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હા હું રડું છું
by Vivek Patel

હા હું રડું છું,મને તું યાદ આવે છે એટલે અને મને તારો સાથ ગમે છે.હા હું રડું છું,મને આપણી મસ્તી બવ યાદ આવે છે.હા હું રડું છું,આપણે સાથે હોઈ ...

ગપસપ - (હળવાશ)
by Ashvin Kalsariya

નમસ્તે મિત્રો, તમે અને તમારો પરિવાર આ સમયમાં ઠીક હશે એવી આશા છે, ઘણાં સમયથી બહુ બધા લોકો ના મેસેજ મળ્યાં કોઈ નવી સ્ટોરી લાવવા અને ઘણાં લોકોએ એડવાઈઝ ...

इलाहाबादी चिट्ठी बाबू जी के नाम
by Abhinav Singh

प्रिय बाबू जी, आपका पत्र हमको मिला। हम यहाँ कुशल से हैं और आशा करते है की वहाँ भी सब कुशल ही होगा। बाबू जी आपको सूचित करते हुये ...

बेनामी ख़त - 3
by Dhruvin Mavani

( ये किसी एक के लिए नही है वल्कि हर उस इंसान के लिए है जिसने कभी जिंदगी में सच्ची मोहब्बत की है लेकिन अब वो उनके साथ नही ...

नारायण धारप यांस पत्र
by Nilesh Desai

 माननीय कै. नारायण धारप सर यांस,   आपल्या रहस्यमय लेखणीने मराठीतला एक काळ ज्यांनी गाजवला अश्या सिद्धहस्त लेखकाला सामान्य वाचकाचा मनापासून सलाम. लहानपणापासून आपल्या कथा वाचून मी माझ्या मनातल्या रहस्य जाणून ...

बेनामी ख़त - 2
by Dhruvin Mavani

Dear किताब ,एक खत तुम्हारे भी नाम का । इसलिए क्योकि वो लड़का तुम्हे आज तक लिख नही पाया । ऐसा नही की उसने कोशिश नही की , उसने  ...

एक पत्र प्रिय शाळेस
by Nagesh S Shewalkar

                              एक पत्र प्रिय शाळेस!माझी अतिप्रिय, माझे सर्वस्व,माझी शाळा,तुज नमन! तुला वंदन!     माझ्या आयुष्यातील कमी-जास्त ...

एक पत्र छकुलीस
by Nagesh S Shewalkar

                                  एक पत्र छकुलीस!माझी लाडकी छकुली,खूप खूप आशीर्वाद!    छकुली! हा शब्द उच्चारताच ...

बेनामी ख़त - 1
by Dhruvin Mavani

Dear ख़त ,सोचा पहला ख़त तुम्हे ही लिखना चाहिए । क्योंकि आज कल के digital जमाने में भला तुम्हे याद कौन करेगा ? तुम्हे तो सिर्फ कुछ सरफिरे लोग ...

एक पत्र निष्ठावंत कार्यकर्त्यास
by Nagesh S Shewalkar

                          एक पत्र निष्ठावंत कार्यकर्त्यास!प्रति,निष्ठावंत कार्यकर्ते,(सर्व पक्ष आणि संघटनांमध्ये दडलेले.)स.न.वि.वि.       काय म्हणता? कुठे आहात? काय ...

वरूण राजास पत्र
by Nagesh S Shewalkar

                                                  वरूण राजास पत्र!प्रिय वरूणराजास,  ...

एक पत्र पळपुट्यांना
by Nagesh S Shewalkar

                                         एक पत्र पळपुट्यांना!              ...

एक पत्र शेतकरी दादास
by Nagesh S Shewalkar

                                       एक पत्र शेतकरी दादास! प्रति,प्रिय शेतकरीदादा,रामराम!      तसे पाहिले तर ...

एक पत्र पुतळ्याचे
by Nagesh S Shewalkar

                                             एक पत्र पुतळ्यांचे !प्रति, अतिप्रिय भक्तांनो,      ...

अरण्यऋषीस पत्र - मारुती चितमपल्ली
by Nilesh Desai

माननीय श्री. मारुती चितमपल्ली सर यांस, माझा नमस्कार. आपल्याला पत्र लिहावे ही खूप दिवसांपासूनची इच्छा होती, आज पूर्ण करावयास घेत आहे. पत्र लिहिण्यास कारण की, मागील काही वर्षांपासून आपली पुस्तके माझ्या ...

एक पत्र मायभूमीस
by Nagesh S Shewalkar

                                    * एक पत्र मायभूमीस !*प्रिय मायभूमीस,शि. सा. न.     माय म्हणजे ...

एक अप्रेषित-पत्र - 14 - अंतिम भाग
by Mahendra Bhishma

एक अप्रेषित-पत्र महेन्द्र भीष्म एक अप्रेषित पत्र दीदी का पत्र आशा के विपरीत आया था। पत्र बहुत संक्षेप में था, उनकी आदत के बिल्कुल उलटे। पत्र में लिखीं चार ...

एक पत्र सायकल या सखीला
by Nagesh S Shewalkar

                                    एक पत्र सायकल या सखीला! प्रिय सखी... सायकल!ट्रिंग... ट्रिंग...  हे घंटीच्या आवाजाने ...

एक अप्रेषित-पत्र - 13
by Mahendra Bhishma

एक अप्रेषित-पत्र महेन्द्र भीष्म एक रुपया ‘‘राम नाम सत्य है।'' ‘‘राम नाम सत्य है।'' सेठ राम किशोरजी की शवयात्रा में सम्मिलित दूसरोें के साथ मैंने भी दुहराया। स्वर्गीय सेठ ...

असहिष्णुता बाईला पत्र !
by Nagesh S Shewalkar

               असहिष्णुता बाईला पत्र!प्रति,असहिष्णुताबाई,तुम्हाला कोणत्याही प्रकारचे अभिवादन करण्याच्या भानगडीत मी पडत नाही पण एक मात्र विचारतो, 'कशा आहात असहिष्णुताबाई? नाही म्हटलं फारा दिवसात कुठे ...

મારી વ્હાલી બપોર..(એક પત્ર)
by Bhavna Jadav

મારી વ્હાલી બપોર.. તને એક પત્ર. કોઈને સવાર ના આનંદ કોઈ સાંજનું દિવાનું હોય પણ મને મારી વ્હાલી બપોર . એ મારી વ્હાલી બપોર . કેમ છે ?મજામાં ને..? ...

एक पत्र बाबांना!
by Nagesh S Shewalkar

                                          एक पत्र बाबांना! तीर्थरूप बाबा,शि.सा. न.तुम्हाला आश्चर्य वाटत असणार ...

एक अप्रेषित-पत्र - 12
by Mahendra Bhishma

एक अप्रेषित-पत्र महेन्द्र भीष्म मुन्शीजी मुन्शी गनेशी प्रसाद को विवाह किये बीस बरस बीत चुके हैं अौर इस कस्बाई शहर में आए सत्रह बरस। तब यहाँ नयी—नयी तहसील खुली ...

पत्र विठूमाऊलीचे !
by Nagesh S Shewalkar

             एक पत्र... विठूमाऊलीचे!     माझ्या प्रिय भक्तांनो,     खूप खूप आशीर्वाद!     कसे आहात? मजेत तर निश्चितच नसणार कारण गेली अनेक महिने त्या ...

एक अप्रेषित-पत्र - 11
by Mahendra Bhishma

एक अप्रेषित-पत्र महेन्द्र भीष्म मग़रिब की नमाज ‘‘सुषमा! प्लीज.... देर हो रही है।'' “बस्स... दो मिनट.... अौर जज साहब।” “क्या सुषमा....? पिछले बीस मिनट से अभी तक तुम्हारे दो ...

एक अप्रेषित-पत्र - 10
by Mahendra Bhishma

एक अप्रेषित-पत्र महेन्द्र भीष्म मसीहा चाय का घूँट भरते हुए असगर ने विक्रम में चढ़ रही सवारियों की ओर ताका, फिर दूसरा घूँट भरने से पहले उसने टैम्पो ड्राइवर ...

एक अप्रेषित-पत्र - 9
by Mahendra Bhishma

एक अप्रेषित-पत्र महेन्द्र भीष्म साथ सकलेचा के दो फोन आ चुके थे। रूबी बेड पर पड़ी ऊहापोह की स्थिति में थी। तेजी से पतनोन्मुख सुदर्शन बोकाड़िया ग्रुप ऑफ कम्पनीज़ ...

સાચા શિક્ષણ ના રસ્તે
by pankti solgama

                        અથૅપધાન સમાજ માં આજે દરેક વ્યકિ્ત નુ લક્ષણ સામાન્ય રીતે અથોૅ પાજન રહ્યુ છે જો બાળક ને ...

एक अप्रेषित-पत्र - 8
by Mahendra Bhishma

एक अप्रेषित-पत्र महेन्द्र भीष्म सतसीरी शहर में कर्फ्यू को लगे आज तीसरी रात है। अस्सी बरस की बूढ़ी दीना ताई की आँखों से नींद कोसों दूर है। जाग घर, ...

एक अप्रेषित-पत्र - 7
by Mahendra Bhishma

एक अप्रेषित-पत्र महेन्द्र भीष्म वितृष्णा अनार का जूस लेकर जब मैं वापस वार्ड में पहुँची, तो देखा बाबूजी अपनी आँखे बन्द किये झपक चुके थे। उनकी नींद में व्यवधान ...

एक अप्रेषित-पत्र - 6
by Mahendra Bhishma

एक अप्रेषित-पत्र महेन्द्र भीष्म कर्कशा ‘‘जवानी में दो—दो भोग चुकने के बाद अब बुढ़ापे में तीसरी करने की मंशा है क्या?‘‘ कृशकाय—कंकाल स्वरूपा पत्नी की कर्कश आवाज सुनकर प्रोफेसर ...

एक अप्रेषित-पत्र - 5
by Mahendra Bhishma

एक अप्रेषित-पत्र महेन्द्र भीष्म कोई नया नाम दो ‘‘जागते रहो'' मध्य रात्रि की निस्तब्धता को भंग करती सेन्ट्रल जेल के संतरी की आवाज और फिर पहले जैसी खामोशी। मैं ...