बारह बरश का इंतज़ार by kusum kumari in Hindi Novels
कुसुम सामने बैठे शीशे में खुद को घूरे जा रही थी। उसने खुद को देखा ! लाल साड़ी, बड़े-बड़े झुमके, माथे पे बिंदी, खुले बाल...
बारह बरश का इंतज़ार by kusum kumari in Hindi Novels
कमरे में सिर पकड़े बैठी कुसुम के ज़ेहन में ! बारह बरस पहले की यादों ने हल्के से दस्तक दी ! और कुसुम उन्हें आने से रोक नह...
बारह बरश का इंतज़ार by kusum kumari in Hindi Novels
अगले दिन उसकी नींद बाहर से आते शोर से खुली।बाहर से हँसने की आवाज़ें आ रही थीं।कुसुम ने अपना सिर पकड़ लिया और उठकर बैठ गई...