“रहिमन ओछे नरन सो, बैर भलो न प्रीति।
काटे चाटे स्वान के, दुहूँ भाँति विपरीत।।”
रहीम जी का यह कालजयी दोहा हमें समाज में जीने, इंसानी स्वभाव को पहचानने और व्यावहारिक जीवन (Social Wisdom) को कुशलता से चलाने का अचूक मंत्र देता है।
रहीम जी स्पष्ट रूप से समझाते हैं कि जो लोग ओछे (संकीर्ण मानसिकता वाले), नकारात्मक, स्वार्थी या दुर्जन स्वभाव के होते हैं, उनसे न तो दुश्मनी (बैर) अच्छी होती है और न ही बहुत ज़्यादा गहरी दोस्ती (प्रीति)। ऐसे लोगों से हमेशा एक गरिमामय और मर्यादित दूरी (Healthy Boundary) बनाकर रखनी चाहिए, क्योंकि आप उनसे चाहे जैसा रिश्ता रखें, अंत में नुकसान आपका ही होना तय है।
व्यावहारिक उदाहरण (Real-life Example)
इस कड़वे सामाजिक सच को समझाने के लिए रहीम जी ने ‘स्वान’ यानी कुत्ते का अत्यंत सटीक और जीवंत उदाहरण दिया है :
यदि कोई कुत्ता उग्र या क्रोधित होकर आपको काट ले, तो शरीर पर गहरा घाव होता है, असहनीय दर्द होता है और आपको डॉक्टर के पास जाकर महंगे इंजेक्शन लगवाने पड़ते हैं। (यह ओछे व्यक्ति से दुश्मनी मोल लेने का भारी नुकसान है—वह आपकी प्रतिष्ठा या मानसिक शांति को चोट पहुँचाएगा)।
वहीं दूसरी तरफ, यदि वही कुत्ता अत्यधिक लाड़-प्यार में आकर आपको चाटने लगे, तो उसकी लार से संक्रमण, बैक्टीरिया और गंदगी आपके शरीर में प्रवेश कर जाती है, जिससे आप गंभीर रूप से बीमार हो सकते हैं। (यह दुर्जन व्यक्ति से बहुत गहरी दोस्ती करने का नुकसान है — उसकी नकारात्मक आदतें और बातें आपकी सोच को दूषित कर देंगी)।
कुत्ता चाहे गुस्से में काटे या प्यार में चाटे, दोनों ही स्थितियों में संकट और नुकसान केवल आपका ही होता है।
ठीक इसी प्रकार, समाज में जो लोग नकारात्मक सोच से भरे हैं, दूसरों की पीठ पीछे चुगली करते हैं, ईर्ष्यालु हैं या हिंसक प्रवृत्ति के हैं, उनसे न तो कभी सीधा झगड़ा मोल लेना चाहिए और न ही उन्हें अपना घनिष्ठ मित्र या राज़दार बनाना चाहिए। उनसे केवल एक ‘सीमित और औपचारिक व्यवहार’ (Diplomatic / Formal Relationship) रखना ही जीवन की सबसे बड़ी समझदारी है।
जीवन के लिए मुख्य सीख
★ संगत का कठोर चयन : अपनी मित्रता की सूची (Friend List) बहुत जांच-परखकर बनाएं। जो लोग दूसरों के सामने किसी और की बुराई करते हैं, वे आपके पीछे आपकी भी बुराई करेंगे; अतः उनसे तुरंत दूरी बनाएं।
★ सकारात्मक ऊर्जा का निवेश : अपनी बहुमूल्य ऊर्जा, समय और विचारों को केवल उन्हीं लोगों के साथ साझा करें जो आपको जीवन में आगे बढ़ने, सकारात्मक रहने और एक बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देते हैं।
★ अटूट मर्यादा और सीमाएं : हर राह चलते या नए व्यक्ति से बहुत जल्दी भावुक रूप से (Emotionally) मत जुड़िए। अपने निजी जीवन के चारों ओर एक स्वस्थ और मजबूत वैचारिक सीमा (Emotional Boundary) तय करना बेहद ज़रूरी है।
आज का सुविचार :
“हर व्यक्ति को अपना सच्चा मित्र समझ लेना भारी भूल है। वास्तविक बुद्धिमानी इसी में है कि हम दुर्जन से दूरी रखें और केवल सज्जन का साथ निभाएं।” 🙏
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