थाई निरेमित यानि थाईलैंड का जादू - 5 in Hindi Travel stories by Neelam Kulshreshtha books and stories Free | थाई निरेमित यानि थाईलैंड का जादू - 5

थाई निरेमित यानि थाईलैंड का जादू - 5

एपीसोड - 5

हम लोग जेम्स बॉण्ड आईलैंड पहुँच चुके हैं. फ़ेरी बोट को किनारे लगा दिया जाता है जहाँ और भी फ़ेरी हैं. पथरीले तट पर सावधानी से उतरते हुए हम आगे बढ़ जाते हैं. छोटे से टापू की अपनी ही विचित्र सुंदरता है, ये प्रसिद्ध इसलिए हो गया है कि एक जेम्स बॉण्ड फ़िल्म की शूटिंग यहाँ हुई थी. मन में रोमांचक लग रहा है कि दूर दूर तक पानी के बीच हम ग्रे व मटमेली चट्टानों के बीच एक टापू की ज़मीन पर घूम रहे हैं. हमारे भारत के शहर में खूब भीड़ भड़ होगी, वाहनों का शोर हो रहा होगा. पीछॆ की तरफ़ जाते ही एक बहुमंज़िली इमारत की तरह सतर लंबा खड़ा ज़मीन का टुकड़ा है. पर्यटक धड़ाधड़ फ़ोटोज़ ले रहे हैं. नेहा, अभिनव बायी तरफ़ के टीले पर चढ़ फ़ोटोग्राफी कर रहे हैं.

बीच के भाग में एक चट्टान के सहारे कुछ दुकानें बनाकर कृत्रिम गहने बेचे जा रहे हैं.. जींस पहने एक लड़की हमारे साथ हो ली है, "आप इंडियन हैं ? मैं भी इंडियन हूँ, मेरी दुकान से कुछ ले लीजिये. "

उसकी दुकान पर रक्खे हैं लाल रंग के कोरल्स, सीप व मेटल के गहने किसी का दाम पूछो तो वह् केल्कुलेटर पर टाईप करके बता रही हैं. हम दोनों की बार्गेनिंग भी ऎसे ही हो रही है मैं आश्चर्यचकित उससे पूछतीं हूँ, "आप लोग फ़ुकेट से दूर यहाँ कैसे दुकानें चलाते हैं ?"

वह उँगली से पीछॆ के भाग में दिखाई देते आईलैंड की तरफ़ इशारा करती है, "हम लोग उस मुस्लिम विलेज में रहते हैं. "

"यहाँ कैसे आते हैं ?"

"रोज़ बोट से आते जाते हैं. पन्द्रह बीस मिनट लग जाते हैं. "

मुस्लिम विलेज भी यहाँ का एक पर्यटक स्थल है जहाँ इंडोनेशिया के गरीब मुस्लिम परिवार आकर इसलिए बस गए थे कि मछली पकड़ कर अपना जीवन यापन कर सकें. जीवन कैसे कैसे विचित्रताओं में पल्लवित होता है ? शहर की भीड़ भड़ से दूर सैकड़ों मील फैले पानी के बीच एक टापू पर ? सामने चार जापानी युवा जोड़े सफ़ेद कपडों में, सफ़ेद हैट लगाए एक कतार में खड़े होकर एक दूसरे को छूते हुए अलग अलग मुद्रा में फ़ोटो खिंचा रहे हैं, बस ऎसा लग रहा है कि सफ़ेद कबूतर समुद्र के किनारे अठखेलियाँ कर रहे हैं.

अब हमें फ़ेरी ले चली है, जेम्स बॉण्ड आईलैंड से लौटते हुए हम समुद्री सौंदर्य में खोकर फि से सुध बुध खोये बैठे है. रास्ते में मछली पकड़ने वाली मोटरबोट्स पर बैठे मछुआरे मछली पकड़ रहे हैं. तीसरे पहर के सूरज में दूर यहाँ वहां दिखाई देते टापू सम्मोहक लग रहे हैं. ऐसा लग रहा है मेंग्रूव्स ने उन्हें जकड़ रक्खा है नहीं तो वे भी समुद्र में टहलने निकाल जाएँ. मुस्लिम विलेज जो इनसानी फितरत या मजबूरी का एक नमूना है. दूर से ही पता लग रहा है कि वह लकड़ी के बड़े बड़े खम्बों पर लकड़ी व सीमेंट से घर बनाकर बसाया गया है, मुझे ऑस्ट्रेलिया के पास के कूक आइलैंड याद आ रहे हैं जिनकी मैंने फ़ोटो देखी है. वहां भी मछुआरे समुद्र के बीच के टापू पर खम्बे गाढ़ उसके ऊपर लकड़ी के मकान बनाकर रहते हैं.

पेनी आईलैंड जिस पर ये गांव बसा है, आ गया है फ़ेरी हमें जिस जेटी पर उतारती है वहां से सीढ़ी चढ़कर लकड़ी के छोटे से पुल को पारकार हम जिस बड़े हॉल में प्रवेश करतें हैं, वह पेनी रेस्टोरेंट है, इस समय खाली कुर्सी व मेज हैं, निरामिष व्यंजनों कि महक फैली हुई है. हम लोग इस हॉल को पारकार पीछॆ जाते हैं वहाँ हैं हैंडीक्राफ़्ट्स की कुछ दुकानें. जहाँ से एक सँकरी गली आरंभ हो जाती है, जहाँ दोनों ओर की दुकानें बंद है. आगे घरों की पंक्तियाँ दिखाई दे रही है.

हम लौटकर होटल की निरामिष महक के कारण कोक टिन भी नहीं खरीद्ते. वहाँ पड़ी कुर्सियों पर सामने फैले समुद्र पर अपनी आँखों को फिसलने दे रहे हैं. क्योंकि इस मंज़र को दिल में बसाकर अब लौटना है अगले दिन.

फ़ुकेट की अखिरी रात में अपने रिसॉर्ट के सामने की सड़क पार करके समुद्र किनारे पर कुर्सियों पर बैठे अन्धेरे में डूबे सुमुद्र के बीच बोट्स की रोशनियों को देख रहे हैं. बाँयी तरफ़ के पहाड़ी पर दिखाई देती रोशनियों को देख रहें हैं. सड़क पर होती चहल पहल का मज़ा भी लेते जा रहें हैं. हमने भारत के बहुत से समुद्र तट देखे हैं लेकिन सड़क से लगा तट अभी तक नहीं देखा. ये ख़ुशनुमा वातावरण कहीं गहरे दिल में उतर रहा है. कोई ग़ज़ल सा दिल में गुनगुना रहा है, एक सुकून दिल में उतरता जा रहा है, शायद जिसे पाने के लिए पर्यटन जरूरी है. समुद्र तट पर हमसे थोड़ी दूर पर एक थाई जोड़ा रोमांस करने में लगा है. लड़की अदाओं से नृत्य करते हुए एक गाना गाती जा रही है. लड़का उसका वीडियो बना रहा है.

दूर खड़ा है 'स्टार क्रूज़ 'सैलानियों को थाईलैंड की सैर कराने निकला है. अभिनव व नेहा इसे देखकर भावुक हो रहे हैं क्योंकि वे अपने हनीमून ट्रिप पर इसी में गोवा व लक्ष द्वीप गए थे. अभिनव बता रहे हैं, "अब ये भारत में बंद कर दिया गया है क्योंकि 'लॉस 'में चल रहा है. "

कुछ बोट्स स्टार क्रूज़ के यात्रियों को दूर समुद में खड़े अपने शिप पर ले जा रही हैं. अगले दिन ही हमारी साढ़े बारह बजे बैंकॉक के लिए उड़ान है.

बैंकॉक एयरपोर्ट से होटल तक ट्रैफ़िक में फंसते हुए पहुँचते ही हम सुयी -2 लेन के हॉटल मोनेको के दो रूम्स में अपना सामान रख देते हैं. इस होटल में कंट्री क्लब ने चार कमरे ले रक्खे हैं ज़ाहिर है इंडियन होटल पास ही होगा. रिसेप्शन से पता लगता है कि मुख्य सड़क पर दस मिनट की दूरी पर है जहाँ हमें होटल की ' टुक टुक 'यानि एक बड़ा खुला ऑटो रिक्शा ले जायेगा. छोटे से इंडियन होटल में पहुँचकर घड़ी पर नजर जाती है तीन बज चुके हैं रात का खाना गोल होना ही है इसलिए सब ख़ूब जमकर ऑर्डर देते हैं. अभिनव जब तक' सियाम निरेमित शो ' की बुकिंग के लिए ट्रैवल एजेंसी चले जाते हैं. ये शो फ़ुकेट में भी था, अधिक भव्य है किन्तु बैंकॉक का शो सस्ता है.

मन में बड़ी ही उत्सुकता है कि ऐसा किस तरह का शो है जिसमें सौ कलाकार व हाथी घोड़े हिस्सा लेते हैं जो दुनियाँ का गिनी ऑफ़ बुक्स ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज सबसे बड़ा शो है. शो से दो ढाई घंटे पहले ही पहुँच जाना चाहिये लेकिन हम लोग एक घंटे पहले वहाँ पहुँच पाते है. क्योंकि जो महानगर के ट्रैफ़िक में फँसते हैं वही समझ सकते हैं कि समय कैसे कत्ल होता है. बड़े गेट के अन्दर जाते ही रंग बिरंगे पेड़ पौधों व रंगीन रोशनियों में नहाये फुव्वारे को देखकर लग रहा है. कि हम तिलिस्मी नगरी में आ गए है.

एक हाथी पर कोई अमेंरिकन परिवार बैठा दिखाई देता है, भव्य व कलात्मक परिसर में देशी विदेशियौ की भीड़ है. रिसेप्शन विंडो के पास एक थाई लड़की पारम्परिक वेशभूषा में खड़ी है जो हम सबको कपड़े से बने पीले फूल देती जा रही है व झुक कर अभिवादन करती है.

मैदान में लोग गोल घेरा बनाकर बैठे हैं -एक युवक व मछली बनी एक युवती वहाँ नृत्य कर रहे हैं व नाटक भी करते जा रहे हैं. बायी तरफ़ आगे जाकर कृत्रिम थाई गांव आरंभ हो जाता है, कुछ कच्चे मकान दोमंज़िल के भी हैं. सँकरे रास्ते की हरियाली इनके प्रकृति प्रेम की गवाही दे रही है. यहाँ कुछ लोग जड़ी बूटी या पत्थरों के गहने बेच रहे हैं. भारत के अनेक पर्यटक स्थलों पर भी विदेशी पर्यटकों को लुभाने के लिए देशी गांव बनाये जाते हैं.

शो आरंभ होने वाला है. हम लोग सीढ़ियां चढ़कर ऊपर थियेटर में आ गये हैं. आरम्भ में थाईलैंड के राष्ट्रपति [ राजा ] रामा नवम्- भुमिबोल अदुल्यादेज [ जिसका अर्थ है भूमि की शक्ति ] जिन्होंने सन् 1950 में शासन सम्भाला था के परिचय व उनकी फ़ोटो के सम्मान में सबको खड़े होने का सबसे अनुरोध किया जाता है. इन राजा व इनकी पत्‍‌नी सुकृति के बड़े बड़े रंगीन फ़ोटो फ्रेम बैंकॉक के रास्तों पर लगे दिखाई दे जायेंगे व इनके राजप्रसादो के बाहर फ़्लैग्स की कतार.

सबके बैठते ही शुरू होता है शो. ---यहाँ के इतिहास की झाँकी प्रस्तुत करता हुआ. राजा हाथी पर आ रहा है व उसके सैनिक भाले लिए साथ में हैं. स्टेज के दूसरी तरफ़ से चार लोगों के कन्धे पर सवार खुली पालकी में खूबसूरत व कमनीय रानी आ रही है ---------चाइना के लोगों का आगमन ----यहाँ के भव्य मन्दिर -----स्टेज के कोने के महल में जलती आग-------अयुथया शहर की गाथा --------अचानक स्टेज पर बन गई नदी

जिसमें मुँह धोता राहगीर ---जल्दी जल्दी बढ़ लते विशाल भव्य सेट ------. कैसे संयोजन करते होंगे इस जादू का ?

ग्यारह बजे होटल लौटकर भूख लगनी है. इंडियन रेस्टरां बंद हो चुका है

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नीलम कुलश्रेष्ठ

e-mail—kneel@rediffmail. com

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दिशा! क्या नाराज़गी है?

disha gwalwanshi

disha gwalwanshi 3 months ago