त्रिवेणी by Triveni chakrdhari in Hindi Novels
अध्याय 1     दरपन मा दिखत ओ सूजन अउ नील के चिंहा मन जनो मोर धरम अउ मोर त्याग के खिल्ली उड़ावत रहिन। मैं सोचत रहेंव कि आख...