ek safar - dosti se ajnabi ka in Hindi Love Stories by Soyab Hala books and stories PDF | एक सफर - दोस्ती से अजनबी का

एक सफर - दोस्ती से अजनबी का

में सेकंड ईयर का लड़का । वो फर्स्ट ईयर की लड़की थी , में c s e का स्टूडेंट ओर वो e c e पढ़ती थी नई - नई आइ थी वो कॉलेज में मेरी क्लास के जस्ट सामने उसकी क्लास लगती थी वो आते संग ही कॉलेज में इतनी फेमस हो गयी थी के उसकी एक जलक पाने के लिए उसकी क्लास के बाहर लड़को की लाइन लगती थी अपनी फ्रेशर पार्टी में उसने किसी अफगानी सोंग पे डांस किया था बस तभी से वो सबकी दिल की धड़कन ओर पहेली पसंद बन गयी थी में भी अपनी क्लास में पीछे बिल्कुल कर्नल वाली सीट पे बैठता था वहां से उसे निहारने का ना एक सबसे सही व्यू मिलता था सबकी बोड पे नजरे होती थी और मेरी सामने वाली क्लास की उस लडक़ी पे,,,

अब सितारों में क्या रखा था यार,,,

जब चांद खुद बेठा है मेरी खिडकि पे ।

एक मज़े की बात बताऊ हम दोनों का रूट सेम था तो अब वो मेरी बस में जाति थी उसके बस में कोई अलग दोस्त थे हा पर इतना था कि वो मेरा नाम जानती थी सुबह मेरे बाद ओर साम को मुझसे पहले उसका स्टॉप था अभी में उसके करीब हो कर भी उससे दूर बहोत था एक दिन की बात है छुट्टी टाइम बहोत तेज बारिश हो रही थी और वो बस में विंडो साइड अकेली बैठी हुई अपने बालों को सुकाने की कोशिस कर रही थी में भी भागता - भागता बारिस से बचता हुआ बस में पहोचा उसके बगल की सीट ही एक खाली बची थी उससे पूछा मेने में यहाँ बैठ सकता हु क्या ? अपने बालों को सुल्जाते हुए उसने बोला या स्योर ,,

ये पहेली दफा था जब उससे मेने कोई वर्ड एक्सचेंज किये हो हम साथ बेठे हुए उस सफर में बस चुप -चाप ही बैठे थे अचानक उसने पूछा मुझसे आप सेकंग ईयर में होना ? हा वो सामने वाली क्लास में दिखते रहते थे मेने बोला हा फिर बातें चलती रही और पता नही कहा तक पहोंच गई उसने बताया वो सलमान खान की कितनी बड़ी फेन है और टी वी सीरियल बिल्कुल पसंद नही सिवा एक को छोड़ के " थपकी प्यार की ",,,

में उससे पहेली बार मिल रहा था पहेली मुलाकात में इतना गुल - मिल गया उससे लग ही नही रहा था वो पहेली दफ़ा मिल रही थी कुछ मजाक की बात कही और कुछ खास बाते भी बताई उससे डांस ओर ड्रॉइंग करना बहुत पसंद है , उसने कुछ ड्रॉइंन भी दिखाया मुजे अपने कॉलेज से उसके स्टॉप का रास्ता 20 मिनिट का था पर बारिस की वजह से वो सफर कुछ 40 मिनिट का बना जाने से पहले उसने बाय बोला मुझसे ओर एक बात और कह गई जिसकी उम्मीद की नहीं थी मेने see u tomorrow,,

ऐसा अहेसास पहेली बार हो रहा था जैसे कोई सपना सच हो गया हो वो गई और मैने आगे के 10 मिनिट का सफर काटने के लिए headpones का सहारा लिया घर गया चहरे पे एक स्माइल लेके वो पूरा लम्हा रिवाइंड हो जा रहा था सुरु से लेके, अगली सुबह excitement में मेरी आँख भी जल्दी खुल गई स्टॉप पे भी 10 मिनिट पहले पहोंच गया और बस खुद 20 मिनिट लेट थी में जहाँ हमेसा से बेठता था वही बैठा बस की सेकंग लास्ट सीट ही मेरा सुरु से अड्डा था 10 मिनिट बाद उसका स्टॉप आया दिमाग के रहा था कि वो जहा बैठती है आगे अपनी सहेली के पास ही बैठेगी दिल के रहा था एक बार के लिये ही सही पर उसकी नजर मुजे जरूर ठुगेगी , सबकी आरज़ू थी वो खूबसूरत के साथ बेहद क्यूट भी थी सब उसकि बस एक जलक पाने को मिटने को तैयार थे और यहाँ अपनी बातों से मेरा दिल वो पहले ही अपने पास ही रख चुकी थी , वो धिरे धिरे आगे बढ़ती गई एक सीट, दूसरी सीट, तीसरी सीट, क्रोस चौथी सीट पे उसकी सहेली बैठी थी और वहाँ पीछे में बैठा था वो चौथी सीट पे रुकी ओर बोली में पीछे बैठ रही हु ओर चलते - चलते मेरे पास आई और बोली hii - how are you ? मेने सुना और बस में जितने भी लड़के थे सबकी नजर मुज पे हैरान, परेसान , माहौल ऐसा जैसे मेने कोई वर्ल्ड कप जीत लिया हो , वो बैठी मेरे पास ओर बोली अपनी साथ वाली सीट ना बचा के रखना अबसे में यही बेठुगी मन - मन मे कहा मेने तुम्हे तो पलको पे बैठा लिया है सीट क्या चीज है पगली ,,,

तो रोज हम बस में साथ ही जाते थे , अछछि दोस्ती भी हो गई थी हमारी , आज काफी हॉट लग रही हो मेरा फ़्लर्ट करना ऐसे सुरु हुआ था उसने भी हस के जवाब दिया तो रिस्ता ओर गहरा होता गया उसका स्टॉप आता था और जब उत्तर जाती थी नजर कही और नही मेरी खिडकी पर रुक जाती थी याद है मुजे में कैसे उससे फ्लाईंग किश से अलविदा करता था वो भी हस्ते हुए बस जवाब में " भप्प " कहे कर चली जाती थी , हैडपोन्स लाना उसने छोड़ दिया था चलता - फिरता रेडियो अब उसका में हो गया था , अब कोई भी बात करने में उससे जरा भी हिचखीचहत नही थी ,

जोड़िया ऊपर वाला बनाता है ना मुजे लगा मेरी जोड़ी मुजे मिल गई थी , मेरे दोस्त भी मुजे कहेते के वो तेरी हो चुकी है , वो कॉलेज की सबसे खूबसूरत लड़की हजार लोगों में से मेरे पास आके बैठती थीं इतनी किस्मत अछ्छी मेरी कैसे हुई जिसके पिच्छे पूरी दुनिया पागल वो शायद मुजे चाहती थी लगभग एक साल तक हम रोज बस साथ आते - जाते थे सफर में ही इतना मजा आता था कि मंजिल की परवाह छोड़ दी थी मेने सायद इसी लिए दिल की बात जुबान से दूर ही रखी थी ,

फिर वो दो दिन तक कॉलेज आई नही मेने कॉल किया तो उसने बोला " शिफ्टिंग " में बिजी थी

शिफ्टिंग ?
उसने बताया कि वो घर शिफ्ट कर रही है तो कॉलेज परसो से आएगी मेने कहा ठीक है , फिर ख्याल आया कि कुछ ठीक नही है यार उसका घर छिफ़्ट होगा तो रूट भी चेंज होगा , ओर रूट चेंज हुआ तो बस भी बदलेगी ना ओर अभी exam के बाद तो नया सेक्सन सुरु हो जाएगा और साथ ही बिलडीन भी बदल जाएगी फिर ना बस में ना क्लास के सामने वो तो मुजे मिल ही नही पाएगी ,

मेने फिर उससे कॉल लगाया और पुछ्छा तो फिर अब तुम बस में नही आओगी ? परसो आखरी दिन समझलो , मेने भी सोचा एक बस ही तो है जहाँ हम मिलते है वही से तो सब सुरु हुआ था, वो दिल की बात का बोझ सर पे था , आखरी दिन उससे confusion में अलविदा नही कहना चाहता था में सोचा बाद में कह दुंगा , वो परसो आई और एक साल तक जो यहाँ यादे बनी है हम उसको दोहरा रहे थे मुजे मिस मत करना वो कहे कर गई , मेने आखरी बार फ्लाईंग किश दी और आज उसने " भप्प " नही किया वो पहली बार स्माइल करके गई , अब कभी - कभी रिसेस में मिलते थे , फोन पे पहले भी बात कम ही होती थी , वक़्त के साथ साथ वो बाते कब hi - hello तक पहोंच गई, अपना रिस्ता रिवर्स होने लगा , अजनबी से एक पक्के दोस्त वो फिर अजनबी की तरफ बढ़ ने लगी , उससे में आज तक कह नही पाया के वो मेरे लिए क्या थी , क्यों कि जब कत मौका तरासा मेने मेरी फ्रेंड स्ट्रेंजर हो चुकी थी , अब कभी मिलते है तो हेलो करके गुजर जाते है दोनों जरासा ठहरते भी नही, अब क्या हाल के अलावा कुछ बचता भी नही पूछने के लिए , वक़्त-वक़्त की बात है कभी दोस्त कभी अजनबी , चैट लिस्ट में वो नीचे जाती रही और रिस्ते में भी मगर दिल मे वही है मुजे अभी भी उसकी बात याद आती है जो उसने जाते हुए कही थी हम मिलते रहेंगे,,,

ओर ऐसी ही बरकरार रहेगी दोस्ती ,

रिस्ता उभर ते हुए देखा ,,,
ढलते हुए देखा
मेने दो दिल को एक साथ ही ,,,
मिलते - बिछरते देखा

फिर किसी दिन वही इत्तेफाक होगा वो बस की विंडो सीट पे बैठी मिलेगी और में पुछुगा में यहाँ बैठ सकता हु क्या,,?

दोस्त को अजनबी बनते देखा है कभी ?

बहोत दर्द होता है यार,,।

।।।। soyab hala ।।।।