Best Moral Stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Moral Stories in All books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cultur...Read More


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कॅलेंडर मधली क्रांती..जेव्हा सासू ने सुरु केला वजा मास. By Trupti Deo

कॅलेंडरमधली क्रांती... जेव्हा सासूने सुरू केला 'वजा मास'!सध्या सगळीकडे तीन वर्षांनी येणाऱ्या पारंपारिक अधिक मासाची, म्हणजेच धोंड्याच्या महिन्याची जोरदार रेलचेल सुरू आहे. मु...

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जया देव तारी - भाग 7 By Prof Shriram V Kale

जया देव तारी - भाग ०७त्याकाळी  इमारत बांधण्यापूर्वी   एक पाऊस काळ गेल्यावर पाया पक्का होतो   असं मानीत असत. म्हणून पायाच काम झाल्यावर एक पावसाळा भर  तरी  ते  तसंच राहू देत असत. त्य...

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साज़िश की गूँज By Irfan ayan Khan

गाँव की वह दोपहर और झुलसा देने वाली गर्म हवाएँ गवाह थीं कि आज एक रिश्ता दम तोड़ चुका था। धूल उड़ती उन गलियों में जब अयान के कदम घर से बाहर निकले, तो उसके पीछे सिर्फ उसकी परछाईं नहीं,...

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पवित्र बहु - 14 By archana

एपिसोड – “शक की दीवार”शादी से लौटने के बाद…घर में सब कुछ सामान्य दिख रहा था।लेकिन…अंदर बहुत कुछ बदल चुका था। ज़हर की शुरुआतअगले ही दिन…दिव्यम के घर के बाहरएक औरत आई—वो पड़ोस में रह...

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ટ્યુશનની બહાર: પરસેવામાં પાકેલી પાક્કી વાતો By Munavvar Ali

ગઈકાલે સાંજે જ્યારે હું ટ્યુશનમાં ગયો હતો ત્યારે સર તરફથી અમુક ખાસ વાતો સમજાવવામાં આવી.જેમાં તેમણે કહ્યું કે "નોકરી થાય જ નહીં કરવો હોય તો ધંધો જ કરાય અને મારી લાઈન તો મિકેનિક છે મ...

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ಹಸಿರು ರೆಕ್ಕೆಗಳ ಪಯಣ By Saandeep Joshi

ಸಂಜೆ ಕೆಂಪಾದಂತೆ ಆಕಾಶದಲ್ಲಿ ಹಕ್ಕಿಗಳ ಸಾಲು ಒಂದು ನಿರ್ದಿಷ್ಟ V ಆಕಾರದಲ್ಲಿ ಸಾಗುತ್ತಿತ್ತು. ಹಳ್ಳಿಯ ಹಳೆಯ ಅಶ್ವತ್ಥ ಮರದ ಕೆಳಗೆ ಕುಳಿತಿದ್ದ ತಾತ ಮತ್ತು ಅವರ ಹತ್ತು ವರ್ಷದ ಮೊಮ್ಮಗ ಅನ್ವಿತ್ ಇದನ್ನು ಗಮನಿಸುತ್ತಿದ್ದ...

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बुझता दीपक By prem chand hembram

बुझता दीपक (एक मार्मिक कथा)कोयले की धूल और लाल मिट्टी से घिरे छोटे-से गाँव में झींगुर और जगा की दोस्ती मिसाल मानी जाती थी।लोग कहते—“एक लँगड़ा है, दूसरा आलसी…फिर भी दोनों की जोड़ी र...

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સ્પર્ધાત્મક પરીક્ષાઓ અને પેપર લીકની ઘટનાઓ By Tr Mrs Snehal Rajan Jani

લેખ:- સ્પર્ધાત્મક પરીક્ષાઓ અને પેપર લીકની ઘટનાઓ.લેખિકા:- શ્રીમતી સ્નેહલ રાજન જાની.તાજેતરમાં જ મેડીકલ ક્ષેત્રે લેવાતી NEET પરીક્ષાનું પેપર લીક થવાની માહિતિ મળી. એનાં પુરાવાઓ પણ મળ્ય...

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4500નું પેન્ટ અને 1500ની શીખ By Munavvar Ali

આજે સાંજે નોકરીએથી ઘરે પરત ફરતી વખતે ટ્રેનમાં રજા સાહેબ સાથે મુલાકાત થઈ. અમારી સામેની સીટ પર સૈયદ કાકા બેઠા હતા. રજા સાહેબ આવીને બેઠા કે તરત જ પેશાબ કરવા ઊભા થઈ ગયા. મેં તક ઝડપીને...

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मुक्त - भाग 13 By Neeraj Sharma

एक लकीर...... उपन्यास लिखने की कोशिश, इसमें है हम लोग कैसे कैसे काम कर के भी यही कहते है, हाँ परमात्मा, खुदा, अल्लाह को यही मंजूर था.....इसका धारावाहिक नहीं है ये लगातार चलती एक जो...

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जिंदगी एक परीक्षा है By Vijay Erry

---जिंदगी एक परीक्षा है लेखक: विजय शर्मा एरी  ---पहला अध्याय: कस्बे की गलियाँ और बचपनअमित का बचपन पंजाब के एक छोटे कस्बे में बीता। गलियाँ संकरी थीं, लेकिन उनमें जीवन की चहल-पहल थी।...

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मांई के मांई By Anant Dhish Aman

मनुष्य के जीवन में कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं, जिनका महत्व शब्दों में पूरी तरह व्यक्त नहीं किया जा सकता। वे रिश्ते केवल पारिवारिक संबंध नहीं होते, बल्कि जीवन की भावनात्मक जड़ों से जुड...

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कागज़ के सामने हारता इंसान - बोधार्थी रौनक़ । By Raunak

कागज़ के सामने हारता इंसान गाँव की पगडंडी पर धूल वैसे ही उड़ती है जैसे वर्षों से उड़ती आई है। फर्क इतना भर आया है कि अब आदमी के हाथ में हल कम और कागज़ ज़्यादा दिखते हैं। कागज़-जिन प...

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डबल स्टैंडर्ड By Shree Kriti

शाम का गहरा मगर सुहाना वक्त था। सत्तर वर्ष की मीरा देवी ड्राइंग रूम के आरामदेह सोफे पर बैठीं अपनी ब्याहता बेटी, चित्रा, से फोन पर बात कर रही थीं। किचन से मसालों की बड़ी ही अच्छी खु...

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कलम की स्याही और समाज का सच By Vijay Erry

इसलिए मैं अब आपको एक पूर्ण, विस्तृत, साहित्यिक शैली की हिंदी कहानी दूँगा, जो 500 शब्दों में होगी। इसमें गहराई, पात्रों का विकास, संवाद, घटनाओं का विस्तार और समाज की परतों का चित्रण...

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हंटर - 2 By Ram Make

छाया झील के पश्चिमी तट पर बने अग्रज हवेली के प्रशिक्षण मैदान में, निधी अपने तीरंदाजी कौशल कि प्रैक्टिस कर रही थी, जबकि वरुण एक कोने में अपनी सेबर आर्ट की प्रैक्टिस कर रहा था ।उसका...

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जीवन के मौसम By PRINCE PREMKUMAR

मैं आशा करती हूँ कि आपका जीवन शांति और आनंद से भरा हो, ऐसा आनंद जो आपको जीवन के हर मोड़ पर स्थिरता का एहसास दिलाए।मैं आशा करती हूँ कि आप हर सुबह उठें और याद रखें कि दुनिया में अभी...

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डिजिटल सन्नाटा: एक अनकही कहानी !! By Anjali kumari Sharma

शहर की ऊंची इमारतों के बीच, एक छोटे से कमरे में बैठी मैं अक्सर सोचती हूँ कि हम कितना आगे निकल आए हैं। मेरे सामने रखा लैपटॉप और बगल में रखा फोन—ये दोनों मेरी दुनिया के सबसे बड़े दरव...

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हेल्पलाइन नंबर By Trupti Deo

आज एक बातमी वाचली… आणि मन शांत बसलंच नाही.एक तीस वर्षांचा तरुण—न्यायाधीश. समाजात उच्च पदावर असलेला, जबाबदारी असलेला, बुद्धिमान व्यक्ती. बाहेरून पाहिलं तर त्याचं आयुष्य स्थिर, यशस्व...

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जीवंत देवता By prem chand hembram

जीवंत देवता अदालत खचाखच भरी थी…पर एक अजीब सा सन्नाटा पसरा हुआ था—जैसे दीवारें भी आज कुछ अलग सुनने को तैयार हों।कटघरे में पंडित रामदीन खड़े थे…सूरज की तपिश से झुलसा चेहरा…पर आँखों म...

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अंधविश्वास - अंधेरा नहीं, सोच बदलो - 1 By Kaushik dave

Chapter 1: डर की शुरुआतरतनपुर…एक छोटा सा गाँव… गुजरात के किनारे बसा हुआ।दिन में ये गाँव बिल्कुल साधारण लगता था —मिट्टी के घर, कच्ची सड़कें, खेतों में काम करते लोग,और बच्चों की हँसी...

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कैद बा-मशक्कत By कमल चोपड़ा

​कैद बा-मशक्कतकमल चोपड़ा​प्रहार से बचने के लिए पीछे हटी थी, मुक्का उसे न लगकर दीवार में जा लगा था। दर्द से बिलबिलाता और गुस्से में फनफनाता हुआ पति लगभग पागल-सा हो आया था। पत्नी का...

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पुरस्कार By कमल चोपड़ा

पुरस्कारकमल चोपड़ा​सदानंद एक सीधा-सादा आदमी था। वह मेहनत-मजदूरी कर अपना और अपने बच्चों का पेट पालता। रोजाना की तरह आज भी वह काम पर जा रहा था कि किसी ने पीछे से आवाज देकर उसे रोका,...

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झूठ-सच By कमल चोपड़ा

झूठ-सच कमल चोपड़ा​   राजकुमार श्वेतांक की उम्र पंद्रह वर्ष थी। एक दिन घूमते-घूमते वह वन की ओर निकल गया। अचानक उस पर एक शेर ने हमला कर दिया। राजकुमार के हाथों से हथियार छूट गए। वह ल...

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બે રસ્તા એક ઓટલો By Munavvar Ali

સાંજના પટાણે પિતાજી અને હું ચા પીવા બેસ્યા હતા.તેવામાં મૂર્તિ કાકા ઘરે આવ્યા.પિતાજીએ સૌથી પહેલા મને પાણી લેવા મોકલ્યો અને તેમને ચા પાણીની ઓફર કરી. થોડીવાર તેઓ બેસ્યા પછી પિતાજી આઈસ...

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खोया हुआ विश्वास By कमल चोपड़ा

खोया हुआ विश्वास​  कमल चोपड़ाबंटी को खाली हाथ घर लौटा देखकर माँ ने हैरानी से पूछा— "नमक की थैली कहाँ है? मैंने तुझे दस रुपए देकर नमक की थैली लेने भेजा था ना?"​जवाब में बंटी ने सुबक...

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स्वाभिमान By कमल चोपड़ा

स्वाभिमान​  कमल चोपड़ास्कूल से आते ही विशू ने मां से कहा—'मां! मुझे आज ही नए कपड़े लेकर दो।'​'क्यों?' माँ ने पूछा।​'कल मेरे सबसे अच्छे दोस्त निखिल का जन्मदिन है...

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तक़लीफ़ By राज बोहरे

 तक़लीफ़ दोपहर की धूप अपनी पूरी तल्खी के साथ शहर की पुरानी सिविल लाइन की मंत्री निवास की बिल्डिंग पर झुकी हुई थी। बाहर खड़े नीम के पेड़ की छाया भी जैसे सिमटकर खुद में सिमट गई थी। भी...

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Back to Those Days By Insha noor

No matter what you are what's your age you still miss your old days sometimes you become too much nostalgic and you can't find an escape from that nostalgiaLike I'm the...

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વરસાદ પડે… ત્યારે ઘર દિલમાં પાછું આવી જાય છે By Daily life Stories

Missing Home વરસાદ આવ્યો... અને સાથે આવી ઘર ની યાદ વરસાદ આજે અહીં પણ પડતો હતો, પણ કંઈક અલગ લાગતું હતું. બારી પાસે ઊભી રહીને હું શહેરને જોઈ રહી હતી. ઉંચી ઈમારતો, ચમકતી લાઈટ્સ, દોડતી...

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मानवता की जीत By prem chand hembram

मानवता की जीत (अंतिम संस्करण)धनबाद जिले की छाती पर बसा रहिमनगर…एक छोटा सा कस्बा—जहाँ जिंदगी सरल थी, पर समाज दीवारों में बँटा हुआ।कुएँ अलग थे…रास्ते अलग थे…और दिल—अपने-अपने डर और दा...

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સંબંધો ના ડિપ્લોમેટ કિશન કાકા - 3 By AKHIL KUMAR

To be continue. કિશન કાકા એટલે મોટા ગજા ના ઉદ્યોગપતિ ૪૦ માણશ ની ટીમ તો એ એકલા હાથે હૅન્ડલ કરી દે. ટીમ મેનેજમેંટ.  HR મેનેજમેન્ટ.એમ્પ્લોયી ના ઇગો મેનેજમેન્ટ. બધા કર્મચારીઓ વચ્ચે ગજબ...

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અવાવરુ વાવનો અતીત - 1 By Ashoksinh jadeja

**પ્રકરણ ૧: સીમમાં સંભળાયેલો કાળજું ચીરતો અવાજ**          સૌરાષ્ટ્રની ખમીરવંતી ધરતી પર જાણે કુદરતે સોનાની મહોરો વેરવી હોય એવું એ રળિયામણું ગામડું. ગામની રક્ષા કરવા કુદરતે જાણે ચારે...

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મેચ્યુરિટિ ના સર્ટિફિકેટ આપતા હસમુખ કાકા By AKHIL KUMAR

પાપા ના ગયા પછી અચાનક જ  ઘર ની વાત બધી જવાબદારીઓ હતી મોટા મોટા ડીસીશન લેવાના હતા જે એક સમયે પાપા કરતા હતા એ બધા જ કામ આવી ગયા હતા.  ક્યારેક ઘર ના બીજા કાકા બાપા સાથે કામ કરવુ પડતુ....

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हर कदम परीक्षा By कमल चोपड़ा

हर कदम परीक्षा​ कमल चोपड़ाकाम की तलाश में इधर-उधर धक्के खाने के बाद निराश होकर मधुकांत घर लौटने लगा तो पीछे से आवाज आई, 'ऐ भाई, यहाँ कोई मजदूर मिलेगा क्या?'​मधुकांत ने मुड़...

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एक छोटी सी भूल By prem chand hembram

एक छोटी सी भूल“आप पुरानी सोच के हैं…”अपनी ही बेटी के मुँह से निकले ये शब्द,शहर के प्रतिष्ठित वकील रामगोपाल वर्मा के हृदय को चीर गए।उन्होंने जीवन में अनेक कठिनाइयाँ देखी थीं,परंतु क...

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बेड़ियां By Reena

बेड़ियांरात के 2:37 बज रहे थे।पूरा शहर नींद में डूबा था, लेकिन आरव के कमरे की लाइट अब भी जल रही थी।कमरे में किताबें खुली पड़ी थीं, लैपटॉप चालू था, टेबल पर कॉफी का कप आधा भरा था......

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स्वर आले जुळूनी - भाग 6 By Prof Shriram V Kale

 स्वर आले जुळूनी अंतीम भाग 6           जे.जे. मधून मला मास्टर्स डिप्लोमा मिळाला त्याच दरम्याने जे.जे. ची एक बँच गोव्यात पणजीला सुरु झाली. मी कान्व्होकेशन फॉर्म भरायला गेलो तेव्हा ए...

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हिम्मत न हार By कमल चोपड़ा

हिम्मत न हारकमल चोपड़ा​चलते-चलते अगम नदी तक आ पहुँचा था। कुछ देर तक वह पानी के तेज बहाव को देखता रहा फिर नदी के किनारे लगे एक पेड़ के तने से लिपट कर रोने लगा। आज विद्यालय में आठवीं...

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उजाले की ओर –संस्मरण By DrPranava Bharti

स्नेहिल नमस्कार प्रिय मित्रों मधुशाला...??? ============      वैसे तो हम अब उम्र की जिस कगार पर खड़े हैं ,यह मस्तिष्क...

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इंसानियत का इनाम By कमल चोपड़ा

इंसानियत का इनाम  कमल चोपड़ा​एक गाँव के एक सेठ का किसी ने दरवाजा खटखटाया। रात का वक्त था। ‘इस वक्त कौन हो सकता है?’ यह सोचते हुए सेठ ने दरवाजा खोला। देखा सामने एक चालीस-बयालीस वर्ष...

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कॅलेंडर मधली क्रांती..जेव्हा सासू ने सुरु केला वजा मास. By Trupti Deo

कॅलेंडरमधली क्रांती... जेव्हा सासूने सुरू केला 'वजा मास'!सध्या सगळीकडे तीन वर्षांनी येणाऱ्या पारंपारिक अधिक मासाची, म्हणजेच धोंड्याच्या महिन्याची जोरदार रेलचेल सुरू आहे. मु...

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जया देव तारी - भाग 7 By Prof Shriram V Kale

जया देव तारी - भाग ०७त्याकाळी  इमारत बांधण्यापूर्वी   एक पाऊस काळ गेल्यावर पाया पक्का होतो   असं मानीत असत. म्हणून पायाच काम झाल्यावर एक पावसाळा भर  तरी  ते  तसंच राहू देत असत. त्य...

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साज़िश की गूँज By Irfan ayan Khan

गाँव की वह दोपहर और झुलसा देने वाली गर्म हवाएँ गवाह थीं कि आज एक रिश्ता दम तोड़ चुका था। धूल उड़ती उन गलियों में जब अयान के कदम घर से बाहर निकले, तो उसके पीछे सिर्फ उसकी परछाईं नहीं,...

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पवित्र बहु - 14 By archana

एपिसोड – “शक की दीवार”शादी से लौटने के बाद…घर में सब कुछ सामान्य दिख रहा था।लेकिन…अंदर बहुत कुछ बदल चुका था। ज़हर की शुरुआतअगले ही दिन…दिव्यम के घर के बाहरएक औरत आई—वो पड़ोस में रह...

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ટ્યુશનની બહાર: પરસેવામાં પાકેલી પાક્કી વાતો By Munavvar Ali

ગઈકાલે સાંજે જ્યારે હું ટ્યુશનમાં ગયો હતો ત્યારે સર તરફથી અમુક ખાસ વાતો સમજાવવામાં આવી.જેમાં તેમણે કહ્યું કે "નોકરી થાય જ નહીં કરવો હોય તો ધંધો જ કરાય અને મારી લાઈન તો મિકેનિક છે મ...

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ಹಸಿರು ರೆಕ್ಕೆಗಳ ಪಯಣ By Saandeep Joshi

ಸಂಜೆ ಕೆಂಪಾದಂತೆ ಆಕಾಶದಲ್ಲಿ ಹಕ್ಕಿಗಳ ಸಾಲು ಒಂದು ನಿರ್ದಿಷ್ಟ V ಆಕಾರದಲ್ಲಿ ಸಾಗುತ್ತಿತ್ತು. ಹಳ್ಳಿಯ ಹಳೆಯ ಅಶ್ವತ್ಥ ಮರದ ಕೆಳಗೆ ಕುಳಿತಿದ್ದ ತಾತ ಮತ್ತು ಅವರ ಹತ್ತು ವರ್ಷದ ಮೊಮ್ಮಗ ಅನ್ವಿತ್ ಇದನ್ನು ಗಮನಿಸುತ್ತಿದ್ದ...

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बुझता दीपक By prem chand hembram

बुझता दीपक (एक मार्मिक कथा)कोयले की धूल और लाल मिट्टी से घिरे छोटे-से गाँव में झींगुर और जगा की दोस्ती मिसाल मानी जाती थी।लोग कहते—“एक लँगड़ा है, दूसरा आलसी…फिर भी दोनों की जोड़ी र...

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સ્પર્ધાત્મક પરીક્ષાઓ અને પેપર લીકની ઘટનાઓ By Tr Mrs Snehal Rajan Jani

લેખ:- સ્પર્ધાત્મક પરીક્ષાઓ અને પેપર લીકની ઘટનાઓ.લેખિકા:- શ્રીમતી સ્નેહલ રાજન જાની.તાજેતરમાં જ મેડીકલ ક્ષેત્રે લેવાતી NEET પરીક્ષાનું પેપર લીક થવાની માહિતિ મળી. એનાં પુરાવાઓ પણ મળ્ય...

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4500નું પેન્ટ અને 1500ની શીખ By Munavvar Ali

આજે સાંજે નોકરીએથી ઘરે પરત ફરતી વખતે ટ્રેનમાં રજા સાહેબ સાથે મુલાકાત થઈ. અમારી સામેની સીટ પર સૈયદ કાકા બેઠા હતા. રજા સાહેબ આવીને બેઠા કે તરત જ પેશાબ કરવા ઊભા થઈ ગયા. મેં તક ઝડપીને...

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मुक्त - भाग 13 By Neeraj Sharma

एक लकीर...... उपन्यास लिखने की कोशिश, इसमें है हम लोग कैसे कैसे काम कर के भी यही कहते है, हाँ परमात्मा, खुदा, अल्लाह को यही मंजूर था.....इसका धारावाहिक नहीं है ये लगातार चलती एक जो...

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जिंदगी एक परीक्षा है By Vijay Erry

---जिंदगी एक परीक्षा है लेखक: विजय शर्मा एरी  ---पहला अध्याय: कस्बे की गलियाँ और बचपनअमित का बचपन पंजाब के एक छोटे कस्बे में बीता। गलियाँ संकरी थीं, लेकिन उनमें जीवन की चहल-पहल थी।...

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मांई के मांई By Anant Dhish Aman

मनुष्य के जीवन में कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं, जिनका महत्व शब्दों में पूरी तरह व्यक्त नहीं किया जा सकता। वे रिश्ते केवल पारिवारिक संबंध नहीं होते, बल्कि जीवन की भावनात्मक जड़ों से जुड...

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कागज़ के सामने हारता इंसान - बोधार्थी रौनक़ । By Raunak

कागज़ के सामने हारता इंसान गाँव की पगडंडी पर धूल वैसे ही उड़ती है जैसे वर्षों से उड़ती आई है। फर्क इतना भर आया है कि अब आदमी के हाथ में हल कम और कागज़ ज़्यादा दिखते हैं। कागज़-जिन प...

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डबल स्टैंडर्ड By Shree Kriti

शाम का गहरा मगर सुहाना वक्त था। सत्तर वर्ष की मीरा देवी ड्राइंग रूम के आरामदेह सोफे पर बैठीं अपनी ब्याहता बेटी, चित्रा, से फोन पर बात कर रही थीं। किचन से मसालों की बड़ी ही अच्छी खु...

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कलम की स्याही और समाज का सच By Vijay Erry

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हंटर - 2 By Ram Make

छाया झील के पश्चिमी तट पर बने अग्रज हवेली के प्रशिक्षण मैदान में, निधी अपने तीरंदाजी कौशल कि प्रैक्टिस कर रही थी, जबकि वरुण एक कोने में अपनी सेबर आर्ट की प्रैक्टिस कर रहा था ।उसका...

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जीवन के मौसम By PRINCE PREMKUMAR

मैं आशा करती हूँ कि आपका जीवन शांति और आनंद से भरा हो, ऐसा आनंद जो आपको जीवन के हर मोड़ पर स्थिरता का एहसास दिलाए।मैं आशा करती हूँ कि आप हर सुबह उठें और याद रखें कि दुनिया में अभी...

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डिजिटल सन्नाटा: एक अनकही कहानी !! By Anjali kumari Sharma

शहर की ऊंची इमारतों के बीच, एक छोटे से कमरे में बैठी मैं अक्सर सोचती हूँ कि हम कितना आगे निकल आए हैं। मेरे सामने रखा लैपटॉप और बगल में रखा फोन—ये दोनों मेरी दुनिया के सबसे बड़े दरव...

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हेल्पलाइन नंबर By Trupti Deo

आज एक बातमी वाचली… आणि मन शांत बसलंच नाही.एक तीस वर्षांचा तरुण—न्यायाधीश. समाजात उच्च पदावर असलेला, जबाबदारी असलेला, बुद्धिमान व्यक्ती. बाहेरून पाहिलं तर त्याचं आयुष्य स्थिर, यशस्व...

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जीवंत देवता By prem chand hembram

जीवंत देवता अदालत खचाखच भरी थी…पर एक अजीब सा सन्नाटा पसरा हुआ था—जैसे दीवारें भी आज कुछ अलग सुनने को तैयार हों।कटघरे में पंडित रामदीन खड़े थे…सूरज की तपिश से झुलसा चेहरा…पर आँखों म...

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अंधविश्वास - अंधेरा नहीं, सोच बदलो - 1 By Kaushik dave

Chapter 1: डर की शुरुआतरतनपुर…एक छोटा सा गाँव… गुजरात के किनारे बसा हुआ।दिन में ये गाँव बिल्कुल साधारण लगता था —मिट्टी के घर, कच्ची सड़कें, खेतों में काम करते लोग,और बच्चों की हँसी...

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कैद बा-मशक्कत By कमल चोपड़ा

​कैद बा-मशक्कतकमल चोपड़ा​प्रहार से बचने के लिए पीछे हटी थी, मुक्का उसे न लगकर दीवार में जा लगा था। दर्द से बिलबिलाता और गुस्से में फनफनाता हुआ पति लगभग पागल-सा हो आया था। पत्नी का...

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पुरस्कार By कमल चोपड़ा

पुरस्कारकमल चोपड़ा​सदानंद एक सीधा-सादा आदमी था। वह मेहनत-मजदूरी कर अपना और अपने बच्चों का पेट पालता। रोजाना की तरह आज भी वह काम पर जा रहा था कि किसी ने पीछे से आवाज देकर उसे रोका,...

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झूठ-सच By कमल चोपड़ा

झूठ-सच कमल चोपड़ा​   राजकुमार श्वेतांक की उम्र पंद्रह वर्ष थी। एक दिन घूमते-घूमते वह वन की ओर निकल गया। अचानक उस पर एक शेर ने हमला कर दिया। राजकुमार के हाथों से हथियार छूट गए। वह ल...

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બે રસ્તા એક ઓટલો By Munavvar Ali

સાંજના પટાણે પિતાજી અને હું ચા પીવા બેસ્યા હતા.તેવામાં મૂર્તિ કાકા ઘરે આવ્યા.પિતાજીએ સૌથી પહેલા મને પાણી લેવા મોકલ્યો અને તેમને ચા પાણીની ઓફર કરી. થોડીવાર તેઓ બેસ્યા પછી પિતાજી આઈસ...

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खोया हुआ विश्वास By कमल चोपड़ा

खोया हुआ विश्वास​  कमल चोपड़ाबंटी को खाली हाथ घर लौटा देखकर माँ ने हैरानी से पूछा— "नमक की थैली कहाँ है? मैंने तुझे दस रुपए देकर नमक की थैली लेने भेजा था ना?"​जवाब में बंटी ने सुबक...

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स्वाभिमान By कमल चोपड़ा

स्वाभिमान​  कमल चोपड़ास्कूल से आते ही विशू ने मां से कहा—'मां! मुझे आज ही नए कपड़े लेकर दो।'​'क्यों?' माँ ने पूछा।​'कल मेरे सबसे अच्छे दोस्त निखिल का जन्मदिन है...

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तक़लीफ़ By राज बोहरे

 तक़लीफ़ दोपहर की धूप अपनी पूरी तल्खी के साथ शहर की पुरानी सिविल लाइन की मंत्री निवास की बिल्डिंग पर झुकी हुई थी। बाहर खड़े नीम के पेड़ की छाया भी जैसे सिमटकर खुद में सिमट गई थी। भी...

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Back to Those Days By Insha noor

No matter what you are what's your age you still miss your old days sometimes you become too much nostalgic and you can't find an escape from that nostalgiaLike I'm the...

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વરસાદ પડે… ત્યારે ઘર દિલમાં પાછું આવી જાય છે By Daily life Stories

Missing Home વરસાદ આવ્યો... અને સાથે આવી ઘર ની યાદ વરસાદ આજે અહીં પણ પડતો હતો, પણ કંઈક અલગ લાગતું હતું. બારી પાસે ઊભી રહીને હું શહેરને જોઈ રહી હતી. ઉંચી ઈમારતો, ચમકતી લાઈટ્સ, દોડતી...

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मानवता की जीत By prem chand hembram

मानवता की जीत (अंतिम संस्करण)धनबाद जिले की छाती पर बसा रहिमनगर…एक छोटा सा कस्बा—जहाँ जिंदगी सरल थी, पर समाज दीवारों में बँटा हुआ।कुएँ अलग थे…रास्ते अलग थे…और दिल—अपने-अपने डर और दा...

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સંબંધો ના ડિપ્લોમેટ કિશન કાકા - 3 By AKHIL KUMAR

To be continue. કિશન કાકા એટલે મોટા ગજા ના ઉદ્યોગપતિ ૪૦ માણશ ની ટીમ તો એ એકલા હાથે હૅન્ડલ કરી દે. ટીમ મેનેજમેંટ.  HR મેનેજમેન્ટ.એમ્પ્લોયી ના ઇગો મેનેજમેન્ટ. બધા કર્મચારીઓ વચ્ચે ગજબ...

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અવાવરુ વાવનો અતીત - 1 By Ashoksinh jadeja

**પ્રકરણ ૧: સીમમાં સંભળાયેલો કાળજું ચીરતો અવાજ**          સૌરાષ્ટ્રની ખમીરવંતી ધરતી પર જાણે કુદરતે સોનાની મહોરો વેરવી હોય એવું એ રળિયામણું ગામડું. ગામની રક્ષા કરવા કુદરતે જાણે ચારે...

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મેચ્યુરિટિ ના સર્ટિફિકેટ આપતા હસમુખ કાકા By AKHIL KUMAR

પાપા ના ગયા પછી અચાનક જ  ઘર ની વાત બધી જવાબદારીઓ હતી મોટા મોટા ડીસીશન લેવાના હતા જે એક સમયે પાપા કરતા હતા એ બધા જ કામ આવી ગયા હતા.  ક્યારેક ઘર ના બીજા કાકા બાપા સાથે કામ કરવુ પડતુ....

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हर कदम परीक्षा By कमल चोपड़ा

हर कदम परीक्षा​ कमल चोपड़ाकाम की तलाश में इधर-उधर धक्के खाने के बाद निराश होकर मधुकांत घर लौटने लगा तो पीछे से आवाज आई, 'ऐ भाई, यहाँ कोई मजदूर मिलेगा क्या?'​मधुकांत ने मुड़...

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एक छोटी सी भूल By prem chand hembram

एक छोटी सी भूल“आप पुरानी सोच के हैं…”अपनी ही बेटी के मुँह से निकले ये शब्द,शहर के प्रतिष्ठित वकील रामगोपाल वर्मा के हृदय को चीर गए।उन्होंने जीवन में अनेक कठिनाइयाँ देखी थीं,परंतु क...

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बेड़ियां By Reena

बेड़ियांरात के 2:37 बज रहे थे।पूरा शहर नींद में डूबा था, लेकिन आरव के कमरे की लाइट अब भी जल रही थी।कमरे में किताबें खुली पड़ी थीं, लैपटॉप चालू था, टेबल पर कॉफी का कप आधा भरा था......

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स्वर आले जुळूनी - भाग 6 By Prof Shriram V Kale

 स्वर आले जुळूनी अंतीम भाग 6           जे.जे. मधून मला मास्टर्स डिप्लोमा मिळाला त्याच दरम्याने जे.जे. ची एक बँच गोव्यात पणजीला सुरु झाली. मी कान्व्होकेशन फॉर्म भरायला गेलो तेव्हा ए...

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हिम्मत न हार By कमल चोपड़ा

हिम्मत न हारकमल चोपड़ा​चलते-चलते अगम नदी तक आ पहुँचा था। कुछ देर तक वह पानी के तेज बहाव को देखता रहा फिर नदी के किनारे लगे एक पेड़ के तने से लिपट कर रोने लगा। आज विद्यालय में आठवीं...

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उजाले की ओर –संस्मरण By DrPranava Bharti

स्नेहिल नमस्कार प्रिय मित्रों मधुशाला...??? ============      वैसे तो हम अब उम्र की जिस कगार पर खड़े हैं ,यह मस्तिष्क...

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इंसानियत का इनाम By कमल चोपड़ा

इंसानियत का इनाम  कमल चोपड़ा​एक गाँव के एक सेठ का किसी ने दरवाजा खटखटाया। रात का वक्त था। ‘इस वक्त कौन हो सकता है?’ यह सोचते हुए सेठ ने दरवाजा खोला। देखा सामने एक चालीस-बयालीस वर्ष...

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