Anath by Dev Kumar Rawat

अनाथ. by Dev Kumar Rawat in Hindi Novels
"जिस दिन इंसान नहीं, किस्मत रोई थी..." रात के ठीक बारह बजे... आसमान जैसे अपना सारा दर्द धरती पर उँडेल रहा था। बिजली की ह...
अनाथ. by Dev Kumar Rawat in Hindi Novels
रात गहरा चुकी थी। अनाथालय के लंबे बरामदों में सन्नाटा पसरा हुआ था। टूटी हुई खिड़कियों से आती ठंडी हवा दीवारों से टकराकर...
अनाथ. by Dev Kumar Rawat in Hindi Novels
उस रात... आसमान पूरी तरह शांत था। बारिश रुक चुकी थी, लेकिन हवा में अब भी मिट्टी की भीनी-सी खुशबू तैर रही थी। अनाथालय के...