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आग और गीत by Ibne Safi in Hindi Novels
लेखक : इब्ने सफ़ी अनुवादक : प्रेम प्रकाश 1 तर्रवान की पहाड़ियां कई देशों की सीमाओं का निर्धारण करती थी । यह मख्लाकार पहाड़ि...
आग और गीत by Ibne Safi in Hindi Novels
(2) लगभग पंद्रह मिनिट बाद नायक उस मैदान में आ गया जिसको ऊपर से देखा था और फिर जब उसने सर उठा कर ऊपर की ओर देखा तो कांप उ...
आग और गीत by Ibne Safi in Hindi Novels
(3) नायक के कुछ कहने के बजाय उसी चट्टान पर नजर डाली जिस पर आग का स्नान किया था । वह चट्टान पहले ही के समान स्वच्छ  ...
आग और गीत by Ibne Safi in Hindi Novels
(4) राजेश ने मुस्कुरा कर टेली फोन को आंख मरी फिर से खुजाते हुये माउथ पीस में कहा । “यार मलखान ! उस औरत के बाल बड़े...
आग और गीत by Ibne Safi in Hindi Novels
(5) टू सीटर पर बैठ कर इंजिन स्टार्ट किया और होटल कासीनो की ओर चल दिया । रात हो चली थी और होटल कासीनो में भरपूर चहलपहल थी...