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  • स्वामीराया - सदैव पाठीशी

    सकाळची १० ची वेळ अनिरुद्ध ने गाडी थांबवली आणि कौलारू अश्या घराच्या गेट चा दरवाजा...

  • Rebirth of a Bench - 1

    चैप्टर 1: सपने, जूते और मेरा जेंडर क्राइसिससब कुछ कितना अजीब था।मैं वापस स्कूल म...

  • हमसफ़र

    बदन पर किसी ठंडी चीज का एहसास पाकर मेरी तंद्रा टूटी। विचारों के भंवर से बाहर निक...

  • સ્વ ની ખોજ - ભાગ 3

    Discover Yourself: Breaking the Illusion     આપણે દુનિયામાં ખુશીઓ અને સર્ટિફિકેટ...

  • सब्र का फल

    _लेखिका: डॉ वंदना शर्मा_---सब्र का फलएक समय की बात है। बिजनौर जिले के एक गाँव कु...

  • कोकणचे अंतरंग - भाग 2

    कोकणचे अंतरंग भाग २दि.२८/०५/२०२६ गुरूवार सकाळी ९.०० वाजता आम्ही ' सी फॅन &#3...

  • परायें हुए अपने

    " ससुराल का बुलावा "                    दोपहर का समय था , घर की गैलरी में दो चार...

  • श्रापित एक प्रेम कहानी - 84

    आलोक की बात को सुनकर वृन्दा गुस्से से एकांश की और दैखकर कहती है। " कोई जरुरत नही...

  • हमारी विलासिता, बेजुबानों का लहू

    क्या आप जानते हैं कि आपकी थाली में सजा भोजन, वॉर्डरोब में टंगा कीमती लेदर जैकेट...

  • નિલક્રિષ્ના - ભાગ 48

    સમુદ્રકનું મસ્તક શરમ અને પીડાથી ઝૂકી ગયું. તેની આંખોમાં વર્ષોનો અફસોસ તરવરી રહ્ય...

सुरेश पाण्‍डे सरस डबरा का काव्‍य संग्रह By Ramgopal Bhavuk Gwaaliyar

श्री सुरेश पाण्‍डे सरस की कृति है। इस संग्रह की अधिकतर रचनायें (कवितायें) जिस धरती पर अंकुरित हुई हैं। उसे हम प्रेम की धरती कह सकते हैं यों भी कविता का विशेष कर ‘गीत’ का जन्‍म प्रे...

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वो भारत! है कहाँ मेरा? By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

आज मानव संवेदनाओं का यह दौर बड़ा ही भयावह है। इस समय मानव त्राशदी चरम सीमा पर चल रही है। मानवता की गमगीनता चारों तरफ बोल रहीं है जहां मानव चिंतन उस विगत परिवेश को तलासता दिख रहा है,...

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उत्‍सुक काव्‍य कुन्‍ज By Ramgopal Bhavuk Gwaaliyar

नरेन्‍द्र उत्‍सुक एक ऐसे व्‍यक्तित्‍व का नाम है जिसे जीवन भर अदृश्‍य सत्‍ता से साक्षात्‍कार होता रहा। परमहंस सन्‍तों की जिन पर अपार कृपा रही।

सोमवती 7 सितम्‍बर 1994 को मैं...

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स्‍वतंत्र सक्‍सेना की कविताएं By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

स्‍वतंत्र सक्‍सेना की कविता काव्‍य संग्रह सरल नहीं था यह काम स्‍वतंत्र कुमार सक्‍सेना सवित्री सेवा आश्...

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अधूरे संवाद ( अतुकांत ) By Alok Mishra

कुछ रचनाऐं भाव के प्रवाह मेंं .... सोचने को मजबूर करेंगी । संवाद तब पूर्ण होगा जब पाठक पढ़ेगा और चिंतन करेगा।

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बेनाम शायरी By Er.Bhargav Joshi અડિયલ

"बेनाम शायरी"??? ?? ??? ?? ???क्रूर भी है, निष्ठुर भी है, वो खुदा मेरा मगरुर भी है।"बेनाम" हलक में बैठा वो खुदा मेरा गुरूर भी है।।??? ?? ??? ?? ???कोई लफ्ज...

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અક્ષરો ની પા પા પગલી By Jay Piprotar

કોઈ નાનકડું છોકરું ચાલતા શીખે અને જેમ ધીમે - ધીમે ડગલા માંડે એમ મેં પણ કવિતાઓના જગતમાં નાના - નાના ડગલા માંડયા છે..

મારા માટે તો મારી કવિતાઓ જ મારો પ્રેમ છે જેને હું બાથ ભરી ને...

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કવિતાની કડી By Hiren Bhatt

નમસ્કાર મીત્રો,કવિતાની કડી રુપે સૌ પ્રથમવાર ©એમજદિલથી હેઠળ મારી લખેલ કવિતા આપની સમક્ષ રજુ કરુ છું. આશા છે કે આપને એ જરૂર પસંદ આવશે.અનુક્રમણીકા૧. ફુલની પ્રેમ કહાની૨. એક જીવડું ૩. ઉત...

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जनजीवन By Rajesh Maheshwari

इतनी कृपा दिखना राघव, कभी न हो अभिमान,

मस्तक ऊँचा रहे मान से, ऐसे हों सब काम।

रहें समर्पित, करें लोक हित, देना यह आशीष,

विनत भाव से प्रभु चरणों में, झुका रहे यह शीष।

कर...

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सिर्फ तुम.. By Sarita Sharma

सिर्फ तुम... यकीन नहीं होता कभी हम मिले थे कुछ तुम दर्द में थे, कुछ हमें भी गिले थे.. ये अधूरा इश्क़ कब पूरा सा हुआ, कब अधूरी सी ज़िन्दगी पूरी सी हुई.. ये बेदर्द सी खुशियां, इतनी हसी...

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सुरेश पाण्‍डे सरस डबरा का काव्‍य संग्रह By Ramgopal Bhavuk Gwaaliyar

श्री सुरेश पाण्‍डे सरस की कृति है। इस संग्रह की अधिकतर रचनायें (कवितायें) जिस धरती पर अंकुरित हुई हैं। उसे हम प्रेम की धरती कह सकते हैं यों भी कविता का विशेष कर ‘गीत’ का जन्‍म प्रे...

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वो भारत! है कहाँ मेरा? By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

आज मानव संवेदनाओं का यह दौर बड़ा ही भयावह है। इस समय मानव त्राशदी चरम सीमा पर चल रही है। मानवता की गमगीनता चारों तरफ बोल रहीं है जहां मानव चिंतन उस विगत परिवेश को तलासता दिख रहा है,...

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उत्‍सुक काव्‍य कुन्‍ज By Ramgopal Bhavuk Gwaaliyar

नरेन्‍द्र उत्‍सुक एक ऐसे व्‍यक्तित्‍व का नाम है जिसे जीवन भर अदृश्‍य सत्‍ता से साक्षात्‍कार होता रहा। परमहंस सन्‍तों की जिन पर अपार कृपा रही।

सोमवती 7 सितम्‍बर 1994 को मैं...

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स्‍वतंत्र सक्‍सेना की कविताएं By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

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कुछ रचनाऐं भाव के प्रवाह मेंं .... सोचने को मजबूर करेंगी । संवाद तब पूर्ण होगा जब पाठक पढ़ेगा और चिंतन करेगा।

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કોઈ નાનકડું છોકરું ચાલતા શીખે અને જેમ ધીમે - ધીમે ડગલા માંડે એમ મેં પણ કવિતાઓના જગતમાં નાના - નાના ડગલા માંડયા છે..

મારા માટે તો મારી કવિતાઓ જ મારો પ્રેમ છે જેને હું બાથ ભરી ને...

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કવિતાની કડી By Hiren Bhatt

નમસ્કાર મીત્રો,કવિતાની કડી રુપે સૌ પ્રથમવાર ©એમજદિલથી હેઠળ મારી લખેલ કવિતા આપની સમક્ષ રજુ કરુ છું. આશા છે કે આપને એ જરૂર પસંદ આવશે.અનુક્રમણીકા૧. ફુલની પ્રેમ કહાની૨. એક જીવડું ૩. ઉત...

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इतनी कृपा दिखना राघव, कभी न हो अभिमान,

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रहें समर्पित, करें लोक हित, देना यह आशीष,

विनत भाव से प्रभु चरणों में, झुका रहे यह शीष।

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