बाबा. by Raj Phulware in Hindi Novels
बाबा भाग 1 लेखक राज फुलवरेविट्ठल पाटिल अब उम्र के उस पड़ाव पर आ चुके थे, जहाँ शरीर धीमा हो जाता है पर मन अब भी पुरानी तर...
बाबा. by Raj Phulware in Hindi Novels
बाबा भाग 2 सुबह के पाँच बज चुके थे। शहर धीरे-धीरे जाग रहा था। आसमान में हल्की लालिमा थी, जैसे सूरज ने पर्दे के पीछे से झ...