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भाग 1 — अजनबी जो सब जानता थाशहर का नाम रूद्रनगर था।एक ऐसा शहर जहाँ रातें ज़्यादा...
चट्टान सिंह की बात सुनकर दक्षराज बहुत घबरा जाता है़ और फोन को काट देता है। दक्षर...
भाग 1 शाम का आसमान हल्के सुनहरे रंग में डूब रहा था। हवेली के पुराने बरामदे में ज...
एपिसोड 16: लिली का क्लोन प्रकट हुआ—पोर्टल से। "हाँ, रानी! धरती को ऊर्जा दो। ब्रह...
छह महीने बाद हरिद्वार सेंट्रल जेल की दीवारें सफेद हैं, लेकिन मुझे हमेशा लगता है...
शीर्षक: 2025 में भी अधूरी आज़ादीसाल 2025 की सर्द सुबह थी। शहर के बाहर बने फ्लाईओ...
लेकिन ठंडी हवेली, मंडप सजाया गया है, गुलाबी और सुनहरी डेकोर के बीच शहनाई की हल्...
अनकही देहलीज़भाग 1: अदृश्य रेखाएं"साहब, चाय टेबल पर रख दी है।"आदित्य ने अपनी फाइल...
शून्य की यात्रा — न सत्य, न असत्य जीवन में न कुछ अंतिम सत्य है,न कुछ अंतिम असत्...
Hi दोस्तों,आज Hug Day है… तो एक किस्सा share करना चाहता हूं...College के 2 साल ह...
आज सुबह प्रोफेसर आमिर खान केस की पहली सुनवाई है जिनके कत्ल इल्ज़ाम उनकी स्टूडेंट रिहाना पर हैं जो सउदी अरब का सबसे हाई प्रोफाइल केसों में से एक हैंईरानी न्यायालयईरानकी किंग फैसल य...
उस दिन बिशप वहां पधारने वाले थे। सैंतिएगो नासार तड़के साढ़े पाँच बजे ही उठ गया था ताकि वह भी बिशप को लाने वाली नाव का इंतज़ार कर सके। उस अभागे को क्या मालूम था कि वह उस दिन आखिरी...
हेलो दोस्तों कैसे हे? जैसे की आप सब जानते हो मेने इस २०२० के नए साल को एनाउंसमेंट किया था की हर रविवार को में एक नयी स्टोरी के साथ आ रहा हु | आज इस साल का और इस महीने का तीसरा रविव...
विरासत पार्ट - 1 इतनी मुश्किल भरे इन दिनों के बाद अ...
*"पार्ट-1"*रात के करीब दस बजे का समय था।हर तरफ खामोशी छाई हुई थी।"आह..... !आह....! मैं कहाँ हूं,मैं कौन हूँ ?!" कोलकाता शहर के आलीशान प्राइवेट सिटी हॉस्पिटल के एक ब...
यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के पश्चात समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करूं। किसी ने सलाह दिया कि मैं एम० सी० ए० कर लूं। मगर उसमें बहुत पैसा लगता था। फीस देने के लिए मेरे घर में पैस...
होप इस हेलये एक काल्पनिक कथा है। जिसे रोचक बनाने के लिए कुछ वर्तमान प्रवाह, स्थान, संस्था, देश और अन्य उचित वस्तुओं का प्रयोग किया गया है। जिसका वस्तावमे हो रही घटनाओं के साथ संब...
वह आवाज़ ठीक वैसी थी मानो किसी चाकू या तलवार को, धारदार बनाने के लिए, किसी पत्थर पर घिसा जा रहा हो। हालाँकि यह आवाज़ बहुत ही धीमे से उभरी थी लेकिन इस सन्नाटे में साफ-साफ सुनी जा सकती...
एसिड अटैक (1) ‘‘हाँ, हूँ, ठीक ही था’’ ऐसे जवाब सुन-सुन देवधर जान गये कि सेलेना उकता रही थी। देवधर ने उसे आराम करने देना ही मुनासिब समझा। थोड़ा बुरा तो लगा था देवधर को, कि उनकी बेटी...
शापित आशीष दलाल [बचपन में यौनउत्पीड़न का शिकार हुए युवक की अपराधी से बदला लेने की भावना और अंतर्द्वंद पर आधारित अपराध कथा] (१) ‘अंकल ! आपकी दाढ़ी चुभती है.’ दस वर्षीय नमन ने अपने नन्...
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