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पर-कटी पाखी by Anand Vishvas in Hindi Novels
प्रस्तावना बालक के माता और पिता, दो पंख ही तो होते हैं उसके, जिनकी सहायता से बालक अपनी बुलन्दियों की ऊँचे से ऊँची उड़ान...
पर-कटी पाखी by Anand Vishvas in Hindi Novels
1.पर-कटी पाखी. कल से ही तो चालू होने वाले हैं पाखी के प्रिलिम ऐग्ज़ामस्। पढ़ते-पढ़ते मन बदलने के लिये वह टैरस पर आ गई। ऊ...
पर-कटी पाखी by Anand Vishvas in Hindi Novels
2. अपना ही प्रतिविम्ब. अपना ही प्रतिविम्ब तो दिखाई दे रहा था पाखी को, इस बेचारी, बेवश, विवश और घायल *पर-कटी चिड़िया* में...
पर-कटी पाखी by Anand Vishvas in Hindi Novels
3. सुरक्षा-कवच. अपनी *पर-कटी चिड़िया* की सुरक्षा और सुरक्षित स्थान को लेकर पाखी बहुतचिन्तित थी। वह एक ऐसे स्थान की तलाश...
पर-कटी पाखी by Anand Vishvas in Hindi Novels
4. नया ठिकाना. -आनन्द विश्वास आज स्कूल में भी सारे दिन उदास ही रही पाखी। शायद उसे अपनी कम और अपनी *पर-कटी* की चिन्ता कुछ...