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Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Letter in All books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cultures. The...Read More


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  • मनाचं प्रेमपत्र..

    मनाचं प्रेमपत्र.. (पत्र पहिले) ऐकना.. खुप सारे स्वप्न पाहतो मी तुझ्यासोबत.. ‍️ स...

  • વામનથી વિરાટ ડૉ.ભીમરાવ

    વામનથી વિરાટ ડૉ.ભીમરાવ “ડૉ. ભીમરાવ આંબેડકર એટલે નસીબ કરતા વધુ કર્મ અને વિશ્વાસનુ...

  • रिश्ता चिट्ठी का

    दिनांक:26/12/2022प्रोफेसर!मालूम है तारीख़ गलत लिखी है, लेकिन 26 तारीख़ अब शायद ही...

मनाचं प्रेमपत्र.. By अक्षय राजाराम खापेकर

मनाचं प्रेमपत्र.. (पत्र पहिले) ऐकना.. खुप सारे स्वप्न पाहतो मी तुझ्यासोबत.. ‍️ स्वप्नांत का होईना तु असतेस माझ्यासोबत.. ‍️‍ माहित आहे.. हे स्वप्न कधीच पुर्ण नाही होणार.. पण या वेड्...

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વામનથી વિરાટ ડૉ.ભીમરાવ By Niky Malay

વામનથી વિરાટ ડૉ.ભીમરાવ “ડૉ. ભીમરાવ આંબેડકર એટલે નસીબ કરતા વધુ કર્મ અને વિશ્વાસનું અસાધારણ વ્યક્તિત્વ.”ડૉ. ભીમરાવ રામજી આંબેડકરનો જન્મ ૧૪ મી એપ્રિલ ૧૮૯૧ મહુ,મધ્ય પ્રદેશમાં એક અતિ સા...

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थोडंसं मनातलं..! By Priyanka Kumbhar-Wagh

आज तब्बल दोन ते अडीच वर्षांनी पुन्हा काहीतरी लिहायला सुरुवात करत आहे. या दोन ते अडीच वर्षांत आयुष्यात खूप काही महत्वाच्या घटना घडल्या. धावपळीच्या जीवनातून म्हटलं थोडा वेळ काढू आणि...

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चिठिया हो तो हर कोई बांचे By Prafulla Kumar Tripathi

जबसे लैपटाप और मोबाइल युग आया है हम सभी के जीवन से पत्र लेखन ,मनन और वाचन की विधा धीरे धीरे विदा हो रही है ।अपनी सेवा प्रारम्भ वर्ष 1977 से रिटायरमेंट वर्ष 2013 में, फुर्सत के क्षण...

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જલધિના પત્રો - 18 - એક શંકાસ્પદ પત્ર - મૃત શિક્ષકને. By Dr.Sarita

ડેમની પાળી પર લટકતો એ દુપટ્ટો અને એના જ આધારે શંકાસ્પદ રીતે પાણીમાં લથડિયા ખાતી, કદાચિત્ તરતી લાશને તરવૈયાઓએ માંડ માંડ પકડી પાડી. ચોમાસાના કારણે ઉપરવાસમાં જોરદાર વરસાદથી ડેમ છલોછલ...

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रिश्ता चिट्ठी का - 5 By Preeti

प्रोफेसर! कैसे हैं आप? आज ये सवाल आप मुझसे पूछ लेते काश! तो बता पाती, जलन से भरी हुईं थीं मैं!!! अच्छा हुआ उससे नहीं मिले आप!! वो, जिसने आपको, आपके प्यार को अपनी ज़िन्दगी में एहमियत...

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रिश्ता चिट्ठी का By Preeti

दिनांक:26/12/2022प्रोफेसर!मालूम है तारीख़ गलत लिखी है, लेकिन 26 तारीख़ अब शायद ही मैं कभी भूल सकूंगी। जो हुआ उस वजह से नहीं, जो हुआ उस वजह से आपका मेरी ज़िन्दगी में शामिल होना! कहाँ स...

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Embracing Life's Laughter And Tears By Kiran

In the journey of life, there are moments that puzzle us where we find ourselves experiencing conflicting emotions at the same time. It's like laughter and tears are two opposi...

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बर्बरता का समाधान क्या हैं ? By Rudra S. Sharma

(), () ()रिक्तत्व की सन्निकट प्रकटता हैं शरुप्ररा अर्थात् मेरी प्रत्येक शब्द प्राकट्यता, सत्य मतलब की मुमुक्षा ही जिसके प्रति जागरूकता को आकार दें सकती हैं अतः मुक्ति की योग्य इच्छ...

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सर्व समर्थ जागरूकता की उपलब्धता का पथिक हूँ मैं ..! By Rudra S. Sharma

(), () ()रिक्तत्व की सन्निकट प्रकटता हैं शरुप्ररा अर्थात् मेरी प्रत्येक शब्द प्राकट्यता, सत्य मतलब की मुमुक्षा ही जिसके प्रति जागरूकता को आकार दें सकती हैं अतः मुक्ति की योग्य इच्छ...

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राख!! By Madhu

अरे ये क्या कह रही हो तुम अभी कुछ दिन पहले हि हमारी बात हुई थी तब तो सब ठीक था! एकदम फ़िट एण्ड फ़ाइन थी ये सब कैसे क्या हो गया ?यकीन नहीं हो रहा है सुन्न पड गये है! हैं....? कल तो मि...

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मुमुक्षु अवचेतन की चेतन मन को प्रतिक्रिया By Rudra S. Sharma

मेरे मुमुक्षु अवचेतन मन की, मुक्त यानी पूर्ण मृत निराकार चेतन मन के प्रेम पूर्ण आमंत्रण की प्रतिक्रिया ..!!मैं ऐसे वाहन चालक सा हूँ, जिसके हिसाब सें वाहन नहीं बल्कि जो असहाय होने स...

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Dear नवरोबा... By Vaishnavi Pimple

Hiiii नवरोबा...काय आज अचानक पत्र....पाहून तर हसूच आल...माझी morning तर good च झाली राव...२ सेकंदात पूर्ण कॉलेज जगून आले... आणि काय रे आज काल हे असे पत्र लिहायचं का थांबवलं ??? विचा...

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Dear बायको... By Vaishnavi Pimple

Hiii बायको ...कशी आहेस ??? कधीही समोर न विचारलेला प्रश्न चक्क आज विचारतो तो पण असा ?? अजब वाटल ना....पण काय करू...तू म्हणते तस माझं काम म्हणजे तुझी सवत झाली आहे....आणि आज मी तुझ्या...

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कुछ शब्द!! By Madhu

उस दिन तुम्हारे बारे में किसी और से मालूम हुआ मुझे उस बात तनिक भी खबर ना थी जब पता चला मेरा दिल धक से हुआ ऐसा लगा कि किसी ने मेरे मुहँ पर तमाचा जड दिया हो ! इतना जुडाव जो तुमसे था...

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વોચમેનને પત્ર By Rakesh Thakkar

વોચમેનને પત્ર-રાકેશ ઠક્કરભાઈ વોચમેન, તું બીજા દેશનો રહીશ હોવાથી તારું સાચું નામ ઉચ્ચારતા આવડતું નથી એટલે અમે તને વોચમેન કહીને જ બોલાવીએ છીએ. આખો દિવસ તારા માટે 'વોચમેન' ની...

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Media Trails with Social Phenomenon By JUGAL KISHORE SHARMA

Trial by media is a phrase popular in the late 20th century and early 21st century to describe the impact of television and newspaper coverage on a person's reputation by creating...

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તારું જિંદગીમાં આવવું નિશંકપણે એક સુંદર સંયોગ પણ…. By Pinki Dalal

પ્રિય..લખતાં તો કરી દીધું પણ મને ખબર નથી પડતી કે હવે આવું સંબોધન મેં કેમ કર્યું ? એમાં નવાઈનું કારણ તો એટલું જ કે જયારે છેલ્લીવાર મળ્યાં ત્યારે પણ ગેરસમજ , નાદાનિયત અને એક ખોટાં અહ...

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कुछ बाते.... By Madhu

क्यो क्यो हर बार हम अपने जाबान्ज वीरो को खो दे रहे हैं सिर्फ़ कुछ गद्दारो जिस देश का नमक खाते हो क्यो नमक हलाली करते हो..... क्या मिलता ऐसा करके एक फ़ौजी तो अपने देश कि प्रति निष्ठाव...

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20B 1032 By Tushar Karande

आजही तो दिवस मला चांगलाच आठवतोय , 28 ऑक्टोबर 2015 , तो दिवस तुझ्या कुशीतला शेवटचा दिवस असेल असं वाटल नव्हतं , कारण त्या रात्री तुझ्या कुशीत निजून दुसऱ्या दिवशी मी 29 ऑक्टोबर 2015 ल...

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દાન By Shivani Goshai

મને બઉ અનુભવ તો નથી પણ જે કંઈ પણ મેં જોયું છે એ અનુસાર હું મારી વાત રજૂ કરું છું આજ કાલ લોકો દાન કરે છે પણ દિલ થી નહિ ફકત ને ફક્ત સોસાયટી મા પોતાની ઍક અલગ ઓળખ ઊભી કરવા પૂરતું જયારે...

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સ્મરણો ની એક સૂડી By Vishnu Dabhi

નમસ્તે વાંચક મિત્રો.... આ લેખ માં હું મારા જીવન ની અઢાર વર્ષ સુધી માં મારા જીવન માં બનેલા ખાસ મિત્રો અને સગાં સંબંધીઓ સાથે કરેલી મુલાકાતો ની વાત કરવા જઈ રહ્યો છું મને સંપૂર્ણ આશા છ...

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અડધી રાત્રે આઝાદી..? By M. Soni

  આપણાં દેશના સ્યૂડો સેક્યુલરીસ્ટો દ્વારા સગવડીયા સત્ય તરીકે સ્વીકારી લેવામાં આવેલી એક માન્યતા એ છે કે સ્વતંત્રતા આપણને સરળતાથી મળી હતી. આ ભ્રામક દંતકથા અનુસાર અંગ્રેજો ભારત પ...

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मेरा प्रेम पत्र By Rudra S. Sharma

सही गलत दों हैं और वास्तविकता एक मात्रता का नाम, इसका मतलब हैं जहाँ सही और गलत हों सकता हैं वहाँ भृम या सत्य की ओर इशारे हों सकतें हैं.. सत्य नहीं! और जहाँ न सही हैं और न ही गलत वह...

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गालियों का प्रयोग क्या सही हैं? By Rudra S. Sharma

अपमान कर्ता शब्दों के प्रयोग, कलंक या निंदा की बात अर्थात् अपशब्दों यानी गालियों का प्रयोग क्या सही हैं?जो जैसा हैं उसे वैसा ही कहना अर्थात् ही सत्य कहना होता हैं और जिसकी जो जैसा...

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एक चिट्ठी प्यार भरी - 4 By Shwet Kumar Sinha

प्रिय प्रियतमा, आज एकबार फिर तुम्हारी नगरी में हूं। पर सबकुछ कितना बदल गया है यहां! या फिर शायद ये मेरी नजरों को धोखा भी हो सकता है क्योंकि तुम जो साथ नहीं हो अब।याद है, पहले हम और...

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मोटे अनाज मल्टीग्रेन की संक्षिप्त जानकारी 2023 को अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष By JUGAL KISHORE SHARMA

एक अनुमान के मुताबिक देश में कुल खाद्यान्न उत्पादन में कदन्न अनाज की हिस्सेदारी 40 फीसदी थी। कदन्न अनाज को मोटा अनाज भी कहा जाता है क्योंकि इनके उत्पादन में ज्यादा मशक्कत नहीं करनी...

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आधुनिक भारतीय दर्शन में व्यक्तिवाद की समीक्षा समकालीन अध्ययन के सार By JUGAL KISHORE SHARMA

आधुनिक भारतीय दर्शन में व्यक्तिवाद की समीक्षा, समकालीन अध्ययन के सार स्वयं और व्यक्तियों को अक्सर समकालीन दर्शन में समानार्थक शब्द के रूप में उपयोग किया जाता है, और कभी-कभी पश्चिमी...

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तुम्हारे नाम एक पत्र और By SURENDRA ARORA

आज चालीस साल बाद एक बार फिर तुम्हें चिट्ठी लिखने की इच्छा हुई है। इच्छा, आज ही नहीं सच कहूं तो पिछले कई दिनों से दिल के, दिमाग के न जाने कितने कोनो में सागर में किसी उफान की तरह हि...

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मनाचं प्रेमपत्र.. By अक्षय राजाराम खापेकर

मनाचं प्रेमपत्र.. (पत्र पहिले) ऐकना.. खुप सारे स्वप्न पाहतो मी तुझ्यासोबत.. ‍️ स्वप्नांत का होईना तु असतेस माझ्यासोबत.. ‍️‍ माहित आहे.. हे स्वप्न कधीच पुर्ण नाही होणार.. पण या वेड्...

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વામનથી વિરાટ ડૉ.ભીમરાવ By Niky Malay

વામનથી વિરાટ ડૉ.ભીમરાવ “ડૉ. ભીમરાવ આંબેડકર એટલે નસીબ કરતા વધુ કર્મ અને વિશ્વાસનું અસાધારણ વ્યક્તિત્વ.”ડૉ. ભીમરાવ રામજી આંબેડકરનો જન્મ ૧૪ મી એપ્રિલ ૧૮૯૧ મહુ,મધ્ય પ્રદેશમાં એક અતિ સા...

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थोडंसं मनातलं..! By Priyanka Kumbhar-Wagh

आज तब्बल दोन ते अडीच वर्षांनी पुन्हा काहीतरी लिहायला सुरुवात करत आहे. या दोन ते अडीच वर्षांत आयुष्यात खूप काही महत्वाच्या घटना घडल्या. धावपळीच्या जीवनातून म्हटलं थोडा वेळ काढू आणि...

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चिठिया हो तो हर कोई बांचे By Prafulla Kumar Tripathi

जबसे लैपटाप और मोबाइल युग आया है हम सभी के जीवन से पत्र लेखन ,मनन और वाचन की विधा धीरे धीरे विदा हो रही है ।अपनी सेवा प्रारम्भ वर्ष 1977 से रिटायरमेंट वर्ष 2013 में, फुर्सत के क्षण...

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જલધિના પત્રો - 18 - એક શંકાસ્પદ પત્ર - મૃત શિક્ષકને. By Dr.Sarita

ડેમની પાળી પર લટકતો એ દુપટ્ટો અને એના જ આધારે શંકાસ્પદ રીતે પાણીમાં લથડિયા ખાતી, કદાચિત્ તરતી લાશને તરવૈયાઓએ માંડ માંડ પકડી પાડી. ચોમાસાના કારણે ઉપરવાસમાં જોરદાર વરસાદથી ડેમ છલોછલ...

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रिश्ता चिट्ठी का - 5 By Preeti

प्रोफेसर! कैसे हैं आप? आज ये सवाल आप मुझसे पूछ लेते काश! तो बता पाती, जलन से भरी हुईं थीं मैं!!! अच्छा हुआ उससे नहीं मिले आप!! वो, जिसने आपको, आपके प्यार को अपनी ज़िन्दगी में एहमियत...

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रिश्ता चिट्ठी का By Preeti

दिनांक:26/12/2022प्रोफेसर!मालूम है तारीख़ गलत लिखी है, लेकिन 26 तारीख़ अब शायद ही मैं कभी भूल सकूंगी। जो हुआ उस वजह से नहीं, जो हुआ उस वजह से आपका मेरी ज़िन्दगी में शामिल होना! कहाँ स...

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Embracing Life's Laughter And Tears By Kiran

In the journey of life, there are moments that puzzle us where we find ourselves experiencing conflicting emotions at the same time. It's like laughter and tears are two opposi...

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बर्बरता का समाधान क्या हैं ? By Rudra S. Sharma

(), () ()रिक्तत्व की सन्निकट प्रकटता हैं शरुप्ररा अर्थात् मेरी प्रत्येक शब्द प्राकट्यता, सत्य मतलब की मुमुक्षा ही जिसके प्रति जागरूकता को आकार दें सकती हैं अतः मुक्ति की योग्य इच्छ...

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सर्व समर्थ जागरूकता की उपलब्धता का पथिक हूँ मैं ..! By Rudra S. Sharma

(), () ()रिक्तत्व की सन्निकट प्रकटता हैं शरुप्ररा अर्थात् मेरी प्रत्येक शब्द प्राकट्यता, सत्य मतलब की मुमुक्षा ही जिसके प्रति जागरूकता को आकार दें सकती हैं अतः मुक्ति की योग्य इच्छ...

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राख!! By Madhu

अरे ये क्या कह रही हो तुम अभी कुछ दिन पहले हि हमारी बात हुई थी तब तो सब ठीक था! एकदम फ़िट एण्ड फ़ाइन थी ये सब कैसे क्या हो गया ?यकीन नहीं हो रहा है सुन्न पड गये है! हैं....? कल तो मि...

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मुमुक्षु अवचेतन की चेतन मन को प्रतिक्रिया By Rudra S. Sharma

मेरे मुमुक्षु अवचेतन मन की, मुक्त यानी पूर्ण मृत निराकार चेतन मन के प्रेम पूर्ण आमंत्रण की प्रतिक्रिया ..!!मैं ऐसे वाहन चालक सा हूँ, जिसके हिसाब सें वाहन नहीं बल्कि जो असहाय होने स...

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Dear नवरोबा... By Vaishnavi Pimple

Hiiii नवरोबा...काय आज अचानक पत्र....पाहून तर हसूच आल...माझी morning तर good च झाली राव...२ सेकंदात पूर्ण कॉलेज जगून आले... आणि काय रे आज काल हे असे पत्र लिहायचं का थांबवलं ??? विचा...

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Dear बायको... By Vaishnavi Pimple

Hiii बायको ...कशी आहेस ??? कधीही समोर न विचारलेला प्रश्न चक्क आज विचारतो तो पण असा ?? अजब वाटल ना....पण काय करू...तू म्हणते तस माझं काम म्हणजे तुझी सवत झाली आहे....आणि आज मी तुझ्या...

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कुछ शब्द!! By Madhu

उस दिन तुम्हारे बारे में किसी और से मालूम हुआ मुझे उस बात तनिक भी खबर ना थी जब पता चला मेरा दिल धक से हुआ ऐसा लगा कि किसी ने मेरे मुहँ पर तमाचा जड दिया हो ! इतना जुडाव जो तुमसे था...

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વોચમેનને પત્ર By Rakesh Thakkar

વોચમેનને પત્ર-રાકેશ ઠક્કરભાઈ વોચમેન, તું બીજા દેશનો રહીશ હોવાથી તારું સાચું નામ ઉચ્ચારતા આવડતું નથી એટલે અમે તને વોચમેન કહીને જ બોલાવીએ છીએ. આખો દિવસ તારા માટે 'વોચમેન' ની...

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Media Trails with Social Phenomenon By JUGAL KISHORE SHARMA

Trial by media is a phrase popular in the late 20th century and early 21st century to describe the impact of television and newspaper coverage on a person's reputation by creating...

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તારું જિંદગીમાં આવવું નિશંકપણે એક સુંદર સંયોગ પણ…. By Pinki Dalal

પ્રિય..લખતાં તો કરી દીધું પણ મને ખબર નથી પડતી કે હવે આવું સંબોધન મેં કેમ કર્યું ? એમાં નવાઈનું કારણ તો એટલું જ કે જયારે છેલ્લીવાર મળ્યાં ત્યારે પણ ગેરસમજ , નાદાનિયત અને એક ખોટાં અહ...

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कुछ बाते.... By Madhu

क्यो क्यो हर बार हम अपने जाबान्ज वीरो को खो दे रहे हैं सिर्फ़ कुछ गद्दारो जिस देश का नमक खाते हो क्यो नमक हलाली करते हो..... क्या मिलता ऐसा करके एक फ़ौजी तो अपने देश कि प्रति निष्ठाव...

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20B 1032 By Tushar Karande

आजही तो दिवस मला चांगलाच आठवतोय , 28 ऑक्टोबर 2015 , तो दिवस तुझ्या कुशीतला शेवटचा दिवस असेल असं वाटल नव्हतं , कारण त्या रात्री तुझ्या कुशीत निजून दुसऱ्या दिवशी मी 29 ऑक्टोबर 2015 ल...

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દાન By Shivani Goshai

મને બઉ અનુભવ તો નથી પણ જે કંઈ પણ મેં જોયું છે એ અનુસાર હું મારી વાત રજૂ કરું છું આજ કાલ લોકો દાન કરે છે પણ દિલ થી નહિ ફકત ને ફક્ત સોસાયટી મા પોતાની ઍક અલગ ઓળખ ઊભી કરવા પૂરતું જયારે...

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સ્મરણો ની એક સૂડી By Vishnu Dabhi

નમસ્તે વાંચક મિત્રો.... આ લેખ માં હું મારા જીવન ની અઢાર વર્ષ સુધી માં મારા જીવન માં બનેલા ખાસ મિત્રો અને સગાં સંબંધીઓ સાથે કરેલી મુલાકાતો ની વાત કરવા જઈ રહ્યો છું મને સંપૂર્ણ આશા છ...

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અડધી રાત્રે આઝાદી..? By M. Soni

  આપણાં દેશના સ્યૂડો સેક્યુલરીસ્ટો દ્વારા સગવડીયા સત્ય તરીકે સ્વીકારી લેવામાં આવેલી એક માન્યતા એ છે કે સ્વતંત્રતા આપણને સરળતાથી મળી હતી. આ ભ્રામક દંતકથા અનુસાર અંગ્રેજો ભારત પ...

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मेरा प्रेम पत्र By Rudra S. Sharma

सही गलत दों हैं और वास्तविकता एक मात्रता का नाम, इसका मतलब हैं जहाँ सही और गलत हों सकता हैं वहाँ भृम या सत्य की ओर इशारे हों सकतें हैं.. सत्य नहीं! और जहाँ न सही हैं और न ही गलत वह...

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गालियों का प्रयोग क्या सही हैं? By Rudra S. Sharma

अपमान कर्ता शब्दों के प्रयोग, कलंक या निंदा की बात अर्थात् अपशब्दों यानी गालियों का प्रयोग क्या सही हैं?जो जैसा हैं उसे वैसा ही कहना अर्थात् ही सत्य कहना होता हैं और जिसकी जो जैसा...

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एक चिट्ठी प्यार भरी - 4 By Shwet Kumar Sinha

प्रिय प्रियतमा, आज एकबार फिर तुम्हारी नगरी में हूं। पर सबकुछ कितना बदल गया है यहां! या फिर शायद ये मेरी नजरों को धोखा भी हो सकता है क्योंकि तुम जो साथ नहीं हो अब।याद है, पहले हम और...

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मोटे अनाज मल्टीग्रेन की संक्षिप्त जानकारी 2023 को अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष By JUGAL KISHORE SHARMA

एक अनुमान के मुताबिक देश में कुल खाद्यान्न उत्पादन में कदन्न अनाज की हिस्सेदारी 40 फीसदी थी। कदन्न अनाज को मोटा अनाज भी कहा जाता है क्योंकि इनके उत्पादन में ज्यादा मशक्कत नहीं करनी...

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आधुनिक भारतीय दर्शन में व्यक्तिवाद की समीक्षा समकालीन अध्ययन के सार By JUGAL KISHORE SHARMA

आधुनिक भारतीय दर्शन में व्यक्तिवाद की समीक्षा, समकालीन अध्ययन के सार स्वयं और व्यक्तियों को अक्सर समकालीन दर्शन में समानार्थक शब्द के रूप में उपयोग किया जाता है, और कभी-कभी पश्चिमी...

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तुम्हारे नाम एक पत्र और By SURENDRA ARORA

आज चालीस साल बाद एक बार फिर तुम्हें चिट्ठी लिखने की इच्छा हुई है। इच्छा, आज ही नहीं सच कहूं तो पिछले कई दिनों से दिल के, दिमाग के न जाने कितने कोनो में सागर में किसी उफान की तरह हि...

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