The Download Link has been successfully sent to your Mobile Number. Please Download the App.
You are welcome to the world of inspiring, thrilling and motivating stories written in your own language by the young and aspiring authors on Matrubharti. You will get a life time experience of falling in love with stories.
शीर्षक: वल्चर – अँधेरे की उड़ानविशेष एपिसोड: “रक्तपंख बनाम नरकवीर”[दृश्य 1 – महा...
यह कहानी एक चिड़िया की है।एक छोटी-सी, नन्ही-सी और बहुत ही प्यारी चिड़िया।पूरे जं...
घने जंगल के बीचोंबीच फैली वह प्राचीन गुफा आज भी रहस्यों से भरी थी। चट्टानों से र...
मेरा नाम आरव मल्होत्रा है, और मैं झूठ बोलने में माहिर हूँ। लेकिन जो कहानी मैं आप...
बारिश की बूंदें खिड़की पर टकरा रही थीं, जैसे कोई पुरानी यादें दरवाजे पर दस्तक दे...
निधि हमेशा सोच-समझकर काम करती थी। घर में सबका ख्याल रखना उसका स्वभाव था। लेकिन क...
बगावत के सुर, एपिसोड 16: लौटती परछाईं, टूटा विश्वाससनाया का दूसरा बच्चा—एक बेटी...
।एपिसोड 15: अंतरिक्ष का नीलकमलन्यूयॉर्क की सड़कें अभी भी काँप रही थीं। टाइम्स स्...
शहर की हलचल से दूर, अरावली की पहाड़ियों की तलहटी में बसा 'सुर-सदन' अपनी भव्यता औ...
धर्म–अर्थ–काम–मोक्ष : एक जीवन-बोध मोक्ष कोई साध्य नहीं है। मोक्ष कोई लक्ष्य नहीं...
व्यंग्य की तेजधर उच्छंखल समाज की शल्य-क्रिया करने में समर्थ होती है। आज के दूषित वातावरण में यहाँ संवेदना मृत प्रायः हो रही है। केवल व्यंग्य पर ही मेरा विश्वास टिक पा रहा है कि कही...
दिल के दरवाज़े पे साँकल जो लगा रखी थी उसकी झिर्री से कभी ताक़ लिया करती थी वो जो परिंदों की गुटरगूं सुनाई देती थी उसकी आवाजों को ही माप लिया करती थी न जाने गुम सी हो गईं हैं ये...
श्री सुरेश पाण्डे सरस की कृति है। इस संग्रह की अधिकतर रचनायें (कवितायें) जिस धरती पर अंकुरित हुई हैं। उसे हम प्रेम की धरती कह सकते हैं यों भी कविता का विशेष कर ‘गीत’ का जन्म प्रे...
आज मानव संवेदनाओं का यह दौर बड़ा ही भयावह है। इस समय मानव त्राशदी चरम सीमा पर चल रही है। मानवता की गमगीनता चारों तरफ बोल रहीं है जहां मानव चिंतन उस विगत परिवेश को तलासता दिख रहा है,...
नरेन्द्र उत्सुक एक ऐसे व्यक्तित्व का नाम है जिसे जीवन भर अदृश्य सत्ता से साक्षात्कार होता रहा। परमहंस सन्तों की जिन पर अपार कृपा रही। सोमवती 7 सितम्बर 1994 को मैं...
स्वतंत्र सक्सेना की कविता काव्य संग्रह सरल नहीं था यह काम स्वतंत्र कुमार सक्सेना सवित्री सेवा आश्...
कुछ रचनाऐं भाव के प्रवाह मेंं .... सोचने को मजबूर करेंगी । संवाद तब पूर्ण होगा जब पाठक पढ़ेगा और चिंतन करेगा।
"बेनाम शायरी"??? ?? ??? ?? ???क्रूर भी है, निष्ठुर भी है, वो खुदा मेरा मगरुर भी है।"बेनाम" हलक में बैठा वो खुदा मेरा गुरूर भी है।।??? ?? ??? ?? ???कोई लफ्ज...
इतनी कृपा दिखना राघव, कभी न हो अभिमान, मस्तक ऊँचा रहे मान से, ऐसे हों सब काम। रहें समर्पित, करें लोक हित, देना यह आशीष, विनत भाव से प्रभु चरणों में, झुका रहे यह शीष। कर...
सिर्फ तुम... यकीन नहीं होता कभी हम मिले थे कुछ तुम दर्द में थे, कुछ हमें भी गिले थे.. ये अधूरा इश्क़ कब पूरा सा हुआ, कब अधूरी सी ज़िन्दगी पूरी सी हुई.. ये बेदर्द सी खुशियां, इतनी हसी...
Continue log in with
By clicking Log In, you agree to Matrubharti "Terms of Use" and "Privacy Policy"
Verification
Download App
Get a link to download app
Copyright © 2026, Matrubharti Technologies Pvt. Ltd. All Rights Reserved.
Please enable javascript on your browser