त्रिजला कहती है।
. जब आप इतने वर्षो से यहां पर बंद तो फिर कालदामु ने इसकी सुचना हम तक क्यो नही पहूँचायी और फिर इस संकट मे वो किसी और से भी सहायता क्यो नही मांगी ।
कुंम्भन ये सब सौचकर परेशान हो जाता है। तब कुंम्भन अपने आप से कहता है।
> मुझे कालदामु पर भी नजर रखनी होगी और सिघ्र ही देत्य लोक पहूँचकर वहां की सुख सुविधा का ख्याल रखना होगा। क्योकी अगर ये सारा किया कालदामु है
तो फिर उससे देत्य लोक को भी संकट है । और फिर वहां पर मृदुला भी तो है उसका क्या ? पता नही वो कैसी है। मुझे सिघ्र अति सिघ्र यहीं से निकलना पड़ेगा ।
उधर वर्षाली और एकांश झरने के पास से गायब होकर अपने बाईक के पास आ जाती है। जिससे एकांश हैरान होकर ईधर उधर दैखने लगता है । उसके साथ ऐसा पहली बार हो रहा था के जो एकांश को एक मैजिक की तरह लग रहा था । ए
एकांश को हैरान दैखकर वर्षाली कहती है ।
> क्या हुआ एकांश जी ? आप ऐसे अचानक इधर उधर क्या दैखने लगे।
एकांश कहता है।
> यही दैख रहा हूँ के अभी हम कहां थे और अभी कहां पर आ गए । जैसे ये सब आंख खुलते और बंद होते ही हो गया । जिसे मैं विश्वास नही कर पा रहा हूँ ।
वर्षाली हल्की मुस्कान के साथ कहती है --
> अहच्छा..! तो ये बात है । अब आप इन सब की आदत डाल लिजिए एकांश जी क्योकी ये सब अब आपके साथ प्रत्येक दिन होने वाली है। अब आप किसी मानव के साथ नही बल्की एक परी के साथ हो । और इसिलिए आपको अब इन सबका आदत डाल लेनी पड़ेगी।
वर्शाली कहती है ।
> ये तो आपका वाहन यहां पर है इसिलिए मैं आपको
यहा पर लेकर आयी अन्यथा अबतक आप अपने घर अपने कमरे पर होते।
वर्शाली की बात सुनकर एकांश हैरान होकर कहता है।
> अच्छा ..! क्या तुम सच कह रही हो वर्शाली ? क्या ऐसा भी हो सकता है ?
एकाश की बात पर वर्शाली कहती है ।
> अच्छा । तो आपको मेरे शक्ती पर अभी भी संदेह है।
वर्शाली अपनी एक भोंहे को उपर करके एकांश की और दैखकर कहती है।
एकांश वर्शाली की और दैखकर हल्की मुस्कान के साथ ना मे अपना सिर हिलाता है । वर्शाली अपनी एक भोहें को उपर करके एकांश का हाथ पकड़ती है और कहती है।
> अच्छा तो ये बात है । आपको अभी तक मेरे शक्ती
पर संदेह है । वर्शाली की शक्ती पर संदेह है। तो लीजिए अगले पल हम आपके घर आपके कमरे मे होगें। एकांश कुछ कह पाता के वर्शाली एकांश का हाथ पकड़ कर अपनी आंखे बंद करके मन ही मन कुछ कहती है और अगले ही पल दौनो वहां से गायब हो जाता है।
और दौनो ही एकांश के कमरे पर पहूँच जाता है। जहां पर मिरा पहले से ही एकांश के कमरे पर आईने केे सामने खड़ी थी। तभी मिरा को अचानक से आईने मे एकांश और वर्शाली दिख जाती है। मिरा हैरानी से शिशे मे दौनो को ही दैख रही थी । एकांश अपने आपको अपने कमरे मे दैखकर हैरान था ।
ये सब दैखकर उसे अपनी आंखो पर भरोसा नही हो रहा था के तभी एकांश की नजर मिरा पर पड़ती है जो आईने मे एकांश और वर्शाली को ही हैरानी से घुरे जा रही था। एकांश अचानक से मिरा को दैखकर घबरा जाता है। मिरा और एकांश आईने मे एक दुसरे को ही दैख रहा था ।
वर्शाली भी आईने मे मेरा को दैखकर हैरान थी । तभी मिरा खुश होकर एकांश और वर्शाली की और मुड़ने जाती है। के एकांश वर्शाली से कहता है।
> ये कहां फंस गए वर्शाली कुछ करो वरना हम पकड़े जाएगें।
अब मिरा कहती है।
> अरे एकांश बैटा और वर्शाली ...!
मिरा की आवाज सुनकर एकाश एक दम से चुप हो जाता है। मिरा इतना बोलकर जैसे ही पलटती है । के एकांश और वर्शाली वहां से गायब हो जाती है। मिरा पलटकर दैखती है के वहा पर कोई नही है । ये दैखकर मिरा चौंक जाती है ।
मिरा को ये सब अजिब लगता है । फिर मिरा झट से आईने की और मुड़ती है तो दैखती है के अब आईने मे भी कोई नही था। मिरा ये सौचकर हैरान हो रही थी के अभी मैने आईने मे दौनो को दैखा और फिर एक पल मे दौनो गायब हो जाता है। मिरा अपनी आंखो को मलकर फिर से आईने मे देखती है और कहती है ।
> हें ..! ये क्या हो गया है मुझे ? मैने तो अभी एकांश और वर्शाली को आईने मे दैखा के वो दौनो मेरे पिछे खड़े है फर जैसे ही मैं पिछे मुड़ी तो दौनो ही गायब ।
इसके बाद मिरा फिर सिसे पर दैखती है तो मिरा को अपने अलावा दुसरा कोई दिखाई नही देती। तभी इस कमरे मे संपूर्णा आ जाती है तो अब मिरा को आईने मे संपूर्णा नजर आने लगती है। जिसे दैखकर मिरा कहती है ।
> ऐ ले अब इस मे मुझे संपूर्णा नजर आने लगी है।
मिरा की बात को सुनकर संपूर्णा रुक जाती है । संपूर्णा भी आईने मे मिरा को ही दैखती है। मिरा आईने मे संपूर्णा को हैरानी से दैखती है और मन ही मन बड़बड़ाती है ।
> नही नही ये भी जरुर कुछ ना कुछ मेरा ही भ्रम है अगर मैं फिर पिछे मुड़ी तो वहां पर कोई नही दिखेगी। इससे अच्छा ये होगा के मैं पिछे मनड़कर दैखुगीं ही नही।
मिरा की अजीबों गरीब हरकत से संपूर्णा धिरे से कहती है।
ये मां को अचानक क्या हो गया। ये आज क्या बड़बड़ा रही है।
तभी मिरा के हाथ से कंघी निचे गिर जाती है। जिसे उठाने के लिए मिरा जैसे ही निचे झुकती है वहां से संपूर्णा बाहर चली जाती है। फिर मिरा जैसे ही कंघी को उठाकर शिशे मे दैखती है तो वहां पर संपूर्णा नही थी । मिरा हैरानी से पिछे मुड़कर दैखती है तो वहां पर कोई नही था मिरा घबराते हूए हैरानी से कमरे को चारों तरफ दैखती है पर मिरा को उस कमरे पर कोई नही दिखता ।
मिरा फिर कहती है।
> ये मुझे आज हो क्या गया है। या फिर इस आईने मे ही कोई खराबी है । या फिर कही मैने भांग तो नही पी लिया।
मिरा अपनी माथे को अपने हाथ से ठौकते हुए कहती है ।
> हाय राम ये मुझे क्या होगा आज सब कुछ सपने जैसा क्यो लग रही है।
इधर वर्शाली और एकांश वापस उसी जगह पर आ जाती है जहां से पहले आयी थी एकांश के बाईक के पास। वापस आने के बाद एकांश वर्षाली से कहता है ।
> ये क्या वर्शाली ! मैं तो तुमसे बस मजाक कर रहा था और तुम तो उसे सच मान कर मुझे अपने घर ही लेकर चली गई । वो तो अच्छा हुआ के चाची के मुड़ने से पहले ही हम सही समय पर वहां से गायब हो गए वरना आज तो हम पकड़े जाते । पर चाची ने हमे एक साथ दैख लिया है पता नही जब हम घर जाऐगे तब चाची क्या क्या पूछेगें ।
तभी एकांश अचानक से हसने लगता है।
> हा हा हा हा। एकांश की हंसी दैखकर वर्शाली पूछती है ।
> क्या हुआ एकांश जी आप अचानक से यूं हसने क्यूं लग गये।
एकांश हंसते हूए कहता है।
> वर्शाली ....! एक बात तो है के चाची की मुह दैखने लायक थी। वो बेचारी जब हमे वहां पर नही दैख पायी होगी तो पता नही उनका रियेक्सन कैसा रहा होगा ।
एकांश की हंसी दैखकर वर्शाली भी हंसने लगती है। और कहती है ।
> आपको मजा आया एकांश जी।
एकांश कहता है ।
> हां वर्शाली पर चाची का मुह अभी दैखने लायक होगी। हाहा हा हा ।
इतना बोलकर एकांश हंसने लगता हे तो वर्शाली कहती है। अगर ऐसा है एकांश जी तो चलिए ना एक बार और आपके कमरे से घुमकर आते है।
एकांश वर्शाली से मना करते हुए कहता है।
> नही नही वर्शाली अब ऐसा नही करना चाहिए। वरना छोटी मां कही अब बेहोश ना हो जाए ।
इतना बोलकर दौनो एक दुसरे को दैखकर हंसने लगे । तो एकाश कहता है ।
> अब तुम्हारी जादु से नही मेरे बाईक से जाऐगें ।
इतना बोलकर एकांश बाईक पर बैठ जाता है और बाईक को स्टार्ट करके वर्शाली से कहता है ।
> अब चले वर्शाली !
वर्शाली हां मे अपनी सर हिलाती है और एकांश के बाईक के पिछे बैठ जाती है। वर्शाली को बाईक पर बैठकर थौडा डर सा लग रहा था और पकड़ने के लिए वर्षाली बाईक पर जगह ढूंढ रही थी। तो एकांश वर्शाली की हाथ को पकड़कर अपने कंधे पर रख देता है।
और कहता है।
> ये भी तो तुम्हारा ही है वर्शाली !
To be continue....1175