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नर्क by Priyansu Jain in Hindi Novels
एक अद्भुत सा दिव्य प्रकाश, जिसका कोई अंत नजर न आ रहा था और उस प्रकाश में बनती एक धुंधली सी आकृति। उस आकृति के सामने हाथ...
नर्क by Priyansu Jain in Hindi Novels
पियूष ड्राइव करके ऑफिस पहुंचा। काफी बड़ा ऑफिस था। अंदर जाते ही सारा स्टाफ उसे गुड मॉर्निंग बोलने लगा, पर उसने किसी को कोई...
नर्क by Priyansu Jain in Hindi Novels
अगले दिन सारे न्यूज चैनल शहर में फैली दहशत को और फैलाने का काम कर रहे थे। वो येन-केन-प्रकारेण अपनी टी.आर.पी. बढा़ने में...
नर्क by Priyansu Jain in Hindi Novels
"पियूष लडे़ जा रहा था, बड़ी खूंखारता से अपना फरसा घुमाये जा रहा था। उसकी धार में आने वाली हर चीज टुकड़ों में विभक्त हो रही...
नर्क by Priyansu Jain in Hindi Novels
निशा का दिल टूट गया। उसे लगने लगा कि अब उसको और उसके भाई को मरना ही पड़ेगा इसके अलावा और कोई चारा ही नहीं बचा वो बस मुँह...