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“जाना है... जाने दो हमें... छोरो, न... चल परे हट लरके ! ए दरोगा बाबू सुनत रहे हो !” “क्या चूँ-चपड़ लगा रखी है तुम लोगों ने ?” दारोगा ज़रा नाराज़ लहज़े में बोला या ये भी हो सकता है ...Read More

“लाडो ससुराल में काम से सबका मन जीत लेना ! ससुराल में इंसान की नहीं उसके काम की कदर होती है ।” बस नानी की उसी युक्ति को रामप्यारी ने अपने जीवन का मूल मंत्र बना लिया था । ...Read More

रामप्यारी की उस घर में किसी को जरूरत नहीं थी, हाँ मगर उसका होना फिर भी सबके लिए जरूरी हो चला था भयंकर बारिश में टपकती छत से सीली हो उठी दीवारें जब ठंड से सिकुड़ने लगती ...Read More

दिन ख़ूब चढ़ आया था, आसमान में सूरज कड़ककर धूप उगल रहा था, छबीली सुस्ताने के बहाने चौपाल के बीचोबीच बूढ़े हो आए पीपल की छाँव में आ बैठी थी वह सीप, मोती और कौड़ियों के आभूषण ...Read More

इन दिनों सावन का महिना चल रहा है और ये महिना इन लोगों के लिए खास माना जाता है, यह माह घर के पुरुषों के लिए खास कमाई करने का होता है क्योंकि इसी माह में नाग-पंचमी का पर्व ...Read More

बिट्टू सुबह-सुबह स्कूल के लिए तैयार हो रहा था कि पीछे से माँ ने आवाज़ लगाई बिट्टू...टिफिन बॉक्स बैग में रख लिया? बिट्टू के एक पैर में जुराब था, दूसरा जुराब हाथ में लिए वह अपना पैर ...Read More

अमानत अली दसवीं पास करने के बाद एक दिन के लिए भी बेरोजगार नहीं बैठा, गरीब माता-पिता की हालत उससे छुपी ना थी पिता लुहारी मुहल्ले में किराने की छोटी सी दुकान चलाते थे, और माँ ने ...Read More

सूखी मछलियों पर नमक भुरकती आई की झुकी पीठ दूर से यूँ प्रतीत हो रही थी मानों समुद्र में कोई डॉलफ़िन छलांगे भरते वक़्त पानी से ऊपर आ गई हो और फिर वापिस लौटते हुए उसका मुँह और पूँछ ...Read More

शिखा ने बरसों बाद फ़िर से कलम चलाना शुरू किया है वह भीतर से कितनी घबराई हुई है “न जाने फिर से विचार उपजेंगें या नहीं ? भावनाएँ जो बरसों-बरस दिल-ओ’ दिमाग में सुसुप्त पड़ी ...Read More

उसने नीचे झुककर जूतों में पैर डालने की कोशिश की, एड़ी ऊपर करके पंजे को जूते के सोल के साथ-साथ भीतर सरकाने की बेतरह कोशिश की, आड़ा-तिरछा किया मगर पंजा था कि हमेशा की मानिंद ज़िद्दी बना रहा था ...Read More

शाम तक रामभरोसे का ट्रान्सफर हार्ड स्टेशन पर करवा दिया गया था । रात अंधेरे वह बेबी से विदा लेने गया था । एक उम्मीद थी कि शायद वह रोक लेगी, आखिर लड़कियों को अपनी इज्ज़त सबसे प्यारी होती ...Read More

दरवाजे पर रंगोली सजाती मालिका गहरी उदासी में डूबी थी, रंग साँचे के भीतर समा ही नहीं रहे थे, पिछली कई दिवालियाँ उसकी इसी ऊहापोह में बीत गयी थी बच्चों का इंतज़ार करते उस घर को सजाए ...Read More

“तुमको हम दिल में बसा लेंगे तुम आओ तो सही, सारी दुनिया से छुपा लेंगे तुम आओ तो सही, एक वादा करो कि हमसे ना बिछड़ोगे कभी, नाज़ हम सारे उठा लेंगे तुम आओ तो सही...” गजल ख़त्म होते ही एक वज़नदार आवाज़ ...Read More

उम्र तो ऐसी कोई खास नहीं हुई उसकी फिर भी सुमि के पैरों में दर्द रहने लगा है, उम्र को कोई ऐसी भी नहीं गुज़री उस पर बस समय और जीवन की बढ़ती जिम्मेदारियों ने उसे थका दिया था, ...Read More

लिपि सेंट्रल पार्क के किनारे उगे घने मेपल ट्री के नीचे बिछी बेंच पर जाकर बैठ गई, नीचे पड़े सूखे पत्तों की चरमराहट से एक अजीब-सी ध्वनि उत्पन्न हुई उसने ललाई लिए एक अधपके पत्ते को उठाकर ...Read More

सुरेखा ने खिड़की से बाहर झाँककर देखा, पिछली रात से झूमकर चढ़ी काली बदली लगातार बरस रही थी यूँ लग रहा था जैसे एक ही रात में बरसकर पिछले सारे मौसमों की कसर पूरी कर लेना चाहती ...Read More

“अच्छा... तो दिन में कितनी दफ़ा आप लोग मुझे फ़ोन करके मुझसे मेरे बारे में पूछते हो ? क्या कोई ये जानना भी जरूरी समझता है कि दिन भर में मैं कितना रोयी, कितना सोयी या मैंने खाना समय ...Read More

“अरे उतरो भी, 800 रुपए में कितनी देर रुकोगे ?” “फ़ोटो तो खिंचवाने दो हमें, एक-दो पल अधिक रुक गई तो कौनसा पहाड़ टूट पड़ेगा ?” “अरे... क्या करोगे जी फ़ोटो का ?” “यादें नहीं ले जायेंगे यहाँ से क्या ?” “यादें ? ...Read More

अगले दिन वे सभी शालीमार बाग़ जाने के लिए निकल चुके थे । ऑफ सीज़न के कारण बाग में उजाड़ पड़ा था सिवाय कुछ चिनार के, जो शाखों से सूखे पत्तों को रह-रहकर झटक दे रहे थे मानों हालात ...Read More

उत्तरा उसके पीछे-पीछे लगभग खिंची चली जा रही थी “या अल्लाह... वो सिर पकड़कर नीचे बैठ गया था । उत्तरा कुछ समझ पाती इससे पहले वह लपककर खड़ा हुआ था और उसे लेकर दौड़ता हुआ पास के एक घर ...Read More

हर प्रश्न के दो जवाब होते हैं, अतुल हमेशा आजकल ज़ाहिदा से यही कहा करता था अक्सर होता भी यही था कि बात-बात में वह इसी जुमले को दोहराता और हमेशा उसके दिए जवाब में दो मत ...Read More

“मैं भी तो नाम और हुलिया बदलकर जीते-जीते तंग आ चुकी हूँ” “जब आमिर खान, इमरान हाशमी जैसे नामी-गिरामी हस्तियों को अपने मजहब की वजह से मकान खरीदने में समस्या होती है तो ऐसे मुल्क में हम जैसे आम नागरिक ...Read More

उस रोज़ ज़ाहिदा ने महक के बाथरूम में मर्दाना बाथ-रॉब में लिपटी ब्रीफ देखी थी तभी उसके दिमाग में कुछ खटका जरूर था पर फिर विचारों को परे झटककर वह सोने चली गयी थी किन्तु महक के ...Read More