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अमृता इमरोज, प्यार के दो नाम, जिनके बारे में तब जाना ,जब मेरी उम्र सपने बुनने की शुरू हुई थी, और प्यार का वह हल्का एहसास क्या है अभी जाना नहीं था। बहुत याद नहीं आता कि कब किताबें ...Read More

जिसने उस वक़्त स्त्री की उस शक्ति को जी के दिखा दिया जब एक औरत अपने घूंघट से बाहर निकलने का सोच भी नहीं सकती थी, अमृता ने न केवल अपनी जिंदगी को इस तरह से जिया, अपने लिखे ...Read More

अमृता प्रीतम खुद में ही एक बहुत बड़ी लीजेंड हैं और बंटवारे के बाद आधी सदी की नुमाइन्दा शायरा और इमरोज जो पहले इन्द्रजीत के नाम से जाने जाते थे, उनका और अमृता का रिश्ता नज्म और इमेज का रिश्ता ...Read More

अमृता के लिखे नावल में मुझे ३६ चक बहुत पसंद है। यह उपन्यास अमृता ने १९६३ में लिखा था जब यह १९६४ में छपा तो यह अफवाह फैल गई कि पंजाब सरकार इसको बेन कर रही है। पर ऐसा ...Read More

नारी डराती नहीं है मगर पुरुष डरता है. डरे हुए पुरुषों का समाज हैं हम. किसी ना किसी उर्मि का डर हमारे समाज में हर पुरुष को है. जीती जागती हंसती खेलती उर्मि नहीं, उर्मि के मरने के बाद भी वो ...Read More

अमृता और इमरोज दोनों मानते थे कि उन्हें कभी समाज की स्वीकृति की आवश्यकता नहीं थी !आम लोगो की नजर में उन्होंने धर्म विरोधी काम ही नही किया था बलिक उससे भी बड़ा अपराध किया था, एक शादीशुदा औरत् ...Read More

अमृता ने इमरोज़ का इन्तजार किस शिद्दत से किया, वह प्यार जब बरसा तो फ़िर दीन दुनिया की परवाह किए बिना बरसा और खूब बरसा.औरत की पाकीज़गी का ताल्लुक, समाज ने कभी भी, औरत के मन अवस्था से नहीं ...Read More

अगला चरित्र उनकी एक कहानी बृहस्पतिवार का व्रत’ व्रत पूजा को ले कर है इसके बारे में अमृता लिखती हैं बृहस्पतिवार का व्रत’ कहानी उस ज़मीन पर खड़ी है, जिससे मैं वाकिफ नहीं थी। एक बार एक अजनबी लड़की ...Read More

अमृता की लिखी जंगली बूटी का चरित्र अंगूरी भी प्रेम के उस रूप को दिखाता है जिसको अमृता ने कहीं न कहीं जीया है अमृता ने अपने जीवन के संदर्भ में लिखा हैः- इन वर्षो की राह ...Read More

विभाजन का दर्द अमृता ने सिर्फ सुना ही नहीं देखा और भोगा भी था। इसी पृष्ठभूमि पर उन्होंने अपना उपन्यास ‘पिंजर’ लिखा। 1947 में 3 जुलाई को अमृता ने एक बच्चे को जन्म दिया और उसके तुरंत बाद 14 ...Read More