Best Moral Stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Moral Stories in All books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cultur...Read More


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बेड़ियां By Reena

बेड़ियांरात के 2:37 बज रहे थे।पूरा शहर नींद में डूबा था, लेकिन आरव के कमरे की लाइट अब भी जल रही थी।कमरे में किताबें खुली पड़ी थीं, लैपटॉप चालू था, टेबल पर कॉफी का कप आधा भरा था......

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स्वर आले जुळूनी - भाग 6 By Prof Shriram V Kale

 स्वर आले जुळूनी अंतीम भाग 6           जे.जे. मधून मला मास्टर्स डिप्लोमा मिळाला त्याच दरम्याने जे.जे. ची एक बँच गोव्यात पणजीला सुरु झाली. मी कान्व्होकेशन फॉर्म भरायला गेलो तेव्हा ए...

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हिम्मत न हार By कमल चोपड़ा

हिम्मत न हारकमल चोपड़ा​चलते-चलते अगम नदी तक आ पहुँचा था। कुछ देर तक वह पानी के तेज बहाव को देखता रहा फिर नदी के किनारे लगे एक पेड़ के तने से लिपट कर रोने लगा। आज विद्यालय में आठवीं...

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उजाले की ओर –संस्मरण By DrPranava Bharti

स्नेहिल नमस्कार प्रिय मित्रों मधुशाला...??? ============      वैसे तो हम अब उम्र की जिस कगार पर खड़े हैं ,यह मस्तिष्क...

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સંબંધો ના ડિપ્લોમેટ કિશન કાકા - 2 By AKHIL KUMAR

To be continue. કિશન કાકા એટલે મોટા બિજનેસ મેન. ધંધા ની દરેક બાબત માં એમનો કોઈ જવાબ નઈ ૪૦ માણસ ની ટીમ એ એકલા હાથે હૅન્ડલ કરી લે.   ૪૦ માણસ ને કંટ્રોલ માં રાખવાના એ ખતરનાક હોશિયાર....

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इंसानियत का इनाम By कमल चोपड़ा

इंसानियत का इनाम  कमल चोपड़ा​एक गाँव के एक सेठ का किसी ने दरवाजा खटखटाया। रात का वक्त था। ‘इस वक्त कौन हो सकता है?’ यह सोचते हुए सेठ ने दरवाजा खोला। देखा सामने एक चालीस-बयालीस वर्ष...

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मैत्रीला लिंग नसतं By Trupti Deo

"मैत्रीला लिंग नसतं…"आयुष्यात कधीतरी असा क्षण येतो…जेव्हा आपल्याला फक्त कुणीतरी “ऐकणारं” हवं असतं.सल्ला देणारं नाही…उपदेश करणारा नाही…फक्त शांतपणे आपल्यासोबत बसणारं कुणीतरी…आणि त्य...

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માસ્ટર નો છોકરો મારો ભાઈબંધ હતો By AKHIL KUMAR

આજે ઘણો લાબો સમય થઈ ગયો પણ એ મિત્ર જે ૧૫ વર્ષ થી સાથે હતો.  મારો જૂનો ખાસ મિત્ર સૂરજ. સૂરજ મારો સ્કૂલ નો બેસ્ટ ફ્રેન્ડ. સાથે રમતા રેહતા.  પારિવારિક સંબધ થઈ ગયો હતો.આજે સૂરજ ૩ વર્ષ...

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भट्ठी में पौधा By कमल चोपड़ा

​भट्ठी में पौधाकमल चोपड़ा​घर तक आते-आते रास्ते में राशनवाले, किरोसिनवाले और दवाईवाले का उधार चुकता करते-करते उसकी तनखा निपट गयी थी। तनखाह के हाथ में आने की गर्मी, उत्साह और खुशी कु...

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अपने यहॉं By कमल चोपड़ा

​अपने यहाँकमल चोपड़ा​बीच में उसका वह डर लगभग खत्म हो गया था, जो उसे शुरू-शुरू में लगता था और जिसने इन दिनों फिर से उसे घेर लिया था। यहाँ रहते हुए उसे दस साल हो गये थे, उसे यह लगता...

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जब लाइक्स खत्म हो गए By Anshika Naithani

मेरा नाम साक्षी है, और अगर आप मेरे सोशल मीडिया प्रोफाइल को देखेंगे तो आपको लगेगा कि मेरी जिंदगी बिल्कुल परफेक्ट है। हर फोटो में मुस्कान, हर स्टोरी में खुशी और हर पोस्ट में एक ऐसा प...

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સંસ્કારોનું સેલ (Sale) અને પશ્ચિમી આંધળી દોટ By Urmit

આજના અત્યાધુનિક યુગમાં આપણે એક એવી વિચિત્ર સ્પર્ધામાં ઉતર્યા છીએ જ્યાં ‘કૂલ’ દેખાવું એ જીવનનું અંતિમ લક્ષ્ય બની ગયું છે. આ ‘કૂલ’ દેખાવાની હોડમાં આપણે ક્યારે આપણા વર્ષો જૂના મૂળિયાં...

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भूतों की बारात में झूमर By prem chand hembram

भूतों की बारात में झूमर“जब तान, थाप और नृत्य ने अदृश्य जगत को भी बाँध लिया…”डोमन के सिर से माँ-बाप का साया बचपन में ही उठ गया था।गाँव में भयंकर हैजे का प्रकोप हुआ था। उन दिनों न दव...

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कैसा भी जुर्म By कमल चोपड़ा

​कैसा भी जुर्म कमल चोपड़ा​आवारा घूम रहे आदमियों, लड़कों, बच्चों, सुअरों, कुत्तों और मुर्गों में से सबसे पहले कुत्तों ने ही उनका विरोध किया था। भौंकते हुए कुत्ते को पत्थर मार-मार कर...

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THE PUBLIC HOUSE A New Horizontals Of Democracy By Nirav Vanshavalya

So fox , how are you and well come to the new episode of  long lines of  democracy. How ever,  we  gave total set ups to the royelets and did start of democracy. But some where  a...

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વિશ્વાસનો એક નાનો નિર્ણય, જીવનનો મોટો ફેરફાર By SOHEL KOTHIYA

અમિત તે સાંજે ખેતરની બાજુમાં ચાલતો હતો. સૂર્ય ઢળી રહ્યો હતો અને આકાશમાં લાલીમા ફેલાઈ ગઈ હતી. પવન ધીમે ધીમે વહેતો હતો, પણ તેના મનમાં એક અજાણી ઉથલપાથલ ચાલી રહી હતી. ગામમાં મેળો લાગ્ય...

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इज्जत के साख By कमल चोपड़ा

​इज्जत के साथकमल चोपड़ा​इतनी दिक्कत उसे जेल से गाँव तक अकेले पहुँचने में नहीं महसूस हुई थी, जितनी गाँव से अपने घर तक पहुँचने में महसूस हो रही थी। हालाँकि उसे कोई झेंप या झिझक महसूस...

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ऋण By कमल चोपड़ा

​ऋणकमल चोपड़ा​उसने जानबूझकर दीदी के घर जाने के लिए ऐसा ही वक्त चुना था, जबकि जीजाजी और बच्चे घर पर ना हों और दीदी अकेली हो। उसे अचानक आया देखकर दीदी का चेहरा खिल उठा था, लेकिन अगले...

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तीसरे पहर का सपना By Vijay Erry

---तीसरे पहर का सपना प्रस्तावनातीसरा पहर — दिन का वह समय जब सूरज अपनी तपिश खोने लगता है, खेतों में काम करने वाले किसान घर लौटने की तैयारी करते हैं, और गाँव की गलियों में बच्चों की...

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संकल्प संकेत By HARISH

विद्यालय से घर पहुँचते ही माँ ने घबराहट में बताया कि हमारी गाय ‘दारा’ घर नहीं लौटी है और उसका बछड़ा भूख से बिलख रहा है। मैंने अपने साथी राजेंद्र यादव के साथ उसे खोजने का निश्चय किय...

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बस्ते में छिपी वंशावली By Vijay Erry

---बस्ते में छिपी वंशावलीप्रस्तावनाअमन सातवीं कक्षा का छात्र था। उसके बैग में किताबें, कॉपियाँ और पेंसिलें थीं। लेकिन एक दिन उसे लगा कि बैग में कुछ और भी है — कोई अदृश्य शक्ति, कोई...

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आहॆ का अशी कोणती प्रार्थना By Trupti Deo

"आहॆ अशी कोणती प्रार्थना , जी अपघात थांबवेल?"देव दरवेळी वाचवेलच असं नाही…पण आपणच थोडं जागं राहिलो,तर देवाला वाचवायची वेळच येणार नाही."आहॆ का अशी कोणती प्रार्थना आहे?""आहॆ का असा को...

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માનવતાની મહેક By Navneet Marvaniya

શહેરની ગતિશીલતા અને ગગનચુંબી ઈમારતોની ચમકથી લગભગ ત્રીસ કિલોમીટર દૂર, પ્રકૃતિના ખોળામાં વસેલું એક અંતરિયાળ ગામ… દેવકીપુરા. જ્યાં સમય જાણે થંભી ગયો હોય એવું લાગતું હતું. અહીંના લોકો...

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कागज़ By राज बोहरे

कागज़ सहाय मास्साब ने अपने पुराने, हल्के फट चुके भूरे बैग को धीरे से खोला। अंदर रखी नोटों की गड्डी को उँगलियों से दबाकर जैसे तसल्ली कर ली—पूरा दस हजार है। फिर बैग को ऐसे बंद किया म...

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अनकहे शब्द By राज बोहरे

अनकहे शब्द कस्बे की मुख्य सड़क से थोड़ा हटकर, पीपल के पुराने पेड़ के नीचे डॉ. पुरोहित का छोटा-सा क्लीनिक था। बरामदे में लकड़ी की दो बेंचें रखी थीं और दीवार पर टँगा एक पुराना पंखा च...

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टूटता हुआ मन - भाग 1 By prem chand hembram

टूटता हुआ मन भाग :-1(अहंकार से आत्मबोध तक की कथा)रमेश घोष एक प्रतिष्ठित आईआईटी इंजीनियर था।तेज बुद्धि, आधुनिक सोच और तर्कशील स्वभाव—वह उन लोगों में से था जो जाति, वर्ण और परंपराओं...

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सपनों की उड़ान, मजबूरी का पंख By Vijay Erry

--- सपनों की उड़ान, मजबूरी का पंखलेखक: विजय शर्मा एरी---प्रस्तावनाहर इंसान के जीवन में सपने होते हैं। कुछ सपने छोटे होते हैं, जो आसानी से पूरे हो जाते हैं। लेकिन कुछ सपने इतने बड़े...

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ವಿಧಿಯ ಬರಹಗಾರ್ತಿ By Danger Writer

ಬೆಂಗಳೂರಿನ ಯಾವುದೋ ಒಂದು ಹಳೆಯ ಬಡಾವಣೆಯ ಮೂಲೆಯಲ್ಲಿರುವ ಆ ಮನೆಯ ಅಟ್ಟದ ಮೇಲೆ ವನಿತಾ ಕುಳಿತಿದ್ದಳು. ಹೊರಗೆ ಮಳೆ ಸುರಿಯುತ್ತಿತ್ತು, ಹಳೆಯ ಹಂಚಿನ ಮನೆಯ ಮಾಡಿನಿಂದ ನೀರು ತೊಟ್ಟಿಕ್ಕುವ ಸದ್ದು ಅವಳ ಲೇಖನಿಗೆ ಲಯ ನೀಡುತ್...

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काँच की दीवार By राज बोहरे

काँच की दीवार   रामनाथ जी एक सेवानिवृत्त शिक्षक थे। चालीस वर्षों तक उन्होंने बच्चों को पढ़ाया, उन्हें जीवन के मूल्य सिखाए। उनकी कक्षा में अनुशासन और आत्मीयता दोनों का अद्भुत मेल था...

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સેક્સએડ્યુકેશન: ઇન્ટરનેટ અને સોશિયલ મીડિયા નો પ્રભાવ By yeash shah

           ૧૫ વર્ષ ની આર્યા એ સ્કૂલ ની સભા માં ૧ ડિસેમ્બર ૨૦૨૫ ના રોજ એઇડ્સ અને સેક્સ એડ્યુકેશન વિશે વૈજ્ઞાનિક માહિતી આપીને શિક્ષકો ને તેમ જ આચાર્ય ને પ્રભાવિત કરી દીધા. ટેક્સબુક ક...

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भटका रास्ता By राज बोहरे

भटका रास्ता कॉलेज का विशाल गेट जैसे ही सामने आया, अमल के कदम अपने आप तेज हो गए। चेहरे पर उम्मीद की चमक थी, आँखों में अनगिनत सपने। उसने जेब से मुड़ा-तुड़ा कागज निकाला और एक बार फिर...

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पवित्र बहु - 11 By archana

दिव्यम के दोस्त की शादी थी।हलचल, हँसी, तैयारियाँ…लेकिन इन सबके बीच चित्र का मन थोड़ा घबराया हुआ था।दिव्यम ने आते ही कहा—“चित्र, तुम अच्छे से तैयार हो जाना… आज तुम्हें मेरे साथ चलना...

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दादी और संदूक By Vijay Erry

---दादी और संदूकपहला अध्याय: बचपन की जिज्ञासागाँव के पुराने घर में विजय बचपन से ही उस संदूक को देखता था। लकड़ी का बना, लोहे की पट्टियों से जकड़ा हुआ, और ऊपर से पीतल का ताला लगा हुआ...

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साहूकार By राज बोहरे

साहूकार दोपहर की धूप गाँव के चौपाल पर ऐसे पसरी थी जैसे किसी बूढ़े की थकी हुई साँसें। बबूल के पेड़ की छाया में बैठे लोग चुनाव की चर्चा में डूबे थे। इसी बीच छम्मी सेठ की कोठी से बुला...

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জীবন দর্শন By PRINCE PREMKUMAR

আমার ধর্ম, বর্ণ, সংস্কৃতি, শিক্ষা, সামাজিক মর্যাদা, সম্পদ ইত্যাদির কারণে আমি তোমার চেয়ে শ্রেষ্ঠ নই। আমি নই, তুমিও নও। আমাকে অবশ্যই মেনে নিতে হবে, এবং তোমারও মেনে নেওয়া উচিত, যে আ...

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फैक्ट्री की आड़ By राज बोहरे

फैक्ट्री की आड़ में शाम का धुंधलका धीरे-धीरे औद्योगिक इलाके पर उतर रहा था। आसमान में धुएँ की मोटी परत तैर रही थी, मानो किसी ने सूरज को काले कपड़े से ढँक दिया हो। स्पंज आयरन फैक्ट्र...

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देख रहे हैं दर्पण का काम By PRINCE PREMKUMAR

आप जिनसे भी मिलते हैं, वे आपके लिए एक दर्पण का काम करते हैं। ऐसा क्यों है? हम दूसरों के साथ अपने संबंधों के माध्यम से ही खुद को सबसे अच्छी तरह समझ पाते हैं। हम केवल उन्हीं चीजों से...

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क्या सब ठीक है - 4 By Narayan Menariya

क्या सब ठीक है? ************************************************* यह किताब उन अनकहे सवालों और अधूरी बातों का संग्रह है, जिन्हें हम अक्सर अपने अंदर दबाकर जीते रहते हैं।हर कहानी हमार...

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अधूरी सुरक्षा By राज बोहरे

 अधूरी सुरक्षा कलेक्ट्रेट परिसर की दोपहर हमेशा की तरह शोर और भागदौड़ से भरी हुई थी। धूल से अटे रास्तों पर इधर-उधर भागते लोग, फाइलों का बोझ उठाए बाबू, और पसीने से तरबतर फरियादी—सब म...

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वधु मूल्य By राज बोहरे

 वधू मूल्य बरसात के बादल उस दिन जैसे आसमान में ठहरे हुए थे। हवा में हल्की नमी थी और आँगन में तुलसी के पास खड़ी करुणा बार-बार घर के अंदर और बाहर झांक रही थी। उसके हाथ में दीवार से उ...

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मैं भी कभी ज़िंदा था - 1 By S B Dubey

लघु उपन्यासलेखक: S.B. Dubey    प्रस्तावनाये कहानी है एक ऐसे शख्स की, जो आपके-हमारे बीच ही रहता है, पर अक्सर नज़र नहीं आता। वो जो हर रोज़ ज़िम्मेदारियों का बोझ उठाता है, सपनों को कि...

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भटका रास्ता By राज बोहरे

भटका रास्ता कॉलेज का विशाल गेट जैसे ही सामने आया, अमल के कदम अपने आप तेज हो गए। चेहरे पर उम्मीद की चमक थी, आँखों में अनगिनत सपने। उसने जेब से मुड़ा-तुड़ा कागज निकाला और एक बार फिर...

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अंतिम इंतज़ार By राज बोहरे

अंतिम  इंतज़ार   गाँव के आख़िरी सिरे पर खड़ा वह मकान जैसे समय के सामने हार मान चुका था। दीवारों की पलस्तर जगह-जगह से झड़ गई थी। आँगन में लगे नीम के पेड़ की छाया दोपहर की धूप को जैस...

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આપણી માનસિકતા By Hitesh Bhalodia

આપણી માનસિકતાઆપણે આજે એક વાતથી આજની શરૂવાત કરીએ,એકવાર હું એક ડોક્ટરના ક્લિનિક ઉપર ગયો. ક્લિનિકના રિસેપ્શન પાછળ એક નોટિસ લખેલી હતી, એમાં લખું હતું, 'આજથી અને અત્યારથી દર ગુરુવાર...

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सफलता का मुल्य By Vijay Erry

---सफलता का मुल्य लेखक: विजय शर्मा एरी---प्रस्तावनासफलता शब्द सुनते ही मन में चमक, ताली, सम्मान और उपलब्धि की तस्वीरें उभरती हैं। लेकिन इन तस्वीरों के पीछे जो धुंधली परतें हैं, वे...

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बेड़ियां By Reena

बेड़ियांरात के 2:37 बज रहे थे।पूरा शहर नींद में डूबा था, लेकिन आरव के कमरे की लाइट अब भी जल रही थी।कमरे में किताबें खुली पड़ी थीं, लैपटॉप चालू था, टेबल पर कॉफी का कप आधा भरा था......

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स्वर आले जुळूनी - भाग 6 By Prof Shriram V Kale

 स्वर आले जुळूनी अंतीम भाग 6           जे.जे. मधून मला मास्टर्स डिप्लोमा मिळाला त्याच दरम्याने जे.जे. ची एक बँच गोव्यात पणजीला सुरु झाली. मी कान्व्होकेशन फॉर्म भरायला गेलो तेव्हा ए...

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हिम्मत न हार By कमल चोपड़ा

हिम्मत न हारकमल चोपड़ा​चलते-चलते अगम नदी तक आ पहुँचा था। कुछ देर तक वह पानी के तेज बहाव को देखता रहा फिर नदी के किनारे लगे एक पेड़ के तने से लिपट कर रोने लगा। आज विद्यालय में आठवीं...

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उजाले की ओर –संस्मरण By DrPranava Bharti

स्नेहिल नमस्कार प्रिय मित्रों मधुशाला...??? ============      वैसे तो हम अब उम्र की जिस कगार पर खड़े हैं ,यह मस्तिष्क...

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સંબંધો ના ડિપ્લોમેટ કિશન કાકા - 2 By AKHIL KUMAR

To be continue. કિશન કાકા એટલે મોટા બિજનેસ મેન. ધંધા ની દરેક બાબત માં એમનો કોઈ જવાબ નઈ ૪૦ માણસ ની ટીમ એ એકલા હાથે હૅન્ડલ કરી લે.   ૪૦ માણસ ને કંટ્રોલ માં રાખવાના એ ખતરનાક હોશિયાર....

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इंसानियत का इनाम By कमल चोपड़ा

इंसानियत का इनाम  कमल चोपड़ा​एक गाँव के एक सेठ का किसी ने दरवाजा खटखटाया। रात का वक्त था। ‘इस वक्त कौन हो सकता है?’ यह सोचते हुए सेठ ने दरवाजा खोला। देखा सामने एक चालीस-बयालीस वर्ष...

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मैत्रीला लिंग नसतं By Trupti Deo

"मैत्रीला लिंग नसतं…"आयुष्यात कधीतरी असा क्षण येतो…जेव्हा आपल्याला फक्त कुणीतरी “ऐकणारं” हवं असतं.सल्ला देणारं नाही…उपदेश करणारा नाही…फक्त शांतपणे आपल्यासोबत बसणारं कुणीतरी…आणि त्य...

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માસ્ટર નો છોકરો મારો ભાઈબંધ હતો By AKHIL KUMAR

આજે ઘણો લાબો સમય થઈ ગયો પણ એ મિત્ર જે ૧૫ વર્ષ થી સાથે હતો.  મારો જૂનો ખાસ મિત્ર સૂરજ. સૂરજ મારો સ્કૂલ નો બેસ્ટ ફ્રેન્ડ. સાથે રમતા રેહતા.  પારિવારિક સંબધ થઈ ગયો હતો.આજે સૂરજ ૩ વર્ષ...

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भट्ठी में पौधा By कमल चोपड़ा

​भट्ठी में पौधाकमल चोपड़ा​घर तक आते-आते रास्ते में राशनवाले, किरोसिनवाले और दवाईवाले का उधार चुकता करते-करते उसकी तनखा निपट गयी थी। तनखाह के हाथ में आने की गर्मी, उत्साह और खुशी कु...

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अपने यहॉं By कमल चोपड़ा

​अपने यहाँकमल चोपड़ा​बीच में उसका वह डर लगभग खत्म हो गया था, जो उसे शुरू-शुरू में लगता था और जिसने इन दिनों फिर से उसे घेर लिया था। यहाँ रहते हुए उसे दस साल हो गये थे, उसे यह लगता...

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जब लाइक्स खत्म हो गए By Anshika Naithani

मेरा नाम साक्षी है, और अगर आप मेरे सोशल मीडिया प्रोफाइल को देखेंगे तो आपको लगेगा कि मेरी जिंदगी बिल्कुल परफेक्ट है। हर फोटो में मुस्कान, हर स्टोरी में खुशी और हर पोस्ट में एक ऐसा प...

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સંસ્કારોનું સેલ (Sale) અને પશ્ચિમી આંધળી દોટ By Urmit

આજના અત્યાધુનિક યુગમાં આપણે એક એવી વિચિત્ર સ્પર્ધામાં ઉતર્યા છીએ જ્યાં ‘કૂલ’ દેખાવું એ જીવનનું અંતિમ લક્ષ્ય બની ગયું છે. આ ‘કૂલ’ દેખાવાની હોડમાં આપણે ક્યારે આપણા વર્ષો જૂના મૂળિયાં...

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भूतों की बारात में झूमर By prem chand hembram

भूतों की बारात में झूमर“जब तान, थाप और नृत्य ने अदृश्य जगत को भी बाँध लिया…”डोमन के सिर से माँ-बाप का साया बचपन में ही उठ गया था।गाँव में भयंकर हैजे का प्रकोप हुआ था। उन दिनों न दव...

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कैसा भी जुर्म By कमल चोपड़ा

​कैसा भी जुर्म कमल चोपड़ा​आवारा घूम रहे आदमियों, लड़कों, बच्चों, सुअरों, कुत्तों और मुर्गों में से सबसे पहले कुत्तों ने ही उनका विरोध किया था। भौंकते हुए कुत्ते को पत्थर मार-मार कर...

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THE PUBLIC HOUSE A New Horizontals Of Democracy By Nirav Vanshavalya

So fox , how are you and well come to the new episode of  long lines of  democracy. How ever,  we  gave total set ups to the royelets and did start of democracy. But some where  a...

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વિશ્વાસનો એક નાનો નિર્ણય, જીવનનો મોટો ફેરફાર By SOHEL KOTHIYA

અમિત તે સાંજે ખેતરની બાજુમાં ચાલતો હતો. સૂર્ય ઢળી રહ્યો હતો અને આકાશમાં લાલીમા ફેલાઈ ગઈ હતી. પવન ધીમે ધીમે વહેતો હતો, પણ તેના મનમાં એક અજાણી ઉથલપાથલ ચાલી રહી હતી. ગામમાં મેળો લાગ્ય...

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इज्जत के साख By कमल चोपड़ा

​इज्जत के साथकमल चोपड़ा​इतनी दिक्कत उसे जेल से गाँव तक अकेले पहुँचने में नहीं महसूस हुई थी, जितनी गाँव से अपने घर तक पहुँचने में महसूस हो रही थी। हालाँकि उसे कोई झेंप या झिझक महसूस...

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ऋण By कमल चोपड़ा

​ऋणकमल चोपड़ा​उसने जानबूझकर दीदी के घर जाने के लिए ऐसा ही वक्त चुना था, जबकि जीजाजी और बच्चे घर पर ना हों और दीदी अकेली हो। उसे अचानक आया देखकर दीदी का चेहरा खिल उठा था, लेकिन अगले...

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तीसरे पहर का सपना By Vijay Erry

---तीसरे पहर का सपना प्रस्तावनातीसरा पहर — दिन का वह समय जब सूरज अपनी तपिश खोने लगता है, खेतों में काम करने वाले किसान घर लौटने की तैयारी करते हैं, और गाँव की गलियों में बच्चों की...

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संकल्प संकेत By HARISH

विद्यालय से घर पहुँचते ही माँ ने घबराहट में बताया कि हमारी गाय ‘दारा’ घर नहीं लौटी है और उसका बछड़ा भूख से बिलख रहा है। मैंने अपने साथी राजेंद्र यादव के साथ उसे खोजने का निश्चय किय...

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बस्ते में छिपी वंशावली By Vijay Erry

---बस्ते में छिपी वंशावलीप्रस्तावनाअमन सातवीं कक्षा का छात्र था। उसके बैग में किताबें, कॉपियाँ और पेंसिलें थीं। लेकिन एक दिन उसे लगा कि बैग में कुछ और भी है — कोई अदृश्य शक्ति, कोई...

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आहॆ का अशी कोणती प्रार्थना By Trupti Deo

"आहॆ अशी कोणती प्रार्थना , जी अपघात थांबवेल?"देव दरवेळी वाचवेलच असं नाही…पण आपणच थोडं जागं राहिलो,तर देवाला वाचवायची वेळच येणार नाही."आहॆ का अशी कोणती प्रार्थना आहे?""आहॆ का असा को...

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માનવતાની મહેક By Navneet Marvaniya

શહેરની ગતિશીલતા અને ગગનચુંબી ઈમારતોની ચમકથી લગભગ ત્રીસ કિલોમીટર દૂર, પ્રકૃતિના ખોળામાં વસેલું એક અંતરિયાળ ગામ… દેવકીપુરા. જ્યાં સમય જાણે થંભી ગયો હોય એવું લાગતું હતું. અહીંના લોકો...

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कागज़ By राज बोहरे

कागज़ सहाय मास्साब ने अपने पुराने, हल्के फट चुके भूरे बैग को धीरे से खोला। अंदर रखी नोटों की गड्डी को उँगलियों से दबाकर जैसे तसल्ली कर ली—पूरा दस हजार है। फिर बैग को ऐसे बंद किया म...

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अनकहे शब्द By राज बोहरे

अनकहे शब्द कस्बे की मुख्य सड़क से थोड़ा हटकर, पीपल के पुराने पेड़ के नीचे डॉ. पुरोहित का छोटा-सा क्लीनिक था। बरामदे में लकड़ी की दो बेंचें रखी थीं और दीवार पर टँगा एक पुराना पंखा च...

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टूटता हुआ मन - भाग 1 By prem chand hembram

टूटता हुआ मन भाग :-1(अहंकार से आत्मबोध तक की कथा)रमेश घोष एक प्रतिष्ठित आईआईटी इंजीनियर था।तेज बुद्धि, आधुनिक सोच और तर्कशील स्वभाव—वह उन लोगों में से था जो जाति, वर्ण और परंपराओं...

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सपनों की उड़ान, मजबूरी का पंख By Vijay Erry

--- सपनों की उड़ान, मजबूरी का पंखलेखक: विजय शर्मा एरी---प्रस्तावनाहर इंसान के जीवन में सपने होते हैं। कुछ सपने छोटे होते हैं, जो आसानी से पूरे हो जाते हैं। लेकिन कुछ सपने इतने बड़े...

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ವಿಧಿಯ ಬರಹಗಾರ್ತಿ By Danger Writer

ಬೆಂಗಳೂರಿನ ಯಾವುದೋ ಒಂದು ಹಳೆಯ ಬಡಾವಣೆಯ ಮೂಲೆಯಲ್ಲಿರುವ ಆ ಮನೆಯ ಅಟ್ಟದ ಮೇಲೆ ವನಿತಾ ಕುಳಿತಿದ್ದಳು. ಹೊರಗೆ ಮಳೆ ಸುರಿಯುತ್ತಿತ್ತು, ಹಳೆಯ ಹಂಚಿನ ಮನೆಯ ಮಾಡಿನಿಂದ ನೀರು ತೊಟ್ಟಿಕ್ಕುವ ಸದ್ದು ಅವಳ ಲೇಖನಿಗೆ ಲಯ ನೀಡುತ್...

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काँच की दीवार By राज बोहरे

काँच की दीवार   रामनाथ जी एक सेवानिवृत्त शिक्षक थे। चालीस वर्षों तक उन्होंने बच्चों को पढ़ाया, उन्हें जीवन के मूल्य सिखाए। उनकी कक्षा में अनुशासन और आत्मीयता दोनों का अद्भुत मेल था...

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સેક્સએડ્યુકેશન: ઇન્ટરનેટ અને સોશિયલ મીડિયા નો પ્રભાવ By yeash shah

           ૧૫ વર્ષ ની આર્યા એ સ્કૂલ ની સભા માં ૧ ડિસેમ્બર ૨૦૨૫ ના રોજ એઇડ્સ અને સેક્સ એડ્યુકેશન વિશે વૈજ્ઞાનિક માહિતી આપીને શિક્ષકો ને તેમ જ આચાર્ય ને પ્રભાવિત કરી દીધા. ટેક્સબુક ક...

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भटका रास्ता By राज बोहरे

भटका रास्ता कॉलेज का विशाल गेट जैसे ही सामने आया, अमल के कदम अपने आप तेज हो गए। चेहरे पर उम्मीद की चमक थी, आँखों में अनगिनत सपने। उसने जेब से मुड़ा-तुड़ा कागज निकाला और एक बार फिर...

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पवित्र बहु - 11 By archana

दिव्यम के दोस्त की शादी थी।हलचल, हँसी, तैयारियाँ…लेकिन इन सबके बीच चित्र का मन थोड़ा घबराया हुआ था।दिव्यम ने आते ही कहा—“चित्र, तुम अच्छे से तैयार हो जाना… आज तुम्हें मेरे साथ चलना...

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दादी और संदूक By Vijay Erry

---दादी और संदूकपहला अध्याय: बचपन की जिज्ञासागाँव के पुराने घर में विजय बचपन से ही उस संदूक को देखता था। लकड़ी का बना, लोहे की पट्टियों से जकड़ा हुआ, और ऊपर से पीतल का ताला लगा हुआ...

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साहूकार By राज बोहरे

साहूकार दोपहर की धूप गाँव के चौपाल पर ऐसे पसरी थी जैसे किसी बूढ़े की थकी हुई साँसें। बबूल के पेड़ की छाया में बैठे लोग चुनाव की चर्चा में डूबे थे। इसी बीच छम्मी सेठ की कोठी से बुला...

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জীবন দর্শন By PRINCE PREMKUMAR

আমার ধর্ম, বর্ণ, সংস্কৃতি, শিক্ষা, সামাজিক মর্যাদা, সম্পদ ইত্যাদির কারণে আমি তোমার চেয়ে শ্রেষ্ঠ নই। আমি নই, তুমিও নও। আমাকে অবশ্যই মেনে নিতে হবে, এবং তোমারও মেনে নেওয়া উচিত, যে আ...

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फैक्ट्री की आड़ By राज बोहरे

फैक्ट्री की आड़ में शाम का धुंधलका धीरे-धीरे औद्योगिक इलाके पर उतर रहा था। आसमान में धुएँ की मोटी परत तैर रही थी, मानो किसी ने सूरज को काले कपड़े से ढँक दिया हो। स्पंज आयरन फैक्ट्र...

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देख रहे हैं दर्पण का काम By PRINCE PREMKUMAR

आप जिनसे भी मिलते हैं, वे आपके लिए एक दर्पण का काम करते हैं। ऐसा क्यों है? हम दूसरों के साथ अपने संबंधों के माध्यम से ही खुद को सबसे अच्छी तरह समझ पाते हैं। हम केवल उन्हीं चीजों से...

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क्या सब ठीक है - 4 By Narayan Menariya

क्या सब ठीक है? ************************************************* यह किताब उन अनकहे सवालों और अधूरी बातों का संग्रह है, जिन्हें हम अक्सर अपने अंदर दबाकर जीते रहते हैं।हर कहानी हमार...

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अधूरी सुरक्षा By राज बोहरे

 अधूरी सुरक्षा कलेक्ट्रेट परिसर की दोपहर हमेशा की तरह शोर और भागदौड़ से भरी हुई थी। धूल से अटे रास्तों पर इधर-उधर भागते लोग, फाइलों का बोझ उठाए बाबू, और पसीने से तरबतर फरियादी—सब म...

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वधु मूल्य By राज बोहरे

 वधू मूल्य बरसात के बादल उस दिन जैसे आसमान में ठहरे हुए थे। हवा में हल्की नमी थी और आँगन में तुलसी के पास खड़ी करुणा बार-बार घर के अंदर और बाहर झांक रही थी। उसके हाथ में दीवार से उ...

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मैं भी कभी ज़िंदा था - 1 By S B Dubey

लघु उपन्यासलेखक: S.B. Dubey    प्रस्तावनाये कहानी है एक ऐसे शख्स की, जो आपके-हमारे बीच ही रहता है, पर अक्सर नज़र नहीं आता। वो जो हर रोज़ ज़िम्मेदारियों का बोझ उठाता है, सपनों को कि...

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भटका रास्ता By राज बोहरे

भटका रास्ता कॉलेज का विशाल गेट जैसे ही सामने आया, अमल के कदम अपने आप तेज हो गए। चेहरे पर उम्मीद की चमक थी, आँखों में अनगिनत सपने। उसने जेब से मुड़ा-तुड़ा कागज निकाला और एक बार फिर...

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अंतिम इंतज़ार By राज बोहरे

अंतिम  इंतज़ार   गाँव के आख़िरी सिरे पर खड़ा वह मकान जैसे समय के सामने हार मान चुका था। दीवारों की पलस्तर जगह-जगह से झड़ गई थी। आँगन में लगे नीम के पेड़ की छाया दोपहर की धूप को जैस...

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આપણી માનસિકતા By Hitesh Bhalodia

આપણી માનસિકતાઆપણે આજે એક વાતથી આજની શરૂવાત કરીએ,એકવાર હું એક ડોક્ટરના ક્લિનિક ઉપર ગયો. ક્લિનિકના રિસેપ્શન પાછળ એક નોટિસ લખેલી હતી, એમાં લખું હતું, 'આજથી અને અત્યારથી દર ગુરુવાર...

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सफलता का मुल्य By Vijay Erry

---सफलता का मुल्य लेखक: विजय शर्मा एरी---प्रस्तावनासफलता शब्द सुनते ही मन में चमक, ताली, सम्मान और उपलब्धि की तस्वीरें उभरती हैं। लेकिन इन तस्वीरों के पीछे जो धुंधली परतें हैं, वे...

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