Amrut Vaani in Hindi Motivational Stories by Nitya Oswal books and stories PDF | अमृत वाणी - संत वाणी - 7

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अमृत वाणी - संत वाणी - 7

“क्रोधाद्भवति संमोहः संमोहात्स्मृतिविभ्रमः।
स्मृतिभ्रंशाद् बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति।।”
–(श्रीमद्भगवद गीता - अध्याय 2, श्लोक 63)

अक्सर लोग क्रोध को केवल एक क्षणिक भावना (Emotion) मानते हैं, लेकिन श्रीकृष्ण इस श्लोक में क्रोध के उस खतरनाक वैज्ञानिक चक्र को समझा रहे हैं जो पल भर में इंसान का पूरा जीवन बर्बाद कर सकता है।

श्रीकृष्ण कहते हैं कि क्रोध से मनुष्य की बुद्धि में संमोह (मूढ़ता या अंधकार) पैदा होता है। बुद्धि में अंधकार छाने से उसकी स्मृति (याददाश्त और सही-गलत की समझ) भ्रमित हो जाती है। स्मृति भ्रमित होने से मनुष्य की बुद्धि का नाश हो जाता है। और जिस मनुष्य की बुद्धि का नाश हो जाता है, उसका पूरी तरह पतन (विनाश) हो जाता है।

व्यावहारिक उदाहरण
इसे आप आज के डिजिटल युग के एक बहुत ही सामान्य और लाइव उदाहरण से समझ सकते हैं। मान लीजिए एक व्यक्ति का सोशल मीडिया पर किसी अजनबी से किसी मुद्दे को लेकर विवाद हो जाता है।

सामने वाले के कमेंट को देखकर उस व्यक्ति को बहुत तेज़ क्रोध आता है। क्रोध आते ही वह संमोह की स्थिति में चला जाता है, यानी उसका खुद पर से नियंत्रण हट जाता है। इस स्थिति में उसकी स्मृति भ्रमित हो जाती है। वह भूल जाता है कि समाज में उसकी क्या प्रतिष्ठा है, उसके संस्कार क्या हैं और उसके परिवार पर इसका क्या असर पड़ेगा। परिणाम यह होता है कि उसकी बुद्धि का नाश हो जाता है और वह गुस्से में आकर सोशल मीडिया पर कोई आपत्तिजनक, हिंसक या कानूनी रूप से गलत बात टाइप करके पोस्ट कर देता है।

अगले ही दिन उस एक गलत पोस्ट के कारण उस पर कानूनी कार्रवाई होती है, उसकी नौकरी चली जाती है और समाज में उसकी बदनामी होती है। यहाँ क्रोध के कारण उस व्यक्ति का सर्वनाश हो गया।

विरोधाभास का समाधान
यहाँ मन में यह विरोधाभास उठ सकता है कि “क्या क्रोध हमेशा गलत होता है? अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने के लिए भी तो गुस्सा ज़रूरी है। अगर हम बिल्कुल गुस्सा नहीं करेंगे, तो लोग हमें दबा देंगे। क्या श्रीकृष्ण ने खुद अर्जुन को युद्ध के लिए तैयार नहीं किया था?”

श्रीकृष्ण यहाँ अन्याय के खिलाफ खड़े होने से मना नहीं कर रहे हैं। वे उस ‘अंधे क्रोध’ (Blind Anger) की बात कर रहे हैं जो इंसान को विवेकहीन बना देता है। महाभारत का युद्ध अर्जुन ने गुस्से में आकर नहीं, बल्कि शांत मन से अपने कर्तव्य (धर्म) को समझकर लड़ा था। जब आप शांत रहकर सही का पक्ष लेते हैं, तो आपकी ताकत दोगुनी हो जाती है। लेकिन जब आप गुस्से में आकर चिल्लाते हैं या हिंसक होते हैं, तो आप अपनी ऊर्जा खो देते हैं और गलत फैसले ले बैठते हैं।

जीवन के लिए मुख्य सीख
★ 5 सेकंड का नियम : जब भी मोबाइल पर कोई ऐसा मैसेज या कमेंट देखें जिससे आपको गुस्सा आए, तो तुरंत रिप्लाई टाइप न करें। फोन को किनारे रख दें, गहरी सांस लें और 5 सेकंड के बाद सोचें। इससे क्रोध का चक्र टूट जाएगा।

★ क्रोध पर विजय : सोशल मीडिया पर किसी को गाली देना या कड़वे शब्द लिखना बहुत आसान है। लेकिन गुस्से को पी जाना और सामने वाले को शांत मन से जवाब देना या उसे अनदेखा करना सबसे बड़ी मानसिक तपस्या है।

★ बुद्धि की सुरक्षा : याद रखें कि आपका विवेक ही आपकी सबसे बड़ी संपत्ति है। किसी भी बाहरी व्यक्ति या परिस्थिति को इतनी ताकत न दें कि वह आपको गुस्सा दिलाकर आपकी बुद्धि पर कब्ज़ा कर सके।

आज का विचार:
“क्रोध में बोला गया एक भी कड़वा शब्द हमारे सालों के अच्छे कर्मों को पल भर में नष्ट कर सकता है। विजेता वह नहीं जो किसी को हरा दे, बल्कि वह है जो अपने गुस्से को जीत ले।” 🙏