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दोपहर ढल चुकी थी, लेकिन सेंट जेवियर्स कॉलेज के गलियारों में तनाव की एक खामोश परत...
ચાના રસિયાઓ તો ઘણા મળી જાય. પરંતુ કોફી પીતા માણસને ચા પીવી ગમે, એવી વાત ગળે ઊતરે...
પ્રકરણ ૫૭: શ્રાદ્ધ પક્ષનો મંગલ આરંભ, પૂર્વજો પ્રત્યે ઋણસ્વીકાર દૈનિક ચબરાકિયાં:"...
એપિસોડ ૨૩: સંધ્યાના સમયે સુમિત શેઠ પોતાની ખૂબ જ શાનદાર અને મોટી લક્ઝરીયસ ગાડીમાં...
द फोर लूजर्सशैली: अपराध, एक्शन, रोमांस, कॉमेडी, थ्रिलर, इमोशनमेरा नाम प्रीत गावड...
"'ઓપરેશન સાગર મંથન' 'ઓપરેશન સેવન સિસ્ટર્સ' 'ઓપરેશન સાયબર...
Episode-8घोषिताराम विहार का गुप्त तहखाना और कवचअस्पताल की मलबे से भरी फ़र्श से इ...
आपण मोबाईल हातात घेतो आणि काही सेकंदांत आपल्या आवडीच्या बातम्या, व्हिडीओ, जाहिरा...
ध्रुव की ताराभाग - १९लेखिका "अनामिका"ट्रेन के लंबे सफर के बाद जैसे ही ध्रुव और...
डाक्टर अरुण को हँसता हुआ देखकर जयन्त बोला...."डाक्टर साहब! मेरी बहन को भी ऐसे ही...
(काव्य संकलन) वेदराम प्रजापति‘ मनमस्त’ 1. सरस्वती बंदना (मॉं शारदे) मॉं शारदे! मृदु सार दे!!, सबके मनोरथ सार दै!!! झंकृत हो, मृदु वीणा मधुर, मॉं शारदे, वह प्यार दे।। अज्ञान त...
व्यंग्य की तेजधर उच्छंखल समाज की शल्य-क्रिया करने में समर्थ होती है। आज के दूषित वातावरण में यहाँ संवेदना मृत प्रायः हो रही है। केवल व्यंग्य पर ही मेरा विश्वास टिक पा रहा है कि कही...
दिल के दरवाज़े पे साँकल जो लगा रखी थी उसकी झिर्री से कभी ताक़ लिया करती थी वो जो परिंदों की गुटरगूं सुनाई देती थी उसकी आवाजों को ही माप लिया करती थी न जाने गुम सी हो गईं हैं ये...
श्री सुरेश पाण्डे सरस की कृति है। इस संग्रह की अधिकतर रचनायें (कवितायें) जिस धरती पर अंकुरित हुई हैं। उसे हम प्रेम की धरती कह सकते हैं यों भी कविता का विशेष कर ‘गीत’ का जन्म प्रे...
आज मानव संवेदनाओं का यह दौर बड़ा ही भयावह है। इस समय मानव त्राशदी चरम सीमा पर चल रही है। मानवता की गमगीनता चारों तरफ बोल रहीं है जहां मानव चिंतन उस विगत परिवेश को तलासता दिख रहा है,...
नरेन्द्र उत्सुक एक ऐसे व्यक्तित्व का नाम है जिसे जीवन भर अदृश्य सत्ता से साक्षात्कार होता रहा। परमहंस सन्तों की जिन पर अपार कृपा रही। सोमवती 7 सितम्बर 1994 को मैं...
स्वतंत्र सक्सेना की कविता काव्य संग्रह सरल नहीं था यह काम स्वतंत्र कुमार सक्सेना सवित्री सेवा आश्...
कुछ रचनाऐं भाव के प्रवाह मेंं .... सोचने को मजबूर करेंगी । संवाद तब पूर्ण होगा जब पाठक पढ़ेगा और चिंतन करेगा।
"बेनाम शायरी"??? ?? ??? ?? ???क्रूर भी है, निष्ठुर भी है, वो खुदा मेरा मगरुर भी है।"बेनाम" हलक में बैठा वो खुदा मेरा गुरूर भी है।।??? ?? ??? ?? ???कोई लफ्ज...
કોઈ નાનકડું છોકરું ચાલતા શીખે અને જેમ ધીમે - ધીમે ડગલા માંડે એમ મેં પણ કવિતાઓના જગતમાં નાના - નાના ડગલા માંડયા છે.. મારા માટે તો મારી કવિતાઓ જ મારો પ્રેમ છે જેને હું બાથ ભરી ને...
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