तुम मिले - 2 in Hindi Social Stories by Ashish Kumar Trivedi books and stories Free | तुम मिले - 2

तुम मिले - 2


                  तुम मििले (2)


मुग्धा जिसके साथ फ्लैट शेयर करती थी वह दो तीन दिनों के लिए बाहर गई हुई थी। मुग्धा सुकेतु को लेकर अपने घर आ गई । यहाँ वह निसंकोच अपनी आपबीती सुकेतु को बता सकती थी। सुकेतु भी सब जानने को उत्सुक था कि यदि मुग्धा का पती जीवित है तो वह यहाँ अकेली क्यों रहती है। वह कभी उससे मिलने क्यों नहीं आता। उन दोनों के रिश्ते में वह कौन सी दरार है जिसके कारण मुग्धा उसके होते हुए भी उसे चाहती है।
मुग्धा को भी सुकेतु के मन में उठ रहे सवालों का अंदाज़ा था। वह बस सोंच रही थी कि अपनी कहानी कहाँ से शुरू किए। बहुत सोंचने के बाद उसने अपनी कहानी बताना शुरू किया...
एमबीए करने के बाद मुग्धा को एक अच्छी कंपनी में जॉब मिल गई। वह बहुत खुश थी। अपने जॉब और दोस्तों में मस्त थी। उसके मम्मी पापा चाहते थे कि अब तो वह अपने पैरों पर खड़ी हो गई है। यही सही समय है कि वह अपने विवाह के बारे में सोंचे। वह उस पर ज़ोर डाल रहे थे कि यदि उसने किसी को चुन रखा हो तो उन लोगों को बता दे। यदि कोई नहीं है तो उन्हें अपनी पसंद बता दे। वह उसके अनुसार उसके लिए लड़का ढूंढ़ लेंगे। 
मुग्धा ने अभी तक शादी के बारे में कुछ नहीं सोंचा था। अतः उसने अपना जीवनसाथी चुनने का फैसला मम्मी पापा पर छोड़ दिया। उसके मम्मी पापा ने सौरभ के साथ उसका रिश्ता तय कर दिया। सौरभ अपने पिता तथा बड़े भाई के साथ अपना रियल स्टेट बिज़नेस संभालता था। मुग्धा के मम्मी पापा चाहते थे कि शादी से पहले वह सौरभ को जान ले। शादी से पहले जो एक दो मुलाकातें हुईं उसमें सौरभ उसे एक भला इंसान लगा। दोनों की शादी हो गई।
सौरभ के घर आने के बाद कुछ दिन तो रस्मों रिवाज़ निभाने में बीत गए। उन लोगों को आपस में मिलने का समय कम ही मिल पाया। लेकिन जब सारी रस्में समाप्त हो गईं तब मुग्धा और सौरभ एक दूसरे के नज़दीक आने लगे। धीरे धीरे दोनों एक दूसरे को जानने लगे। सब ठीक चल रहा था। दोनों अपने हनीमून पर जाने की तैयारी कर रहे थे। पर बिज़नेस में कुछ समस्या आ जाने के कारण दोनों अपने हनीमून पर नहीं जा सके। 
बिज़नेस की समस्या दूर हो जाने के बाद परिवार के एक करीबी रिश्तेदार की मृत्यु हो गई। टलते टलते आखिरकार शादी के आठ महीने के बाद दोनों एक महीने की छुट्टी मनाने एक छोटे से हिल स्टेशन पर गए। यह हिल स्टेशन सौरभ को बहुत पसंद था। यह जगह बहुत खूबसूरत थी पर लोगों की भीड़ कम होती थी। सौरभ ने यहाँ एक कॉटेज किराए पर ले लिया था। 
वहाँ पहुँच कर मुग्धा और सौरभ दोनों ही बहुत खुश थे। बहुत इंतज़ार के बाद उन्हें एक दूसरे को सही तरह से जानने का मौका मिला था। वहाँ साथ में बिताया हर लम्हा उन्हें और अधिक नज़दीक ला रहा था। कुदरत की सुंदरता के बीच दोनों एक दूसरे के साथ का मज़ा लेते थे। दर्शनीय स्थलों पर घूमने जाते थे। उनके कॉटेज के पास ही एक और बंगाली जोड़ा रह रहा था। उनके साथ मुग्धा और सौरभ की दोस्ती हो गई। उनके साथ भी दोनों अच्छा वक्त बिताते थे।
सौरभ ने यहाँ एक रेस्टोरेंट ढूंढ़ लिया था। मुग्धा और सौरभ अक्सर अपनी शाम वहीं बिताते थे। इस रेस्टोरेंट ने 'लव इज़ इन द एयर नाइट' का आयोजन किया था। मुग्धा और सौरभ ने भी इस ईवेंट में भाग लिया। वहाँ से लौटने में बहुत देर हो गई थी। सुबह जब मुग्धा की आँख खुली तो उसे थकावट महसूस हो रही थी। वह कुछ और देर सोना चाहती थी। जबकी सौरभ रोज़ की तरह उसके साथ वॉक पर जाना चाहता था। मुग्धा ने उसे बताया कि आज वॉक पर जाने का उसका मन नहीं है। वह अकेले ही वॉक पर चला जाए। सौरभ उसे आराम करने के लिए छोड़ कर वॉक पर चला गया।
जब मुग्धा की नींद खुली तो उसने देखा की नौ बज गए हैं। अब तक तो सौरभ लौट आया होगा यह सोंच कर वह नीचे आई। उसने हॉल, किचेन, गार्डन सब जगह देखा पर सौरभ कहीं नहीं था। मुग्धा ने फौरन सौरभ को फोन मिलाया। लेकिन वह स्विचऑफ था। मुग्धा घबरा गई। कहीं वह मिस्टर और मिसेज़ चटर्जी के पास ना हो यह सोंच कर वह उनके कॉटेज पर पहुँची। उन्होंने बताया कि उन लोगों ने सुबह उसे अकेले वॉक पर जाते तो देखा था पर वह यहाँ नहीं आया। यह सुन कर मुग्धा रोने लगी। मिसेज़ चटर्जी ने उसे तसल्ली दीं। दोनों पति पत्नी उसके साथ सौरभ को ढूंढ़ने जाने के लिए तैयार हो गए। 
तीनों रास्ते में सौरभ के बारे में लोगों से पूँछ रहे थे। किसी को भी सौरभ के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। मुग्धा ने उस चायवाले से भी बात की जहाँ वॉक से लौटते समय दोनों चाय पीते थे। उसने बताया कि आज सौरभ चाय पीने तो आया था पर उसके बाद क्या हुआ उसे कुछ पता नहीं। सब तरफ से मायूस होकर तीनों लोग पुलिस के पास गए।
मुग्धा ने घर फोन कर उन लोगों को सारी बात बताई। सब लोग बहुत परेशान हो गए। जल्द ही सौरभ के घरवाले वहाँ पहुँच गए। उन्होंने अपनी जानपहचान का इस्तेमाल कर पुलिस पर सौरभ को ढूंढ़ने के लिए ज़ोर डलवाया। पुलिस ने भी सौरभ को ढूंढ़ने के लिए पूरा ज़ोर लगाया। पर उनके हाथ एक भी ऐसा सूत्र नहीं लगा जिससे सौरभ के बारे में कोई सुराग मिल सके। 
कुछ दिनों तक वहाँ ठहरने के बाद सौरभ के घरवाले मुग्धा के साथ लौट आए। कई महीने बीत गए पर सौरभ का कुछ पता नहीं चला। मुग्धा बहुत दुखी थी। अभी तो उसके विवाहित जीवन की शुरुआत हुई थी। इस हादसे ने उसकी दुनिया ही बदल दी। सौरभ के गायब होने के वक्त वही उसके साथ थी। पुलिस ने अपनी जांच के दौरान उससे तरह तरह के सवाल पूँछे थे। क्या उन लोगों के बीच कोई झगड़ा हुआ था ? क्या दोनों इस शादी से खुश नहीं थे ? मुग्धा ने उन सारे सवालों का सही सही जवाब दिया था। लेकिन उन्हीं सवालों को लेकर अब सौरभ के घरवाले उस पर शक करते थे। यह स्थिति मुग्धा के लिए असहनीय थी। बहुत समय बीतने पर भी सौरभ के अचानक गायब हो जाने की गुत्थी नहीं सुलझ पाई थी। मुग्धा इस अनिश्चित स्थिति से बाहर निकलना चाहती थी। वह अपने मायके चली गई। शादी के बाद मुग्धा ने नौकरी छोड़ दी थी। उसने दोबारा नौकरी करना शुरू कर दिया। अपने मम्मी पापा के घर रहते हुए उसे अपने रिश्तेदारों के कई सवालों का सामना करना पड़ता था। वह चाहती थी कि किसी ऐसी जगह चली जाए जहाँ कोई उसे ना जानता हो। उसने अपने बॉस से सारी बात कही। बॉस ने उसका स्थानांतरण इस शहर में कर दिया। यहाँ आकर उसकी दोस्ती मेधा से हो गई। मेधा की लंच पार्टी में वह सुकेतु से मिली। 

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