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पहला प्यार by Kripa Dhaani in Hindi Novels
2 फरवरी 1987कोहरे की चादर लपेटे जाड़े की अलसाई सुबह सूरज की झिलमिलाती किरणों के इंतज़ार में थी। चाय की चुस्कियों और अख़बार...
पहला प्यार by Kripa Dhaani in Hindi Novels
'बड़ी अजीब हो बेला तुम और आज तो रहस्यमयी भी लग रही हो।' राज के होंठ बुदबुदा उठे।राज और बेला का प्रेम विवाह हुआ थ...
पहला प्यार by Kripa Dhaani in Hindi Novels
दिन बीतने लगे और ऑफिस के बोरिंग रूटीन में बंधकर राज पेन फ्रेंड की बात भूल गया। मगर शायद तक़दीर मेहरबान थी। एक दिन जब वह ऑ...
पहला प्यार by Kripa Dhaani in Hindi Novels
राज को कुमार गौरव से जलन हो रही थी। जलन क्या? उसे तो उस पर बेतहाशा गुस्सा आ रहा था। गुस्सा निकालने का बड़ा अजीब तरीका नि...
पहला प्यार by Kripa Dhaani in Hindi Novels
बेला ने राज के लिए छोड़े कागज़ के पुर्ज़े में कब्रिस्तान का पता देते हुए लिखा था – ‘उस कब्र पर चले आना, जिस पर सफेद गुलाब...