Aag aur Geet - 8 in Hindi Detective stories by Ibne Safi books and stories PDF | आग और गीत - 8

आग और गीत - 8

(8)

“मेरा विचार यह है कि तुम यही बैठ जाओ, मैं माथुर को तुम्हारी सीट पर भेज देता हूं ।” मदन ने कहा ।

“प्रश्न यह है कि हम तमाशा देखने के बहाने तुम्हारे लिये यहां भेजे गये हैं या नायक के लिये ?” माथुर ने पूछा ।

“यहां से वापस होने के बाद चीफ से पूछ लेना कि उसने तुमको यहाँ क्यों भेजा था ।” जोली ने कहा फिर मदन से कहा “मेरे विचार से वह आदमी अवश्य कोई महत्व रखता है इसलिये उचित यही होगा कि तुम्ही मेरे पास चल कर बैठो ।”

इतने में माइक पर एलान होने लगा ।

“अब आपकी सेवा में आग का नाच प्रस्तुत किया जायेगा ।”

फिर रुक रुक कर के रोशनियाँ बुझने लगीं । लोग अपनी अपनी सीटों पर जाने लगे । मदन बी उठा और जोली के साथ उसकी सीट तक आया – फिर दोनों बैठ गये ।

नायक तमाम बातों से निःस्पृह सर झुकाये बैठा था । अब भी उसकी नज़रों के सामने कुसुमित घाटी का वही दृश्य घूम रहा था – साइकी, आग का स्नान और हेली काप्टर ।

फिर सारी रोशनियां बुझ गई और पर्दा धीरे धीरे खिसकने लगा और लपकते हुए शोले के समान लाल रंग के चुस्त लिबास में एक औरत स्टेज पर प्रकट हुई ।

नायक एकदम से चौंक पड़ा । अब वह विस्फारित नेत्रों से स्टेज की ओर देख रहा था । पहले तो उसे संदेह हुआ कि वह जो कुछ देख रहा है केवल नजर का धोखा है । उसे अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था । विगत कई दिनों से जो तस्वीर उसके मानस पटल पर अंकित हो चुकी थी वह तस्वीर इस समय सजीव होकर स्टेज पर थिरक रही थी । उसके मुख से अनायास निकल पड़ा – साइकी !

वह अपने नृत्य का कमाल दिखा रही थी । उसके दोनों हाथों में दो परिवेष थे जिनसे शोले निकल रहे थे । वह उन्हें चक्र देती थी, इतना तेज चक्र कि केवल आग के वृत्त नजर आते थे और फिर वह उनके मध्य से निकल जाती थी ।

सारे दर्शकों के दिल धड़क रहे थे । हर बार यही लगता था कि परिवेष से निकलने वाले शोले उसके कपड़ों को थाम लेंगे, वह जल जायेगी, उसका हुस्न हमेशा के लिये बर्बाद हो जायेगा – कोई भी आदमी ठीक से अपनी सीट पर नहीं बैठा था । स्नायविक तनाव ने सबको पंजों के बल बैठने पर विवश कर दिया था ।

केवल नायक ही एक ऐसा था जिसे स्नायविक झटका सहन नहीं करना पड़ा था । उसे यह एक साधारण सी बात मालूम हो रही थी । जिस औरत को वह आग में स्नान करते हुए देख चुका था उसी औरत को आग से खेलता हुआ देखकर भला उसे स्नायविक झटका क्या लगता किन्तु था वह बहुत ही बेचैन । बार बार पहलू बदल रहा था और उसके मुख से बार बार एक ही वाक्य निकलता था ।

“वही है – वही है ।”

माथुर और कपिल उसके पास ही बैठे हुए थे । उन्होंने भी नायक का यह वाक्य सुना था, मगर वह डांस देखने में इतने तल्लीन थे कि उन्होंने कोई नोटिस नहीं ली । उनकी निगाहें उसी नर्तकी पर जमी हुई थीं ।

अचानक नायक को ऐसा लगा जैसे किसी ने उसकी पिंडली पर हाथ रख दिया हो । वह देखने के लिये नीचे झुका । पैरों के पास वही आदमी बैठा हुआ था जो उसे साइकी के साथ नजर आया था और जिसने उसे कार से नीचे घसीटा था – खौफनाक आदमी ।

“तुमको साइकी ने बुलाया है ।” उस आदमी ने धीरे से कहा ।

“कहां ?” नायक ने पूछा ।

“बाहर निकलो, बता दिया जायेगा ।” उस आदमी ने कहा और धीरे से उठ कर दरवाजे की ओर बढ़ गया ।

नायक बिलकुल किनारे वाली सीट पर बैठा था, इसलिये उस आदमी को यह सब करने का अवसर मिल गया था । उसने माथुर और कपिल की ओर देखा । दोनों नाच देखने में निमग्न थे । वह धीरे से उठा और दरवाजे की ओर बढ़ गया ।

दरवाजे से बाहर निकलते ही नायक को वह आदमी मिल गया ।

“कहां बुलाया है ?” नायक ने पूछा ।

“बस मेरे पीछे पीछे चले आओ ।” उस आदमी ने कहा और आगे बढ़ गया ।

नायक मंत्र मुग्ध सा उसके पीछे चल दिया ।

वह आदमी नायक को कम्पाउंड में ऐसी जगह लाया जहां एक गाड़ी थी फिर कहा ।

“अगली सीट पर बैठ जाओ ।”

“मगर साइकी तो स्टेज पर ।”

“हां ।” उस आदमी ने बात काट कर कहा “डांस ख़त्म होने के बाद वह भी वहीं आ जायेगी जहां तुमको ले जाया जा रहा है – चलो बैठो ।”

फिर नायक अगली सीट पर बैठ गया । उसने देखा कि पिछली सीट पर दो आदमी बंधे पड़े थे मगर उसने कुछ कहा नहीं । उस आदमी ने कार के पर्दे खींच दिये फिर ड्राइविंग सीट पर बैठ कर कार स्टार्ट कर दी ।

उधर हाल में तालियां बज रही थीं – फिर हाल में रोशनियां जल उठीं । नर्तकी स्टेज से चली गई और पर्दे खींच लिये गये ।

माथुर और कपिल ने गर्दन घुमा कर नायक की सीट की ओर देखा, सीट खाली थी । दोनों चौंक कर खड़े हो गये और इधर उधर देखने लगे । कपिल ने माथुर से पूछा ।

“नायक कहां गया ?”

“पता नहीं ।” माथुर ने कहा, फिर बोला “मैंने जीवन में प्रथम बार ऐसा नाच देखा है ।”

“मैं नायक के बारे में पूछ रहा हूं और तुम नाच की प्रशंसा कर रहे हो !” कपिल झल्लाकर बोला “वह गायब हो गया ।”

“क्या !” माथुर कांप उठा । नाच का नशा सर से उतर गया था । फिर उसने संभल कर कहा “अरे कहीं चला गया होगा ।”

“और हम लोग खड़े एक दूसरे का मुंह देख रहे हैं ।” कपिल ने जहरीले स्वर से कहा “यह क्यों भूल रहे हो कि हम लोग उसकी निगरानी पर नियत किये गये थे । अगर वह न मिला तो ?”

“अरे बाप रे !” माथुर ने बौखलाकर कहा “अनर्थ हो गया, अब क्या होगा ?”

उसी समय हाल में अंधेरा छा गया और एक चीख गूंज उठी ।

फिर क्या था । हाल में कुर्सियां टूटने लगीं । मिली जुली चीखें गूंज रही थी । लोग एक दूसरे से टकरा रहे थे । और इसी हंगामे में माथुर और कपिल इधर उधर नायक को तलाश कर रहे थे मगर भला अंधेरे में क्या दिखाई देता ।

दोनों बाहर निकल कर कम्पाउंड में आ गये मगर यहां भी अंधेरा ही था । शायद पोल ही उड़ गया था । बाहर सड़क पर भी अंधेरा ही था ।

लोग अपनी अपनी कारों और स्कूटरों पर बैठ बैठ कर वापस जा रहे थे । बस गाड़ियों की हैड लाइट्स का प्रकाश कम्पाउंड में नजर आ रहा था ।

मदन और जोली भी एक दूसरे को तलाश कर रहे थे । वह इस हंगामे में एक दूसरे से बिछड़ गये थे । फिर जोली ने ही मदन को देखा और भीड़ को चीरती हुई उसके पास पहुँची ।

“कहां रह गई थी तुम ?” मदन ने उसे देखते ही पूछा ।

“यही सवाल मैं तुमसे भी कर सकती हूं ।” जोली ने कहा ।

“आखिर हुआ क्या था ?”

“पता नहीं मगर इतना अनुमान तो है ही कि कोई न कोई महत्वपूर्ण घटना हुई है ।”

“यह कैसे कह सकती हो ?”

“हमारे चीफ ने हमें सचमुच यहां तफरीह करने के लिये तो भेजा नहीं होगा । अवश्य कोई न कोई खास बात रही होगी ।” जोली ने कहा “अगर कभी केवल मनोरंजन के लिये उसने कहीं भेजा हो तो बताओ ।”

“ठीक कह रही हो ।” मदन ने कहा “हमारे और साथी नजर नहीं आ रहे हैं ।”

“यहीं कहीं होंगे, आओ तलाश करें ।” जोली ने कहा ।

थोड़ी देर की तलाश के बाद उन्हें कपिल और माथुर मिल गये ।

“नायक कहां है ?” जोली ने दोनों से पूछा ।

“वही हम तुम लोगों से पूछने वाले थे ।” माथुर ने कहा ।

“कमाल है ।” मदन ने कहा “नायक तुम दोनों को सोंपा गया था और पूछ हमसे रहे हो ।”

“क्या बताएं यार !” माथुर ने कहा “हम लोग आग वाला डांस देखने में तल्लीन हो गये थे, फिर देखा तो नायक अपनी सीट पर नहीं था ।”

“तब तो हममें से किसी का कुशल नहीं है ।” मदन ने कहा ।

“राजेश का क्या हुआ ?” माथुर ने कहा “वह तमाशा भी नहीं देख रहा था । मतलब यह कि वह हाल में नहीं था ।”

“हो सकता है राजेश ही नायक को हटा ले गया हो ।” जोली ने कहा ।

जोली की यह बात सबके लिये तिनके का सहारा बन गई । वह सब वापस जाने के लिये गेट की ओर बढ़े – माथुर कम्पाउंड में उस ओर बढ़ गया था जिधर उनकी गाड़ी खाड़ी थी ।

कार कम्पाउंड से बाहर निकला और लोग उसपर बैठने ही जा रहे थे कि जोली को राजेश नजर आया । वह किसी को कन्धे पर लादे उसी ओर आ रहा था । वह उसी हुलिये में था जिसमें जोली ने उसे टिकिट देते हुये देखा था । साथ में छतरी भी थी ।

जब वह गाड़ी के पास आया तो जोली ने पूछा ।

“यह कौन है ? ”

“मेरा एक दोस्त है और बहुत ज़ख्मी है ।” – राजेश ने कहा फिर धीरे से बोला तुम्हारे चीफ की आज्ञा है कि इसे साइको मेनशन पहुंचा दिया जाये और उसी की आज्ञा से तुमको मेरे साथ रहना है ।”

जोली ने अपने दुसरे साथियों को अपने चीफ की आज्ञा सुनाई – फिर राजेश ने उस ज़ख्मी आदमी को कार में डाल दिया और कार चली गई ।

“तुम आखिर कहां ग़ायब हो गये थे ? ” – जोली ने पूछा ।

“रेखागणित और गणित की तुलना कर रहा था ।” – राजेश ने कहा ।

“और इस तुलना में नायक ग़ायब हो गया ।” – जोली ने कहा ।

“क्या ? ” – राजेश उछल पड़ा ।

“मैं ठीक कह रही हूँ ।” – जोली ने कहा ।

“आखिर कैसे ग़ायब हो गया ? ” – राजेश ने आँखे निकाल कर कहा “तुम लोग क्या कर रहे थे ? ”

“यह माथुर और कपिल से पूछना ।” – जोली ने कहा “नायक पर उन्ही दोनों की डयूटी लगाईं गई थी – हमारी नहीं ।”

“ठीक है । ” – राजेश ने कहा “जब वह चूहा पूछेगा तो उत्तर देना ।”

“मैं उत्तर दे दूँगी – तुम चिंता न करो और मेरी कहानी सुनो ।”

“तो तुम्हारी भी कहानी है ? ”

“हां – और बहुत ही दिलचस्प तथा रहस्यपूर्ण ।”

“तब तो अवश्य सुनूंगा – मगर पहले यह बताओ कि नायक कैसे ग़ायब हो गया ।”

“माथुर और कपिल का यह कहना है कि वह आग का नाच देखने में निमग्न हो गये थे – फिर नाच समाप्त होने के बाद जब उन्होंने नायक की ओर देखा तो नायक की सीट खाली थी ।”

“हूँ – अच्छा अब तुम अपनी कहानी सुनाओ ।”

जोली ने अपनी बगल वाली सीट पर बैठने वाले आदमी की कहानी सुना दी – फिर राजेश के पूछने पर उसने उस आदमी की हुलिया दुबारा बता दिया ।

“वह बेन्टो था ।” – राजेश ने कहा “इसका अर्थ यह हुआ कि नायक का अपहरण किया गया है ।”

“इसके अतिरिक्त और क्या कहा जा सकता है ।” – जोली ने कहा ।

“आखिर आडिटोरियम में क्या हुआ था ? ” – राजेश ने पूछा ।

“पहले रोशनी गई थी फिर तत्काल ही एक चीख गूंजी थी और उसके बाद भगदड़ मच गई थी । कुछ पता नहीं चल सका था कि चीख किसकी थी और क्या हुआ था ? ”

“अच्छा – आओ चलें ? ” – राजेश ने कहा ।

“कहां ? ”

“आडिटोरियम में ।”

“अब वहां क्या होगा – अतिरिक्त स्टेज के ।”

“चलो तो सही – नाच न देख सका तो स्टेज ही देख लूं ।” – राजेश ने कहा ।

बहरहाल जोली को उसके साथ आडिटोरियम में आना पड़ा अब रोशनी आ गई थी । वहां अब बिलकुल सन्नाटा था । राजेश कुछ देर तक इधर उधर देखता रहा फिर पिछले भाग की ओर गया – इधर उधर देखता रहा – फिर दो क़दम आगे बढ़ कर झुका और तार का एक टुकड़ा उठाकर अपनी जेब में रख लिया ।

“यह क्या था ? – जोली ने पूछा ।

“एक ऐसा तार जिससे च्युंगम बनाया जाता है । ” – राजेश ने कहा ।

“कभी तो ढंग की बात किया करो ।” – जोली अपनी झल्लाहट दबाकर बोली ।

“चलो – अब चला जाये । बाहर निकल कर ढंग की बात करूँगा । ” – राजेश ने कहा ।

दोनों वहां से निकल कर कम्पाउंड में आ गये ।

“आखिर तुम टिकिट लेकर कहां रह गये थे ? ” – जोली ने पूछा “आडिटोरियम में नाच देखने आयें क्यों नहीं थे ? ”

“मै आने ही वाला था कि एक आदमी दिखाई दे गया था । उसकी जेबें खासी वजनी थी और वह चारों ओर देखता हुआ बड़ी सतर्कता से चल रहा था । वह आडिटोरियम के पिछले भाग की ओर गया था । वहां गमलों की पंक्तियाँ थी – वहां वह धरतीं के ऊपर कोई चीज गाड़ने लगा था ।”

“बम ! ” – जोली ने पूछा ।

“हां – टाइम बम ।” राजेश ने कहा “वह शो समाप्त होते ही कट जाता और आडिटोरियम का पिछला भाग निश्चय ही नष्ट हो जाता और उस भाग का एक आदमी भी न बच पाता ।”

“तो क्या जिसको तुम कंधे पर लाद कर लाये थे वह वही आदमी था ? ” – जोली ने पूछा ।

“हां ।”

“तुमने उस पर अधिकार कैसे प्राप्त किया ? ”

“मैं उसके पीछे लग गया था । उसने मुझे नहीं देखा था – फिर उसे छाप बैठा था । जब वह बेहोश हो गया तो मैंने उसे झाड़ियों में छिपा दिया । उसके बाद होटल की ओर गया तो पता चला कि जो पार्टी आई है उसका सामान जा चुका है ।तुम्हें याद होगा कि पहले बेले का प्रोग्राम हुआ था उसके बाद आग के नाच का प्रोग्राम हुआ था । जिन लोगों ने बेले में भाग लिया था वह जा चुके थे । मैं भी उसी ओर रवाना हो गया था जिधर वह गये थे । आशा थी कि उन्हें मार्ग ही में धर लूँगा – फिर यह सोच कर वापस लौट आया कि कहीं आग का नाच दिखाने वाली औरत भी न ग़ायब हो जाये, मगर जब यहां आया तो डांस समाप्त हो चुका था और अंधेरे में लोग बौखलाये हुये इधर उधर भाग दौड़ रहे थे – कुशल यह हुआ कि वह बेहोश आदमी वही बेहोश पड़ा हुआ मिल गया वर्ना कोई सुराग न मिल सकता ।”