Best Children Stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Children Stories in All books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cul...Read More


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  • अमन और चमन

    बाल कहानी - अमन और चमनशरारती अमनअमन और चमन दो बहुत अच्छे दोस्त थे। चमन थोड़ा शान...

  • अनोखी सभा

    1. अनोखी सभा आधी रात का समय था। एकदम शान्त सा वातावरण लग रहा था, लेकिन कुछ आवाजे...

  • Kabir's Cleverness

    “Kabir's Cleverness” -Anand Vishvas For a long time, Kabir and his mother had be...

लोमड़ी और मुर्गी By DINESH KUMAR KEER

बाल कहानी :- लोमड़ी और मुर्गीएक बार एक जंगल में एक मुर्गी और लोमड़ी कहीं बाहर भोजन की तलाश में जा रही थीं। उन दोनों में गहरी दोस्ती थी। मुर्गी पेड़ पर चढ़ जाती और जैसे ही उसे लोमड़...

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एक - दूसरे का सहयोग By DINESH KUMAR KEER

किसानबहुत दिनों की बात है । एक गाँव में एक किसान रहता था । उसका स्वभाव बहुत अच्छा था । वह सबकी मदद करता था । किसान के पास एक गाय थी । किसान को गाय बहुत प्रिय थी । खेती का काम करने...

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अमन और चमन By DINESH KUMAR KEER

बाल कहानी - अमन और चमनशरारती अमनअमन और चमन दो बहुत अच्छे दोस्त थे। चमन थोड़ा शान्त और सरल स्वभाव का था, पर अमन को कभी - कभी शरारत सूझती। वह किसी को भी अटपटे से झूठ बोलकर डरा देता औ...

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वापरातील म्हणी व त्यांच्याशी निगडित बोधकथा - भाग 1 By Balkrishna Rane

वापरातील म्हणी व त्यांच्याशी निगडित बोधकथा : भाग 1आजच्या युगात कोण कुणाशी आपल्या फायद्यासाठी कसा संबंध जोडेल ते सांगता येत नाही. अगदी ओढून-ताणून असे नातेसंबंध तयार करतात की, ज्यामु...

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A STORY OF AN UNDEFINED GIRL By JAHNAVI KATTI

Once upon a time there was girl named Jahnavi who had recently came to Banglore during corona time(she was 5th when she came to Banglore). As she had joined other branch of Podar I...

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पर-कटी पाखी - 10. पर-कटी फुर्र. By Anand Vishvas

10. पर-कटी फुर्र. *पर-कटी चिड़िया* से चिरौंटे के मिलने का सिलसिला आज भी बन्द नहीं हुआ था। हाँ, इतना तो जरूर था कि कभी कभार चिरौंटे की जगह *पर-कटी* के बेटा-बेटी आ जाया करते थे। शायद...

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अनोखी सभा By DINESH KUMAR KEER

1. अनोखी सभा आधी रात का समय था। एकदम शान्त सा वातावरण लग रहा था, लेकिन कुछ आवाजें जो नदी तट से आ रही थी, मानों कोई मीटिंग चल रही हो। मैंने बिस्तर से उठकर देखा, वहाँ तो सचमुच मीटिंग...

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दो दोस्त By DINESH KUMAR KEER

दो दोस्त(नीकु और नीशू दोनों दोस्त आपस में वार्तालाप कर रहे हैं)निकु - ये बताओ नीशू दोस्त! आज कई दिनों के बाद हम दोनों दोस्त विद्यालय जा रहे हैं। क्या तुमने गृहकार्य पूरा किया है?नी...

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Kabir's Cleverness By Anand Vishvas

“Kabir's Cleverness” -Anand Vishvas For a long time, Kabir and his mother had been desiring to visit Somnath Temple. But sometimes Kabir’s father's office work and sometimes Kabir’...

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School Picnic By Anand Vishvas

"School Picnic" -Anand Vishvas What can be a better day for children than the day when they do not have to study and get a chance to have fun and travel? Complete Independence Day....

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Shri Kshay Paro By Anand Vishvas

Shri Kshay Paro -Anand Vishvas Kabir and his friends were playing cricket in the society ground. Kabir was batting, due to the strong shot the ball went outside the compound wall....

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Bird Fur By Anand Vishvas

For the past two-four days, there had been a lot of movement of birds in the verandah of Kabir's house. The birds come with straws, put them on top and then go away again to collec...

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ಪ್ರವೀಣ ಹೇಗೆ ಆದ ಜಾಣ By Vaman Acharya

ಪ್ರವೀಣ ಹೇಗೆ ಆದ ಜಾಣ ( ಮಕ್ಕಳ ನೀತಿ ಕಥೆ) ಲೇಖಕ ವಾಮನಾಚಾರ್ಯ ರಾಘವಪುರ್ ನಗರ ದಲ್ಲಿ ಬೆಳಗಿನ ಹತ್ತು ಗಂಟೆ ಸಮಯ. ಅನ್ನಪೂರ್ಣ ಮಾಧ್ಯಮಿಕ ಶಾಲೆ ಏಳನೇ ತರಗತಿಯಲ್ಲಿ ಅರ್ಧ ಗಂಟೆ ಮೊದಲು ಇದ್ದ ಲವಲವಿಕೆ ಒಮ್ಮಿ0 ದೊಮ್ಮೆಲೆ...

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I hate you, Papa! By Anand Vishvas

The Ashram of Saint Shri Shivanand ji is situated at some distance from Kabir's house. Abode of divine supernatural power. Quiet, beautiful and pleasant place. Where the Ganga of m...

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Mobile Phone By Anand Vishvas

“Mom, I just want a mobile phone, that's all. Now I don't want to hear anything else. Now this is too much, mother. You are informed mother, all my friends have very good, super, i...

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Two samosas for one anna By Anand Vishvas

Two samosas for one anna -Anand Vishvas It is about those days when two samosas were available for one anna and sixteen kg of jaggery was available for one rupee. It was the time o...

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History Of Comic Books By Utopian Mirror

Blame the comic book. Cheap and transportable, a trove of infantile fantasy and psychosexual Pop Art, often spiced with egregious stereotypes and nativist aggression, this humble m...

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विद्यालय By DINESH KUMAR KEER

तालियाँ - बाल कहानीइस समय विद्यालय में गणतन्त्र दिवस समारोह के लिए सभी बच्चे और शिक्षक बड़े जोर - शोर से तैयारी में लगे थे । घर जाकर सभी अपने - अपने रोल का रिहर्सल करते थे । कोई बच...

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हैलो मिस मैगी By Kusum Agarwal

हैलो मिस मैगी!“रीना क्या तुमने मिस मैगी को देखा है?” कक्षा में आते ही यामा ने प्रश्न किया।“होगी यहीं कहीं या किसी गैस पर पड़ी उबल रही होगी।” यामा ने हँसते हुए कहा और अपना स्कूल बैग...

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पेड़ पौधे By DINESH KUMAR KEER

पेड़ पौधेएक बार दीपक नाम का लड़का किसी जंगल में गायों को चराने के लिए गाँव के अन्य लोगों के साथ गया। उस समय उसके माता-पिता कहीं बाहर गये थे। घर पर बूढ़े दादा-दादी ही थे, इसलिए गायो...

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बहुत जरूरी By DINESH KUMAR KEER

बहुत जरूरीआज खुशी के परिवार में बेहद ही खुशी का माहौल था। उसकी माँ तो फूले न समा रही थी। वह विद्यालय आकर सभी शिक्षकों से मिलकर उनके द्वारा किये गए सहयोग के लिए नतमस्तक हो आभार व्यक...

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मज़े से होली खेलेंगे By Kusum Agarwal

मजे से होली खेलेंगेजब से इरा आई थी, टीना के पांव जमीन पर नहीं पड़ते थे। वह पूरे दिन इरा के हाथों में हाथ डाले इधर से उधर घूमती रहती थी। नए-नए खेल खेलती थी। तरह-तरह की बातें करती थी।...

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झूठी प्रशंसा By DINESH KUMAR KEER

1. झूठी प्रशंसा : -एक बार की बात है । एक महिला के घर पर कुछ मेहमान आने वाले थे । वह महिला बहुत दिखावा करती थी । उस दिन वह बहुत उत्सुकतावश चहलकदमी करती जा रही थी । उसको सबसे प्रशंसा...

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जिज्ञासा By DINESH KUMAR KEER

1. जिज्ञासा -"मांँ! आज क्या मैं स्कूल नही जाऊंँ?""क्या हुआ तृप्ति बिटिया, तबियत तो ठीक है? देखूँ, कहीं बुखार तो नहीं है! अरे! तुम्हें बुखार भी तो नहीं है फिर दिक्कत क्या है? आखिर त...

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रेशम की डोरी से बंधा यह अनमोल बंधन .... By Purnima Kaushik

कभी खट्टा तो कभी मीठा, कभी प्यार तो कभी झगड़ा, कभी एक दूसरे के लिए बेशुमार प्यार और चिंता तो कभी एक दूसरे से अपने खेल खिलौनों और पसंदीदा खाने के लिए लड़ जाना, कभी एक दूसरे के लिए ब...

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जंगल की पाठशाला By DINESH KUMAR KEER

1.जंगल की पाठशाला -एक दिन शेर सिंह अपने जंगल में घूमने निकले। घूमते - घामते एक पेड़ पर टंगी एक तख्ती देखी। रुक गए। जोर से दहाड़ा। उनकी दहाड़ सुन चुन्नू चूहा अपने बिल से निकला। शेर सिं...

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Sword of Knight The Return of Gandar's Sword - Chapter 1 By Cb Servano

THE BATTLE OF EASTERLAND AND NORTHERNLANDThe land in the Easterland is dark, and its purpose is to spread darkness to the neighboring kingdoms. The great war initiated by Mundoghor...

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बालवीर - भाग 2 By Ankush Shingade

बालवीर भाग दोन फतेहसिंह व जोरावर सिंह........ते वीरच होते. त्यांचा जन्म वीरगतीच प्राप्त करण्यासाठी जणू झाला होता असं म्हटल्यास आतिशयोक्ती होणार नाही. अगदी अल्प अल्प वयातच चारही भाऊ...

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तोता और मैना By DINESH KUMAR KEER

तोता और मैना की कहानीएक बार की बात है । एक जंगल में बड़े से पीपल के पेड़ पर एक तोता और मैना ने अपना बसेरा बना रखा था । हाल ही में बारिश का मौसम खत्म हो चुका था । कई जगह - जगह रास्त...

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कहां गए वो बचपन के दिन..... By Purnima Kaushik

वो हसीं ठिठोली के दिन, वो खेलने कूदने के दिन, वो मस्ती भरे हुए दिन न जाने कहां खो गए। जब व्यर्थ की कोई चिंता नहीं थी, जब हमेशा सपनों के ऊंचे ऊंचे महल बनाए जाते थे। जब किसी भी समस्य...

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युवराज आदित्य व पांढरा पक्षी By Balkrishna Rane

युवराज आदित्य व पांढरा पक्षी पहाट कधीच उलटून गेली होती. चांदीच्या रत्नजडीत पलंगावर राजकुमार आदित्य निवांत झोपले होते. बाजूलाच एक दासी मोरपंखांच्या पंख्याने वारा घालत मंचकावर बसली ह...

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ईमानदार खरगोश By DINESH KUMAR KEER

ईमानदार खरगोशएक समय की बात है, खरगोश नौकरी की तलाश में था। उसने फैसला कर लिया कि वह मेहनत की कमाई ही खायेगा, पर नौकरी मिलना आसान काम नहीं था। वह इधर - उधर भटकता रहा लेकिन उसे कहीं...

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Adventures Of Ojas Patel By Roma Rawat

Once upon a time, in a quaint Indian village nestled amidst lush greenery and vibrant fields, lived a curious and spirited young girl named Meera. The village, surrounded by rollin...

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प्यासा कौआ By DINESH KUMAR KEER

प्यासा कौआएक बार की बात है किसी जंगल में एक कौआ रहता था। एक दिन उसे बड़ी जोर से प्यास लगी । वह पानी की तलाश में वह बहुत दूर तक उड़ता रहा, परन्तु कहीं भी उसे पानी नहीं मिला। जब वह ब...

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A Jolly Days With Boys By Vaman Acharya

A Jolly Day With Boys (A Humorous Short story) By Vaman AcharyaIt was on Sunday at eleven am, the boys were playing hide & seek game in Hanuman street, Raghavpur town. Among them R...

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मज़ेदार पहाड़े By DINESH KUMAR KEER

मज़ेदार पहाड़े 01 नेकीएक एकम एक, नेक बनो भई नेक।एक दूनी दो, न बुरा कहो - न सुनो।।एक तिया तीन, परोपकार में हो लीन।एक चौक चार, अच्छा रखो व्यवहार ।।एक पंजे पाँच, अच्छाई को नहीं आँच ।ए...

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बाल गीत By DINESH KUMAR KEER

बाल गीत1. घोड़ा... तांगे में भी ये है लगता। और लड़ाई में है लड़ता।। बहादुर भी है इस पर चढ़ता। सरपट दौड़े कभी न अड़ता।। सर्कस में ये खेल दिखाता। घास चने खुश होकर खाता।।2. तोता... हर...

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પપ્પનજી By SHAMIM MERCHANT

તક્ષશિલા કો ઓપરેટિવ હાઉસિંગ સોસાયટીના કિશોરો બિલ્ડીંગની પાછળના કમ્પાઉન્ડમાં મળીને ઉત્સાહપૂર્વક કંઈક બનાવવામાં વ્યસ્ત હતા. આઠ વર્ષનો કાર્તિક દૂર ઉભો રહીને તેઓની ક્રિયા સમજવાનો પ્રયા...

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उंबर - उगवता झरा By Sheetal Jadhav

अंबिकावाडीत सुशीलाबाई राहत होती. त्या गावातील शाळेत ती शिक्षिका होती. तिचा मुलगा शशांक खुप हुशार होता. त्याला शेतात जायला खुप आवडायचे. तो दुपारी शाळा सुटल्यावर शेतात एक चक्कर मारून...

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लोमड़ी और मुर्गी By DINESH KUMAR KEER

बाल कहानी :- लोमड़ी और मुर्गीएक बार एक जंगल में एक मुर्गी और लोमड़ी कहीं बाहर भोजन की तलाश में जा रही थीं। उन दोनों में गहरी दोस्ती थी। मुर्गी पेड़ पर चढ़ जाती और जैसे ही उसे लोमड़...

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एक - दूसरे का सहयोग By DINESH KUMAR KEER

किसानबहुत दिनों की बात है । एक गाँव में एक किसान रहता था । उसका स्वभाव बहुत अच्छा था । वह सबकी मदद करता था । किसान के पास एक गाय थी । किसान को गाय बहुत प्रिय थी । खेती का काम करने...

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अमन और चमन By DINESH KUMAR KEER

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पर-कटी पाखी - 10. पर-कटी फुर्र. By Anand Vishvas

10. पर-कटी फुर्र. *पर-कटी चिड़िया* से चिरौंटे के मिलने का सिलसिला आज भी बन्द नहीं हुआ था। हाँ, इतना तो जरूर था कि कभी कभार चिरौंटे की जगह *पर-कटी* के बेटा-बेटी आ जाया करते थे। शायद...

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अनोखी सभा By DINESH KUMAR KEER

1. अनोखी सभा आधी रात का समय था। एकदम शान्त सा वातावरण लग रहा था, लेकिन कुछ आवाजें जो नदी तट से आ रही थी, मानों कोई मीटिंग चल रही हो। मैंने बिस्तर से उठकर देखा, वहाँ तो सचमुच मीटिंग...

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दो दोस्त By DINESH KUMAR KEER

दो दोस्त(नीकु और नीशू दोनों दोस्त आपस में वार्तालाप कर रहे हैं)निकु - ये बताओ नीशू दोस्त! आज कई दिनों के बाद हम दोनों दोस्त विद्यालय जा रहे हैं। क्या तुमने गृहकार्य पूरा किया है?नी...

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“Mom, I just want a mobile phone, that's all. Now I don't want to hear anything else. Now this is too much, mother. You are informed mother, all my friends have very good, super, i...

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Two samosas for one anna By Anand Vishvas

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विद्यालय By DINESH KUMAR KEER

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हैलो मिस मैगी!“रीना क्या तुमने मिस मैगी को देखा है?” कक्षा में आते ही यामा ने प्रश्न किया।“होगी यहीं कहीं या किसी गैस पर पड़ी उबल रही होगी।” यामा ने हँसते हुए कहा और अपना स्कूल बैग...

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पेड़ पौधे By DINESH KUMAR KEER

पेड़ पौधेएक बार दीपक नाम का लड़का किसी जंगल में गायों को चराने के लिए गाँव के अन्य लोगों के साथ गया। उस समय उसके माता-पिता कहीं बाहर गये थे। घर पर बूढ़े दादा-दादी ही थे, इसलिए गायो...

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बहुत जरूरी By DINESH KUMAR KEER

बहुत जरूरीआज खुशी के परिवार में बेहद ही खुशी का माहौल था। उसकी माँ तो फूले न समा रही थी। वह विद्यालय आकर सभी शिक्षकों से मिलकर उनके द्वारा किये गए सहयोग के लिए नतमस्तक हो आभार व्यक...

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मजे से होली खेलेंगेजब से इरा आई थी, टीना के पांव जमीन पर नहीं पड़ते थे। वह पूरे दिन इरा के हाथों में हाथ डाले इधर से उधर घूमती रहती थी। नए-नए खेल खेलती थी। तरह-तरह की बातें करती थी।...

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झूठी प्रशंसा By DINESH KUMAR KEER

1. झूठी प्रशंसा : -एक बार की बात है । एक महिला के घर पर कुछ मेहमान आने वाले थे । वह महिला बहुत दिखावा करती थी । उस दिन वह बहुत उत्सुकतावश चहलकदमी करती जा रही थी । उसको सबसे प्रशंसा...

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जंगल की पाठशाला By DINESH KUMAR KEER

1.जंगल की पाठशाला -एक दिन शेर सिंह अपने जंगल में घूमने निकले। घूमते - घामते एक पेड़ पर टंगी एक तख्ती देखी। रुक गए। जोर से दहाड़ा। उनकी दहाड़ सुन चुन्नू चूहा अपने बिल से निकला। शेर सिं...

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बालवीर - भाग 2 By Ankush Shingade

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तोता और मैना By DINESH KUMAR KEER

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वो हसीं ठिठोली के दिन, वो खेलने कूदने के दिन, वो मस्ती भरे हुए दिन न जाने कहां खो गए। जब व्यर्थ की कोई चिंता नहीं थी, जब हमेशा सपनों के ऊंचे ऊंचे महल बनाए जाते थे। जब किसी भी समस्य...

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ईमानदार खरगोश By DINESH KUMAR KEER

ईमानदार खरगोशएक समय की बात है, खरगोश नौकरी की तलाश में था। उसने फैसला कर लिया कि वह मेहनत की कमाई ही खायेगा, पर नौकरी मिलना आसान काम नहीं था। वह इधर - उधर भटकता रहा लेकिन उसे कहीं...

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प्यासा कौआ By DINESH KUMAR KEER

प्यासा कौआएक बार की बात है किसी जंगल में एक कौआ रहता था। एक दिन उसे बड़ी जोर से प्यास लगी । वह पानी की तलाश में वह बहुत दूर तक उड़ता रहा, परन्तु कहीं भी उसे पानी नहीं मिला। जब वह ब...

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मज़ेदार पहाड़े By DINESH KUMAR KEER

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बाल गीत By DINESH KUMAR KEER

बाल गीत1. घोड़ा... तांगे में भी ये है लगता। और लड़ाई में है लड़ता।। बहादुर भी है इस पर चढ़ता। सरपट दौड़े कभी न अड़ता।। सर्कस में ये खेल दिखाता। घास चने खुश होकर खाता।।2. तोता... हर...

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પપ્પનજી By SHAMIM MERCHANT

તક્ષશિલા કો ઓપરેટિવ હાઉસિંગ સોસાયટીના કિશોરો બિલ્ડીંગની પાછળના કમ્પાઉન્ડમાં મળીને ઉત્સાહપૂર્વક કંઈક બનાવવામાં વ્યસ્ત હતા. આઠ વર્ષનો કાર્તિક દૂર ઉભો રહીને તેઓની ક્રિયા સમજવાનો પ્રયા...

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उंबर - उगवता झरा By Sheetal Jadhav

अंबिकावाडीत सुशीलाबाई राहत होती. त्या गावातील शाळेत ती शिक्षिका होती. तिचा मुलगा शशांक खुप हुशार होता. त्याला शेतात जायला खुप आवडायचे. तो दुपारी शाळा सुटल्यावर शेतात एक चक्कर मारून...

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