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सामने खुली किताब के खुले पन्ने को पलटते हुए स्वस्ति अनायास ही रुक गई! उसने एक पल ठहरकर पढ़ना शुरू किया! “प्रेम के अलावा प्रेम की कोई और इच्छा नहीं होती। पर अगर तुम प्रेम करो और तुमसे इच्छा किये ...Read More

अरे, मूवी शुरू होने में थोड़ी सी देर है और अभी तक तुम यहाँ बैठी हो। चलो भी, मूवी शुरू हो जाएगी, जानेमन!!! कार्तिक ने एकाएक पीछे से आकर उसे बाँहों में भरते हुए ज़ोर से हिला दिया। अपने ही ...Read More

इन दिनों एक कोर्स के सिलसिले में स्वस्ति को कुछ किताबों के लिए रोज मंडी हाउस जाना पड़ रहा था! उस लगता है, वहां से लौटते हुए मेट्रो से अधिक सुविधाजनक कोई और वाहन हो ही नहीं सकता! मंडी ...Read More

रात भर बतियाई थीं दोनों! माँ जानती हैं किसी को आज सुबह जागने की जल्दी नहीं! उन्होंने कमला से धीरे काम करने को कहा ताकि उन बातूनी सहेलियों की नींद में कोई खलल न पड़े! सुबह माँ को एक ...Read More

“उसे आईलाइनर पसंद था, मुझे काजल। वो फ्रेंच टोस्ट और कॉफी पे मरती थी, और मैं अदरक की चाय पे। उसे नाइट क्लब पसंद थे, मुझे रात की शांत सड़कें। शांत लोग मरे हुए लगते थे उसे, मुझे शांत रहकर उसे सुनना ...Read More

ये मन का मौसम है न कब बदल जाये क्या कहिये। फिर हर दिन एक सा नहीं होता। एक बार मन पर उदासी का कोहरा छाया नहीं कि संभलते-संभलते वक्त लग ही जाता है। बहुत मूडी हो गई है ...Read More

बहुत मुश्किल थे वे दिन भी। इतने संघर्षमय जीवन में कहीं कोई अपना नहीं। तब बहुत अकेली थी दोनों माँ बेटी और उनका दिल्ली जैसे महानगर में बस जाना भी इतना आसान कहाँ था। पुरुष प्रधान समाज में स्त्री ...Read More

ये प्रेम शब्द ही ऐसा है। विचित्र सी मिठास से भरा एक शब्द और कैसी है ये मिठास, क्या इसे कभी कोई परिभाषित कर पाया है। दरअसल ये तो गूंगे का गुड़ है जो मुंह में घुलकर आत्मा तक ...Read More

उस रात फिर से स्वस्ति के सपने में वह समय रेखा थी! मतलब समयरेखा पर अलग-अलग अंकों पर खड़े वे और शेखर! दोनों के बीच के फासले में छाए थे वे अंक जो उन दोनों के बीच के उम्र ...Read More

आज सुबह जल्दी आँख खुल गई तो स्वस्ति ने कुछ पेंडिंग काम निपटाने का प्लान किया! सबसे पहले इमेल्स निपटाई, फिर मेसेजेज पढ़े कुछ देर और फिर उसने अपने कॉलम के लिए लेख लिखना शुरू किया! जाने क्यों आज ...Read More

रेस्टोरेंट से वे दोनों सीधे शेखर के फ्लैट पर चले गए। शेखर जल्दी ही विदेश चले जाएँगे यह ख्याल स्वस्ति अपने मन से निकाल नहीं पा रही है। इससे पहले भी वे देश विदेश की यात्राओं पर जाते रहे ...Read More

ये रोशेल थी फोन पर! हम्म...तो इतने दिनों बाद आखिर फुरसत मिल ही गई मैडम को...स्वस्ति सोच रही थी! लम्बी बात हुई दोनों की! बहुत दिनों बाद! दोनों ही के पास एक दूसरे को बताने के लिए बहुत कुछ ...Read More

आज तेज धूप खिली है! लग रहा है जैसे ये धूप अपने साथ अवसाद के अँधेरे कोनों की कालिमा को कहीं दूर ले जाएगी! कॉलेज की छुट्टी है। स्वस्ति और माँ दोनों आज घर पर हैं! स्वस्ति ने तय ...Read More

अँधेरे की काली चादर को हौले से सरकाकर सूरज ने पहली किरण को एक इशारा किया और उसने आहिस्ता से धरती की सतह की ओर बढ़ना शुरू किया! इधर उषा ने आँखें खोली और उधर पक्षियों ने अपने पंख ...Read More

ये बुखार कई दिन चला। कभी चढ़ जाता तो कभी दवा के असर से उतर जाता है। एक दिन भी ऐसा नहीं रहा जब दोनों वक्त बुखार न चढ़ा हो! दवा बराबर चलती रही! डॉक्टर घोष ने बताया था ...Read More