Shrapit ek Prem Kahaani - 65 in Hindi Spiritual Stories by CHIRANJIT TEWARY books and stories PDF | श्रापित एक प्रेम कहानी - 65

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श्रापित एक प्रेम कहानी - 65

एकांश वर्शाली के कंधे पर अपना हाथ रख कर कहता है। 

> हां वर्शाली बताओ मुझे मैं जानना चाहता हूँ के इनकी ऐसी दशा केसे हुई और किसने की ?

 एकांश की बात सुनकर वर्शाली कहती है। 


> एकांश जी मैने आपसे पहले भी कहा था के हम परियां इस पृथ्वी पर अपने योवन और शक्तीयों को संतुलित रखने के लिए इस झरने पर 12 बार ही स्नान कर सकते है़ । जिसके लिए हम परियां इस पृथ्वी पर आते है। क्योकी हम परियों के पास 12 जिवन चक्र होते है।

 वर्शाली की बात पर एकांश हैरान होकर पूछता है। 

> जिवन चक्र ? ये जिवन चक्र क्या है वर्शाली ?  

एकांश की बात सुनकर वर्शाली अपनी कलाई को दिखाती हूई कहती है। 

> ये देखिए एकांश जी । 

एकांश दैखता है के वर्शाली के कलाई पर स्टार जैसा 12 टेटु था। जिसे एकांश बड़े गौर से दैखे जा रहा था। अब वर्शाली अपनी बहन हर्षाली का हीथ दिखाती है । जिसमे सिर्फ 3 जिवन चक्र थे । एकांश ये सब दैखकर कुछ समझ नही पा रहा था । एकांश वर्शाली से पुछता है। 

> वर्शाली .. तुम्हारे हाथ मे 12 है पर वही हर्शाली के 3 ऐसा क्युं ?

 वर्शाली कहती है।

> इसी बात का तो डर है एकांश जी।

 एकांश फिर झट पूछती है ।

> डर ..! पर डर किस बात का ..? 

वर्शाली अपनी हाथ पर बनी जिवन चक्र को दिखते हुए कहती है । 

> ये देखिए एकांश जी ये 12 जिवन चक्र है जो मेरे कलाई पर बनी है।

 वर्शाली अब हर्शाली के हाथ पर बनी 3 जिवन चक्र को दिखाते हूए कहती है ।

> अब आप इसके हाथ पर बनी इस जिवन चक्र को दैखिए । मेरा और हर्शाली का एक समान होना चाहिए था परतुं हर्शाली का जिवन चक्र अब केवल 2 ही शेष रह गए है।  

वर्शाली के 2 चक्र कहने पर एकांश कहता है। 

> 2 नही 3 वर्शाली ..! शायद तुमने ठीक से देखा नही। 

इतना बोलकर एकांश हर्शाली के हाथ के चक्र को वर्शाली को दिखाने लग जाता है। जैसे ही एकांश हर्शाली के हाथ के चक्र की और दैखता है। एकांश की आंखे फटी के फटी रह जाती है। एकांश दैखती है हर्शाली के हाथ के एक जिवन चक्र अपने आप मिटने लगता है।

 जिसे दैखकर एकांश हैरान रह जाता है। एकांश ये सौच कर परेशान हो रहा था--

" के वर्शाली को ये पहले ही कैसे पता चला के हर्शाली के हाथ मे सिर्फ दो ही जिवन चक्र बचेगें। 

एकांश को दैखकर वर्शाली समझ जाती है के वो क्या सौच रहे है। वर्शाली एकांश से कहती है।

> एकांश जी आप यही सौच रहे हो ना के मुझे कैसे पता चला के हर्शाली के हाथ मे केवल 2 जिवन चक्र शेष है ?

  एकांश हैरानी से अपनी सर हां मे हिलाता है। वर्शाली कहती है।

> ये सब उस दुष्ट के कारण के हुआ है एकांश जी। 
जिसके वजह से आज मेरी बहन हर्शाली मृत्यु के द्वार पर है। अगर इस 2 चक्र के रहते मुझे हर्शाली की मणी नही मिली तो हम हर्शाली को फिर कभी जिवित नही कर जाएगें और हमेशा के लिए हम हर्शाली को खो देंगे। 

इतनी बोलकर वर्शाली चुप हो जाती है और उसके आंखो से आंसु के बूंदे गिरने लगती है। जिसे दैखकर एकांश वर्शाली के आंखो के आंसु को पोंछते हूए कहता है। 

> सब ठीक हो जाएगी वर्शाली । मैं उस मणी को ढुंढने मे तुम्हारी मदद करूगां । 

एकांश के इतना कहने पर वर्शाली भावुक हो जाती है और और एकांश के गले से लग जाती है। एकांश भी वर्शाली को गले से लगा लेता है और उसके बालों को सहलाने लगता है। 

वर्शाली को एकांश के बाहो मे एक अपना पन सा लगता है ।

उधर जंगल के अंदर अधोरी बाबा अपने ध्यान मे लिन थे। तभी वहां पर चैतन पहूँच जाता है और अधोरी बाबा को प्रणाम करते हुए कहता है़ । 

> गुरू देव की जय हो। गुरूदेव मे आपकी सेवा के लिए तत्पर हूँ।

 चेतन की आवाज सुनकर अधोरी अपने ध्यान से बाहर आते हैं और आंखे खोलकर दैखता है के उसके सामने चैतन खड़ा था। अघोरी चेतन को दैखकर एक हल्की मुस्कान देता है और कहता है। 

> आ गए तुम चेतन ! मुझे ञात था के तुम सिघ्र ही लौटोगे । कहो क्या खबर लाये हो । कुछ जानकारी प्राप्त हूई की नही ? 

अघोरी के बात पर चेतन कहता है। 


> जी गुरूदेव । 

चेतन के मुह से इतना सुनने के बाद अघोरी खुश होकर कहता है ।

> मै जानता था के जिस कार्य के लिए तुम गए हो उसे पूर्ण किये बिना तुम नही लोटोगे । मुझे तुम पर पूर्ण विश्वास था के तुम सिघ्र ही मेरे पास पूरी जानकारी प्राप्त करके ही लौटोगे। तो बताओ चेतन तुमने क्या पता लगाया है उस मेली के बारे मे । 

अघोरी की बात सुनकर चेतन अघोरी की और दैखता है और कहता है।

> गुरूदेव पहले मैं अपना वेश बदलकर गाँव के प्रत्येक व्यक्ति से मिला और उनसे मुझे बस इतनी ही 
जानकारी प्राप्त हूई है के उस मेला मे जो देत्य आया था वह कुंम्भन ही था । जो रक्षा कवच को तौड़कर अब गाँव मे प्रवेश कर गया है। मेला मे उस देत्य ने काफी नुकसान पहूँचाया है। जिससे कई लोगो की प्राण भी चला गया है और कई लोगो को कुंम्भन पकड़कर ठीक उसी तरह मार कर उसका कंकाल और कटा सर गाँव के बाहर रक्षा के पास रख कर चला गया है। 

चेतन की बात सुनकर अघोरी गुस्से से कहता है। 

> जिस बात की शंका थी वही हो रही है , आखीर कोई तो है जो कुम्भन की सहायता कर रहा है। 

चेतन अघोरी ती बात सुनकर झट से कहता है। 

> कुंम्भन की सहायता परंतु गुरूदेव कोई उस भंयकर देत्य की सहायता क्यों करेगा ? 

अघोरी कहता है। 

> कोई तो है चेतन । अन्यथा कुंम्भन मे इतना सामर्थ 
नही था के वो रक्षा कवच को तौड़ सके। अब मुझे इस बात का पता लगाना होगा के आखीर वो कौन है जो कुंम्भन की सहायता कर रहा है। उसका उद्देश्य क्या है और क्यों ! 

अघोरी चेतन की और दैख कर कहता है ।

> और बताओ चेतन मेला के बारे मे और क्या पता 
लगा। 

चेतन कहता है।

> गुरूदेव गाँव वालो का कहना है के कुंम्भन ने पहले 
तो अपना भयंकर रुप धारण करके सबको मार रहा था के तभी अचानक एक निली रोशनी आकर कुंम्भन पर लगती है और कुंम्भन दर्द से कराहते हुए दुर जंगल मे जा गिरता है। 

अघोरी चेतन की बात को बड़े गौर से सुन रहा था के चेतन के मुह से निलि रौशनी सुनकर अधोरी बड़े उत्साह के साथ चेतन से पूछता है। 

> निलि रौशनी ! क्या कहा तुंमने चेतन निलि रौशनी ? 

चेतन कहता है। 

> हां गुरूदेव गाँव वाले तो यही बता रहे थे। 

अघोरी कुछ सौचता है और फिर कहता है।

> हम्ममम ! इसका अर्थ ये हुआ के मेरा शंदेह सही है।

 अघोरी चेतन से कहता है। 

> चेतन क्या तुम्हे ये पता चला के वो निलि रौशनी कहां से आयी थी।

 चेतन कहता है। 

> गाँव वाले तो उस रौशनी को देवी मां का चमत्कार बता रहा है उस रौशनी को आते हूए किसीने भी नही देखा। गुरूदेव उन गाँव वालो से मुझे इससे ज्यादा और कुछ भी पता नही चला , तब मैने वेश बदल कर हॉस्पिटल मे चौट का बहाना करके वहां पर चली गया ताकि वहां पर रह रहे घायलो से शायद कुछ जानकारी प्राप्त हो सके। तब मुझे एक बात और पता चली । 

अघोरी झट से कहता है--

> क्या चेतन ? 

चेतन कहता है। 


> गुरुदेव वहां पर एक लड़का से मुझे जानकारी प्राप्त हूई के जिस समय कुम्भन अपना भंयकर रुप धारण किये था तब सबको बचाने के लिए उस हॉस्पिटल के डॉक्टर एकांश ने उस देत्य को ललकारा और जब कुंम्भन ने उस डॉक्टर पर अपनी शक्ती से हमला किया तो उस डॉक्टर को बचाने के लिए एक वर्शाली नाम की लड़की ने अपनी की बाजी लगा दी थी और स्वयं घायल हो गई। तभी उसी समय एक निलि रौशनी आकर कुंम्भन को घायल कर देता है। गुरुदेव मुझे संदेह उस डॉक्टर पर हो रहा है क्योकीं किसी मे इतना साहस और सार्मथ नही के उस देत्य को ललकार सके । अवश्य वो निलि रौशनी का उस संबंध उस डॉक्टर से है। 

चेतन की बात सुनकर अघोरी हल्की मुस्कान के साथ कहता है ।

> अच्छा ! तुमने तो तब सारा मामला ही सुलझा दिया। 

चेतन अपना सर खुजाते हुए कहता है। 

> आ...आप ऐसे क्यों कह रहे हो गुरुदेव ! क्या मुझसे कोई भूल हूई है ? 

अघोरी चेतन के बात पर हंसते हूए कहता है। 

> हा हा हा हा ! अरे नही चेतन तु मेरा सबसे प्रिय शिष्य है और तुमसे भुल तो हो ही नही सकता। अच्छा अब ये बता के वो वर्शाली कौन है । कहां रहती है , क्या करती है ! कुछ जानकारी है इसकी तुम्हें ।

 चेतन कहता है । 

> नही गवरुदेव! बस मैं उसका पता लगाने ही वाला था के उस डॉक्टर का दोस्त मतलब दक्षराज का भतिजा को शायद मुझ पर शक हो रहा था ऐसा मुझे आभास हो रहा था इसिलिए मैने बिना दैरी किये ही वहां से भाग निकला।

 अघोरी गुस्से से अपनी त्रिशुल उठायी और चेतन पर गुस्सा होते हुए कहता है। 

> भाग गया का क्या मतलब ! क्या हम कोई चोर या राक्षस है जो तुं वहां से भाग निकले। हम अघोरी है अघोरी ! 

अघोरी की गुस्सा दैखकर चेतन डर से कांपने लगता है । अघेरी चेतन से कहता है।

> चेतन तुम सिघ्र जाओ और जाकर उस वर्शाली के बारे मे और जानकारी जुटा कर लाओ । 

अघोरी बात सुनकर चेतन अपने दोनो हाथ जोड़कर अघोरी को प्रणाम करता है और कहता है ।

> जैसी आपकी आज्ञा गुरुदेव। 

चेतन कुछ कदम दुर गया ही था के फिर चेतन मुड़कर आता है । जिसे दैखकर अघोरी कहता है । 

> क्या बात है चेतन मन मे कुछ प्रश्न है क्या ?

 चेतन कहता है । 

> हां बाबा आपसे एक बात और करनी थी। 

अघोरी कहता है । 

> निसंकोच कहो । 

चेतन कहता है।

> गुरुदेव जब मैं हॉस्पिटल से भागकर दक्षराज के घर 
गया था । तब वहां पर मुझे घर के उपर बैठे दो पक्षीयों पर नजर पड़ी जो मुझे कोई साधारण पक्षी नही लगी। तो मैने अपनी शक्ती से उसके बारे मे पता लगाने की कोशीश की तो मुझे पता चला के वो कोई साधारण पक्षी नही बल्की देत्य है। 



To be continue.....1047