अधूरी डायरी या पूरी महोब्बत in Hindi Love Stories by Kritika Sharma books and stories PDF | अधूरी डायरी या पूरी महोब्बत

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अधूरी डायरी या पूरी महोब्बत

शहर के एक छोटे, शांत और बेहद खूबसूरत कैफ़े के कोने वाली टेबल माहिरा की सबसे पसंदीदा जगह थी। वह रोज़ दोपहर ढलते ही वहाँ आकर बैठ जाती, खिड़की से बाहर दौड़ती दुनिया को देखती और अपनी नीली डायरी में खोई रहती थी। वह अपने दिल की हर उस बात को, जिसे वह कभी किसी से ज़ुबान से कह नहीं पाती थी, शायरी के रूप में उस डायरी के पन्नों पर बिखेर देती थी। उसी कैफ़े में, बस दो टेबल छोड़कर, कबीर भी रोज़ आकर बैठता था। कबीर पिछले एक पूरे महीने से माहिरा को चुपचाप नोटिस कर रहा था। उसने कभी आगे बढ़कर माहिरा से सीधे बात करने की हिम्मत नहीं की थी, लेकिन जिस तरह माहिरा पूरी दुनिया से बेखबर होकर अपनी डायरी के पन्नों में डूब जाती थी, वह सादगी कबीर के दिल को बहुत गहराई से छू गई थी। कबीर को बस उसे लिखते हुए देखना ही सुकून देता था।एक सुहानी शाम, माहिरा हमेशा की तरह कैफ़े की उसी टेबल पर बैठी कुछ लिख रही थी। अचानक उसके फोन पर एक बेहद ज़रूरी कॉल आया। वह इतनी जल्दबाज़ी और हड़बड़ी में वहाँ से उठी कि अपनी वही सबसे प्यारी नीली डायरी टेबल पर ही भूलकर बाहर चली गई। कबीर ने देखा कि माहिरा जा चुकी है और उसकी डायरी वहीं छूट गई है। उसने तुरंत डायरी उठाई और उसे ढूंढने के लिए कैफ़े से बाहर भागा, लेकिन तब तक माहिरा भीड़ में कहीं गायब हो चुकी थी। कबीर ने बहुत भारी मन से उस डायरी को अपने पास रख लिया ताकि वह अगले दिन जब कैफ़े आए, तो माहिरा को उसकी अमानत सही-सलामत लौटा सके।रात को अपने कमरे में बैठे-बैठे कबीर से रहा नहीं गया। उस नीली डायरी को देखकर उसके अंदर की उत्सुकता जाग गई। उसने जैसे ही डायरी का सबसे आखिरी पन्ना खोला, वहाँ माहिरा की लिखी एक अधूरी शायरी थी, जिसके शब्द सीधे कबीर के जज़्बातों से मेल खा रहे थे। वहाँ लिखा था:"तुमसे रोज़ मिलना, पर आँखों से कुछ न कह पाना,एक अजनबी को इस दिल में यूँ चुपके से बसाना...सोचती हूँ कह दूँ आज दिल की हर बात तुमसे, पर..."शायरी की लाइनें ठीक इसी मोड़ पर आकर अचानक रुक गई थीं। यह पढ़ते ही कबीर के दिल की धड़कनें बहुत तेज़ हो गईं। वह बिना एक पल गँवाए समझ गया कि माहिरा ने ये पंक्तियाँ सिर्फ और सिर्फ उसी के लिए लिखी थीं। कबीर के चेहरे पर एक गहरी मुस्कान आ गई। उसने तुरंत अपनी जेब से एक पेन निकाला और उस अधूरी शायरी के ठीक नीचे, अपनी तरफ से दो बेहद खूबसूरत लाइनें लिख दीं:"पर डरती हो कि कहीं यह हसीन ख्वाब टूट न जाए,लो आज हम खुद कदम बढ़ाते हैं, कि यह लम्हा हाथ से छूट न जाए।"अगले दिन, माहिरा बहुत ज़्यादा परेशान और उदास होकर कैफ़े पहुँची। वह अपनी खोई हुई डायरी को हर कोने में ढूंढ रही थी, क्योंकि उसमें उसकी ज़िंदगी के सबसे सच्चे जज़्बात छिपे थे। तभी कबीर धीरे से उसकी टेबल के पास आया और मुस्कुराते हुए उसने वह नीली डायरी माहिरा की तरफ बढ़ा दी। माहिरा ने राहत की एक बहुत लंबी सांस ली और कबीर को धन्यवाद कहते हुए डायरी अपने हाथ में ले ली। जैसे ही उसने डायरी खोली, उसकी नज़र कबीर की लिखी उन नई पंक्तियों पर पड़ी। पंक्तियाँ पढ़ते ही माहिरा के दिल की धड़कनें रुक सी गईं, और उसके गालों पर एक हल्की सी लाली छा गई। उसने जब अपनी नज़रें ऊपर उठाईं, तो कबीर को अपने सामने पूरी मोहब्बत से मुस्कुराते हुए खड़े पाया।कबीर ने बिना देर किए, मुस्कुराते हुए चाय का एक गर्म कप माहिरा की तरफ बढ़ाया और बहुत ही प्यार से कहा, "मैं जानता हूँ कि बिना किसी की इजाज़त के उसकी डायरी पढ़ना बहुत गलत बात है, और इसके लिए मैं तुमसे माफ़ी मांगता हूँ। पर तुम्हारी वह अधूरी शायरी इतनी ज़्यादा मुकम्मल और खूबसूरत थी कि मेरा यह पेन खुद-ब-खुद पन्ने पर चलने लगा। वैसे... चाय ठंडी हो रही है, क्या मैं आज तुम्हारी इस पसंदीदा टेबल पर बैठ सकता हूँ?"माहिरा ने शरमाते हुए अपना सिर धीरे से 'हाँ' में हिला दिया। कबीर सामने वाली खाली कुर्सी पर बैठ गया। बाहर हल्की-हल्की बूंदाबांदी शुरू हो चुकी थी और चाय की भीनी खुशबू के बीच दोनों की पहली लंबी बातचीत शुरू हुई। बातों ही बातों में शाम से रात ढल गई, पर उनकी बातें खत्म होने का नाम नहीं ले रही थीं। कबीर ने माहिरा की आँखों में गहराई से देखा और कहा, "माहिरा, तुम्हारी इस नीली डायरी का पन्ना भले ही आज पूरा हो गया हो, पर मुझे लगता है कि हमारी खुद की एक नई कहानी आज से शुरू हुई है। क्या कल भी तुम मुझे इसी कैफ़े की इसी टेबल पर मिलोगी?"माहिरा ने मुस्कुराते हुए चाय की आखिरी चुस्की ली, कबीर की आँखों में देखा और अपनी डायरी के उसी पन्ने पर नीचे एक और नई लाइन लिख दी— "कुछ अजनबी इस ज़िंदगी के सफ़र में ऐसे मोड़ पर मिलते हैं, जो मंज़िल का पूरा रास्ता ही हमेशा के लिए बदल देते हैं।" उसने वह डायरी मुस्कुराकर कबीर को दिखा दी, और इस तरह एक अधूरी शायरी के टुकड़ों से शुरू हुई उन दोनों की मोहब्बत, हमेशा-हमेशा के लिए मुकम्मल होने की एक खूबसूरत राह पर चल पड़ी। kittu and jiya