मध्य प्रदेश के रायसेन जिला में अवस्थित भीमबैठका शैलाश्रय (Bhimbetka Rock Shelters) भोपाल से लगभग 45 किमी दूर विंध्य पर्वत माला के दक्षिण में अवस्थित है। यह स्थान बलुआ पत्थर के चट्टानों, प्राकृतिक गुफाओं और शैलाश्रयों के लिए प्रसिद्ध है। यहां पाषाण युग में मानव के निवास और उनके द्वारा बनाए गए शैल चित्र मौजूद हैं। इन शैल चित्रों में शिकार के भिन्न-भिन्न दृश्य, नृत्य करते युवक युवती, उत्सव मनाने, पशुओं जैसे हाथी, घोड़ा, भैंस, बकरी आदि के साथ साथ युद्ध के दृश्य एवं विभिन्न सामाजिक कार्यकलापों के चित्र देख उस समय के मानव जीवन का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।
चलो दूर कहीं..! - 1
चलो दूर कहीं...मध्य प्रदेश के रायसेन जिला में अवस्थित भीमबैठका शैलाश्रय (Bhimbetka Rock Shelters) भोपाल से लगभग 45 किमी विंध्य पर्वत माला के दक्षिण में अवस्थित है। यह स्थान बलुआ पत्थर के चट्टानों, प्राकृतिक गुफाओं और शैलाश्रयों के लिए प्रसिद्ध है। यहां पाषाण युग में मानव के निवास और उनके द्वारा बनाए गए शैल चित्र मौजूद हैं। इन शैल चित्रों में शिकार के भिन्न-भिन्न दृश्य, नृत्य करते युवक युवती, उत्सव मनाने, पशुओं जैसे हाथी, घोड़ा, भैंस, बकरी आदि के साथ साथ युद्ध के दृश्य एवं विभिन्न सामाजिक कार्यकलापों के चित्र देख उस समय के मानव जीवन का सहज अनुमान ...Read More
चलो दूर कहीं..! - 2
चलो दूर कहीं.. 2प्रतीक्षा के खाई में गिरने से वहां चीख पुकार मचा था जिसे सुनकर और पर्यटक वहां हो गए थे। रोहन का रो रो कर बुरा हाल था.. ऐसा लगता था वह खाई में छलांग लगा देगा.. शिवा और अविनाश उसे संभाले हुए थे। शिखा और सारा भी रो रही थी, शिखा ने रोहन के आंखों में आंखें डाल कर कहा, " जो होना था वो तो हो चुका.. ये रोने धोने से कुछ नहीं होगा..? अब भी उम्मीद बाकी है..इसलिए सबसे पहले पुलिस को फोन करो शायद पुलिस प्रतीक्षा को ढूंढने में मदद करें ..?""तुम सही ...Read More
चलो दूर कहीं..! - 3
चलो दूर कहीं... 3प्रतीक्षा को खाई में गिरे 36 घंटे से ज्यादा का वक्त बीत गया था और सभी जिंदा होने पर संशय व्यक्त कर रहे थे लेकिन कमलनाथ ये मानने को तैयार ही नहीं थे । ये सच था कि उनपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था और इस दुख के घड़ी में उनपर क्या बीत रही होगी इसका सहज अनुमान लगाया जा सकता है।तीसरे दिन भी एसडीआरएफ के द्वारा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया लेकिन नतीजा सिफर रहा...न प्रतीक्षा मिली और न ही उसकी लाश। थक-हारकर कर रेस्क्यू ऑपरेशन को बंद कर दिया गया। अपने करीबी दोस्त के ...Read More
चलो दूर कहीं..! - 4
चलो दूर कहीं... 4एक पल के लिए प्रतीक्षा को उस विचित्र जीव को देखकर ऐसा लगा मानो वह कोई हो..न कभी उसका किसी दैत्य से सामना हुआ था और न ही इस प्रकार के किसी जीव की स्मृति थी, फिर भी वह अपने अवचेतन के स्मृति से अनुमान कर रही थी । उसके माथे से निकलते तेज नारंगी रोशनी के कारण उसका आंख चौंधिया रहा था जिससे वह उसका चेहरा साफ साफ देख नहीं पा रही थी। लेकिन उसका डील डौल बड़ा अजीब था...लंबे लंबे ऊंट जैसे पीछे के पैर थे, और जानवर के जैसे आगे के दो पैर ...Read More
चलो दूर कहीं..! - 5
चलो दूर कहीं... 5उस प्राणी पर ही प्रतीक्षा का अस्तित्व टिका था,वही इस अंधेरे गुफा से निकलने का एक सहारा था और उसके एकाएक गायब हो जाने से वह व्याकुल थी, उसने पुरे गुफा को टटोल डाला..चिल्ला चिल्ला कर गला बैठा ली लेकिन कोई फायदा न हुआ..शायद वो यहां था ही नहीं और था भी तो जानबूझकर प्रतीक्षा से छुप रहा था.. वह इस निशब्द सन्नाटे में जरा सी आहट पाती तो उस दिशा में भागती और बैचैन नजरों से इधर उधर देखती.. जब काफी प्रयास के बाद भी वह नहीं मिला तो मायुस होकर वह घुटनों में अपने ...Read More
चलो दूर कहीं..! - 6
चलो दूर कहीं... 6"कौन प्रतीक्षा..कौन अनाह..?न मैं किसी प्रतीक्षा को जानती हूं और न ही किसी अनाह को .. वैसे भी तुम जो कोई भी हो सामने आओ..!" उसके गूंजते आवाज से इधर उधर देखते हुए प्रतीक्षा ने कहा तो वह बोला,"मैं तुम्हारे सामने खड़ा हूं..!""यानी कि तुम अनाह हो .. अरे वाह तुम बोल सकते हो.. वो भी हिंदी में..! और ये प्रतीक्षा कौन है?"ये मुझे नहीं पता कि मैं क्या बोल रहा हूं और कौन सी भाषा में बोल रहा हूं...मैंने तुम्हारे ब्रेन को हाइजेक कर लिया है.. अब तुम्हारा ब्रेन जो सोचता है, करना चाहता है.. ...Read More
चलो दूर कहीं..! - 7
चलो दूर कहीं... 7अपनत्व और सुख दुख का साथ ही प्यार का आधार है.. और कोई निस्वार्थ भाव से की सहायता करता है तो उसका दिल उस व्यक्ति के प्रति ऋणी हो जाता है। प्रतीक्षा का भी हाल कुछ ऐसा ही था अनाह के लिए उसके दिल में अथाह प्यार उमड़ रहा था, उसे पता था कि उस अंधेरे गुफा से अनाह ने ही उसे निकाल कर यहां लाया है.. लेकिन वो मुझे यहां छोड़कर कहां चला गया...? ये अनाह भी न एक अबूझ पहेली है..? वह अनाह के बारे में सोचते सोचते इधर-उधर देखते हुए उस जंगल के ...Read More
चलो दूर कहीं..! - 8
चलो दूर कहीं... 8उस युवक ने प्रतीक्षा के पांव देखे खुबसूरत पांव लहुलुहान था.. कीचड़ से सने पांव के से खून रिस रहा था। उसके पांव की स्थिति को देखकर वह उस दर्द का अनुभव कर रहा था जो इसने झेली थी.. उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि इतनी खूबसूरत लड़की यहां कैसे आई.. जरुर इसके साथ कुछ हुआ है जिसके कारण ये जान बचाकर यहां भाग आई है..! अगर घाव में ऐसे ही धुल मिट्टी पड़ा रहा तो संक्रमण फैल सकता है..? मुझे इसकी मदद करनी चाहिए..! सोच कर वह झोपड़ी के पीछे बने रसोई में ...Read More
चलो दूर कहीं..! - 9
चलो दूर कहीं... 9रवि इस हसीना को देखकर पहले ही अपना होशोहवास खो बैठा था, अबतक इतनी खूबसूरत लड़की उसे पाला न पड़ा था, उसके छुवन से उठती उसकी सिसकारी जैसे आग में घी डालने का काम कर रही थी..वह अपने भावनाओं को किसी तरह काबू किए था और उसकी हरकत से वह सकते में था, उसने सोचा न था कि वो अचानक इस तरह उससे लिपट जाएगी... हालांकि यह मिलन उसके लिए बहुत सुखद अनुभव था, उसके दिल में गुदगुदी हो रही थी,दिल की धड़कनें बढ़ गई थी..! जैसे जैसे उसके गर्म सांसों का एहसास बढ़ता जा रहा ...Read More
चलो दूर कहीं..! - 10
चलो दूर कहीं... 10रवि के अप्रत्याशित व्यवहार से प्रतीक्षा सकते में थी, उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था अचानक से इसे क्या हो गया.. थोड़ी देर पहले तक एकदम ठीक ठाक था फिर ऐसी क्या बात हुई कि ये अनाप-शनाप बक रहा है। रवि मुंह लटकाए बैठा था और प्रतीक्षा भी चूल्हे के पास बैठी उसे घूर रही थी। चूल्हे का लकड़ी बुझ चुका था और उससे निकलता धुंआ बरामदे में फ़ैल गया था। धुंए से जब आंखों में जलन महसूस हुई तब प्रतीक्षा को चूल्हा बुझने का ध्यान आया और उसने पास पड़े माचीस की एक तीली ...Read More
चलो दूर कहीं..! - 11
चलो दूर कहीं... 11प्रतीक्षा ने 'अनाह' जोर से चिल्लाई और उठकर उस आकृति के पीछे दौड़ी तो रवि ने प्रतीक्षा अभी तुम्हारे पैर के घाव हरे है..!"लेकिन उसे इसकी सुध कहां थी, पलक झपकते ही वह झोपड़ी के बाहर थी और आंखें फाड़कर इधर उधर देख रही थी पर अनाह क्या उसकी परछाई भी नजर नहीं आ रही थी..! रवि भी उसके पीछे था, उसे हैरत से इधर उधर देखते देख उसने पूछा, "क्या हुआ किसे ढूंढ रही हो..? और ये अनाह कौन है..?""दोस्त हैं मेरा.. मुझे लगा वह यहां से गुजरा है.. लेकिन ये मेरा भ्रम था..!""एक तरफ ...Read More
चलो दूर कहीं..! - 12
चलो दूर कहीं... 12पश्चिम क्षितिज पर सुरज, किसी नई नवेली दुल्हन के घूंघट की भांति सरक रहा था.. जिससे में रक्तांबर आभा फैली हुई थी। गोधूलि बेला में जंगल में जैसे अफरातफरी मची हुई थी... पक्षियों के कलरव से वातावरण गुंजायमान हो रहा था और स्वच्छ नीले आसमान में अठखेलियां करते पक्षियों के झुंड की अदभुत तस्वीरें बन और बिगड़ रही थी..उन तस्वीरों को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था कि जैसे किसी कुशल ट्रेनर के देख रेख में एक लय में डुबते सुर्य को सलामी दी जा रही है..! जंगली पशुओं का झुंड आपस में लड़ते झगड़ते धूल ...Read More
चलो दूर कहीं..! - 13
चलो दूर कहीं... 13अनाह के आंखों के संपर्क में जैसे ही रवि की आंखें आई उसे लगा जैसे करंट झटका लगा हो और अगले ही पल उसके ब्रेन पर अनाह का नियंत्रण था..! वह न रवि को जानता था न पहचानता था फिर भी न जाने क्यों उसे उससे जलन हो रही थी...अगर वह प्रतीक्षा को लेकर जल रहा था तब तो ये साबित हो रहा था कि रवि प्रतीक्षा को नहीं चाहता..और रवि इस लड़की के जितना करीब रहे यह उसके लिए उतना ही अच्छा था। फिर भी उसने जानबूझकर खेल खेला और उस लड़की के याद को ...Read More
चलो दूर कहीं..! - 14
चलो दूर कहीं... 14रवि के बेहोश होते ही प्रतीक्षा को लगा जैसे पावर कट हो गया हो.. उसका संपर्क से टूट गया था। उसका हाल जानने के लिए वो व्याकुल थी लेकिन कोई चारा न था। दिन के उजाले में जिस जंगल में सबकुछ जीवंत था.. ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे सारी सृष्टि चलायमान है.. वही रात के अंधियारे में सुषुप्त और शांत था। न किसी जानवर का शोर, न पक्षियों की चहचहाहट.. गिरते झरने का शोर और पत्तों की फड़फड़ाहट... किसी निशाचर की भांति उस निशब्द सन्नाटे को चीरकर किसी पिशाच के अट्टहास का अहसास करा रहा ...Read More
चलो दूर कहीं..! - 15
चलो दूर कहीं... 15सारा और प्रतीक्षा कैंटीन में बैठी रोहन का इंतजार कर रही थी कि अविनाश के साथ और शिवा वहां पहुंचे और अविनाश ने प्रतीक्षा से कहा, " किस खुशी में पार्टी दे रही हो प्रतीक्षा.. कहीं रोहन से ब्रेकअप तो नहीं हो गया..?"ये सुनते ही प्रतीक्षा की सुरत देखने लायक था, उसे महसूस हुआ जैसे अविनाश ने उसके गरीबी का मज़ाक उड़ाया हो.. वह बोली तो कुछ नहीं लेकिन सारा को समझते देर न लगी, उसने अविनाश के पीठ पर एक चपत लगाते हुए बोली, "प्रतीक्षा क्यों पार्टी देगी.. पार्टी तुम दे रहे हो..!""किस खुशी में...?" ...Read More
चलो दूर कहीं..! - 16
चलो दूर कहीं... 16"तेरी मां को टीबी हो गया है बेटा..!" कमलनाथ ने डॉक्टर की पर्ची अपने जेब से कर प्रतीक्षा को थमाते हुए भर्राए स्वर में कहा,"डॉक्टर ने एक्स-रे और कुछ ब्ल्ड टेस्ट जल्द से जल्द कराने के लिए कहा है..!" कहते कहते वह भावुक हो गया और आंखें छलछला आई तो प्रतीक्षा बोली, "इसमें इतना घबराने की कोई बात नहीं है बापू..! अब ये बीमारी लाइलाज नहीं है.. डॉक्टर के दिशा निर्देश अनुसार दवा खाने से ये बीमारी पुरी तरह ठीक हो सकती है..!""ये हमें मालूम है प्रतीक्षा.. लेकिन तू अपनी मां को जानती है.. एक तो ...Read More
चलो दूर कहीं..! - 17
चलो दूर कहीं.. 17प्रतीक्षा घंटों मां के पास बैठी कभी उसका सिर दबाती तो कभी उसका पैर..! मां की देख वह बहुत बैचैन थी..! उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें मां को इस हाल में छोड़ कर जाय या नहीं..? एक सप्ताह के बुखार में ही ऐसा बिछावन पकड़ी है कि जैसे महीनों से बीमार हो..न ठीक से खाती पीती है और न ही चल फिर सकती है..अगर मैं इसे इस हाल में छोड़ कर गई तो यह जीते जी मर जाएगी..नही नहीं..मैं ये पाप नहीं कर सकती..! काफी सोच-विचार करने के बाद उसने रोहन ...Read More
चलो दूर कहीं..! - 18
चलो दूर कहीं.. 18गहराते रात के साथ उस बीहड़ जंगल की भयावहता भी गहराती जा रही थी और प्रतीक्षा इसकी कुछ सुध न थी । उसके मन मस्तिष्क में उसके अपनों का चित्र तैर रहा था और उनसे मिलने के लिए वो व्याकुल थी । उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करें कैसे अनाह के चंगुल से मुक्त हो? कैसे इस बीहड़ जंगल से बाहर निकले ? उसे तो ये भी पता न था कि वो कहां है..?वह रवि के झोंपड़े के सामने विचारों में डुबी गुमसुम बैठी थी। ठंडी हवा के झोंके से उसका ...Read More
चलो दूर कहीं..! - 19
चलो दूर कहीं.. 19सुमी की चुप्पी प्रतीक्षा को खाए जा रहा था, प्रतीक्षा की सिसकियां रात के उस निरव में प्रतिध्वनित होकर ऐसे गूंज रही थी मानो पुरी कायनात सिसक रही हो..। प्रतीक्षा रवि का एक झलक पाने के लिए व्याकुल थी..वह लगातार रोते हुए सुमी से रवि के बारे में पूछ रही थी, लेकिन सुमी की चेतना जैसे निष्ठुर हो गई थी , उसके बातों का उसपर कोई असर नहीं हो रहा था। वह दीवार पर टेक लगाए पथराई आंखों से फूस के छप्पर में बने सुराख को घूर रही थी..जैसे उसकी सारी आशाएं, उमंगें और खुशियां इस ...Read More
चलो दूर कहीं..! - 20
चलो दूर कहीं -20रवि के जमीन पर पड़े शरीर से लिपटकर प्रतीक्षा को रोते देख बुत बनी बैठी सुमी तन बदन में जैसे आग लग गई हो वह उठी और प्रतीक्षा को पकड़ कर खींचते हुए चीखी, " रवि से दूर हट चुड़ैल.. आज तेरे ही कारण इसका ये हाल हुआ है..? मैं तुम्हारी छाया भी इस पर पड़ने नहीं दूंगी.. तू डायन है डायन..तू मेरे रवि को खा गई.. अब तो तेरे कलेजे को ठंडक पहुंच गया होगा..? फिर ये नाटक क्यों कर रही है..?"कहकर वह उसके हाथ को पकड़ कर खींचती रही परन्तु वह टस से मस ...Read More
चलो दूर कहीं..! - 21
चलो दूर कहीं.. 21रात के लगभग ग्यारह बजे थे। भोपाल–दिल्ली हाईवे अंधेरे के विशाल समुद्र में एक चमकती हुई जैसा दिखाई दे रहा था। दूर-दूर तक फैली काली सड़क पर ट्रकों की हेडलाइटें जुगनुओं की कतार की तरह टिमटिमा रही थीं। कहीं-कहीं ढाबों की पीली रोशनी सन्नाटे को चीरती हुई यात्रियों को अपनी ओर बुला रही थी। सड़क के दोनों ओर खेत और पेड़ों की परछाइयाँ अंधेरे में गुम थीं, मानो किसी रहस्य को छिपाए खड़ी हों। हवा में डीजल, मिट्टी और रात की ठंडक का मिला-जुला एहसास था। कभी किसी तेज रफ्तार बस का हॉर्न सन्नाटे को तोड़ ...Read More
चलो दूर कहीं..! - 22
चलो दूर कहीं.. 22अनाह के माथे की लाइट जबतक जलती रही रोहन बुत बना खड़ा रहा.. और जैसे ही बुझी वैसे ही अनाह ने कहा, " क्या हुआ मि. रोहन आप तो मुझे ऐसे घूर रहे हैं जैसे मैं कोई भूत हूं..?""अरे .. नहीं.. नहीं... ऐसी कोई बात नहीं है। दरअसल मुझे ऐसा लगा जैसे मैं यहां हूं ही नहीं..! और तुम पर कैसा शक तुम हमारी प्रतीक्षा के फ्रेंड हो तो मेरे भी फ्रेंड हुए.. अच्छा छोड़ो इन बातों को चलो पहले कुछ खा लेते हैं.. जोरों की भूख लगी है। " कहकर वह अनाह को देखा तो ...Read More
चलो दूर कहीं..! - 23
चलो दूर कहीं.. 23सुबह की औरा ने रोहन के व्याकुल मन को कुछ देर के लिए सुकून पहुंचाया था। के सुनी सड़क पर तेज गति से दौड़ते गाड़ी से ज्यादा स्पीड से उसके मन मस्तिष्क में विचारों की श्रृंखलाएं दौड़ रही थी। दोस्त होने के नाते प्रतीक्षा की सहायता करना उसका फर्ज था लेकिन उसके लिए सिरदर्द के सबब बने हुए थे उसके दोस्त और उसमें भी खासकर अनाह.. उसे न जाने उससे क्यों चिढ़ हो रही थी? अगर इन्हें अपने घर ले गया तो लोग तरह तरह के प्रश्न करेंगे..? क्या करुं कुछ समझ नहीं आता..? प्रतीक्षा से ...Read More