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रात - एक रहस्य by Sanjay Kamble in Hindi Novels
रात... 'डर, अजीब सा डर मेरे दिलो-दिमाग को दिमक की तरह अंदर से खा रहा है। 'रात' के इस काले अंधेरे में...
रात - एक रहस्य by Sanjay Kamble in Hindi Novels
रात 2 उसकी बात सुनकर मैंने थोड़े मुस्कुराते हुए उसकी तरफ देखा। पर कुछ नहीं कहा, वो समझ चुका था कि मैं उसका मजाक उड़ा...
रात - एक रहस्य by Sanjay Kamble in Hindi Novels
अगर मैं पानी पीने के लिए उठा और उसी वक्त वो पिशाच आ गया तो मेरे जिस्म के हजारों चिथड़े ... नहीं नहीं मुझे इसी तरह...
रात - एक रहस्य by Sanjay Kamble in Hindi Novels
उसने दरवाजे की तरफ देखा तो दरवाजा बंद हो चुका था और बाहर से कोई दरवाजे पर लगातार दस्तक दे रहा था। " लगता है इस घर का माल...
रात - एक रहस्य by Sanjay Kamble in Hindi Novels
वह काफी देर तक मुझे समझाता रहा और मैं चुपचाप मुस्कुराते हुए दोनों को बाय बोलकर अपनी कार से घर के लिए निकला। काश उस वक्...