श्रापित एक प्रेम कहानी

(356)
  • 225
  • 0
  • 205.7k

अमावस्या की रात थी और रात के 11 बज रहे थे । भानपुर गांव का एक तांत्रिक अपनी तात्रिकं साधना करने के लिए सुंदरवन की तरफ जा रहा था । गांव मे ये मान्यता थी के जो कोई भी तात्रिकं अमावस्या की मध्य रात्री को साधना करेगा उसे असिम शक्ती के साथ साथ अपार धन भी प्राप्त होता है । घना जंगल, चारों ओर धुंध, चाँद गायब, केवल मशालों की मद्धम रोशनी > "अमावस्या की रात थी… जब पूरा भानपुर गाँव अपनी साँसें थामे बैठा था।" क्योकि हर अमावस को भानपुर मे आता है एक कहर मौत का कहर । गांव मे सभी सांत और डर से चुप चाप अपने घर के अदर बैठे थे तभी वहां पर तेज वहां चल रही थी ----

1

श्रापित एक प्रेम कहानी - 1

अमावस्या की रात थी और रात के 11 बज रहे थे । भानपुर गांव का एक तांत्रिक अपनी तात्रिकं करने के लिए सुंदरवन की तरफ जा रहा था । गांव मे ये मान्यता थी के जो कोई भी तात्रिकं अमावस्या की मध्य रात्री को साधना करेगा उसे असिम शक्ती के साथ साथ अपार धन भी प्राप्त होता है ।घना जंगल, चारों ओर धुंध, चाँद गायब, केवल मशालों की मद्धम रोशनी> "अमावस्या की रात थी… जब पूरा भानपुर गाँव अपनी साँसें थामे बैठा था।" क्योकि हर अमावस को भानपुर मे आता है एक कहर मौत का कहर ।गांव मे सभी ...Read More

2

श्रापित एक प्रेम कहानी - 2

साधक गुस्से से कहता है ---साधक :- तुने मेरी सारी मेहनत पर पानी फेरा , मेरी ब्रम्हचार्य की परीक्षा , पर जब मेरा ब्रह्मचार्य टूट ही गया है तो क्यो ना तुझे पुरी तरह से भोगा जाए ।इतना बोलकर वो साधक अपने जेब से कुछ निकालता है और एक मंत्र पड़ता है ---साधक :- > “ओम् मनोहराय नमः” > “चन्द्रकान्ता तेजो भूते”इतना बोलकर वो साधक उस परी के उपर भस्म फेंक देता है जिससे परी की ताकत कमजोर पड़ जाती है और वो साधक उस परी को पकड़कर उसे जमीन मे लिटा देता है ।परी साधक से ...Read More

3

श्रापित एक प्रेम कहानी - 3

दक्षराज को एक गेरुआ वस्त्र पहनने ध्यान में लीन एक बाबा दिखई देता है। जिनकी बड़ी बड़ी दाड़ी मुछे तथा हाथ , पैर औऱ मुह में भस्म लगा था । "और उनके दोनो और एक एक सेवक खड़े थे , ताकी बाबा के ध्यान में कोई बाधा ना आए । बाबा के पास एक त्रिसुल था और सामने कुछ मानव खोपड़ियां।वो बाबा ध्यान मे मग्न था ।ये बाबा कोई और नहीं बल्की अघोरी बाबा है। दक्षराज अघोरी बाबा के सामने हाथ जोड़ कर चुप चाप खड़ा था । तभी बाबा ध्यान में रहते ही कहता है ।अघरी बाबा ---- ...Read More

4

श्रापित एक प्रेम कहानी - 4

अघोरी कहता है ----तुझे ये मणि शुद्ध करना होगा और तेरा कार्य पूर्ण होगा और तु श्राप से मुक्त जाएगा ।दक्षराज कहता है ।दक्षराज ---- इंसान का रक्त बाबा ?अघोरी कहता है ।बाबा ---- ह़ा़ दक्ष इंसान के छाती का रक्त। ! और वो भी किसी ऐसे इंसान की जो पूर्णिमा तिथि के रोहिणी नक्षत्र के बरियान योग में जन्मा हो । ऐसे इंसान की तलाश करके तुझे उसके रक्त से मेघ मणि को अभिषेक करना होगा । क्योकी ये देत्य मणी है और देत्य मणी केवल रक्त से ही शुध्द होती है दक्षराज ।अघोरी की बात सुनकर दक्षराज ...Read More

5

श्रापित एक प्रेम कहानी - 5

आज से तीन माहिना तक मतलब जन्माष्टमी तक इसका मृत्यु योग चलेगा । इन तीन महिनो तक इस पर भारी रहेगी । इतना सुनकर इंद्रजीत एकांश और गिरी तीनो के होश उड़ जाते हैं । इंद्रजीत घबरा कर कहता है । ये..ये..ये..ये आप क्या कह रहे हैं बाबा ? मृत्यु योग ! मेरे बेटे पर ? साधु बाबा कहता है । हाँ बेटा मृत्यु योग । साधु बाबा एकांश को अपने पास इशरे से बुलाता है और कहता है । बेटा मेरी बात सुनकर तू घबरा गया क्या ? एकांश कहता है । नहीं बाबा में घबरा नहीं रहा ...Read More

6

श्रापित एक प्रेम कहानी - 6

सत्यजीत :- एकांश गिरी ने फोन किया था। वो धापा लेकर आ रहा है।सत्यजीत की बात सुनकर एकांश अपने पर हाथ रख के कहता है।एकांश :- हे भगवान हो गया कल्याण। इनको भी अभी आना था ।सत्यजीत इतना बोला ही था के तभी सत्यजीत की नजर मीरा पर पढ़ती है जो सत्यजीत को ही देख रही थी जिसे दैख कर सत्यजीत की बोलती बंद हो जाती है। सत्यजीत घबरा कर एकांश की और देखता है और इशारा करके पुछता है।सत्यजीत :- क्या हुआ ??एकांश हाथ को गले में ले जा कर इशारा करता है। गए काम से एकांश मन ...Read More

7

श्रापित एक प्रेम कहानी - 7

वो जंगल इतना घना था के किसी भी रोशनी का वहां पँहूचना ना मुमकीन था एकांश अपनी नजरे इधर घुमाता है तो एकांश को अपने आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था के इस जंगल में इतनी सुंदर जगह भी हो सकता है ।जिसके बारे में आज तक किसको ना मालुम है और ना कभी सुना है । वहां पर बहते पानी की सुंदर आवाज और चारो और रंग बिरेंगे फूल उस जगह को और भी रोमांचक बना रहा था के जैसे ये धरती नहीं कोई और लोक है ।एकांश.. जो कुछ दैर पहले हांफ रहा था अब उसकी ...Read More

8

श्रापित एक प्रेम कहानी - 8

वर्शाली के इतने करीब आने से एकांश का दिल जौर जौर से धड़क रहा था । एकांश बस वर्शाली दैखे जा रहा था । फिर वर्शाली अपना हाथ एकांश के सिने पर रख देती है । वर्शाली के छुने से एकांश के पुरे शरीर पर बिजली जैसी करंट दौड़ जाती है और दिल धड़कन अब और तेज हो जाती है ।वर्शाली कहती है ।वर्शाली :- ये क्या एकांश जी आपका दिल तो जौर जौर से धड़क रहा है ।एकांश कुछ कहता इससे पहले वर्शाली कहती है ।वर्शाली :- आज के लिए इतना ही एकांश जी । मैं कल फिर ...Read More

9

श्रापित एक प्रेम कहानी - 9

आलोक दक्षराज की और देखता है और कहता है ।आलोक :- वो एक काम है इसिलिए मुझे जाना होगा बोलकर आलोक वहा से चला जाता है ।दक्षराज नीलू को इशारा करके आलोक के पिछे जाने कहता हैं तो नीलू भी वहा से आलोक के पिछे चला जाता है । दक्षराज अपने चादर के अंदर से मणि को निकलाता है उसे फिरसे देखने लगता है ।इधर आलोक एकांश को लेकर बाइक से सुंदरवन की और जा रहा था । के तभी आलोक को उसके पिछे नीलू दिखई देता है जो इन दोनो का पिछा कर रहा था। आलोक अपने मन ...Read More

10

श्रापित एक प्रेम कहानी - 10

चतुर गुस्से से कहता है ।चतुर :- क्या बोला बे छक्क....... साले रुक तु ।इतना बोलकर चतुर गुना को जाता है । तो गुना चतुर को रोकते हूए कहता है -----गुना :- रुक जाओ , रुक जाओ ----- बस यही दोस्ती यही प्यार।गूना के इतना पर सभी हंसने लगता है और फिर गूना सबके लिए चाय बिस्किट लगाने को कहता है ।गुना :- चाचा सबके लिए चाय बिस्किट ले कर आओ । आज मेरा दोस्त मर्द बना है ।चतुर समझ जाता है के गुना उसका मजा ले रहा है इसिलिए अब वो बिना कुछ बोले चुप चाप बैठा रहता ...Read More

11

श्रापित एक प्रेम कहानी - 11

चटान सिंह कहता है ----चट्टान सिंह :- वो इंद्रजीत का बेटा एकांश आया है ना । लंदन से डॉक्टर पढ़ाई करके तो गांव में अस्पताल खोलने की खुशी में उन्होनें आज घर में पार्टी रखी है और हम सबको बुलाया है ।सोनाली कहती है ---सोनाली :- सुना है के वो बड़ा ही शर्मिला है और देखने में बहुत सुंदर है और गांव मे फ्री में सबका इलाज करेगा ।सोनाली खुश होकर कहती है ---सोनाली :- हांजी क्यो ना वृंन्दा के लिए एकांश के घरवाले से बात कीया जाए ।चट्टान सिंह वृंदा के गाल को छुकर कहता है ----चट्टान सिंह ...Read More

12

श्रापित एक प्रेम कहानी - 12

चतुर कहता है -----चतुर :- तुम दोनो पागल हो । अब यहां रुक के क्या फ़ायदा । जल्दी निकलो से वर्ना अब हमलोग सब गायब हो जाएंगे । क्यूंकी वो इसी जंगल में रहता है । ये उसकी का चाल है , हममे से कोई नही बचेगा ।एकांश गुस्से से कहता है ----एकांश :- आखीर क्या कर लेगा कुम्भन यहां आके जो तुम सब इतना डर रहे हो । इतने साल हो गए क्या किसीने कुम्भन को देखा है ? ये सब बातें पुरानी हो चुकी है । अब यहां कोई नही रहता सिवाय तुम्हारे डर के।तभी गुना कुछ ...Read More

13

श्रापित एक प्रेम कहानी - 13

आलोक :- पुराणों मे तो मैने भी पड़ा है के दैत्य , राक्षस और दानव और सभी अपनी लोक रहते है , और ये भी पड़ा था के देवता और दैत्यों मे एक संधी हूआ था के वो फिर कभी पृथ्वी वासियों को परेशान नही करेगें और ना ही मारेगें ।एकांश कहता है ---एकांश :- अगर ऐसी बात है तो ये इस युग मे कैसे आ गया और सबको मार क्यू रहा है । और फिर आज जो मैने दैखा और सुना .....!एकांश इतना बोलकर चुप हो जाता है ।आलोक कहता है ---आलोक :- तुझे याद है एकांश बचपन ...Read More

14

श्रापित एक प्रेम कहानी - 14

आलोक जवाब देता है ---आलोक :- किया था यार....! तेरे पापा और कुछ गांव वालो ने मिलकर सबके घर पुछा पर किसी को भी उस मणि के बारे मे नहीं पता था।एकांश कहता है ---एकांश :- ऐसा कैसे हो सकता है। किसी के पास तो मणी जरूर होगा। क्यू ना हम लोग उस मणि के बारे मे पता लगाए ।गुना कहता है ---गुना :- पर कैसे एकांश। जब तुम्हारे पापा और सभी गांव वाले मिलकर पता नहीं लगा पाए तब हम कैसे ?आलोक कहता है ----आलोक :- एक रास्ता है।सभी हैरानी से आलोक की और देखकर कहता है।सभी एक ...Read More

15

श्रापित एक प्रेम कहानी - 15

वृंदा अंजान बनाते हैं पूछती हैं---वृदां :- अच्छा संपूर्णा आज पार्टी किस खुशी में दी जा रही है।संपूर्णा कहती :-- हां हां.. अब ज्यादा बनो मत चल मुझे पता है तुम सब क्यूं पुंछ रही है।वृंदा पुछती है--वृदां :- क्या पता है तुझे?संपूर्णा कहती है---संपूर्णा: - यही जो तू सुनना चाहती है के भाई वापस आ गया है।वृंदा कहती है ----वृदां :- तुझे कैसे पता के मैं यही पूछने वाली हूँ ।संपूर्णा कहती है----सपूर्णा :- तेरी आँखों की चमक बता रही है पगली। इसिलिए तो तुझे वहा दौ दिन और रखने का परमिशन भी ले लिया है। ताकी तू ...Read More

16

श्रापित एक प्रेम कहानी - 16

एकांश कहता है-----एकांश :- अरे वाह शेम्पु समोसा लेकर आ गई वहां टेबल में रख दो ।इतना बोलकर एकांश मुड़ता है। तो वृंदा को दैख कर वो घबरा जाता है और अपने हाथ से अपने छाती को ढकने लगता है ।एकांश हकला कर कहता है----एकांश :- तू...तू...तू...तू...तुम..! तुम यहां कैसे ?वृंदा हंसती हुई बेड से चादर उठा कर एकांश को देता है और कहती है-----वृदां :- ये लो और ढक लो अपने नंगे सरिर को।एकांश बेड शीट लेता है और अपने शरीर को ढकने लगता है। वृंदा हंसती हुई कहती है--–वृदां :- लड़का होके इतना शर्मा क्यूं रहे हो..? ...Read More

17

श्रापित एक प्रेम कहानी - 17

संपूर्णा और आलोक एक दुसरे को पंसद तो करता है पर कभी एक दुसरे को बताया नही ।दोनो ही दुसरे के बांहो मे इस कदर खो जाते है के वो लोग कहां पर इसका कोई होश नही रहता है । संपूर्णा अपना होंट आलोक के होंट के बहोत करीब ले आती है जिससे आलोक बहोत excited हो जाता है और दोनो के होंट एक दुसरे से टकरा जाता है ।आलोक संपूर्णा के होंट को चुमने लगता है दोनो ही अंधेरे मे एक दुसरे के होंट को चुमने लगता है।उधर वृंदा एकांश को बुलाती है----एकांश ... एकांश तुम यहाँ होना।एकांश ...Read More

18

श्रापित एक प्रेम कहानी - 18

वर्षाली कहती हैं----ये क्या एकांश जी अगर किसी ने देख लिया तो गलत सोचेंगे।एकांश कहता है-----क्या गलत सोचेंगे?वर्षाली कहती के समय एक लड़का और एक लड़की को एक साथ अगर किसी ने यू मिलते हुए देख लिया तो क्या वो गलत नहीं सोचेगा एकांश जी।?एकांश तुरंत वर्षाली का हाथ छोड़ देता है और कहता है----नहीं..नहीं वर्षाली तुम जाओ मैं नहीं चाहता मेरी वजह से लोग तुम्हें गलत सोचे।वर्षाली एक मुस्कान देकर वहां से चली जाती है।इधर संपूर्णा और आलोक एक दुसरे के होंठो के चुमे जा रहा था दोनो की सांसे गर्म थी और अब दोनो का मन अब ...Read More

19

श्रापित एक प्रेम कहानी - 19

वृंदा कहती है---वृदां :- निंद ही नहीं आ रही है तो सोचा कुछ दैर तुमसे बात करलूं ।तभी चतुर में बड़बड़ाता है----चतुर :- आज तो बच गया रे बाबा। एकुम्भन तू साला गया। तूने मुझसे पंगा लिया है ना । तुझेे तो मैं गोली से उड़ा दूगां ढिसकांउउ ....इतना बोलकर चतुर फिर सो जाता है।वृंदा हैरानी से पुछती है---वृदां :- इससे क्या हो गया ?एकांश :- वो तो ऐसे ही बड़बड़ाने लगता है।वृंदा एकांश के हाथ मे ग्लासदेखकर पूछती है ---वृदां :- ये क्या हैएकांश ग्लास को छुपाते हूए कहता हैं--एकांश :; कक्क...कक..कुछ नहीं।वृंदा :- क्या है एकांश बोलो ...Read More

20

श्रापित एक प्रेम कहानी - 20

रूम में जाकर एकांश वृंदा को सुला देता है। और वसे जाने लगता है पर वृंदा एकांश का हाथ लेती है और निंद में बड़बड़ाती है।वृदां :- कर लो न एकांशहातेरे बाप काक्या जाता है।एकांश वृंदा का हाथ प्यार से छुड़ाता है और हल्की मुस्कान के साथ वहा से निकल जाता है। सुबह हो जाती है। वृंदा अभी तक सोयी हुई थी। वही हवेली के बाहर आलोक और संपूर्ण भी सोया हुआ था। आलोक का एक हाथ संपूर्णा के कुर्ती के अंदर संपूर्णा के वक्ष पर था जिससे संपूर्णा की कुर्ती उसके कमर से ऊपर था और संपूर्णा की ...Read More

21

श्रापित एक प्रेम कहानी - 21

आलोक :- संपूर्णा तुम यही छुप जाओ मैं चतुर को यहां से लेकर चला जाउगांतब तुम निकल कर यहां चली जाना।संपूर्णा आलोक को जाने देना नही चाहती थी क्योकी संभोग पुरा नहीहुआ था तभी आलोक संपूर्णा तोसमझाते हुए कहता है----आलोक :- संपूर्णा ऐसे तो मैं भी तुम्हेछौड़कर नही जाना चाहता पर अगरअभी किसी ने दैख लिया तो गड़बड़ हो जाएगी।इतना बोलकर आलोक संपूर्णा के ऊपर बिचाली डाल देता है जिससे संपूर्णा पूरी तरह से ढक जाती है और आलोक अपने शर्ट उठा कर पहन ने लगता है।तभी चतुर आ जाता है और आलोक को देख कर कहता है---चतुर :- ...Read More

22

श्रापित एक प्रेम कहानी - 22

दोनो सुंदरवन के पास पँहुच जाता है जहां पर वर्शाली ने एकांश को बुलायी थी। एकांश बाइक से उतर इधर उधर देखता है पर वहां पर कोई नहीं था। ।आलोक एकांश से पुछता है---आलोक :- एकांश क्या वर्शाली ने तुम्हें इसी जगह पर बुलाया था।एकांश :- हाँ यार..! यही तो कहा था उसने।आलोक :- पर यहाँ तो कोई नहीं है।एकांश जंगल के अंदर जाने लगता है तो आलोक एकांश को रोक कर कहता है---आलोक :- तू बिलकुल पागल हो गया है। जब यहाँ कोई नहीं है और तू फिर से जंगल के अंदर जा रहा हैं।एकांश :- तू डर ...Read More

23

श्रापित एक प्रेम कहानी - 23

वर्षाली हंसकर कहती हैं--वरशाली :- आपके सारे प्रश्नों का उत्तर है पर पहले आप घर के भीतर तो आईये।एकांश से पुछता है---एकांश :- क्या घर और यहां ..? पर यहां पर तो मुझे कोई घर दिखाई नहीं दे रहा है।वर्षाली हंसने लगती है और कहती है---एकांश :- आप आओ तो सही आपकोमेरा घर भी दिखने लगेगा।इतना बोलकर वर्षाली झरने की और बढ़ने लगती है। आलोक और एकांश भी वर्षाली के पीछे जाने लगता है। उधर हवेली में वृंदा रात में घटी घटना के बारे में सौच रही थी और मन ही मन बड़बड़ा रही थी----वृदां :- क्या एकांश भी ...Read More

24

श्रापित एक प्रेम कहानी - 24

वर्शाली धीरे से कहती है---वर्शाली :- मैं यहाँ बस आपके लिए आई हूं।वर्षाली की बात सुनकर एकांश हड़बड़ा कर है।एकांश :- क क्या .... क्या ..? क्या कहा वर्शाली तुमने..?वर्शाली एकांश के कान में कहती है---वर्शाली :- हां एकांश जी मैं यहां सिर्फ आपके लिएआयी हूं।वर्शाली की आवाज इतनी धीरे थी के आलोक कोसुनाई नहीं देता है।एकांश वर्षाली से पुछता है---एकांश :- पर वर्शाली वो अमृत सिर्फ यही आती है या इस धरति पर कहीं और भी आती है जिसका पता और किसीको नही है ।वर्शाली :- ये अमृत की किरने सिर्फ इसी जगह परआती है एकांश जी। और ...Read More

25

श्रापित एक प्रेम कहानी - 25

दयाल कहता है ----दयाल :- ठिक है आप लोग शांत हो जाओ मैं जाकर मलिक से कहता हूं।इतना बोलकर दक्षराज के पास चला जाता है।इधर एकांश वर्शाली से उत्सुकता से पुछता है ।एकांश :- वर्शाली तुम किसी शक्ति के बारे में बोल रही थी ना। बताओ ना क्या है वो शक्ति जो तुम परियों को यहां आके मिलता है ?वर्शाली कहती है----वर्शाली : - हाँ एकांश जी बताती हूं।वर्शाली एकांश का हाथ पकड़ कर कमरे से बाहर ले कर आती है और कहती है---वर्शाली :- देखिये एकांश जी इस महल को।वर्शाली :- देखिए एकांश जी इस महल में हम ...Read More

26

श्रापित एक प्रेम कहानी - 26

वर्शाली एकांश की आंखों में अपने लिए प्रेम देख पारही थी।वर्शाली एक टक नजर से एकांश को देखे ही रहीथी। तभी एकांश वर्शाली से कहता है-----एकांश :- क्या हुआ वर्शाल बताओ ना..? क्या प्रेम जात पात देख कर किया जाता है।वर्शाली एकांश के आंखों में दैख कर कहती है---वर्शाली: - नहीं एकांश जी। प्रेम की कोई सीमा नहींहोती और नाहीं ही जात पात का प्रेम किसी से भी हो सकता है बस प्रेम निस्वार्थ होना चाहिए।इतना बोलकर एकांश और वर्शाली एक दसरे के आंखों में देखने लगता है। और ऐसे ही एक दुसरे को दैखते रहता है ।उधर राजनगर ...Read More

27

श्रापित एक प्रेम कहानी - 27

मीरा मीना से कहती है----मीरा :- अरे दीदी अब बस भी करो ना क्यों सता रहे हो तुम मेरे को।मीना के मुह से बहू सब्द सुनकर वृंदा हैरान हो जाती है वृन्दां मीना की और हैरानी से देखती रहती है। तब मीना कहती है----मीना :- अरे मेरी बच्ची तू इतना घबरा क्यों रही है। संपूर्णा ने हम सबको बता दिया है के तुम एकांश सेप्यार करती हो।वृंदा संपूर्णा को देख कर मुस्काने लगती है और सरमाने लगती है। तभी संपूर्णा अपनी दौनो भोहें उपर करके कहती है----संपूर्णा : - माफ़ करना यार तुझसे बिनापूछे ही मेैं माँ और बड़ी ...Read More

28

श्रापित एक प्रेम कहानी - 28

एकांश हैरानी से कहता है----एकांश :- मेरा महल..?वर्शाली कहती है:- हाँ एकांश जी। आप भूल गए के अपने कैसे उन दुष्ट मानवो से रक्षा किए थे बसतभी से मेैं और ये महल आपका हो गया।एकांश वर्षाली से पुछता है---एकांश :- क्या...! वर्शाली क्या कहा तुमने। तुम भी मेरी हो गई हो।वर्शाली :- आपको क्या सुनाई दिया एकांश जी। एकांश चुप हो जाता है और कहता है---एकांश :- तुमने इतना कह दिया ये मेरे लिए बहुत है वर्षाली । पर मैं यहां चाह कर भी नहीं रुक सकता। क्योंकी तुम एक लड़की हो और मैं एक लड़का अगर किसी को ...Read More

29

श्रापित एक प्रेम कहानी - 29

सोनाली खुश होती हैं और कहती हैं---->" ये तो बहुत अच्छी बात है। पर बहन क्या एकांश को भी पसंद है..?मीरा कहती है--->"वो सब आप हमें छोड़ दिजिये। आप बस शादी कीतैयारी सूरु किजिये। और हां वृंदा को अभी कुछ दिन यहीं रहने दिजिए।सोनाली कहती है--->" ये खुश खबरी मैं अभी वृंदा के पापा को सुनाती हूं। ठीक है बहन अब रखती हूं।इतना बोलकर दोनो फोन कट कर देता है।एकांश हवेली पहूँच जाता है और अपने जूटे उतारने लगता है इंद्रजीत एकांश से पुछता है।--->" अरे बेटा आ गए तुम आज दिन भर कहा रह गए? आज कुछ लोग ...Read More

30

श्रापित एक प्रेम कहानी - 30

एकांश को वर्शाली की याद आती है। वो सौच रहा होता है---" कास में यह वर्षाली को ला पता चल जाता केचलचित्र क्या होता है। एकांश इतना सौच ही रहा था कि तभी उसे वहां अपनी राइट साइड की सीट पर जो खाली थी वहां पर किसी लड़की के होने का एहसास होता है।एकांश धीरे से अपनी राइट साइड में देखता है तो वो हैरान हो जाता है। तो वहां और कोई नहीं बल्की वर्शाली थी। एकांश वर्षाली को देखकर एकदम हैरान रह जाता है। वर्शाली एकांश को देख कर हल्की मुस्कान देती है। एकांश वर्शाली को देख कर ...Read More

31

श्रापित एक प्रेम कहानी - 31

वर्शाली एकांश के बात को काटते हुए कहती है--->" एकांश जी भूल सिर्फ आपसे नहीं मुझसे भी हुई है भी आपको नहीं रोका। पता नही आपके साथ रहने के बाद मुझे मुझे क्या हो जाता है। इसीलिए एकांश जी अब मुझे जाना होगा। क्योंकी अगर मैं आपके साथ यहाँ रुकी तो वृंदा को पता चल जाएगा और मैं स्वयं को नहीं रोक पाउंगी इसिलिए अब मुझे जाना होगा।एकांश वर्शाली को जाने देना नहीं चाहता है। पर एकांश वर्शाली के बारे में सोचकर उसे करें जाने देता है। और वर्शाली वहां से गयाब हो जाती है। तभी वृंदा वॉशरूम से ...Read More

32

श्रापित एक प्रेम कहानी - 32

चतुर कहता है--->" वो तो मेला में है क्योंकि हम दोनो ने उधर एकफास्टफूड का दुकान लगाया है। वो पर है।आलोक कहता है --->" तुझे पता नहीं के मेला में क्या चल रहा है।चतुर कहता है--->" हां यार फूटबॉल का मैच , क्यों तुझे पता नहीं ।आलोक गुस्से से चतूर की और दैखता है चतुर कुछजवाब नहीं देता और चुपचाप एकांश के साथ चौक पर से आलोक के साथ गाड़ी में बैठ जाता है।कुछ ही दैर में सभी मेला पँहुच जाता है। जहां पर सब का गांव वाले जोर सोर से स्वागत करता है। आलोक अपने जेब से एक ...Read More

33

श्रापित एक प्रेम कहानी - 33

दक्षराज कहता है--->" वो मार्ग मुझे बताइये बाबा।अघोरी कहता है--->" तेरे लिए दो रास्ते है दक्ष। एक जो मैंने पहलेबताया था। दूसरा तुझे दोबारा परी साधना करनी होगी और परी को अपने के जाल में फसाना होगा और इस बार तुझे उसके साथ संभोग करना होगा।दक्षराज हैरान होकर कहता है-->" क्या कहा बाबा आपने संभोग ?वो भी परि के साथ। दक्षराज बाबा के बात से हैरान था क्योंकी बाबा ने अभी कहा परि के साथ संभोग करने से श्राप लगा है और बाबा अब अचानक से परि के संभोग करने को कह रहे है । अधोरी दक्षराज से कहता ...Read More

34

श्रापित एक प्रेम कहानी - 34

एकांश मन ही मन सोचता है----->" अच्छा तो वो लाल शिला ही रक्षा कवच है।कुछ दैर में सभी उस पर पहुँच जाता है। सभी जल्दी जल्दी उतर कर उस पेड़ के पास जाता है जहां पर रक्षा कवच बनी है। सभी वहाँ जाकर देखता है। तो सभी हैरान रह जाता है। शक्ति शिला वही उसी जगह पर था।आलोक शक्ति शिला को देखकर कहता है--->" अगर शिला यहीं है तो फिर कुंम्भन बाहर कैसेनिकल सकता है।तभी एकांश कहता है---->" आलोक क्यों ना हम सब तुम्हारे गांव तरफ जा करदेखे। वहाँ पर भी ऐसे ही शिला है ना।एकांश की बात सुनकर ...Read More

35

श्रापित एक प्रेम कहानी - 35

वर्शाली को देखकर एकांश कहता है-->" वर्शाली तुम यहां ?वर्शाली एकांश से कहती है---->" हाँ जी मैं यहां आपके आई हूँ। एकांश जी आप वहां मेला में मत जाओ। वहां पर खतरा है।एकांश कहता है--->" तुम्हे ये सब कैसे पता , और हां वर्शाली मुझे पता है।वर्शाली कहती है---->" ये जानते हुए भी के कुंम्भन मुक्त हो चुका है और वो अब सबको मारने लगा है। तब भी आप वहाँ जाना चाहते हो और कुम्भन अब वो शांत नहीं होगा। क्योंकी राजनगर का रक्षा कवच अब नहीं रहा इसीलिए वो राजनगर के सभी मनुष्य को मारने लगा है और ...Read More

36

श्रापित एक प्रेम कहानी - 36

कुंम्भन का नाम सुनकर सब घबरा जाता है। और डर से इधर उधर देखने लगता है।एकांश घबराते हुए कहता क...कक....कहा वर्शाली ? मुझे तो कहीं दिखाई नहीं दे रहा है।तब वर्शाली कहती है--->" एकांश जी वो देखिये मेले के बिच में वो सुखा पेड़दिख रहा है।सभी उसी पेड़ को देखने लगता है पर कुछ दिखाई नहीं देता।आलोक कहता है--->" पर वहाँ तो कुछ दिखाई नहीं देता।वर्शाली कहती हैं--->" ध्यान से देखीए एकांश जी पेड़ के उस सुखी टहनी पर जो सिधे ऊपर की और गई है। उसी पर देखीए कुम्भन की आंखें दिखाई देगी आपको। जो उस पैड़ पर ...Read More

37

श्रापित एक प्रेम कहानी - 37

गुना एकांश और आलोक के लिए प्लेट लगा देता है और कहता है---यार ये लड़की कोई अप्सरा है क्या इतनी सुंदर लड़की मेंने आज तक नहीं देखा।तभी एकांश गुना के कान में धीरे से कहता है--->" गुना हमें यहां से जल्दी दुकान बंद करके निकलनाहोगा।गुना पुछता है--->" पर क्यू भाई। इतनी अच्छी दुकान चल रही है हमारी।एकांश कहता है--->" बात को समझो गुना यहा खतरा है। मैं तुम्हें बाद में बताऊंगा पहले जल्दी निकलो यहां से।गुना एकांश से कहता है--->" तुझे हो क्या गया है यार कैसी बात कर रहा है तू।एकांश इंद्रजीत से कहता है--->" पापा अब घर ...Read More

38

श्रापित एक प्रेम कहानी - 38

वर्शाली एकांश से कहती है----वर्शाली : - एकांश जी आप मुझे अपने घर तक पहूँचा देंगे ?सत्यजीत कहता है--सत्यजीत कैसी बात कर रही हो बेटी तुम इस हालत घर कैसे जाओगी तुम अभी हमलोग के साथ चलोगी।एकांश भी वर्शाली से कहता है --एकांश :- हां वर्शाली ऐसी हालत में तुम वहाँ नहीं जासकती ।वर्शाली सबको समझा कर कहती है--वर्शाली: - मैं अब ठीक हु आप सब मेरी चिंता ना करे। अगर में घर नहीं पँहूची तो मेरे बाबा चिंतित हो जाएंगे। इसिलिए मुझे जाना पड़ेगा।सभी वर्शाली की बात सुनता है और इंद्रजीत एकांश से कहता है---इंद्रजीत :- बेटा तुम ...Read More

39

श्रापित एक प्रेम कहानी - 39

लोगो की रोने की आने आने लगी है। दक्षराज कहता है---दक्षराज :- चलो दयाल बाहर जा कर देखते हैं। उस कुम्भन ने क्या किया है।इतना बोलकर दक्षराज और दयाल हवेली से बाहर जाने लगता है। उधर वर्शाली और एकांश सुंदरवन पँहुच जाता है । जहां से अब उन्हे आगे पेदल ही जाना था। वर्शाली गाड़ी से धीरे धीरे उतरती है। वर्शाली आगे बढ़ने की कोशिस करती है पर कमजोरी के कारण वो डगमगाने लगती है जिससे वर्शाली गिरने लगती है। एकांश वर्शाली को संभालते हुए कहता हैं--एकांश :- तुम ठीक तो हो वर्शाली । वर्षाली हां में अपना सर ...Read More

40

श्रापित एक प्रेम कहानी - 40

दयाल मन ही मन सौचता है---" क्यो ना इसको मालिक के लिए उठा लू ।उस लड़की को दैखकर दयाल मन मे भी उसके साथ संभोग करने का मन हो गया था , दयाल सौचने लगता है के क्या करे ।दयाल उस लड़की को उपर निचे तक दैखता है , जिससे माधुरी इसकी नियत को भांप लेती है ।दयाल :- चल बैठ गाड़ी मे तुझे छोड़ देता हूँ ।माधुरी :- नही मैं चली जाउगीं ।दयाल :- अरे इतनी खुबसूरत, जवान लड़की को अकेली नही जाना चाहिए । अगर तेरे साथ किसीने कुछ कर लिया तो , तु इतनी खुबसूरत है ...Read More

41

श्रापित एक प्रेम कहानी - 41

वर्शाली अपनी आंखें पोंछती हूई कहती है---अब मैं क्या करू एकांश जी मुझे अपनी बहन को भी बचाना है आपको भी पाना है। क्योंकी अब मैं आपकी हो चुकी हूं एकांश जी । आपकी हो चुकी हूं।इतना बोलकर वर्शाली एकांश के शरीर मे लगे घांव को छूती है जिससे एकांश को दर्द महसूस होती है और एकांश निंद से उठ जाता है। एकांश देखता है के वर्शाली उसके पास खड़ी है जिसे दैख कर एकांश का चेहरा खुशी से लाल हो जाता है। एकांश खुश होकर वर्शाली के दोनो हाथ पकड़ लेता है और अपनी और खींच कर वर्शाली ...Read More

42

श्रापित एक प्रेम कहानी - 42

वर्शाली अपना हाथ आगे करके फिर वही मंत्र कहती है---“ॐ सुप्त-शक्ति जागर्ति — रोगः क्षीणो भवतु।वरोऽस्मिन् द्रवणे आरोग्यम् पुनरुत्थापय।”देखते देखते वो मणि वर्शाली के हाथ में आ जाती है। वर्शाली एकांश से कहती है---वर्शाली : - एकांश जी यही है सांतक मणि जिनसे पाने के लिए बहुत सारे मनुष्य परी साधना करता है। पर फिर भी उन्हे इस मणि के दर्शन नहीं होती।एकांश मणि को हैरानी से देख रहा था और फिर कहता है---एकांश :- क्या ये मणि सच में सबकी मनोकामना पूरी करता है ?वर्शाली :- हां एकांश जी सबकी । क्यों एकांश जी आपकी कोनसी मनोकामना है ...Read More

43

श्रापित एक प्रेम कहानी - 43

उधर वर्शाली और एकांश एक दुसरे को प्यार से बाहों मे भर रखा था और उनपर नीले पुष्प की हो रही थी जिससे दोनो ही घुटने पुष्प से ढक जाते हैं। एकांश वर्शाली के होठ को चुमने के लिए आगे बड़ता है पर वर्शाली अपने आपको सम्भांलते हुए कहती हैं--वर्शाली :- नहीं एकांश जी अभी नही ।एकांश कुछ नहीं बोलता है। बस चुपचाप हाथ में रखी मणि को देखने लगता है। वर्शाली एकांश से अलग होती होकर कहती है--वर्शाली :- बस अब और नहीं।वर्शाली के इतना कहते ही वह पुष्प वर्षा रुक जाती है। वर्शाली भूमी पर गीरे पुष्प ...Read More

44

श्रापित एक प्रेम कहानी - 44

एकांश वर्शाली का हाथ पकड़ कर कहता है।एकांश :- वर्शाली उस रात मैने जो किया वो मेरा कर्तव्य था। वर्शाली तुम जो मेरे लिए कर रही हो वो पागलपन है। इसिलिए तुम अपने लोक लौट जाओ। मैरे वजह से तुम अपने आपको खतरे मे मत डालो और यहां से अपने लोक चले जाओ।एकांश की बात सुनकर वर्शाली कहती है--.वर्शाली: - ये आप कैसी बात कर रहे हैं एकांश जी। मै आपको छोड़कर तब तक नही जा सकती एकांश जी। जब तक के ये आने वाला पूर्णिमा पार नहीं हो जाता उस समय तक मैं आपको छोड़कर नही जाउगीं।उधर भानपुर ...Read More

45

श्रापित एक प्रेम कहानी - 45

उस तांत्रीक ने अपने जेब से मुठ्ठी बंद करके कुछ निकालता है और मंत्र बड़बड़ाकर वर्षाली पर के उपर देता है--"“ॐ ह्रीं क्लीं — मायाम्, मायाम् — वशं कुरु, वशं कुरु — स्वाहा।”जिसे वर्शाली को कमजोरी महसूस होने लगती है। तांत्रीक वर्शाली को पकड़ने के जैसे ही आगे अपना कदम बड़ाती है के वर्शाली उस पर भी मणी से शक्ति प्रहार करती है जिसे तांत्रीक बेहोस हो जाता है।वर्शाली के आगे अब अंधेरा छा गया था और वो बेहोसी के हालत मे उसके कदम डगमगाने लगती है जिसका फायदा वो दुसरा आदमी उठाना चाहता है। वो आदमी वर्शाली को ...Read More

46

श्रापित एक प्रेम कहानी - 46

एकांश कहता है--->" नहीं वर्षाली ये जानते हूए भी के इस मणि मे तुम्हारी सारी शक्ति हैं मे इसे ले सकता। तुम्हें तुम्हारी शक्तियों की जरुरत है ।इतना बोलकर एकांश वो मणि वर्शाली को दे देता है। वर्शाली मणि को लेकर फिर से वही मंत्र बोलती है और मणि देखते ही देखते गायब हो जाती है। वर्शाली मन ही मन सौचती है के लोग इस शक्ति को प्राप्त करने के लिए क्या क्या कार्य करते हैं और एक एकांश जी जिन्हे इन सब चीजों की कोई लालसा नही हैं।वर्शाली कहती हैं-->" एकांश आपको पता है आप इस मणि से ...Read More

47

श्रापित एक प्रेम कहानी - 47

एकांश की बात सुनकर सत्यजीत कहता है---> नही बैटा अब वो ऐसा नही कर पाएगी क्योकीं भैयाऔर मैं साधु से मिलकर आ रहे हैं और उन्होंने हमे एक रक्षा कलस दिया है। जिसे हमने उसी पैड़ पर बांधकर आ रहे हैं। अब वो कुंम्भन फिर से उसी सुंदरवन में कैद हो गया है। पर.......।इतना बोलकर सत्यजीत चूप हो जाता है। एकांश पूछता है---> पर क्या चाचा , बोलिये ना ।सत्यजीत कहता है---> बेटा मुझे चिंता इस बात की है के जिसने शिला को गायब किया अगर उसने इसे भी गायब कर दिया तो और जब उसने रक्षा शिला को ...Read More

48

श्रापित एक प्रेम कहानी - 48

चट्टान सिंह की बात सुनकर दक्षराज बहुत घबरा जाता है़ और फोन को काट देता है। दक्षराज अपना सिर सौचने लगता है ---> मुझे अब जल्दी से जल्दी अघोर बाबा की कहे अनुसार अपना कार्य पुरा करना होगा। क्योकीं जन्माष्टी मे अब बस कुछ ही दिन बचे हैं। मुझे साधना के लिए उचित सामग्री का व्यवस्था कर लेनी होगी। क्योकीं अब कुम्भन भी मेध और सांतक दौनो मणि का खोज मे लग गया है वो कुंम्भन मुझ तक पहुंचे इससे पहले मैं अपना कार्य पूरा कर लुगां।दक्षराज के इतना सौचते ही वहां पर दयाल आ जाता है । दयाल ...Read More

49

श्रापित एक प्रेम कहानी - 49

दुसरा आदमी कहता है--> पहले तो ना देखे है तन्ने यहां । ऐ कौन हो भाया और यहां के रहे हो ?चेतन कहता है--> में यहां पर नया हूँ और इस मेला को देखने आयाथा बहुत सुना था इस मेला के बारे में , सोचा था के मेला देखकर रात को ही चला जाउगां पर कल जो उस भयानक देत्य तो देखा तो रात को निकलने की हिम्मत ना हुई ।तभी पहला आदमी कहता है--> तो क्या तुम पुरी रात यही बाहर सर्दी मे बिताई ?चेतन कहता है --> नही भाया मैं तो बाहर ही रात बिताने वाला था ...Read More

50

श्रापित एक प्रेम कहानी - 50

> भाया वो...वोह...।दुसरा आदमी कहता है--> अरे भाया पहले थौड़ी सांस ले लो फिर कहना।वो आदमी कुछ दैर सांस है और फिर कहता है --> भाया वो रक्षा कवच अब नही रहा किसीने उसे वहां से हटा दिया है। इसिलिए कुंम्भन जंगल से बाहरआया।इतना सुनने के बाद सभी उस आदमी पर गुस्सा होकर कहता है --> ये लो इसे अब पता चला, अरे मुरख कलस वहां से हटा था तभी तो कुंम्भन बाहर आया था , और इंद्रजीत बाबु ने वहां पर रक्षा कलश रख दिया है , अब कुंम्भन फिर से सुंदरवन मे कैद हो गया है समझे।इधर ...Read More

51

श्रापित एक प्रेम कहानी - 51

कुंभ्मन परेसान होकर कहता है--> ये....ये मुझे क्या हो रहा है । मैं....मैं ठीक से चल क्यों नही पा हूँ।कुंम्भन अपने अंदर बहुत कमजोरी महसुस कर रहा था। कुंभ्मन गुस्से से कहता है--> ये मेरे अंदर क्या हो रहा है। मुझमे शक्ती का अभावक्यो हो रहा है। मुझे कुछ याद क्यो नही आ रहा है , मुझे क्या हुआ था।इतना बोलकर कुंभ्मन मेला मे घटी घटना के बारे मे सौच रहा था । तभी उसे याद आ जाता है के उसपर किसी ने कोई शक्ती से प्रहार किया था। कुंम्भन अपनी छाती पर हाथ रखकर दर्द से कराहते हूए ...Read More

52

श्रापित एक प्रेम कहानी - 52

मातंक कहता है--> तुम चिंता ना करो मित्र कुम्भनी हमारी भी पुत्री हैऔर उसे बचाने के लिए हम कुछ कर सकते हैं। अब हमे कहां जाना होगा मित्र ?मांतक की बात सुनकर कुंम्भन कहता है--यहां इस जंगल के बाहर तीन गांव है इन्ही तीन गांव मे से किसी एक गांव मे मणी छुपी हूई है । तुम्हे अपना भेष बदल कर उसका पता लगाना होगा।मांतक कहता है --> ठीक है मित्र । अब आञा दो ।तभी मांतक को रौकते हूए कुंम्भन कहता है --> ठहरो मित्र । एक बात और जिसके पास भी वहमणी होगा वह मानव श्रापित होगा।कुम्भन ...Read More

53

श्रापित एक प्रेम कहानी - 53

एकांश गुणा और चतूर से कहता है--थैंक्स यार तुम दौनो ने मेरी बहुत हेल्प की । अगर आज ये नही आती तो बहोत प्रब्लाम हो जाती ।चतुर एकांश से कहता है--> दैख यार दोस्ती में नो थैंक्स । वैसे भी हमारे पास ही नही हा कुछ करने को इसिलिए इसे कर लिया।तभी गुणा हिचकिचाते हुए कहता है--> यार एकांश हम दौनो ये सौच रहे थे के जब हमारे पास काम करने के लिए कुछ भी नही है। तो ..... !! तो क्यों ना तुम हमे इसी हॉस्पिटल मे कुछ काम दे दो। गुणा और चतुर की बात सुनकर एकांश ...Read More

54

श्रापित एक प्रेम कहानी - 54

सभी आलोक की और बड़े गौर से दैख रहा था । आलोत अपनी जारी रखते हुए कहता है--> उनकी पर लगी खरोंचे किसी इंसान के नही हो सकते है। इतनी बड़ी और गहरी नाखुन किसी इंसान के हो ही नही सकते ।आलोक की बात सुनकर एकांश कहता है--> तुम बिल्कुल सही कह रहे हो आलोक । मैने भी निलु काका के खरोंचे को दैखा वो इंसान के नाखुन नही हो सकते। ये लोग हम सब से कुछ छुपा रहे है। क्योकी आज कुछ दैर पहले एक आदमी मेरे पास आया और कहां के कल मेले के भाग दौड़ मे ...Read More

55

श्रापित एक प्रेम कहानी - 55

दयाल की बात सुनकर दक्षराज जौर जौर से हंसने लगता है और कहता है---> हा हा हा हा । साथ रहकर तेरी भी बुध्दी काम करने लगी है दयाल।वही घर के उपर बैठे मातंक और त्रिजला यह सब दैखकर हैरान था। त्रिजला मांतक से कहती है--> स्वामी इस मानव की बात सुनी आपने कितनास्वार्थवान है ये। हम बहोत से घरों में गए पर इसके जैसा मानव नही दैखा। स्वामी मुझे तो ऐसा आभास हो रहा है के जिसे हम ढुंढ रहे हैं कहीं यही मानव तो नही है।त्रिजला की बात सुनकर मातंक कहता है--> हां त्रिजला मुझे भी ऐसा ...Read More

56

श्रापित एक प्रेम कहानी - 56

गुणा कहता है --> क्या बात है यार ये अचानक बाइक की लाइट क्यो बंद हो गई।आलोक बाइक की चैक करने लग जाता है पर अंधेरा होने के कारण उसे कुछ समझ मे नही आता । आलोक अपना की टॉर्च जलाकर दैखने लग जाता है और चतुर से कहता है---> चतुर जरा दैख तो अंदर मे कही वायर तो नही छुटगयी है।चतूर भी बाइक की लाइट को दैखने लग जाता है। तभी गुणा की नजर सड़क पर बैठे दौ पक्षीयों पर जाता है। अंधेरा होने पर भी उन पक्षीयों की आंखे लाल चमक रहा था। गुणा ये कंफर्म करने ...Read More

57

श्रापित एक प्रेम कहानी - 57

> मालिक ! इस कागज पर ऐसा क्या लिखा है जिससे पड़कर आपकी ये हालत हो गयी।दक्षराज कागज़ को के हाथ मे थमा देता है। दयाल कागज को मन ही मन पड़कर लगता है। चेतन ने कागज पर लिखा था के हवेली के आसपास कोई दैत्य शक्ती है जिसका आभास मुझे हो रहा है। शायद वो शक्ती छिपकर हमारी बात सुन रहा है इसिलिए मेैने इस कागज पर लिख कर तुम्हे सब बता रहा हूँ।चट्टान सिंह की बात मुझे समझ मे आ गया है क्योकी हॉस्पिटल मे मुझे आभास हो गया था के आलोक को मुझ-पर शक हो गया ...Read More

58

श्रापित एक प्रेम कहानी - 58

चतूर कहता है ----> आलोक क्यों ना बाईक को कुछ दुर और अंदर ले जाकर दैखते है़ ?आलोक कहता --> नही यार मैं ऐसै भी ज्यादा करते ही बोला था क्योकी चेतन इतने समय मे इससे ज्यादा दुरी तय नही कर पाएगा। अब हम भानपूर की और जाएगें।आलोक बाईक चलाते हूए गुणा से कहता है--> गुणा यार तु ठीक तो है ना ?गुणा दर्द से कराहते हुए कहता है--> हां..... आह। मैं ठीक हूँ ।आलोक समझ जाता है के गुणा को दर्द हो रहा है।आलोक बाईक को हॉस्पिटल के सामने रोकते हूए कहता है--> गुणा तु अब अंदर जा ...Read More

59

श्रापित एक प्रेम कहानी - 59

त्रिजला कहती है--> आपकी आञा हो तो इसे अभी यहां से कुंभ्मन के पास लेकर चलुं ?मातंक त्रिजला को करते हूए कहता है-->" नही त्रिजला हम इसे ऐसे ही यहां से नही ले जा सकते । ज्ञात रहे ये वो दुष्ट मानव नही है जिसके पासकुंभ्मनी की मणी है। ये एक अच्छा मानव है । हमे इससे उस रात को हूई घटना के बारे मे जानना है। अगर हम इस क्षण इसे यहां से उठाकर ले जाते हैं तो वह दुष्ट सतर्क हो जाएगा। जिसके पास कुंभ्मनी का मणी है। अभी हम यहां से चलते है। क्योकी हमे उस ...Read More

60

श्रापित एक प्रेम कहानी - 60

तभी संपूर्णा आलोक से धिरे से कहती है--> मैं अब संतुष्ट होने वाली हूँ ।जिसे सुनकर आलोक की रफतार तैज हो जाती है । संपूर्णा अपनी मुट्टा को कसके भीच लेती है और अपनी दौनो हाथो को आलोक के कमर पर कस के बांध दैती हे़ै।तभी आलोक भी कहता है।> संपूर्णा मैं भी चरम सिमा तक पहूँच चुका हूँ।आलोक के इतना कहते ही संपूर्णा आलोक को कस के पकड़ लेती है। और एक लम्बी चीख के साथ आलोक के होंट को चुमने लगती है तभी आलेक के मुह से भी एक चिख निकलता है और आलोक संपूर्णा को कस ...Read More

61

श्रापित एक प्रेम कहानी - 61

एकांश वर्षाली के हाथ को पकड़कर जैसे ही कुछ कहने वाला होता है। के एकांश को पता चलता है वर्षाली के हाथ एकदम ठडीं हो चुकी थी । एकांश ये दैखकर हैरान था। तभी एकांश वर्षाली सको आवाज देने लगता है। एकांश वर्षाली को पुकारता है--> वर्षाली ..! वर्षाली !एकांश के बार बार बुलाने पर भी वर्षाली का कोई भी प्रतीक्रीया नही आती है जिससे एकांश घबरा जाता है। एकांश वर्षाली के नब्ज को चैक करने लग जाता है। पर एकांश को वर्षाली की नब्ज नही मिलता है। एकांश वर्षाली को हिलाने लगता है। और पुकारने लगता है--> वर्षाली ...Read More

62

श्रापित एक प्रेम कहानी - 62

वर्शाली सरमाते हूए एकांश से कहती है--> एकांश जी ! मैं भी आपसे बहुत प्रेम करती हूं । मेरा कुछ आपका है। मैं भी आपके बिना नही रह सकती एकांश जी।इतना बोलकर वर्षाली एकांश से लिपट जाती है। और फिर मायूस होकर कहती है--> ये तु क्या कर रही है वर्शाली । तु यहां किस कार्य से आयी है और तु क्या कर रही है। एक मनुष्य से तु प्रेम कैसे कर सकती है। तु ये कैसे भूल गयी के तु एक परी है और एकांश एक मनुष्य ! तुम दौनो का मिलन कभी नही हो सकता। अपने आप ...Read More

63

श्रापित एक प्रेम कहानी - 63

आलोक का नाम सुनते ही संपूर्णा का चैहरा खुशी से लाल हो जाता है। संपूर्णा अपनी खुशी को छिपा पा रही थी इसिलिए संपूर्णा सर्मा के वहां से दौड़कर भाग जाती है। सभी संपूर्णा की चेहरे की खुशी दैखकर समझ जाता है के संपूर्णा इस रिश्ते से बहुत खुश है।उधर वर्शाली मणी के बारे मे सौच रही थी के तभी एकांश वर्शाली से कहता है--> क्या बात है वर्शाली ? तुम किस सौच मे पड़ गयी।एकांश की बात सुनकर वर्शाली कहती है---> वो मैं मणी के बारे मे सौच रही थी एकांश जी।एकांश पुछता है--> मणी के बारे मे ...Read More

64

श्रापित एक प्रेम कहानी - 64

वर्षाली झट से वहां से उठ जाती है और कमरे के बाहर जाने लगती है। वर्शाली को यूं अचानक दैखकर एकांश वर्षाली को रौककर कहता है--> कहां जा रही हो वर्शाली ?वर्शाली हल्की मुस्कान के साथ कहती है।> आपको भुख लगी होगी ना एकांश जी । इसिलिए मैं आपके लिए भोजन लाने जी रही हूँ ।एकांश उत्सुकता से पूछता है।> परी लोक का भोजन ?एकांश की बात सुनकर वर्शाली हंसते हुए कहती है।> हा हा हा ! हां एकांश जी परी लोक का ही भोजन लाउंगी ।वर्शाली से इतना सुनने के बाद एकांश मन ही मन खुश होते हुए ...Read More

65

श्रापित एक प्रेम कहानी - 65

एकांश वर्शाली के कंधे पर अपना हाथ रख कर कहता है।> हां वर्शाली बताओ मुझे मैं जानना चाहता हूँ इनकी ऐसी दशा केसे हुई और किसने की ?एकांश की बात सुनकर वर्शाली कहती है।> एकांश जी मैने आपसे पहले भी कहा था के हम परियां इस पृथ्वी पर अपने योवन और शक्तीयों को संतुलित रखने के लिए इस झरने पर 12 बार ही स्नान कर सकते है़ । जिसके लिए हम परियां इस पृथ्वी पर आते है। क्योकी हम परियों के पास 12 जिवन चक्र होते है।वर्शाली की बात पर एकांश हैरान होकर पूछता है।> जिवन चक्र ? ये ...Read More

66

श्रापित एक प्रेम कहानी - 66

चेतन कहता है। गुरुदेव जब मैं हॉस्पिटल से भागकर दक्षराज के घरगया था । तब वहां पर मुझे के उपर बैठे दो पक्षीयों पर नजर पड़ी जो मुझे कोई साधारण पक्षी नही लगी। तो मैने अपनी शक्ती से उसके बारे मे पता लगाने की कोशीश की तो मुझे पता चला के वो कोई साधारण पक्षी नही बल्की देत्य है।देत्य का नाम सुनकर अघोरी कुछ दैर चुप रहता है। और फिर कहता है । देत्य ! ये दुसरा देत्य अब कहां से आ गया । कुंम्भन तो जंगल मे पड़ा है तो फिर ये दोनो पक्षी बने देत्य आखिर कौन ...Read More

67

श्रापित एक प्रेम कहानी - 67

वर्शाली हैरानी से कहती है -- आपके घर ?एकांश कहता है -- हां मेरे घर ।एकांश उत्साह कहता है-- हां वर्शाली ! तुम्हें दैख कर मा पापा भी बहोत खुश हो जाएगें। और मुझे भी तुम्हारे साथ रहने का कुछ पल और मिल जाएगा। इसी तरह तुम मुझे हर्शाली के बारे मे भी बता देना।एकांश की बात पर वर्शाली अपनी हामी भरते हुए कहती है-- ठीक है एकांश जी । जैसी आपकी ईच्छा।वर्शाली के मुह से इतना सुनते ही एकांश खुशी से झुम उठता है। वर्शाली हर्शाली के पास जाती है और हर्शाली सके माथे पर प्यार से अपना ...Read More

68

श्रापित एक प्रेम कहानी - 68

दक्षराज अघोरी बाबा से कहता है--> ठिक है ठिक है आप पहले सांत हो जाईए और आप अंदर आईए आराम से बात करते है। आप भी काफी थके हुए से लग रहे हैं । आइए अंदर आइए।इतना बोलकर दक्षऱाज दयाल और अघोरी बाबा अदर चला जाता है। मातंक और त्रिजला ये सब दैख रहा था । त्रिजला कहती है --> स्वामी अब ये मानव कौन है जो इस प्रकार से विलाप कर रहा था और ये दक्षराज इतना दयालु कैसे हो गया जो उस मानव को अपने हवेली के अंदर ले कर चला जाता है।त्रिजली की बात पर मांतक ...Read More

69

श्रापित एक प्रेम कहानी - 69

वह इतना तेजी से घुम रहा था के उसके घुमने से हवा मे सांय सांय जैसी आवाज आने लगता और फिर वो खोपड़ी अचानक से रुक जाता है और कुंम्भन के मुख के पास आकर जोर जोर से खोफनाक हसी से हंसने लगता है और बोलने लगता है।> हा हा हा हा ....! महाराज कुंम्भन की सेवा मे नारंग देत्य प्रस्तुत है मेरे मालिक ! क्या हुआ मेरे मालिक ! आपने मुझे क्यो याद किया ? आप मुझे सिघ्र ही बताए मैं आपका सेवा करने के लिए व्याकुल हो रहा हूँ मालिक । बताईए मैं आपकी क्या सेवा कर ...Read More

70

श्रापित एक प्रेम कहानी - 70

कुम्भन कहता है --> ये मुझे ञात नही मित्र परतुं इस समय हित और अहित की चितां का नही जब रक्षा कवच टुटा तब मैने फिर से चुपचाप इस जंगल से बाहर आकर मणी की खोज करने लगा । ताकी किसी को भी ये आभास ना हो के रक्षा कवच टुट चुकी है और मैं जंगल से बाहर आ गया हूँ । परतुं मित्र मेरा ये प्रयत्न भी विफल रहा क्योकीं उस दिन मेला मे एक छोटे बालक ने मुझे देख लिया और मेरे आंखो को खेलने का वस्तु समझ कर मेरे आंख पर कुछ दे मारा तब मैं ...Read More

71

श्रापित एक प्रेम कहानी - 71

संजीवनी मंत्र का नाम सुनते ही कुंम्भनी कहती है--> संजीवनी मंत्र ये वही मंत्र है ना पिताश्री जो हमारे शुक्राचार्य के पास है । तो क्या गुरू देव को ये मंत्र भगवान शंकर ने दिया था ?कुंभ्मन कहता है--> हां पुत्री ! जब ये बात देवताओ को पता चली के दैत्य गुरु शुक्राचार्य भगवान शंकर के पास संजीवनी मंत्र को प्राप्त करने के किए गया है तो उनको ये बात सताने लगी के अगर दैत्य गुरु शुक्राचार्य को भगवान शंकर ने संजीवनी मंत्र दे दिया तो अनर्थ हो जाएगा । क्योकी संजीवनी मंत्र मिलने के बाद दैत्य देवताओ पर ...Read More

72

श्रापित एक प्रेम कहानी - 72

वामन देवता के पैर बिल्कुल छौटे छोटे थे। जिसे दैखकर राजा बली हैरान होकर कहने लगे।" हे वामन देवता अपने लिए मात्र तीन पैर जमीन मांगना जिसे सुनकर मुझे बड़ा आश्चर्य लगा क्योकी आपके इतने छोटे छोटे पैर से तीन पैर जमीन लेकर क्या किजीएगा अगर आपको मांगना ही है तो सोना , चाॅदी , किमती रत्न वस्त्र ये सब मांगिए। "राजा बली के कहने पर भी वामन देव हल्की मुस्कान के साथ कहता है --> राजन मुझे मुझे इन सब वस्तुओं की कोई आवश्यकता नही है मुझे केवल तीन पैर जमीन ही चाहिए।सभी वामन देव के बात पर ...Read More

73

श्रापित एक प्रेम कहानी - 73

कुंम्भन की बात सुनकर मांतक कहता है--> मित्र क्या ये संभव है के एक देत्य कन्या को किसीमानव द्वारा बना लिया गया हो। क्या इस युग मे भी ऐसे मानव है जो हम देत्यो से भी ज्यादा शक्तीशाली है ?कुंभ्मन कहता है --> पता नही मित्र। परतुं सत्य तो यही है के मुझे मेरीपुत्री इसी अवस्था मे मुझे यहां मिली थी । तो इसका अर्थ यही हुआ के के कोई शक्ती तो है जो मेरी पुत्री की शक्ती को पराजीत कर दिया है या छल किया है ।कुंम्भन की बात को सुनकर त्रिजला कहती है---> अगर उस समय कालदामु ...Read More

74

श्रापित एक प्रेम कहानी - 74

त्रिजला कहती है।. जब आप इतने वर्षो से यहां पर बंद तो फिर कालदामु ने इसकी सुचना हम तक नही पहूँचायी और फिर इस संकट मे वो किसी और से भी सहायता क्यो नही मांगी ।कुंम्भन ये सब सौचकर परेशान हो जाता है। तब कुंम्भन अपने आप से कहता है।> मुझे कालदामु पर भी नजर रखनी होगी और सिघ्र ही देत्य लोक पहूँचकर वहां की सुख सुविधा का ख्याल रखना होगा। क्योकी अगर ये सारा किया कालदामु हैतो फिर उससे देत्य लोक को भी संकट है । और फिर वहां पर मृदुला भी तो है उसका क्या ? पता ...Read More

75

श्रापित एक प्रेम कहानी - 75

एकांश वर्शाली की हाथ को पकड़कर अपने कंधे पर रख देता है।और कहता है।> ये भी तो तुम्हारा ही वर्शाली !एकांश के मुह ये इतना सुनने के बाद वर्शाली सरमाने लगती है दौनो ही एक दुसरे को बाईक के शिशे मे दैखता है। दौनो ही एक दुसरे को दैखकर सरमाने लगता है और तब एकांश बाईक को धिरे धीरे आगे की और बड़ाने लगता है। उधर मिरा एकांश के कमरे मे शिशे मे अपने आपको दैखकर बस यही सौच रही थी के आज इस शिशे मे ऐसा क्या हो गया के ये शिशा मुझे भ्रम मे डाल रहा था।मैं ...Read More

76

श्रापित एक प्रेम कहानी - 76

सत्यजीत अपनी एक भोंहे उपर करते कहता है।> गए थे ..! गए थे का क्या मतलब मिरा। मैं तो था। और तुम मुझे दैखकर ऐसी भागी जैसे मैं तुम्हारा पति नही बल्की मैं कोई भूत हूँ। और फिर तुम वहां से भूत भूत चिल्ला कर क्यों भागी थी ?तभी वहां पर संपूर्णा और मिना भी आ जाती है। मिरा सत्यजीत से कहती है।> मैं वहां से इसिलिए भागी क्योकी क्योकी उस कमरेके आईने मे मुझे अजीब अजीब से चीजें दिखाई देती है। और फिर एक दम से गायब हो जाती है। मुझे लगता है के हमारे घर मे किसी ...Read More

77

श्रापित एक प्रेम कहानी - 77

एकांश की बात का सत्यजीत जवाब देकर कहता है। अरे बैटा छोड़ो ना क्या तुम भी उसी बात पर हो।एपिसोड 58. रोने की आवाज किसकी है ।सत्यजीत की बात सुनकर एकांश कहता है।अरे बोलिए ना क्या बात है । प्लिज !एकांश के ज्यादा दबाव देने पर मिरा सब कुछ बोलकर सुनाती है। मिरा के सब सुनाने के बाद सत्यजीत कहता है।वो सब तो ठीक है पर मुझे ! मुझे इसने भूत समझा और वहां से भूत भूत चिल्ला कर भाग गई। एकांश दोनो की बात को सुनकर हल्की मुस्कान देता है। जिसे दैखकर सत्यजीत कहता है।अच्छा तो अब तुम्हे ...Read More

78

श्रापित एक प्रेम कहानी - 78

निलु के इतना कहने पर गाड़ी अपने आप रुक जाती है। गाड़ी रुकने के बाद निलु गुस्से से कहता तुझे अभी बताता हूँ।इतना बोलकर निलु गाड़ी से उतरता है तो वो हैरान हो जाता है। निलु की आंखे फटी के फटी रह जाता है। क्योकी निलु जहां पर पहले था उसकी गाड़ी अब भी वही पर थी। ये सब दैखकर निलु बहोत घबरा जाता है । उसे समझ मे नही आता है के ये सब क्या हो रहा है। निलु कहता है।य.…य....ये कैसे हो सकता है। मैने खुद गाड़ी को आगे बड़ते हूए दैखा है। जो पिछे से कोई ...Read More

79

श्रापित एक प्रेम कहानी - 79

निलु की बात सुनकर कुंम्भन गरजते हूए कहता है।हे मुर्ख मानव । कदाचित मुझे ऐसा प्रतीत हो रहा है तुम मेरे वस्त्र की बात कर रहे हो।निलु बिड़ी का एक गहरी कस्त लगाकर कहती है।कदाचित , प्रतीत ! हे भगवान ये किस आदी मानव से पाला पड़ गया आज मेरा । इसकी आधी भाषा मुझे वैसे ही समझ मे नही आ रही है। लगता है नाटक कंपनी मे एक ही केरेक्टर का रोल प्ले कर करके इसका इसका भाषा भी वैसी ही हो गई है।कुंभ्मन निलु से कहता है।देखो मानव मैं अंतिम बार चेतावनी दे रहा हूँ । इतनी ...Read More

80

श्रापित एक प्रेम कहानी - 80

कुंम्भन जौर जौर से हंसते हुए कहता है।" मृत्यु की तुम परिचय मांग रहे हो मुर्ख । आज तेराअंतिम है। और तेरे पास केवल कुछ ही छण शेष है। इससे पूर्व के मैं तुम्हें मृत्यु दंण्ड दूं । बता के मेरी पुत्री कुंम्भनी का मणी कहां है?"निलु डर से थर थर काँप रहा था और अपनी कंप कंपाती हूई आवाज मे कहता है।" क..क..कौन सा मणी ?"कुंम्भन गरजते हुए निलु को अपने एक हाथ से उपर हवा मे लटका देता है। और कहता है।" मुझे मुर्ख समझने की भूल ना करो मानव। मैं उसी मणी के विषय मे बोल ...Read More

81

श्रापित एक प्रेम कहानी - 81

निलु के मन मे कुम्भन का डर सता रहा था । इसिलिए वो अपना हाथ के रस्सी को जल्दी खोल लोता हो और जैसे ही अपमे पैर की रस्सी को खोलने जाता है के तभी वहां पर कुंम्भन आ जाता है। कुंम्भन को दैख कर निलु की जान हलक मे आ जाती है।निलु झट से रस्सी को जैसे तैसे लपेटकर वहा पर लेट जाता है और बेहोश होने का ढोंग करता है। तभी वहां पर कुम्भन आ जाता है और निलु को बेहोश दैखकर कहता है।" लगता है ये अभी तक मूर्छित है। जब तक ये मूर्छित है मैं ...Read More

82

श्रापित एक प्रेम कहानी - 82

अघोरी कहता है"" हम्म्..! ठीक है । दक्ष ये बात मेरे और तुम्हारे बिच ही रहनी चाहिए इस बारे चेतन को पता नही चलनी चाहिए ।"दक्षराज हैरानी से कहता है:" पर चेतन तो आपका ...! "इतना बोलकर दक्षराज रुक जाता है , अघोरी कहता है:" दक्ष तुम्हे जितना कहा गया हो उतना ही करों । जी जी बाबा ..!"दक्षराज कहता है:अघोरी कुछ सौचते हूए कहता है:" अब मुझे ही इस बात का पता लगाना होगा के वोमणी किसके पास है। क्योकी अब देत्य यहां आने लगे है और अगर वो मणी हमे नही मिला तो वो देत्य इस पुरे ...Read More

83

श्रापित एक प्रेम कहानी - 83

एकांश कहता है:पता नही यार इस तरह के दवाई के बारे मे मुझे कोई नॉलेज नही है। ये बेहोशी दवाई थी क्योकी अगर ये बेहोशी की दवाई क्लोरोफॉर्म या एनेस्थीसिया होती तो हम बेहोश हो जाते मगर हम बेहोश नही हूए हम सब कुछ दैख और समझ सकते थे।"तभी वृन्दा कहती है :" ये एक तरह का पैरालाइसिस जैसा था । "एकांश कहता है:" अब ये वही जाने के ये क्या था क्योकी अगर ये पेरालिसिस था तो हमारे सारे अंग काम नही करता मगर ऐसी कुछ भी नही था । उसने कुछ ऐसी चिज का इस्तेमाल किया के ...Read More

84

श्रापित एक प्रेम कहानी - 84

आलोक की बात को सुनकर वृन्दा गुस्से से एकांश की और दैखकर कहती है।" कोई जरुरत नही है। मैं चली जाऊगीं। "आलोक मना तरते हूए कहती है :" नही वृन्दा , तुम्हारा अकेले जाना सही नही होगा ।"वृऩ्दा समझाते हूए कहती है :" अकेली कहां ऑटो वाला साथ होगा ना , तुम चिंता मत करो ।"इतना बोलकर वृन्दां वहां से ओटो पकड़कर चली जाती है। चतुर , आलोक और गुणा भी चला जाता है। सभी के जाने के बाद वर्शाली एकांश से पूछती है।" एकांश जी ये आलोक और चतुर दोनो आलोक के घर पर चेतन को क्यो ढुडने ...Read More

85

श्रापित एक प्रेम कहानी - 85

चतुर आलोक से कहता है:" ये क्या यार यहां पर ताला लगा है। लगता है सभी बाहर हुए है। क्या करें यार ?"आलोक बिना कुछ जवाब दिये हवेली के गेट के पास जाता है। जहां पर दिवार मे एक छोटी सी खिड़की जैसी थी जिसमे एक छौटा सा दरवाजा लगा था । जिसे बहोत गौर से दैखने पर ही पता चलता था। आलोक उस दरवाजा को खोलता है और उसमे से चाबियां निकालकर मेन गेट को खोल देता है।चतुर ये सब दैखकर हैरान था । चतुर हैरानी से आलोक से कहता है:" ये क्या था यार मैं कितनी बार ...Read More

86

श्रापित एक प्रेम कहानी - 86

निलु के उपर आलोक दवाब बनाते हुए पूछता है:" निलु काका अब बोलिए क्या बात है। आप डरीये मत हो सकता है इसमे हम आपकी कोई सहायता कर सके। आप हमे बेखोफ होकर बोलिए । "निलु के पास अब कोई चारा नही था । निलु आलोक के पास अपना हाथ जौड़कर कहता है:" बेटा मुझसे कुछ मत पुछो । अगर मैने आपको सब बता दिया तो मालिक मुझे जान से मार देगें। इसिलिए बेटा तुम सब यहां से चले जाओ। "आलोक निलु का हाथ पकड़कर कहता है:" निलु काका आप तो मुझे बचपन से जानते हो । आपने ही ...Read More

87

श्रापित एक प्रेम कहानी - 87

एकांश मुस्कान देकर कर जवाब देता है। वर्शाली कुछ सोचती हूई कहती है:" परतुं एकांश जी इस वस्त्र को से क्या लाभ ? "वर्शाली के इस सवाल से एकांश हड़बड़ा जाता है और वर्शाली से कहता है:" वो मुझे नही पता तुम ये सब किसी लड़की से ही पूछ लेना।"वर्शाली एकांश की और दैखती है एकांश अपनी नजरे निचे किया हुआ था वर्शाली हलकी मुस्कान के साथ मन ही मन सोचती है:" एकांश जी आपतो बिल्कुल लड़कीयों की तरह शर्माने लगे ।"एकांश वर्शाली के लिए ड्रेस पंसद करता है जिससे वर्शाली को भी पंसद आती है। एकांश वर्शाली से ...Read More