×

उस दिन गरिमा अपने विद्यालय से लौटकर घर पहुँची, तो उसकी माँ एक पड़ोसिन महिला के साथ दरवाजे पर खड़ी हुई बाते कर रही थी। गरिमा जानती थी कि वह महिला, जो उसकी माँ के साथ बाते कर रही ...Read More

पुष्पा दलित जाति की लड़की थी। गरिमा की समवयस्क होते हुए भी वह कक्षा एक मे पढ़ती थी, जबकि गरिमा कक्षा तीन मे पढ़ती थी। उसकी पढ़ाई के पीछे भी एक रोचक कहानी थी, जो गरिमा ने रची थी। ...Read More

गरिमा ने माँ से ऐसे किसी भी विषय पर प्रश्न पूछना लगभग—लगभग बन्द सा कर दिया था, जिस पर माँ चाहती थी कि गरिमा उन बातो से दूर रहे। अब वह धैर्य धारण करके बड़ी होने की प्रतीक्षा करने ...Read More

गरिमा बारहवी कक्षा उत्तीर्ण कर चुकी थी और स्नातक मे प्रवेश लेने की तैयारी कर रही थी। जिन दिनो उसकी बहन प्रिया की हत्या हुई थी, वह नौवी कक्षा मे पढ़ती थी। तब समाज के कई वरिष्ठ लोगो ने ...Read More

जब गरिमा की चेतना लौटी, तब उसने स्वय को अस्पताल मे बिस्तर पर पाया। उस समय उसके चेहरे पर भयमिश्रित चिन्ता की रेखाएँ स्पष्ट दिखायी दे रही थी और उसका मन अनेको सकल्प—विकल्पो से जूझ रहा था। उसने देखा ...Read More

अपनी मौसी के साथ रहते हुए गरिमा को तीन महीने का समय बीत चुका था। उस दिन उसके पिता उससे मिलने के लिए वहाँ पर आये थे। वही पर उसने अपने पिता को मौसी से बात करते हुए सुना ...Read More

दो—तीन महीने तक गरिमा के पिता सुयोग्य वर की तलाश मे भटकते रहे। अन्त मे पर्याप्त भाग—दौड़ करने के उपरान्त ऐसा वर मिल ही गया, जो सुशिक्षित होने के साथ—साथ सम्पन्न घराने का रोजगाररत भी था। लड़का सरकारी नौकर ...Read More

अपने बचपन से ही गरिमा की प्रकृति कृत्रिमता के विरुद्ध थी। अपने सौन्दर्य मे वृद्धि करने के लिए आभूषणो अथवा कृत्रिम सौन्दर्य—प्रसाधनो की आवश्यकता का अनुभव उसने कभी नही किया। वह बहुत छोटी थी, जब उसके पिता ने उसे ...Read More

सास की मृदु वाणी मे प्रभा के परिवार का इतिहास सुनकर गरिमा की जिज्ञासा और अधिक बढ़ गयी थी। वह प्रभा के परिवार क इतिहास विस्तार से सुनना चाहती थी ताकि अपने समाज की विकृत व्यवस्था को समझ सके। ...Read More

आशुतोष की अनुमति मिलने के पश्चात्‌ गरिमा निश्चिन्त हो गयी थी। उसने अगले ही दिन प्रभा को बुलाने के लिए प्रयास करना आरम्भ कर दिया। सयोगवश एक दिन पश्चात्‌ ही पुष्पा उससे मिलने आ पहुँची। पुष्पा के माध्यम से ...Read More

‘पुरुषार्थी प्राणी की सहायता स्वय ईश्वर करता है' और ‘वह कभी किसी का पारिश्रमिक नही रखता है, देर—सबेर सबके परिश्रम का फल देता है' यह उक्ति गरिमा के ऊपर पूर्णतया चरितार्थ हो रही थी। उसने अपनी अधूरी शिक्षा को ...Read More

गरिमा का परीक्षा—फॉर्म भरा जा चुका था। उसने परीक्षा मे अच्छे अक प्राप्त करने के लिए अध्ययन आरम्भ कर दिया था। गरिमा चाहती थी कि श्रुति के अध्ययन मे भी वह उसकी यथासम्भव सहायता करे, परन्तु, श्रुति को गरिमा ...Read More

दो दिन कान्ता मौसी के घर रहकर गरिमा अपने पिता के घर वापिस लौट आयी । जब वह घर लौट कर आयी, आशुतोष उसकी प्रतीक्षा कर रहा था। आशुतोष का कहना था कि उसकी माँ ने वह समय, जब ...Read More

प्रातः आठ बजे थे। अक्षय अपने ऑफिस जाने के लिए तैयार हो चुके थे और नाश्ते की प्लेट को जल्दी—जल्दी खाली करने का प्रयास कर रहे थे। अचानक उनकी दृष्टि कमरे के अन्दर से निकलते हुए अपने बेटे अश ...Read More