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भाग ५ — स्वप्नांना पंख मिळालेवर्षं पुढे जात होती.Princess आता लहान मुलगी राहिली...
चांट फिरोजपुर की भूतिया हवेलीपीलीभीत शहर से लगभग दूर, पूरनपुर की तरफ जाने वाले र...
સાવ સવારથી આકાશમાં મઘમઘતી પ્રસન્નતા વ્યાપેલી હતી. શ્રાવણ માસની પૂનમ એટલે ભાઈ-બ...
भाग तीन: समय का इम्तिहान और दूरियों का सायाकहानी में मोड़ तब आया जब कॉलेज का आखि...
एक विचित्र डायरीलेखक: विजय शर्मा एरी(लगभग २००० शब्द)१५ मार्च २०१९आज रात फिर वही...
भाग ७ — नौकरी का डरमिहिर कुछ पल तक बॉस के सामने चुप बैठा रहा।उसकी नजर सामने रखी...
### સમય સાથે બદલાયેલા સંબંધોની એક ઝાંખી:> લગ્ન પછી દેવાંશના સ્વભાવમાં મોટો બદલાવ...
बाबू राम किसी गाँव में एक प्राइमरी स्कूल के अध्यापक थे। उनका एक बेटा था मोहन। मो...
ભાગ ૩ — બાળકોનું ભવિષ્યરમેશભાઈએ એ રાત્રે બહુ વિચાર્યું હતું.બારીની બહાર અંધારું...
I had just reached home, but it didn't feel like I had actually reached anyw...
दोस्तों, आज हम बात करेंगे महाभारत के कर्ण की जिसे लोग दानवीर कर्ण के नाम से जानते हैं। जिसे परशुराम जी ने श्राप दिया था। आज हम आपको बताएंगे की अखिर परशुराम जी ने कर्ण को श्राप क्य...
चोरी टळलेली... बारावी पर्यंत माझे शिक्षण खेडेगावांत झाले होते. कॉलेज शिक्षणासाठी मी भावाकडे येरवड्याला पुण्यात आलो. बारावीत माझ्याबरोबर शिकणाऱ्या आम्ही काही मित्रांनी ठरवून एकाच कॉ...
जेल के रोशनदान से आती सुबह की पहली किरण की छुयन मूक हो जाया करती थी वो अपनी जिन यादों को दवा कर रखा था वे यादे इस समय जिवंत हो जाया करती थी पहली बार जब सानवी ने सुना कि उसे जेल ह...
कैसे भूल सकता हूँ ,उन दिनों को भूलना चाहूं, तो भी नही।ऐसे दिन भगवान किसी भी बाप को न दिखाए। और माफ भी नही कर सकता उन लोगों को जो आदमी को कर्ज के जाल में फसाते है।सुना है कि हमारे...
किस जन्म में बच्चे नहीं हुए? माता-पिता के बगैर किसका अस्तित्व संभव है? सभी भगवान माँ के पेट से ही जन्मे थे! इस प्रकार माता-पिता और बच्चों का व्यवहार अनादि अनंत है। यह व्यवहार आदर्श...
ज़िंदगी की उलझनों के दिन-रात, शामें बँट जाती हैं शब्दों में, चुप्पी साधी नहीं जा सकती यदि कोई संवेदनशील हो --कसमसाते हुए दिनों की आहट उसे परेशान करती ही तो रहती है जब तक भावों का पु...
ईस्ट इंडिया कम्पनी की स्थापना 31 दिसम्बर 1600 में इंग्लैंड में हुई थी।यह कम्पनी भारत मे व्यापार करना चाहती थी।इस कम्पनी को भारत के साथ व्यापार करने की 21 वर्ष के लिए छूट महारानी ने...
केवल जीवन जी लेना ही जीवन नहीं है। जीवन जीने का कोई ध्येय, कोई लक्ष्य भी तो होगा। जीवन में कोई ऊँचा लक्ष्य प्राप्त करने का ध्येय होना चाहिए। जीवन का असली लक्ष्य ‘मैं कौन हूँ’, इस स...
पाप या पुण्य, जीवन में किये गए किसी भी कार्य का फल माना जाता है। इस पुस्तक में दादाश्री हमें बहुत ही गहराई से इन दोनों का मतलब समझाते हुए यह बताते है कि, कोई भी काम जिससे दूसरों...
पूरा पढ़ना न भूलें :- यह एक काल्पनिक कहानी है इसका वास्तविक जीवन से कोई वास्ता नहीं। वह ट्रेन के आरक्षण की बोगी में बाथरूम के तरफ वाली सीट पर बैठी थी... उसके चेहरे के भाव से पता...
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