Shrapit ek Prem Kahaani - 61 in Hindi Spiritual Stories by CHIRANJIT TEWARY books and stories PDF | श्रापित एक प्रेम कहानी - 61

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श्रापित एक प्रेम कहानी - 61

एकांश वर्षाली के हाथ को पकड़कर जैसे ही कुछ कहने वाला होता है। के एकांश को पता चलता है के वर्षाली के हाथ एकदम ठडीं हो चुकी थी । एकांश ये दैखकर हैरान था। तभी एकांश वर्षाली सको आवाज देने लगता है। एकांश वर्षाली को पुकारता है--

> वर्षाली ..! वर्षाली !

 एकांश के बार बार बुलाने पर भी वर्षाली का कोई भी प्रतीक्रीया नही आती है जिससे एकांश घबरा जाता है। एकांश वर्षाली के नब्ज को चैक करने लग जाता है। पर एकांश को वर्षाली की नब्ज नही मिलता है। एकांश वर्षाली को हिलाने लगता है। और पुकारने लगता है--

> वर्षाली ...! वर्षाली ...! उठो वर्षाली मैं एकांश तुमसे मिलने के लिए आया हूँ । 

एकांश ते बहुत प्रयास करने के बाद भी जब वर्षाली कोई जवाब नही देताी है तो एकांश के आंख से आंसु बहने लगते है। एकांश को सपना सच होते हूए दिखाई देता है। एकांश फिर दोबारा वर्षाली के नब्ज और दिल 
 की धड़कन को चैक करता है। पर कुछ नही मिलता । एकांश के आंखो से आंशु निकलने लगता है एकांश अपने आंशु को पोंछते हूए कहता है --

> नही ऐसो नही हो सकता ... ऐसा नही हो सकता । वर्शाली तुम मुझे यूं अकेला छौड़कर नही जी सकती। मैं .... मैं अब क्या करु । ये क्या हो गया , कैसे हो गया , वर्शाली तुम्हें ये क्या हो गया । वापस आ जाओ वर्षाली । उठो वर्शाली ....मैं अब क्या करूं वर्षाली । क्या करू। मैं तुम्हारे बिना नही रह सकता वर्शाली...
नही रह सकता। कुछ तो बोलो वर्शाली ...!

एकांश को कुछ भी समझ मे नही आ रहा था के वो क्या करे , वर्शाली को ऐसे दैखकर एकांश डर गया था । तभी एकांश के कान मे वर्षाली की आवाज आती है --

> मैं यहां हूँ एकांश जी।

 वर्षाली की आवाज को सुनकर एकांश खुश हो जाता है और एकांश वर्षाली को इधर उधर दैखने लगता है। तभी की नजर वर्षाली पर जाती है जो दरवाजे पास खड़ी थी। वर्षाली को सही सलामत दैखकर एकांश खुशी से वहा से उठ कर वर्षाली की और भागकर जाता है और वर्षाली को गले से लगा लेता है। 

वर्षाली भी एकांश के बाहों मे समा जाती है। वर्षाली भी अपनी आंखे बंद करते एकांश के बाहों मे रहती है। वर्षाली अपने प्रति एकांश के प्यार को महसुस कर रही थी। वर्षाली भी एकांश से उतना ही प्यार करने लगी थी जितना के एकांश करता था। 

पर वर्षाली अपने प्यार को छुपाती हुई कहती है--

> एकांश जी आप यहां इस समय ?

 एकांश वर्षाली को गले लगाकर कहता है--

> तुम ठीक हो वर्षाली । मैं ..! मैं कितना खुश हूँ तुम्हे ठीक दैखकर के मैं तुम्हे बता नही सकता।

 एकांश वर्शाली से अलग होकर उसके गाल को छुकर कहता है--

> तुम्हे पता है वर्शाली आज मैने एक बहुत ही बुरा सपना दैखा। मैंने दैखा की।


 एकांश के इतना कहते ही वर्षाली एकांश के होंट पर अपना हाथ रख देती है और कहती है--

> आपको कुछ बताने की जरूरत नही है। मैं आपके 
आंखो मे दैख सकती हूँ के आपने मुझे लेकर जरूर कुछ बुरा सपना ही दैखा होगा। पर एकांश जी एक सपने के लिए आपको यहां इस समय नही आना चाहिए था । आप जानते हो ना इस जंगल मे कितना संकट है। आपको यहां ऐसे नही आना चाहिए था। अगर आपको कुछ हो जाता तो ?

एकांश कहता है --

> मैं क्या करता वर्शाली मैं बहुत घबरा गया था । मुझे 
डर था के कही ये सपना सच तो नहीं । और फिर मुझे ऐसा लग रहा था के कोई तुम्हे मुझसे ....!

 इतना बोलकर एकांश चुप हो जाता है। वर्शाली एकांश से पुछती है--

> क्या एकांश जी ? मुझे आपसे क्या ..? बोलिए ना आप रुक क्यों गए ? 

एकांश बिना कुछ जवाब दिए चुप रहता है , एकांश वर्शाली से कहना चाहता था के वो उससे बहुत प्यार करता है पर एकांश कह नही पाता और वर्शाली जानती थी के एकांश उससे क्या कहना चाहता है , वर्शाली एकांश के मुह से सुनना चाहती है , तो वर्शाली अपनी बात को जारी रखते हुए धिरे से कहती है --

> जैसै मुझे कोई आपसे दुर कर रहा है। 

 एकांश अपनी सर को हां मे हिलाते हुए जवाब देता है और अपनी नजरे वर्षाली से जुराने लगता है। वर्शाली एकांश के पास जाकर उसका हाथ पकड़कर कहती है--

> एकांश जी आप भुल रहे हो के मैं एक परी हूँ और परी के पास दिव्य शक्तीयां होती है। कोई भी इतनी आसानी से मुझे हानी नही पहुचा सकती और आपको ऐसा चिंता नही करनी चाहिए क्योकीं इस जंगल मे इस जगह पर मेरा राज चलता है। और आपका यूं इस तरह अकेले इस जंगल मे आना आपके लिए अच्छा नही ह़ै़ ।

वर्षाली एकांश के हाथ मे लगी खरोचों को दैखकर कहती है--

> इस्स। कितनी सारी चोंटे आई है आपको । आपना 
बिल्कुल मंद बुध्दी हो। एक सपने के लिए कोई इस तरह से भागकर आता है वो भी अपनी चिंता किये बिना। 

एकांश कहता है--

> मैं क्या करता वर्शाली वो सपना था ही इतना भयानक के मैं अपने आपको यहां आने से रोक ही नही पाया।

 वर्षाली कहती है--

> आपको पता है ना वो कुंभ्मन अब कुछ भी कर 
सकता है। क्योकी उसके पास अब ज्यादा समय नही है। इसीलिए अब कभी भी ऐसे मुझे बिना बताए यहां नही आइएगा। वो भी ऐसे किसी सपने के कारण तो बिल्कुल भी नही। 

तभी एकांश वर्शाली से पुछता है--

> अच्छा वर्शाली मैं कबसे आकर तुम्हे उठाने की कोशीश कर रहा हूँ और तुम हो के उठने के नाम ही नही ले रही थी । और तुम्हारा नब्ज वो भी बंद था तुमने तो मुझे डरा ही दिया था। क्यो करती हो तुम मेरे साथ ऐसा ?

 एकांश की बात सुनकर वर्शाली उसी बिस्तर की और इशारा करती हुई कहती है।
--

> एकांश जी आप जिसे मुझे समझकर पुकार रहे थे वो मैं नही मेरी बड़ी बहन हर्षाली है।

वर्शाली की बात सुनकर एकांश चौंक जाता है के जिसे वो वर्शाली समझ रहा था वो कोई और है। एकांश धिरे धिरे हर्शाली की और बड़ता है। एकांश हर्शाली को दैखकर हैरान रह जाता है के वर्शाली और हर्शाली दौनो ही बिल्कुल एक ही जैसी दिखती है। 

एकांश वर्षाली से झट से पूछता है--

> ये तो बिल्कुल तुम्हारी जैसी ही दिखती है वर्शाली ! 

वर्शाली कहती है--

> हां एकांश जी हम दौनो का चैहरा एक जैसी ही है 
हम दौनो एक ही जन्में थे हर्शाली मुझसे पहले जन्म लि थी इसिलिए ये मुझसे बड़ी है। एकांश कहता है--

> पर वर्शाली तुम्हारी बहन की ऐसी हालत क्यों है ? 

वर्शाली धीरे से आकर हर्शाली के बेड पर बैठ जाती है और हर्शाली के बालों को सहलाते हूए कहती है--

> एकांश जी आज से करीब कुछ वर्ष पहले हुई एक 
घटना ने हमारी खुशीयां हमसे छीन ली। 

एकांश हैरानी से वर्षाली की बात सुन रहा था। तभी एकांश को जोरों की निंद आने लगती है। एकांश एक उबासी लेकर कहता है--

> क्या कुछ सा...आ...ल पहले ? पर वर्षाली तुमने कभी मुझे इस बारे बताया क्यों नही। 

एकांश फिर एक उबासी लेता है और अपनी आंख मलने लगता है। वर्शाली एकांश का हाथ पकड़कर कहती है--

> मैं आपको अब सब बताउगीं । पर अभी आप बहोत थके हुए हो और कुछ ही दैर मे सुबह भी होने वाली है। और फिर रात जागने से आपकी थकान भी और बड़ जाएगी। इसीलिए अभी आप आराम करो । कल सुबह मैं आपको सारी बात विस्तार से बताउगीं।

एकांश को निंद भी बहोत आ रही थी पर वह अभी सारी बात जानना चाहता था इसीलिए एकांश वर्शाली 
 से कहता है--

> कोई बात नही वर्षाली तुम बताओ ना हर्शाली को क्या हुआ था। मैं बाद मे सो लुगां। 

एकांश वर्शाली के गौद मे अपना सर रख लेता है और कहता है --

> अब बताओ ...

एकांश के बार बार जिद करने पर वर्शाली आगे बताने के लिए राजी हो जाती है। एकांश वर्षाली से पुछता है --

> क्या हुआ था हर्शाली के साथ वर्शाली बताओ ना। 

एकांश फिर एक उबासी लेता है और वर्शाली के गौद मे सो जाता है। वर्शाली एकांश के सर मे हाथ फेरकर कहती है--

> बिल्कुल मंद बुध्दी हो आप एकांश जी। शरीर 
 थका है पर फिर भी मेरी फिक्र है।

वर्शाली एकांश के माथे पर एक किस करती है और कहती है--

> एकांश जी ये मेरी पहला चुम्बन है जो मैं किसी पुरूष को दे रही हूँ। मैं आपको बिना बताए आपको चुम्बन किया क्योकीं मैने आपकी सारी बात सुन ली थी । जब आप हर्शाली को मुझे समझ कर अपनी मन की सारी बात कह दी थी।

 वर्शाली का चेहरा सरम से लाल हो गया था क्योंकी उसने पहली बार किसी मर्द को चुमा था। वर्शाली सरमाते हूए एकांश से कहती है--

> एकांश जी ! मैं भी आपसे बहुत प्रेम करती हूं । मेरा सब कुछ आपका है। मैं भी आपके बिना नही रह सकती एकांश जी।


To be continue....983