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ऑफ़िस - ऑफ़िस By R.KapOOr

सूचना - ये एक काल्पनिक कहानी है और इसका जीवित यां मृत किसी व्यक्ति से कोई लेनादेना नहीं है। अगर ऐसा हुआ है तो ये महज़ एक संयोग है। इस कहानी को केवल पाठकों के मनोरंजन हेतु लिखा गया ह...

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જટાશંકર જટાયુ યક્ષ સાથે ભેટો By Om Guru

'માનનીય મુરબ્બી શ્રી જટાશંકરજી ઊભા થાઓ. આ ધરતીલોક ઉપર આપનો સમય પૂર્ણ થઇ ગયો છે.' ગેબી અવાજ સાંભળી જટાશંકરે આંખો લૂછતાં-લૂછતાં જોયું એક કાળા વસ્ત્રમાં સજ્જ પડછંદ દેખાતી વ્યક...

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लौट के बुद्धू घर को आये By Kishanlal Sharma

नाम सुनते ही आप सोचने लगेे होंगे । केसरिया वस्त्र , बड़ी बड़ी जटा, हाथ मे कमंडल और चिमटा या किसी नंग धड़ंग शरीर पर भभूत लगाए या किसी इसी तरह के बाबा के बारे में आपको बताने जा र...

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कवी असह्य. By टाकबोरू

कवी असह्य व माझा संबंध तसा जुनाच. ऋणानुबंध प्रकारात मोडतील असे आमचे संबंध मुळीच नाहीत. आज मात्र अचानकच कवी असह्यांच्या ओघवत्या वाणीतून आमच्या नात्यातील प्रेम, प्लास्टिकच्या पिशवीने...

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कहानी भोला की By राज कुमार कांदु

भोला सत्रह साल का एक ग्रामीण युवक था । अपने नाम के अनुरूप ही सीधा सादा और भोला या यूँ भी कह सकते हैं नाम से भी ज्यादा भोला ।
उसके पिताजी बचपन में ही गुजर गए थे । शोषित जाति का होन...

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कहानी सब्जीपुर की By राज कुमार कांदु

सब्जीपुर के युवराज ‘ आलू चंद ‘ की विवाह योग्य उम्र होते ही राज्य के सभी मंत्री , दरबारी उनके लिए सुयोग्य नायिका की खोज में लग गए ।सब्जी पुर की कई यौवनाएँ मन ही मन आलूचन्द के सपने...

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ગુજરાતી કહેવતો અને તેનો અર્થ-ગમ્મત સાથે By Yuvrajsinh jadeja

મિત્રો હું એક એન્જિનિયરિંગ સ્ટુડન્ટ છું અને જેવું વાતાવરણ હું જોંઉ છું એ પ્રમાણે આપણા રોજીંદા સંવાદો માંથી કહેવતો નો વપરાશ ઘણો ઘટી ગયો છે . અને આજની નવી જનરેશન ને તો આ કહેવતો વીશે...

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चोलबे ना By Rajeev Upadhyay

चच्चा खीस से एकमुस्त लाल-पीला हो भुनभुनाए जा रहे थे मगर बोल कुछ भी नहीं रहे थे। मतलब एकदम चुप्प! बहुत देर तक उनका भ्रमर गान सुनने के बाद जब मेरे अन्दर का कीड़ा कुलबुलाने लगा। अन्त म...

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होम मिनिस्टर By preeti sawant dalvi

दार उघड बये दार उघड!!'

"शमी, तो टीव्हीचा आवाज कमी कर आधी.", अरुण पेपर वाचता वाचता ओरडत म्हणाला.

"काय त्या आदेश बांदेकरने बायकांना पैठणीची स्वप्न दाखविली आहे द...

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लाल स्कूटी वाला By Aakanksha

इस कहानी का मुख्य पात्र अक्षिता नाम की लड़की हैं, वह १२ वीं कक्षा में पढ़ती हैं।इस कहानी का शीर्षक आपको थोड़ा सा अजीब लगा होगा! यह कहानी वैसे तो थोड़ी सी न...

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ऑफ़िस - ऑफ़िस By R.KapOOr

सूचना - ये एक काल्पनिक कहानी है और इसका जीवित यां मृत किसी व्यक्ति से कोई लेनादेना नहीं है। अगर ऐसा हुआ है तो ये महज़ एक संयोग है। इस कहानी को केवल पाठकों के मनोरंजन हेतु लिखा गया ह...

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જટાશંકર જટાયુ યક્ષ સાથે ભેટો By Om Guru

'માનનીય મુરબ્બી શ્રી જટાશંકરજી ઊભા થાઓ. આ ધરતીલોક ઉપર આપનો સમય પૂર્ણ થઇ ગયો છે.' ગેબી અવાજ સાંભળી જટાશંકરે આંખો લૂછતાં-લૂછતાં જોયું એક કાળા વસ્ત્રમાં સજ્જ પડછંદ દેખાતી વ્યક...

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लौट के बुद्धू घर को आये By Kishanlal Sharma

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कवी असह्य. By टाकबोरू

कवी असह्य व माझा संबंध तसा जुनाच. ऋणानुबंध प्रकारात मोडतील असे आमचे संबंध मुळीच नाहीत. आज मात्र अचानकच कवी असह्यांच्या ओघवत्या वाणीतून आमच्या नात्यातील प्रेम, प्लास्टिकच्या पिशवीने...

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भोला सत्रह साल का एक ग्रामीण युवक था । अपने नाम के अनुरूप ही सीधा सादा और भोला या यूँ भी कह सकते हैं नाम से भी ज्यादा भोला ।
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चोलबे ना By Rajeev Upadhyay

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लाल स्कूटी वाला By Aakanksha

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