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अधूरे सपनों की चादर by umaroshni in Hindi Novels
पहला अध्याय:---"तमन्ना को कभी नहीं पता चला कि उसकी ज़िंदगी कब सुबह से शाम और शाम से रात में बदलती जाती है।गली के खेल, मा...
अधूरे सपनों की चादर by umaroshni in Hindi Novels
अध्याय 2 – बचपन की गलियाँ और भीतर की कसकगाँव में थोड़ी ही दूरी पर बाबूजी के चाचा का घर था। सब उन्हें बड़े स्नेह से बाबा...
अधूरे सपनों की चादर by umaroshni in Hindi Novels
अध्याय 3 भय का आतंकबचपन का वह समय तनु के लिए किसी अनजाने बोझ की तरह था। घर की चारदीवारी उसके लिए कभी सुरक्षित पनाहगाह नह...
अधूरे सपनों की चादर by umaroshni in Hindi Novels
अध्याय 4तनु अभी छोटी ही थी, मगर माँ ने रसोई की पूरी ज़िम्मेदारी उसके कंधों पर डाल दी थी। जैसे ही सूरज ढलता और घर में सब...
अधूरे सपनों की चादर by umaroshni in Hindi Novels
अध्याय 5– घर के आँगन की किलकारियाँघर के बाहर एक लंबी कतार में कीकर के पेड़ खड़े थे। उनकी टेढ़ी-मेढ़ी डालियाँ, काँटों से...