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                 तुम मिले (1)सुकेतु ने एक बार अपने आप को आईने में देखा। सब कुछ सही था। लेकिन वह कुछ नर्वस फील कर रहा था। ऐसा नहीं था कि मुग्धा से ये ...Read More

                  तुम मिले (2)मुग्धा जिसके साथ फ्लैट शेयर करती थी वह दो तीन दिनों के लिए बाहर गई हुई थी। मुग्धा सुकेतु को लेकर अपने घर आ गई । यहाँ वह ...Read More

                    तुम मिले (3)कहानी सुनाते हुए मुग्धा भावुक हो गई। सुकेतु उसे ढांढस बंधाने लगा। मुग्धा बोली। "सुकेतु मैं अजीब सी स्थिति में हूँ। मैं नहीं जानती कि मैं सौरभ की ...Read More

                       तुम मिले (4)सुकेतु अपने दोस्त दर्शन के ऑफिस में बैठा था। इस वक्त दर्शन किसी और क्लांइट के साथ व्यस्त था। सुकेतु बाहर बैठा अपनी बारी की प्रतीक्षा ...Read More

                        तुम मिले (5)सुकेतु ने जानबूझ कर मुग्धा को अपने घर पर मिलने बुलाया था। अब तक मुग्धा और उसकी माँ एक दूसरे से नहीं मिली थीं। दोनों ...Read More

                  तुम मिले (6)मुग्धा अपनी इच्छा से ससुराल छोड़ कर अपने मायके चली गई थी। इतने दिनों से उसने कोई खबर भी नहीं ली थी। अचानक मुग्धा को देख कर उसके ...Read More

                                     तुम मिले (7)मुग्धा के मन में कई सारे सवाल उभरने लगे। यह बात उससे और उसके माता पिता से क्यों छिपाई ...Read More

                          तुम मिले (8)गेस्टरूम में बैठी हुई मुग्धा सोंच रही थी कि सौरभ के बारे में उसे एक बड़ी बात पता चली। लेकिन जो भी पता चला ...Read More

                        तुम मिले (9)कई मिनटों तक मुग्धा वैसे ही बैठी रहीं। फिर खुद को संभाल कर उसने सुकेतु को फोन किया। सुकेतु ने उससे कहा कि वह फौरन ...Read More

                          तुम मिले (10)खाने के बाद दुर्गेश ने कहानी आगे बढ़ाई.....मुग्धा से शादी होने के बाद सौरभ बहुत खुश था। लेकिन वो तीनों लोग इसे अपनी हार ...Read More