Best Moral Stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Moral Stories in All books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cultur...Read More


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कैद बा-मशक्कत By कमल चोपड़ा

​कैद बा-मशक्कतकमल चोपड़ा​प्रहार से बचने के लिए पीछे हटी थी, मुक्का उसे न लगकर दीवार में जा लगा था। दर्द से बिलबिलाता और गुस्से में फनफनाता हुआ पति लगभग पागल-सा हो आया था। पत्नी का...

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पुरस्कार By कमल चोपड़ा

पुरस्कारकमल चोपड़ा​सदानंद एक सीधा-सादा आदमी था। वह मेहनत-मजदूरी कर अपना और अपने बच्चों का पेट पालता। रोजाना की तरह आज भी वह काम पर जा रहा था कि किसी ने पीछे से आवाज देकर उसे रोका,...

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जया देव तारी - भाग 1 By Prof Shriram V Kale

जया देव तारी - भाग ०१                        श्रावणात  दाजी  प्रभू मिराश्यांची वरसल सुरू झाली आणि ईश्वराच्या  गाभाऱ्याला कुलूप लागलं. दत्तंभट सालाबाद प्रमाणे  सकाळीच  पूजा साहित्य...

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झूठ-सच By कमल चोपड़ा

झूठ-सच कमल चोपड़ा​   राजकुमार श्वेतांक की उम्र पंद्रह वर्ष थी। एक दिन घूमते-घूमते वह वन की ओर निकल गया। अचानक उस पर एक शेर ने हमला कर दिया। राजकुमार के हाथों से हथियार छूट गए। वह ल...

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खोया हुआ विश्वास By कमल चोपड़ा

खोया हुआ विश्वास​  कमल चोपड़ाबंटी को खाली हाथ घर लौटा देखकर माँ ने हैरानी से पूछा— "नमक की थैली कहाँ है? मैंने तुझे दस रुपए देकर नमक की थैली लेने भेजा था ना?"​जवाब में बंटी ने सुबक...

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બે રસ્તા એક ઓટલો By Munavvar Ali

સાંજના પટાણે પિતાજી અને હું ચા પીવા બેસ્યા હતા.તેવામાં મૂર્તિ કાકા ઘરે આવ્યા.પિતાજીએ સૌથી પહેલા મને પાણી લેવા મોકલ્યો અને તેમને ચા પાણીની ઓફર કરી. થોડીવાર તેઓ બેસ્યા પછી પિતાજી આઈસ...

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Back to Those Days By Insha noor

No matter what you are what's your age you still miss your old days sometimes you become too much nostalgic and you can't find an escape from that nostalgiaLike I'm the...

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स्वाभिमान By कमल चोपड़ा

स्वाभिमान​  कमल चोपड़ास्कूल से आते ही विशू ने मां से कहा—'मां! मुझे आज ही नए कपड़े लेकर दो।'​'क्यों?' माँ ने पूछा।​'कल मेरे सबसे अच्छे दोस्त निखिल का जन्मदिन है...

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સંબંધો ના ડિપ્લોમેટ કિશન કાકા - 3 By AKHIL KUMAR

To be continue. કિશન કાકા એટલે મોટા ગજા ના ઉદ્યોગપતિ ૪૦ માણશ ની ટીમ તો એ એકલા હાથે હૅન્ડલ કરી દે. ટીમ મેનેજમેંટ.  HR મેનેજમેન્ટ.એમ્પ્લોયી ના ઇગો મેનેજમેન્ટ. બધા કર્મચારીઓ વચ્ચે ગજબ...

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मानवता की जीत By prem chand hembram

मानवता की जीत (अंतिम संस्करण)धनबाद जिले की छाती पर बसा रहिमनगर…एक छोटा सा कस्बा—जहाँ जिंदगी सरल थी, पर समाज दीवारों में बँटा हुआ।कुएँ अलग थे…रास्ते अलग थे…और दिल—अपने-अपने डर और दा...

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વરસાદ પડે… ત્યારે ઘર દિલમાં પાછું આવી જાય છે By Daily life Stories

Missing Home વરસાદ આવ્યો... અને સાથે આવી ઘર ની યાદ વરસાદ આજે અહીં પણ પડતો હતો, પણ કંઈક અલગ લાગતું હતું. બારી પાસે ઊભી રહીને હું શહેરને જોઈ રહી હતી. ઉંચી ઈમારતો, ચમકતી લાઈટ્સ, દોડતી...

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तक़लीफ़ By राज बोहरे

 तक़लीफ़ दोपहर की धूप अपनी पूरी तल्खी के साथ शहर की पुरानी सिविल लाइन की मंत्री निवास की बिल्डिंग पर झुकी हुई थी। बाहर खड़े नीम के पेड़ की छाया भी जैसे सिमटकर खुद में सिमट गई थी। भी...

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અવાવરુ વાવનો અતીત - 1 By Ashoksinh jadeja

**પ્રકરણ ૧: સીમમાં સંભળાયેલો કાળજું ચીરતો અવાજ**          સૌરાષ્ટ્રની ખમીરવંતી ધરતી પર જાણે કુદરતે સોનાની મહોરો વેરવી હોય એવું એ રળિયામણું ગામડું. ગામની રક્ષા કરવા કુદરતે જાણે ચારે...

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एक छोटी सी भूल By prem chand hembram

एक छोटी सी भूल“आप पुरानी सोच के हैं…”अपनी ही बेटी के मुँह से निकले ये शब्द,शहर के प्रतिष्ठित वकील रामगोपाल वर्मा के हृदय को चीर गए।उन्होंने जीवन में अनेक कठिनाइयाँ देखी थीं,परंतु क...

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हर कदम परीक्षा By कमल चोपड़ा

हर कदम परीक्षा​ कमल चोपड़ाकाम की तलाश में इधर-उधर धक्के खाने के बाद निराश होकर मधुकांत घर लौटने लगा तो पीछे से आवाज आई, 'ऐ भाई, यहाँ कोई मजदूर मिलेगा क्या?'​मधुकांत ने मुड़...

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મેચ્યુરિટિ ના સર્ટિફિકેટ આપતા હસમુખ કાકા By AKHIL KUMAR

પાપા ના ગયા પછી અચાનક જ  ઘર ની વાત બધી જવાબદારીઓ હતી મોટા મોટા ડીસીશન લેવાના હતા જે એક સમયે પાપા કરતા હતા એ બધા જ કામ આવી ગયા હતા.  ક્યારેક ઘર ના બીજા કાકા બાપા સાથે કામ કરવુ પડતુ....

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बेड़ियां By Reena

बेड़ियांरात के 2:37 बज रहे थे।पूरा शहर नींद में डूबा था, लेकिन आरव के कमरे की लाइट अब भी जल रही थी।कमरे में किताबें खुली पड़ी थीं, लैपटॉप चालू था, टेबल पर कॉफी का कप आधा भरा था......

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स्वर आले जुळूनी - भाग 6 By Prof Shriram V Kale

 स्वर आले जुळूनी अंतीम भाग 6           जे.जे. मधून मला मास्टर्स डिप्लोमा मिळाला त्याच दरम्याने जे.जे. ची एक बँच गोव्यात पणजीला सुरु झाली. मी कान्व्होकेशन फॉर्म भरायला गेलो तेव्हा ए...

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हिम्मत न हार By कमल चोपड़ा

हिम्मत न हारकमल चोपड़ा​चलते-चलते अगम नदी तक आ पहुँचा था। कुछ देर तक वह पानी के तेज बहाव को देखता रहा फिर नदी के किनारे लगे एक पेड़ के तने से लिपट कर रोने लगा। आज विद्यालय में आठवीं...

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उजाले की ओर –संस्मरण By DrPranava Bharti

स्नेहिल नमस्कार प्रिय मित्रों मधुशाला...??? ============      वैसे तो हम अब उम्र की जिस कगार पर खड़े हैं ,यह मस्तिष्क...

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इंसानियत का इनाम By कमल चोपड़ा

इंसानियत का इनाम  कमल चोपड़ा​एक गाँव के एक सेठ का किसी ने दरवाजा खटखटाया। रात का वक्त था। ‘इस वक्त कौन हो सकता है?’ यह सोचते हुए सेठ ने दरवाजा खोला। देखा सामने एक चालीस-बयालीस वर्ष...

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मैत्रीला लिंग नसतं By Trupti Deo

"मैत्रीला लिंग नसतं…"आयुष्यात कधीतरी असा क्षण येतो…जेव्हा आपल्याला फक्त कुणीतरी “ऐकणारं” हवं असतं.सल्ला देणारं नाही…उपदेश करणारा नाही…फक्त शांतपणे आपल्यासोबत बसणारं कुणीतरी…आणि त्य...

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भट्ठी में पौधा By कमल चोपड़ा

​भट्ठी में पौधाकमल चोपड़ा​घर तक आते-आते रास्ते में राशनवाले, किरोसिनवाले और दवाईवाले का उधार चुकता करते-करते उसकी तनखा निपट गयी थी। तनखाह के हाथ में आने की गर्मी, उत्साह और खुशी कु...

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માસ્ટર નો છોકરો મારો ભાઈબંધ હતો By AKHIL KUMAR

આજે ઘણો લાબો સમય થઈ ગયો પણ એ મિત્ર જે ૧૫ વર્ષ થી સાથે હતો.  મારો જૂનો ખાસ મિત્ર સૂરજ. સૂરજ મારો સ્કૂલ નો બેસ્ટ ફ્રેન્ડ. સાથે રમતા રેહતા.  પારિવારિક સંબધ થઈ ગયો હતો.આજે સૂરજ ૩ વર્ષ...

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अपने यहॉं By कमल चोपड़ा

​अपने यहाँकमल चोपड़ा​बीच में उसका वह डर लगभग खत्म हो गया था, जो उसे शुरू-शुरू में लगता था और जिसने इन दिनों फिर से उसे घेर लिया था। यहाँ रहते हुए उसे दस साल हो गये थे, उसे यह लगता...

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जब लाइक्स खत्म हो गए By Anshika Naithani

मेरा नाम साक्षी है, और अगर आप मेरे सोशल मीडिया प्रोफाइल को देखेंगे तो आपको लगेगा कि मेरी जिंदगी बिल्कुल परफेक्ट है। हर फोटो में मुस्कान, हर स्टोरी में खुशी और हर पोस्ट में एक ऐसा प...

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भूतों की बारात में झूमर By prem chand hembram

भूतों की बारात में झूमर“जब तान, थाप और नृत्य ने अदृश्य जगत को भी बाँध लिया…”डोमन के सिर से माँ-बाप का साया बचपन में ही उठ गया था।गाँव में भयंकर हैजे का प्रकोप हुआ था। उन दिनों न दव...

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સંસ્કારોનું સેલ (Sale) અને પશ્ચિમી આંધળી દોટ By Urmit

આજના અત્યાધુનિક યુગમાં આપણે એક એવી વિચિત્ર સ્પર્ધામાં ઉતર્યા છીએ જ્યાં ‘કૂલ’ દેખાવું એ જીવનનું અંતિમ લક્ષ્ય બની ગયું છે. આ ‘કૂલ’ દેખાવાની હોડમાં આપણે ક્યારે આપણા વર્ષો જૂના મૂળિયાં...

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कैसा भी जुर्म By कमल चोपड़ा

​कैसा भी जुर्म कमल चोपड़ा​आवारा घूम रहे आदमियों, लड़कों, बच्चों, सुअरों, कुत्तों और मुर्गों में से सबसे पहले कुत्तों ने ही उनका विरोध किया था। भौंकते हुए कुत्ते को पत्थर मार-मार कर...

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વિશ્વાસનો એક નાનો નિર્ણય, જીવનનો મોટો ફેરફાર By SOHEL KOTHIYA

અમિત તે સાંજે ખેતરની બાજુમાં ચાલતો હતો. સૂર્ય ઢળી રહ્યો હતો અને આકાશમાં લાલીમા ફેલાઈ ગઈ હતી. પવન ધીમે ધીમે વહેતો હતો, પણ તેના મનમાં એક અજાણી ઉથલપાથલ ચાલી રહી હતી. ગામમાં મેળો લાગ્ય...

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THE PUBLIC HOUSE A New Horizontals Of Democracy By Nirav Vanshavalya

So fox , how are you and well come to the new episode of  long lines of  democracy. How ever,  we  gave total set ups to the royelets and did start of democracy. But some where  a...

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इज्जत के साख By कमल चोपड़ा

​इज्जत के साथकमल चोपड़ा​इतनी दिक्कत उसे जेल से गाँव तक अकेले पहुँचने में नहीं महसूस हुई थी, जितनी गाँव से अपने घर तक पहुँचने में महसूस हो रही थी। हालाँकि उसे कोई झेंप या झिझक महसूस...

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ऋण By कमल चोपड़ा

​ऋणकमल चोपड़ा​उसने जानबूझकर दीदी के घर जाने के लिए ऐसा ही वक्त चुना था, जबकि जीजाजी और बच्चे घर पर ना हों और दीदी अकेली हो। उसे अचानक आया देखकर दीदी का चेहरा खिल उठा था, लेकिन अगले...

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तीसरे पहर का सपना By Vijay Erry

---तीसरे पहर का सपना प्रस्तावनातीसरा पहर — दिन का वह समय जब सूरज अपनी तपिश खोने लगता है, खेतों में काम करने वाले किसान घर लौटने की तैयारी करते हैं, और गाँव की गलियों में बच्चों की...

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संकल्प संकेत By HARISH

विद्यालय से घर पहुँचते ही माँ ने घबराहट में बताया कि हमारी गाय ‘दारा’ घर नहीं लौटी है और उसका बछड़ा भूख से बिलख रहा है। मैंने अपने साथी राजेंद्र यादव के साथ उसे खोजने का निश्चय किय...

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बस्ते में छिपी वंशावली By Vijay Erry

---बस्ते में छिपी वंशावलीप्रस्तावनाअमन सातवीं कक्षा का छात्र था। उसके बैग में किताबें, कॉपियाँ और पेंसिलें थीं। लेकिन एक दिन उसे लगा कि बैग में कुछ और भी है — कोई अदृश्य शक्ति, कोई...

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आहॆ का अशी कोणती प्रार्थना By Trupti Deo

"आहॆ अशी कोणती प्रार्थना , जी अपघात थांबवेल?"देव दरवेळी वाचवेलच असं नाही…पण आपणच थोडं जागं राहिलो,तर देवाला वाचवायची वेळच येणार नाही."आहॆ का अशी कोणती प्रार्थना आहे?""आहॆ का असा को...

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कागज़ By राज बोहरे

कागज़ सहाय मास्साब ने अपने पुराने, हल्के फट चुके भूरे बैग को धीरे से खोला। अंदर रखी नोटों की गड्डी को उँगलियों से दबाकर जैसे तसल्ली कर ली—पूरा दस हजार है। फिर बैग को ऐसे बंद किया म...

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માનવતાની મહેક By Navneet Marvaniya

શહેરની ગતિશીલતા અને ગગનચુંબી ઈમારતોની ચમકથી લગભગ ત્રીસ કિલોમીટર દૂર, પ્રકૃતિના ખોળામાં વસેલું એક અંતરિયાળ ગામ… દેવકીપુરા. જ્યાં સમય જાણે થંભી ગયો હોય એવું લાગતું હતું. અહીંના લોકો...

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टूटता हुआ मन - भाग 1 By prem chand hembram

टूटता हुआ मन भाग :-1(अहंकार से आत्मबोध तक की कथा)रमेश घोष एक प्रतिष्ठित आईआईटी इंजीनियर था।तेज बुद्धि, आधुनिक सोच और तर्कशील स्वभाव—वह उन लोगों में से था जो जाति, वर्ण और परंपराओं...

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अनकहे शब्द By राज बोहरे

अनकहे शब्द कस्बे की मुख्य सड़क से थोड़ा हटकर, पीपल के पुराने पेड़ के नीचे डॉ. पुरोहित का छोटा-सा क्लीनिक था। बरामदे में लकड़ी की दो बेंचें रखी थीं और दीवार पर टँगा एक पुराना पंखा च...

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सपनों की उड़ान, मजबूरी का पंख By Vijay Erry

--- सपनों की उड़ान, मजबूरी का पंखलेखक: विजय शर्मा एरी---प्रस्तावनाहर इंसान के जीवन में सपने होते हैं। कुछ सपने छोटे होते हैं, जो आसानी से पूरे हो जाते हैं। लेकिन कुछ सपने इतने बड़े...

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ವಿಧಿಯ ಬರಹಗಾರ್ತಿ By Saandeep Joshi

ಬೆಂಗಳೂರಿನ ಯಾವುದೋ ಒಂದು ಹಳೆಯ ಬಡಾವಣೆಯ ಮೂಲೆಯಲ್ಲಿರುವ ಆ ಮನೆಯ ಅಟ್ಟದ ಮೇಲೆ ವನಿತಾ ಕುಳಿತಿದ್ದಳು. ಹೊರಗೆ ಮಳೆ ಸುರಿಯುತ್ತಿತ್ತು, ಹಳೆಯ ಹಂಚಿನ ಮನೆಯ ಮಾಡಿನಿಂದ ನೀರು ತೊಟ್ಟಿಕ್ಕುವ ಸದ್ದು ಅವಳ ಲೇಖನಿಗೆ ಲಯ ನೀಡುತ್...

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काँच की दीवार By राज बोहरे

काँच की दीवार   रामनाथ जी एक सेवानिवृत्त शिक्षक थे। चालीस वर्षों तक उन्होंने बच्चों को पढ़ाया, उन्हें जीवन के मूल्य सिखाए। उनकी कक्षा में अनुशासन और आत्मीयता दोनों का अद्भुत मेल था...

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भटका रास्ता By राज बोहरे

भटका रास्ता कॉलेज का विशाल गेट जैसे ही सामने आया, अमल के कदम अपने आप तेज हो गए। चेहरे पर उम्मीद की चमक थी, आँखों में अनगिनत सपने। उसने जेब से मुड़ा-तुड़ा कागज निकाला और एक बार फिर...

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સેક્સએડ્યુકેશન: ઇન્ટરનેટ અને સોશિયલ મીડિયા નો પ્રભાવ By yeash shah

           ૧૫ વર્ષ ની આર્યા એ સ્કૂલ ની સભા માં ૧ ડિસેમ્બર ૨૦૨૫ ના રોજ એઇડ્સ અને સેક્સ એડ્યુકેશન વિશે વૈજ્ઞાનિક માહિતી આપીને શિક્ષકો ને તેમ જ આચાર્ય ને પ્રભાવિત કરી દીધા. ટેક્સબુક ક...

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कैद बा-मशक्कत By कमल चोपड़ा

​कैद बा-मशक्कतकमल चोपड़ा​प्रहार से बचने के लिए पीछे हटी थी, मुक्का उसे न लगकर दीवार में जा लगा था। दर्द से बिलबिलाता और गुस्से में फनफनाता हुआ पति लगभग पागल-सा हो आया था। पत्नी का...

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पुरस्कार By कमल चोपड़ा

पुरस्कारकमल चोपड़ा​सदानंद एक सीधा-सादा आदमी था। वह मेहनत-मजदूरी कर अपना और अपने बच्चों का पेट पालता। रोजाना की तरह आज भी वह काम पर जा रहा था कि किसी ने पीछे से आवाज देकर उसे रोका,...

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जया देव तारी - भाग 1 By Prof Shriram V Kale

जया देव तारी - भाग ०१                        श्रावणात  दाजी  प्रभू मिराश्यांची वरसल सुरू झाली आणि ईश्वराच्या  गाभाऱ्याला कुलूप लागलं. दत्तंभट सालाबाद प्रमाणे  सकाळीच  पूजा साहित्य...

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झूठ-सच By कमल चोपड़ा

झूठ-सच कमल चोपड़ा​   राजकुमार श्वेतांक की उम्र पंद्रह वर्ष थी। एक दिन घूमते-घूमते वह वन की ओर निकल गया। अचानक उस पर एक शेर ने हमला कर दिया। राजकुमार के हाथों से हथियार छूट गए। वह ल...

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खोया हुआ विश्वास By कमल चोपड़ा

खोया हुआ विश्वास​  कमल चोपड़ाबंटी को खाली हाथ घर लौटा देखकर माँ ने हैरानी से पूछा— "नमक की थैली कहाँ है? मैंने तुझे दस रुपए देकर नमक की थैली लेने भेजा था ना?"​जवाब में बंटी ने सुबक...

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બે રસ્તા એક ઓટલો By Munavvar Ali

સાંજના પટાણે પિતાજી અને હું ચા પીવા બેસ્યા હતા.તેવામાં મૂર્તિ કાકા ઘરે આવ્યા.પિતાજીએ સૌથી પહેલા મને પાણી લેવા મોકલ્યો અને તેમને ચા પાણીની ઓફર કરી. થોડીવાર તેઓ બેસ્યા પછી પિતાજી આઈસ...

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Back to Those Days By Insha noor

No matter what you are what's your age you still miss your old days sometimes you become too much nostalgic and you can't find an escape from that nostalgiaLike I'm the...

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स्वाभिमान By कमल चोपड़ा

स्वाभिमान​  कमल चोपड़ास्कूल से आते ही विशू ने मां से कहा—'मां! मुझे आज ही नए कपड़े लेकर दो।'​'क्यों?' माँ ने पूछा।​'कल मेरे सबसे अच्छे दोस्त निखिल का जन्मदिन है...

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સંબંધો ના ડિપ્લોમેટ કિશન કાકા - 3 By AKHIL KUMAR

To be continue. કિશન કાકા એટલે મોટા ગજા ના ઉદ્યોગપતિ ૪૦ માણશ ની ટીમ તો એ એકલા હાથે હૅન્ડલ કરી દે. ટીમ મેનેજમેંટ.  HR મેનેજમેન્ટ.એમ્પ્લોયી ના ઇગો મેનેજમેન્ટ. બધા કર્મચારીઓ વચ્ચે ગજબ...

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मानवता की जीत By prem chand hembram

मानवता की जीत (अंतिम संस्करण)धनबाद जिले की छाती पर बसा रहिमनगर…एक छोटा सा कस्बा—जहाँ जिंदगी सरल थी, पर समाज दीवारों में बँटा हुआ।कुएँ अलग थे…रास्ते अलग थे…और दिल—अपने-अपने डर और दा...

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વરસાદ પડે… ત્યારે ઘર દિલમાં પાછું આવી જાય છે By Daily life Stories

Missing Home વરસાદ આવ્યો... અને સાથે આવી ઘર ની યાદ વરસાદ આજે અહીં પણ પડતો હતો, પણ કંઈક અલગ લાગતું હતું. બારી પાસે ઊભી રહીને હું શહેરને જોઈ રહી હતી. ઉંચી ઈમારતો, ચમકતી લાઈટ્સ, દોડતી...

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तक़लीफ़ By राज बोहरे

 तक़लीफ़ दोपहर की धूप अपनी पूरी तल्खी के साथ शहर की पुरानी सिविल लाइन की मंत्री निवास की बिल्डिंग पर झुकी हुई थी। बाहर खड़े नीम के पेड़ की छाया भी जैसे सिमटकर खुद में सिमट गई थी। भी...

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અવાવરુ વાવનો અતીત - 1 By Ashoksinh jadeja

**પ્રકરણ ૧: સીમમાં સંભળાયેલો કાળજું ચીરતો અવાજ**          સૌરાષ્ટ્રની ખમીરવંતી ધરતી પર જાણે કુદરતે સોનાની મહોરો વેરવી હોય એવું એ રળિયામણું ગામડું. ગામની રક્ષા કરવા કુદરતે જાણે ચારે...

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एक छोटी सी भूल By prem chand hembram

एक छोटी सी भूल“आप पुरानी सोच के हैं…”अपनी ही बेटी के मुँह से निकले ये शब्द,शहर के प्रतिष्ठित वकील रामगोपाल वर्मा के हृदय को चीर गए।उन्होंने जीवन में अनेक कठिनाइयाँ देखी थीं,परंतु क...

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हर कदम परीक्षा By कमल चोपड़ा

हर कदम परीक्षा​ कमल चोपड़ाकाम की तलाश में इधर-उधर धक्के खाने के बाद निराश होकर मधुकांत घर लौटने लगा तो पीछे से आवाज आई, 'ऐ भाई, यहाँ कोई मजदूर मिलेगा क्या?'​मधुकांत ने मुड़...

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મેચ્યુરિટિ ના સર્ટિફિકેટ આપતા હસમુખ કાકા By AKHIL KUMAR

પાપા ના ગયા પછી અચાનક જ  ઘર ની વાત બધી જવાબદારીઓ હતી મોટા મોટા ડીસીશન લેવાના હતા જે એક સમયે પાપા કરતા હતા એ બધા જ કામ આવી ગયા હતા.  ક્યારેક ઘર ના બીજા કાકા બાપા સાથે કામ કરવુ પડતુ....

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बेड़ियां By Reena

बेड़ियांरात के 2:37 बज रहे थे।पूरा शहर नींद में डूबा था, लेकिन आरव के कमरे की लाइट अब भी जल रही थी।कमरे में किताबें खुली पड़ी थीं, लैपटॉप चालू था, टेबल पर कॉफी का कप आधा भरा था......

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स्वर आले जुळूनी - भाग 6 By Prof Shriram V Kale

 स्वर आले जुळूनी अंतीम भाग 6           जे.जे. मधून मला मास्टर्स डिप्लोमा मिळाला त्याच दरम्याने जे.जे. ची एक बँच गोव्यात पणजीला सुरु झाली. मी कान्व्होकेशन फॉर्म भरायला गेलो तेव्हा ए...

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हिम्मत न हार By कमल चोपड़ा

हिम्मत न हारकमल चोपड़ा​चलते-चलते अगम नदी तक आ पहुँचा था। कुछ देर तक वह पानी के तेज बहाव को देखता रहा फिर नदी के किनारे लगे एक पेड़ के तने से लिपट कर रोने लगा। आज विद्यालय में आठवीं...

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उजाले की ओर –संस्मरण By DrPranava Bharti

स्नेहिल नमस्कार प्रिय मित्रों मधुशाला...??? ============      वैसे तो हम अब उम्र की जिस कगार पर खड़े हैं ,यह मस्तिष्क...

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इंसानियत का इनाम By कमल चोपड़ा

इंसानियत का इनाम  कमल चोपड़ा​एक गाँव के एक सेठ का किसी ने दरवाजा खटखटाया। रात का वक्त था। ‘इस वक्त कौन हो सकता है?’ यह सोचते हुए सेठ ने दरवाजा खोला। देखा सामने एक चालीस-बयालीस वर्ष...

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मैत्रीला लिंग नसतं By Trupti Deo

"मैत्रीला लिंग नसतं…"आयुष्यात कधीतरी असा क्षण येतो…जेव्हा आपल्याला फक्त कुणीतरी “ऐकणारं” हवं असतं.सल्ला देणारं नाही…उपदेश करणारा नाही…फक्त शांतपणे आपल्यासोबत बसणारं कुणीतरी…आणि त्य...

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भट्ठी में पौधा By कमल चोपड़ा

​भट्ठी में पौधाकमल चोपड़ा​घर तक आते-आते रास्ते में राशनवाले, किरोसिनवाले और दवाईवाले का उधार चुकता करते-करते उसकी तनखा निपट गयी थी। तनखाह के हाथ में आने की गर्मी, उत्साह और खुशी कु...

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માસ્ટર નો છોકરો મારો ભાઈબંધ હતો By AKHIL KUMAR

આજે ઘણો લાબો સમય થઈ ગયો પણ એ મિત્ર જે ૧૫ વર્ષ થી સાથે હતો.  મારો જૂનો ખાસ મિત્ર સૂરજ. સૂરજ મારો સ્કૂલ નો બેસ્ટ ફ્રેન્ડ. સાથે રમતા રેહતા.  પારિવારિક સંબધ થઈ ગયો હતો.આજે સૂરજ ૩ વર્ષ...

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अपने यहॉं By कमल चोपड़ा

​अपने यहाँकमल चोपड़ा​बीच में उसका वह डर लगभग खत्म हो गया था, जो उसे शुरू-शुरू में लगता था और जिसने इन दिनों फिर से उसे घेर लिया था। यहाँ रहते हुए उसे दस साल हो गये थे, उसे यह लगता...

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जब लाइक्स खत्म हो गए By Anshika Naithani

मेरा नाम साक्षी है, और अगर आप मेरे सोशल मीडिया प्रोफाइल को देखेंगे तो आपको लगेगा कि मेरी जिंदगी बिल्कुल परफेक्ट है। हर फोटो में मुस्कान, हर स्टोरी में खुशी और हर पोस्ट में एक ऐसा प...

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भूतों की बारात में झूमर By prem chand hembram

भूतों की बारात में झूमर“जब तान, थाप और नृत्य ने अदृश्य जगत को भी बाँध लिया…”डोमन के सिर से माँ-बाप का साया बचपन में ही उठ गया था।गाँव में भयंकर हैजे का प्रकोप हुआ था। उन दिनों न दव...

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સંસ્કારોનું સેલ (Sale) અને પશ્ચિમી આંધળી દોટ By Urmit

આજના અત્યાધુનિક યુગમાં આપણે એક એવી વિચિત્ર સ્પર્ધામાં ઉતર્યા છીએ જ્યાં ‘કૂલ’ દેખાવું એ જીવનનું અંતિમ લક્ષ્ય બની ગયું છે. આ ‘કૂલ’ દેખાવાની હોડમાં આપણે ક્યારે આપણા વર્ષો જૂના મૂળિયાં...

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कैसा भी जुर्म By कमल चोपड़ा

​कैसा भी जुर्म कमल चोपड़ा​आवारा घूम रहे आदमियों, लड़कों, बच्चों, सुअरों, कुत्तों और मुर्गों में से सबसे पहले कुत्तों ने ही उनका विरोध किया था। भौंकते हुए कुत्ते को पत्थर मार-मार कर...

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વિશ્વાસનો એક નાનો નિર્ણય, જીવનનો મોટો ફેરફાર By SOHEL KOTHIYA

અમિત તે સાંજે ખેતરની બાજુમાં ચાલતો હતો. સૂર્ય ઢળી રહ્યો હતો અને આકાશમાં લાલીમા ફેલાઈ ગઈ હતી. પવન ધીમે ધીમે વહેતો હતો, પણ તેના મનમાં એક અજાણી ઉથલપાથલ ચાલી રહી હતી. ગામમાં મેળો લાગ્ય...

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THE PUBLIC HOUSE A New Horizontals Of Democracy By Nirav Vanshavalya

So fox , how are you and well come to the new episode of  long lines of  democracy. How ever,  we  gave total set ups to the royelets and did start of democracy. But some where  a...

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इज्जत के साख By कमल चोपड़ा

​इज्जत के साथकमल चोपड़ा​इतनी दिक्कत उसे जेल से गाँव तक अकेले पहुँचने में नहीं महसूस हुई थी, जितनी गाँव से अपने घर तक पहुँचने में महसूस हो रही थी। हालाँकि उसे कोई झेंप या झिझक महसूस...

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ऋण By कमल चोपड़ा

​ऋणकमल चोपड़ा​उसने जानबूझकर दीदी के घर जाने के लिए ऐसा ही वक्त चुना था, जबकि जीजाजी और बच्चे घर पर ना हों और दीदी अकेली हो। उसे अचानक आया देखकर दीदी का चेहरा खिल उठा था, लेकिन अगले...

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तीसरे पहर का सपना By Vijay Erry

---तीसरे पहर का सपना प्रस्तावनातीसरा पहर — दिन का वह समय जब सूरज अपनी तपिश खोने लगता है, खेतों में काम करने वाले किसान घर लौटने की तैयारी करते हैं, और गाँव की गलियों में बच्चों की...

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संकल्प संकेत By HARISH

विद्यालय से घर पहुँचते ही माँ ने घबराहट में बताया कि हमारी गाय ‘दारा’ घर नहीं लौटी है और उसका बछड़ा भूख से बिलख रहा है। मैंने अपने साथी राजेंद्र यादव के साथ उसे खोजने का निश्चय किय...

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बस्ते में छिपी वंशावली By Vijay Erry

---बस्ते में छिपी वंशावलीप्रस्तावनाअमन सातवीं कक्षा का छात्र था। उसके बैग में किताबें, कॉपियाँ और पेंसिलें थीं। लेकिन एक दिन उसे लगा कि बैग में कुछ और भी है — कोई अदृश्य शक्ति, कोई...

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आहॆ का अशी कोणती प्रार्थना By Trupti Deo

"आहॆ अशी कोणती प्रार्थना , जी अपघात थांबवेल?"देव दरवेळी वाचवेलच असं नाही…पण आपणच थोडं जागं राहिलो,तर देवाला वाचवायची वेळच येणार नाही."आहॆ का अशी कोणती प्रार्थना आहे?""आहॆ का असा को...

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कागज़ By राज बोहरे

कागज़ सहाय मास्साब ने अपने पुराने, हल्के फट चुके भूरे बैग को धीरे से खोला। अंदर रखी नोटों की गड्डी को उँगलियों से दबाकर जैसे तसल्ली कर ली—पूरा दस हजार है। फिर बैग को ऐसे बंद किया म...

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માનવતાની મહેક By Navneet Marvaniya

શહેરની ગતિશીલતા અને ગગનચુંબી ઈમારતોની ચમકથી લગભગ ત્રીસ કિલોમીટર દૂર, પ્રકૃતિના ખોળામાં વસેલું એક અંતરિયાળ ગામ… દેવકીપુરા. જ્યાં સમય જાણે થંભી ગયો હોય એવું લાગતું હતું. અહીંના લોકો...

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टूटता हुआ मन - भाग 1 By prem chand hembram

टूटता हुआ मन भाग :-1(अहंकार से आत्मबोध तक की कथा)रमेश घोष एक प्रतिष्ठित आईआईटी इंजीनियर था।तेज बुद्धि, आधुनिक सोच और तर्कशील स्वभाव—वह उन लोगों में से था जो जाति, वर्ण और परंपराओं...

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अनकहे शब्द By राज बोहरे

अनकहे शब्द कस्बे की मुख्य सड़क से थोड़ा हटकर, पीपल के पुराने पेड़ के नीचे डॉ. पुरोहित का छोटा-सा क्लीनिक था। बरामदे में लकड़ी की दो बेंचें रखी थीं और दीवार पर टँगा एक पुराना पंखा च...

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सपनों की उड़ान, मजबूरी का पंख By Vijay Erry

--- सपनों की उड़ान, मजबूरी का पंखलेखक: विजय शर्मा एरी---प्रस्तावनाहर इंसान के जीवन में सपने होते हैं। कुछ सपने छोटे होते हैं, जो आसानी से पूरे हो जाते हैं। लेकिन कुछ सपने इतने बड़े...

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ವಿಧಿಯ ಬರಹಗಾರ್ತಿ By Saandeep Joshi

ಬೆಂಗಳೂರಿನ ಯಾವುದೋ ಒಂದು ಹಳೆಯ ಬಡಾವಣೆಯ ಮೂಲೆಯಲ್ಲಿರುವ ಆ ಮನೆಯ ಅಟ್ಟದ ಮೇಲೆ ವನಿತಾ ಕುಳಿತಿದ್ದಳು. ಹೊರಗೆ ಮಳೆ ಸುರಿಯುತ್ತಿತ್ತು, ಹಳೆಯ ಹಂಚಿನ ಮನೆಯ ಮಾಡಿನಿಂದ ನೀರು ತೊಟ್ಟಿಕ್ಕುವ ಸದ್ದು ಅವಳ ಲೇಖನಿಗೆ ಲಯ ನೀಡುತ್...

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काँच की दीवार By राज बोहरे

काँच की दीवार   रामनाथ जी एक सेवानिवृत्त शिक्षक थे। चालीस वर्षों तक उन्होंने बच्चों को पढ़ाया, उन्हें जीवन के मूल्य सिखाए। उनकी कक्षा में अनुशासन और आत्मीयता दोनों का अद्भुत मेल था...

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भटका रास्ता By राज बोहरे

भटका रास्ता कॉलेज का विशाल गेट जैसे ही सामने आया, अमल के कदम अपने आप तेज हो गए। चेहरे पर उम्मीद की चमक थी, आँखों में अनगिनत सपने। उसने जेब से मुड़ा-तुड़ा कागज निकाला और एक बार फिर...

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સેક્સએડ્યુકેશન: ઇન્ટરનેટ અને સોશિયલ મીડિયા નો પ્રભાવ By yeash shah

           ૧૫ વર્ષ ની આર્યા એ સ્કૂલ ની સભા માં ૧ ડિસેમ્બર ૨૦૨૫ ના રોજ એઇડ્સ અને સેક્સ એડ્યુકેશન વિશે વૈજ્ઞાનિક માહિતી આપીને શિક્ષકો ને તેમ જ આચાર્ય ને પ્રભાવિત કરી દીધા. ટેક્સબુક ક...

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