- छबीले, बांके जवान उन्होंने शादी क्या की जैसे अपना नाम ही खो दिया जब उनकी पत्नी उन्हें ऐ जी........., सुनते हो...

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જો જીતા વો સિકંદર..! By Ramesh Champaneri

જો જીતા વો સિકંદર..! મોડે મોડે અને ઉમરની છેલ્લી ઓવરમાં શ્રીશ્રી ભગાને પણ રાજકારણનો ચટાકો લાગ્યો. મા-બાપ ને પરિવારની સેવા કરવાનું ક્ષેત્ર નાનું લાગ્યું, ને નેતા બની...

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जूते की आत्मकथा  By Alok Mishra

जूते की आत्मकथा मैं एक जूता हुँ , अरे साहब वही जूता जो आप सर्दी,गर्मी और बरसात में बिना मुर्रवत के रगड़ते रहते है , अरे वही जूता जो सम्मान का प्रतीक बन कर आप के चरणों में सजता...

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मैं बजट क्यूं देखूं? By Suvidha Gupta

कुछ दिन पहले मेरे एक परिचित का फोन आया। किसान आंदोलन की वजह से उनके यहां, नेट नहीं चल रहा था। तो उन्होंने मुझसे पूछा,"क्या आपने बजट देखा?" मैंने कहा,"नहीं"। नहीं सु...

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डाइनिंग टेबल का महत्व-व्यंग्य By Rishi Katiyar

नहीं ,नहीं। मैं सफिस्टिकैटड होने की ऐक्टिंग नहीं कर रहा, ना ही अमीरों जैसे रुतबा दिखाने की कोशिश कर रहा हूँ और न ही मेरे ‘पर’ निकल आए हैं, फिर भी अक्सर मुझे तो यह सोच के भी हैरानी...

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હાસ્યનો મારગ છે શૂરાનો...! By Ramesh Champaneri

હાસ્યનો મારગ છે શૂરાનો...! લોકોને હસાવવા એટલે, રણ ખોદીને પાણી કાઢવા જેટલું અઘરું હોંકેએએએ..? લોકોને સાલી શ...

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कोतवाल की गर्दन (व्यंग्य कथा ) By Alok Mishra

कोतवाल की गर्दन एक नगर था, छोटा सा । इस नगर में रहने वाले लोग बहुत ही भोले- भाले थे । वे सुनी बातों को सत्य समझते और जो दिखता उसे परमसत्य । इस नगर का कोतवाल भोला सा दिख...

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