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काश हम अजनबी होते तो खुश होतेरात के दो बज चुके थे। दिसंबर की सर्द हवाएं खिड़की क...
ਅਧਿਆਇ ੨: ਅਣਜਾਣੇ ਰਾਹ ਤੇ ਪਹਿਲੀ ਮੁਲਾਕਾਤਸ਼ਹਿਰ ਦੀ ਇੱਕ ਪੁਰਾਣੀ ਲਾਇਬ੍ਰੇਰੀ, ਜਿੱਥੇ ਕਿਤਾਬਾਂ...
स्नोसिटी रात का वक्त : नशे में धुत होकर खुश होती धरुविका नहीं जानती थी ! कि वो क...
દિલ્હી એરપોર્ટનું પ્રીમિયમ લાઉન્જ. ચારેય બાજુ હાઈ-ફાઈ લોકો, સોફ્ટ જાઝ મ્યુઝિક અન...
फिर ज़ेबा ने वहाँ रहते हुये अपने जवानी का जादू चलाना सुरु कर दिया था. उसे उन दहश...
■■ मेंरे जीवन के सुनहरे गर्मी के दिन ■■️ Written by H. K. Bharadwaj_____________...
वाजिद हुसैन सिद्दीक़ी की कहानी घर का छोटा सा कमरा-एक अलमारी, कुछ...
शहर की रंगीन रोशनियाँ भाग – 02 (अनकही आँखों की कहानी) ️ Written by H. K. Bh...
"તમારો ઓર્ડર સક્સેસફુલી પ્લેસ થઈ ગયો છે!" ફોનની સ્ક્રીન પર આવતો આ એક નાનકડો મેસે...
(अंतिम भाग)मुंबईच्या त्या गजबजलेल्या कॉफी शॉपमध्ये लोकांचा हसण्याचा, बोलण्याचा आ...
यह कहानी है मासूम – सी मान्या की.. जो अभी केवल 23 साल की है । जो फिलहाल में एक स्कूल टीचर है। जितनी मासूम.. उतनी ही प्यारी है, लेकिन एक दिन उसकी पूरी दुनिया पलट सी जाती है। जब उसकी...
बात उन दिनों की है जब मेरी नई नई शादी हुई थी। मेरे पिता जी अपनी ड्यूटी के चक्कर में पड़े हुए थे, अतः उनका हमारे परिवार की ओर ध्यान लगभग कम ही था अतः हमारा सयुंक्त परिबार दादीअम्मा...
तुम्हारे हिस्से का मौन मेरे हिस्से में आया.... और तेरा मन मेरे मन को भाया.....यामिनी की मृत्यु के सातवें दिन घर में अब पहले की तरह सन्नाटा नहीं रहा था।लोग थे,रिश्तेदार थे,बर्तन खनक...
मैं, सतोशी नाकामोतो, और एक लकड़ी का फलसफ़ा चारों तरफ घना अँधेरा। मैं एक अजीब सी जगह पर था। मैंने अपने हाथों को देखने की कोशिश की, पर वहाँ कुछ था ही नहीं, सिर्फ घुप्प अँधेरा। "...
આર્ટ એન્ડ આર્કિટેક્ચર કંપનીમાં આજે સવારથી બધા એમ્પ્લોયની ભાગદોડ ચાલુ હતી, કારણ કે જે ક્લાયન્ટ ૧૪ દિવસ બાદ આવવાના હતા, તે અચાનક સોમવારે આવી જવાથી બધા એમ્પ્લોય પોત પોતાના કામ પર લાગી...
ದಾರಿಲಿ ಅಳ್ತಾ ಹೋಗ್ತಾ ಇದ್ದಾ ಹುಡುಗನನ್ನ ನೋಡಿ, ಹರಳಿ ಕಟ್ಟೆಮೇಲೆ ಕೂತಿದ್ದ ಮುದುಕ ಅ ಹುಡುಗನನ್ನ ನೋಡಿ....ಲೇ ಕೆಂಪ ಯಾಕೋ ಹಾಗೇ ಅಳ್ತಾ ಹೋಗ್ತ ಇದ್ದಿಯಾ ಏನಾಯ್ತು...ಕೆಂಪ...ಅಳೋದನ್ನ ನಿಲ್ಲಿಸಿ,,,ಏನಾಯ್ತು ಅಂತ ಕ...
છેલ્લો પ્રેમ આ શબ્દ સાંભળી ને દરેક ના દિમાગ માં પહેલો પ્રેમ કોણ ?જેવા પ્રશ્ન ઊભા થાય છે....તમે વધુ મુજવણ માં ના આવો માટે કહી દવ કે તમે મારી પહેલી બુક મારો પ્રેમ વાચી હશે તો ખબર પડી...
यह कहानी है राघव की…. जो अपने मम्मी पापा के साथ फॉरेन में रहता था, लेकिन उसके दादा- दादी इंडिया के एक छोटे से गांव में रहते थे। जिस गांव का नाम कलिंग था, राघव अपने पेरेंट्स से ह...
रुद्रपुर की पहाड़ियों पर आज रात आसमां से पानी नहीं, बल्कि साक्षात कहर बरस रहा था। बादलों के गरजने की गूँज ऐसी थी मानो पहाड़ अपना सीना पीट रहे हों। मूसलाधार बारिश ने नीचे की घाटियों क...
त्या दिवशी सकाळी १० वाजण्याच्या सुमारास सुशीलाने विनायकरावांच्या घराची बेल दाबली. चार वेळा बेल दाबल्यावर सुद्धा आतून काहीच उत्तर आलं नाही, हे बघून तिने घरं भोवती चक्कर मारली. कदाचि...
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