थाई निरेमित यानि थाईलैंड का जादू - 4 in Hindi Travel stories by Neelam Kulshreshtha books and stories Free | थाई निरेमित यानि थाईलैंड का जादू - 4

थाई निरेमित यानि थाईलैंड का जादू - 4

एपीसोड - 4

किसी का पर्स खोने के अनाउंसमेंट से व अभिनव के कहने से कि मृदुल जी अपना पर्स चैक करें. ये बेमन अपनी पॉकेट में हाथ डालते हैं व एकदम चौंक कर कहतें हैं, "अरे ! मेरा ही पर्स कपड़े बदलते समय गिर गया होगा. "

ये काउंटर पर जाकर अपना पर्स ले आतें हैं. जेटी से हम लोगों को एक पुल से फ़ी फ़ी आईलैंड में प्रवेश करना है सामने एक बड़े गेट पर लिखा है 'वेलकम टु फ़ी फ़ी आईलैंड'. सड़क धूल भरी ही हैं. एक मोटी ताजी प्रौढ़ विदेशी महिला 'बिकनी में नजर आ जाती है. दाँयी तरफ़ मुड़ते ही' पायरेट्स ऑफ़ केरेबिअन शो 'का बोर्ड नजर आता है. बाहर भी एक भूत का शिप के चक्के के साथ पुतला बना हुआ है. अन्दर से भूतों की रिकॉर्डेड आवाजें आ रही हैं. हमें हंसी आ जाती है सभी देश के भूत एक सी डरावनी आवाज़ें निकालते हैं.

लंच के लिए हम एक अच्छे होटल में ले जाए जाते हैं. एक मेज़ पर विशेष रुप से हमारे लिए वेजेटेरिअन फ़ूड सज़ा है तरह तरह के सलाद. सूप चटनी, पास्ता व नूडल्स, कटा हुआ अनन्नास व तरबूज चावल. अभिनव अभिभूत होकर इस सजी मेज की फ़ोटो ले लेते हैं. निरामिष व्यंजनों की मेजों की ओर हम बिना देखे खाने में लग जाते हैं. मैं पहली बार लाल व पीली शिमला मिर्च की दीवानी हो उठी हूँ.

लौटकर अपने रिसॉर्ट में आराम करने के बाद रात में बाहर घूमने निकले हैं. होटल की दीवार के पास जी जी ' टैक्सी 'लिखा एक बोर्ड हाथ में लिए खड़ी है, उसने बेहद चटख रंग की स्लीवलैस, लो कट नैक वाली पोशाक पहन रक्खी है. हमसे मुस्करा कर अभिवादन तो करती है किन्तु जल्दी ही जान छुड़ाकर सड़क की तरफ़ देखने लग जाती है. वह टैक्सी के लिए खड़ी है या स्वय टैक्सी है ? मैं सोचती रह जाती हूँ. एक नया राजपूती रेस्तरां खोज कर हम वहाँ पहुँच जाते है. बरसों पहले भारत से भागे समर सिंह राजपूत अनेक देश की खाक छानते सैम 'होकर यहाँ बस गए हैं.

मैं अपनी बेचैनी उनसे व्यक्त करतीं हूँ, "यहाँ हर जगह सजी धजी लड़कियाँ लड़कों की अपेक्षा अधिक दिखाई देती हैं. '

"आजकल टूरिस्ट सीज़न चल रहा है. आस पास के गांव की, छोटे शहरों की लड़कियाँ यहाँ व थाईलैंड में आ जातीं हैं. पर्यटन से संबंधित काम उन्हें मिल जाता है. यहाँ के पुरुष अधिकतर निक्कमे हैं. ड्रग्स लेकर या ऎसे ही पड़े रहतें हैं. "

मेरा मन बरसों पहले भटक रहा है जब हम युवा थे तब स्वीडन' थ्री डब्ल्यू '[ वूमन,. वाइन एंड वेल्थ ] के लिए प्रसिद्ध था जिससे उसका सामाजिक ढाँचा बदल गया होगा, लोग डिप्रेशन के शिकार हो रहे होंगे. अब मेरी परिचित सॉफ़्टवेयर इंजीनियर लड़की को बार बार वहाँ जाना पड़ता है. वह वहाँ के पारिवारिक जीवन से प्रभावित होकर लौटती है. मैं इस बात से चकित होती हूँ. कुछ खोजबीन के बाद ही पता लगता है कि कुछ वर्षों पहले वहाँ सेक्स ट्रेड पर प्रतिबंध लगा दिया था. भारत में ये व्यापार फल फूल रहा है इसके बुरे परिणाम आने आरंभ हो ही गए हैं. सरकार ऎसे देश में जहाँ की संस्कृति को विश्व में श्रद्धा से देखा जाता है, सेक्स ट्रेड को लीगल बनाने की सोच रही है. थाईलैंड में क्या फेमिनिज़्म है ?क्योंकि यहाँ हर लड़की खुश दिखाई देती है या फिर इन्हें पाला ही ऎसे वातावरण में जाता है कि इनके मन में कोई ग्लानि नहीं होती है, अपने को उपभोग की वास्तु बनाने के लिए।

तीसरे दिन की यात्रा भी बेहद रोचक है. बड़ी वैन में एक बर्मीज परिवार, जिनकी बहु ने पारदर्शी टॉप पहन रक्खा है व. एक ब्रिटिश जोड़ा है. डेढ़ घंटे की शहर के बाहर ले जाती यात्रा के बाद हमें पहाड़ की तलहटी में बुद्धा केव यानि 'सुवान बुद्धा मन्दिर ' देखना है बाहर बंदर धमाचौकड़ी मचाये हैं., लोग चने खरीद कर उन्हें खिला रहे हैं. ये गुफ़ा बहुत विशालकाय है. मुख्य मूर्ति पीतल के विशाल लेटें हुए बुद्ध की है जिनके दूसरी तरफ़ विशाल पीतल की बौद्ध भिक्षुओं की प्रतिमायें हैं. अन्दर नीरवता का, कुछ अधेरे में पगा सम्मोहन है, अगरबत्ती का धुँआ है. बौद्ध धर्म के अनुयायी किन सुदूर स्थलों में प्रार्थना गृह बना लेतें थे. रास्ते में हमे एक छोटे से रेस्तरां में खाना खिलाया जाता है. सूप में तैरते स्टारफ़िश की तरह सफ़ेद मशरूम को देखकर मैं बाउल अपने से दूर रख देतीं हूँ. कहतें हैं थाईलैंड का सी फ़ूड बहुत स्वाड्दिष्ट होता है।सी फ़ूड खाने के शौक़ीन दुनियां के कोने कोने से यहाँ सी फ़ूड खाने आते हैं।

फ़ुकेट जाने के लिये जेटी की तरफ़ हम वैन से जा रहे हैं। आगे बढ़ती वैन में हमने सोचा भी ना था कि हम ऎसे एडवेंचर को देखने जां रहे हैं कि हम फ़ुकेट को कभी भुला नहीं पायेंगे. एक घन्टे के सफ़र के बाद हम फुंगचेंग एन जी ए. आयरलैंड के पहाड़ की तलहटी में पहुँच जाते हैं जहाँ एक गुफ़ा का मुहाना है जिसे तीस वर्ष पूर्व ही खोजा गया था. यहाँ हम लोग जींस उतारकर ट्रैक पैंट पहन लेतें हैं. हमें सिर पर लगाने के लिए हैड लाइट्स दे दी जाती हैं. हमें लाल, पीले प्लास्टिक के केनोय [छोटी नाव ]में बिठा दिया जाता है जिसमे सिर्फ़ दो लोग ही बैठ सकते हैं. एक मल्लाह चप्पू से नाव चलाता हमें काली गुफ़ा के अन्दर ले चला है व कहता है, "पहाड़ की दरारों से रिसकर व आस पास के झरनों के बारिश के पानी ने जो कार्विंग गुफ़ा के दीवारों पर कर दी है. उसे अपनी हैड लाइट्स घुमाकर देखते चलें. "

हम सिर घुमा घुमा कर चकित हैं अपनी हैड लाइट के ऊपर के गोल घेरे वाले प्रकाश में देखकर कि किस कलाकार ने इस अन्धेरे में बैठकर गुप चुप गुफ़ा की दीवारों पर ये कला उकेरी है ?बेहद ऊपर छत पर या दीवारों की कटीली लाइनें, कहीं लम्बी, कही गोल बहती हुई कुछ पत्थरीले कोने झालरो से लटके हुए हैं. कही हल्के गुलाबी, कही हल्के पीले, क्रीम कलर या हरे रंग के अद्भुत करीगरी किए पत्थर नजर आ रहे हैं. अजीब सा पथरीला सौंदर्य ऊपर व अगल बगल है. ये रंग बिरंगा सौंदर्य पहाड़ के पत्थर की परतों के अलग अलग रंगों का है. पहाड़ों की कोख में दीवारों पर हलके रंगों से बनी ये अनेक ख़ूबसूरत भीनी भीनी कलाकृतियां, मरहूम सबावाला विश्वप्रसिद्द पेंटर के रंगों जैसी. पहली बार जाना है पत्थरों में भी हल्के रंग का इन्द्रधनुष छिपा होता है . कहाँ ढूंढें --वो कौन चित्रकार है ?

थोड़ा आगे जाकर हमें पीले व लाल रंग की हुई बांस की आदिम राफ़्ट पर बिठा दिया जाता है, हमे लग रहा है हम उस आदिम युग में पहुँच गए हैं जहाँ पहली बार आदि मानव ने बांसो को रस्सी से जोड़कर कर राफ़्ट बनाकर जलयात्रा की थी. इसे एक डंडे से चलाया जां रहा है. हम लोगों को कभी कहीं नाचती हुई नर्तकी, कभी खरगोश, कभी चिड़िया कभी सारस, यहाँ तक शेषनाग तक दिखाई दे जाता है. थाईलैंड और शेषनाग ? 'जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूर्त तीन देखी तैसी' ये प्रकृति के चमत्कार तो ऊपर वाले की कारी कारीगरी के प्रमाण है.

मल्लाह आगे जाकर घोषणा करता है, "आगे हमें पैदल ही जाना होगा. "

अब सोचिये काली गुफ़ा, कदमों तले बहता पानी. इस अन्धेरे में चलते हम आठ दस प्राणी, पैरों में कंकड़ चुभ रहें हैं क्योंकि हम स्लीपर्स लाना भूल गए थे. छोटे उपांशु पैरों में चुभते कंकड़ के बावजूद अभिनव का हाथ पकड़े 'बड़ बड़ 'करते चल रहें हैं, गुफ़ा बायी तरफ़ घूम गई है. कुछ लोग गुफ़ा देखकर लौट रहे हैं. हम पथरीली प्राकृतिक सुंदेरता में खोये हुए मंत्रमुग्ध अन्धेरे में चलते गुफ़ा की अन्तिम सीमा पर पहुँच गए हैं.

[ बाद के वर्षों में हमारा मित्र परिवार यहां आया था। उस वर्ष बारिश इतनी थी कि इन गुफ़ाओं में पानी भर गया था। वे इन्हें देख नहीं पाये थे। कुछ और वर्ष बाद किसी वर्ष चमगादड़ों ने टूरिस्ट पर अटैक किया, जबसे ये गुफ़ायें पर्यटन के लिये बंद कर दी गईं हैं। बाद में जाने वाले लोग इस यात्रा वृतांत से इसके सौंदर्य का अनुभव करें। ]

यहाँ से लौटना है, राफ़्ट हमारा इंतज़ार कर रही है, इसके बाद वही केनोय का सफ़र फिर कपड़े बदलकर वैन से सफ़र.

ये वैन चलती हुई हमें एक जेटी पर छोड़ देती है. जिसके लंबे पुल से हम एक बहुत बड़ी फ़ेरीनुमा मोटरबोट में बैठते हैं. किनारे पर खड़ी एक बूदी औरत हम सबको हाथ हिलाकर बाय बाय कर रही है, जैसे खाली बोतल सी ज़िन्दगी में तरंगें पैदा कर रही हो. मोटरबोट की 'धुड़ धुड़ 'करती आवाज़ के साथ दूर दूर फैला है समुद्र के नीले पानी का सम्मोहन ! ऎसे मंज़र देखकर हम अकसर स्तब्ध हो जाते हैं. आस पास दिखाई दे रहे हैं छोटे छोटे आईलैंडस जिनके किनारे लगे हैं 'मेंग्रूव्स ', उनकी जड़ें तक दिखाई दे रही हैं ये वो पेड़ों की पंक्तियाँ हैं जिनसे वो समुद्र तट बंधे रहते हैं वर्ना अपनी सीमायें तोड़कर धरती के और भाग को अपनी चपेट में ले लें. वैज्ञानिक इन्ही के संरक्षण की चिंता कर रहे हैं.

नीलम कुलश्रेष्ठ 

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