Aag aur Geet - 16 in Hindi Detective stories by Ibne Safi books and stories PDF | आग और गीत - 16

आग और गीत - 16

(16)

राजेश जहां था वही से उसने कलाबाजी लगाईं औए अपने साथियों के सरों पर से होता हुआ ठीक उस भीमकाय आदमी के सामने गिरा और बिजली की सी तेजी के साथ उलटा खड़ा हो गया और बोला ।

“हम बनजारे है । तमाशा दिखाना चाहतें है ।”

“सीधे खड़े हो जाओ ।” उस आदमी ने कोमल स्वर में पूछा ।

राजेश सीधा खड़ा हो गया ।

“कहां से आये हो ? ” उस आदमी ने पूछा ।

“पहाड़ी की दूसरी ओर से ।” राजेश ने कहा ।

“यहां पहले भी कभी आये हो ? ”

“नहीं ।”

“फिर हमारी बोली कैसे जानते हो ? ”

“बहुत दिनों की बात है, मोबरान अपने साथियों के साथ हमारी ओर गया था । वही मैंने उसके साथियों से यह भाषा सीखी थी । मोबरान ने हमें यहां आने का निमंत्रण भी दिया था और हमने यहां आने का वचन भी दे दिया था, इसलिये अवसर मिलते ही यहां आ गये ।”

यह हवाई तीर ठीक निशाने पर बैठा था । उस आदमी ने कबायलियों की ओर देखा फिर पूछा ।

“तुम लोग तमाशा देखना चाहते हो ? ”

उत्तर में सबने हाथ उठा कर हाथ हिलाया, यह इस बात का एलान था कि वह तमाशा देखना चाहे थे ।

इस बीच राजेश का संकेत पाकर माथुर एक लम्बे बांस पर खड़ा हो गया था ।

“तो फिर मोबरानी के पास चलें ।” उस आदमी ने अपने साथियों से कहा ।

“मगर नया मोबरान ? ” एक बूढ़े आदमी ने कहा ।

“तुम उसे नया क्यों कह रहे हो ! ” उस आदमी ने क्रोध भरे स्वर में कहा “वह वही पुराना वाला ही मोबरान है, खो गया था, अब मिल गया है ।”

“यह झूठ है ।” बूढ़े ने कहा ।

“क्यों ? ”

“इसलिये कि नये मोबरानी के चेहरे पर सूरज देवता की रोशनी नहीं देखी गई है ।” बूढ़े ने कहा ।

“तो फिर ? ”

“वह तमाशा करने की आज्ञा नहीं देगा ।”

“बकवास मत करो । ” भीमकाय आदमी ने धीरे से कहा फिर राजेश की ओर संकेत करते हुये कहा “यह हमारी भाषा जानता है ।”

बूढा कुछ नहीं बोला । वह राजेश को देखता रहा ।

“मैं जा रहा हूँ, घंटा बजेगा ।” भीमकाय आदमी ने कहा और जाने की लिये मुड़ गया ।

उसके जाते ही कबायली तालियां बजाने लगे जिसका अर्थ था कि तमाशा आरंभ कर दिया जाये ।

राजेश ने संकेत किया और ढोल ताशे के साथ फिर उछल कूद आरंभ हो गई ।

“अब क्या प्रोग्राम है ? ” मदन ने राजेश से पूछा ।

“यहीं रुके रहो, देखो क्या होता है ।” राजेश ने कहा ।

“एक जगह खड़े रहने से तो खोपड़ी पिघल जायेगी ।” मदन ने कहा ।

“तब फिर धीरे धीरे आगे बढ़ो ।” राजेश ने कहा ।

मदन ने संकेत किया और पार्टी वाले उछलटे कूदते आगे बढ़ने लगे ।

एक घंटे से अधिक समय बीत गया मगर वह भीमकाय आदमी नजर नहीं आया जो सफ़ेद इमारत की ओर गया था ।

इस मध्य इस लोगों ने काफ़ी फासिला तैयार कर लिया था । सफ़ेद इमारत बिलकुल सामने नजर आ रही थी । धूप बहुत तेज थी मगर तेज हवाओं के चलते रहने के कारण उसका प्रभाव कम पड़ रहा था । सब लोग अब भी उछल कूद रहे थे मगर जोली सीधे साधे चल रही थी ! शायद वह थक गई थी ।

अचानक घंटा बजने लगा और वही भीमकाय आदमी नजर आया । उसे देखते ही कबायली तालियां बजाने लगे ।

भीमकाय आदमी ने राजेश को अपने पास आने का संकेत किया ।

“तुम लोग अपना तमाशा दिखा सकते हो ।”

“क्या मोबरान और मोबरानी हमारा तमाशा नहीं देखेंगे ? ” राजेश ने पूछा ।

“देखेंगे ।” उस आदमी ने कहा “तुम लोग तमाशा आरंभ कर दो । वह आ रहे है ।”

राजेश ने मदन और जोली को संकेत किया और तमाशा आरंभ हो गया ।

“अगर आप लोग ठीक तौर से तमाशा देखना चाहते है तो बैठ जाइये ।” राजेश ने कबायलियों से कहा ।

सारे कबायली घेरा डाल कर बैठ गये ।

तमाशों का प्रारंभ इस प्रकार हुआ था कि एक के कंधे पर दूसरा खड़ा हो गया था । सबसे नीचे माथुर था और सबसे ऊपर चौहान था ।

जोली, मदन और राजेश ने तमाशे में भाग नहीं लिया था । वह ऐ कोर खड़े थे । राजेश की नजर दरवाजे पर लगी थी, दरवाजे के पास ही भीमकाय आदमी खड़ा था ।

अचानक घंटियाँ बजने लगीं और वह भीमकाय आदमी कमर तक झुक गया ।

राजेश ने देखा कि आगे छ: फीट लम्बी और गठे हुये शरीर की एक स्वस्थ औरत चली आ रही है । उसकी आयु पैंतीस और चालीस के मध्य मालूम हो रही है । उसके चेहरे से कठोरता और निर्दयता टपक रही थी । उसके शरीर पर शेर की खाल एक प्रकार से मढ़ी हुई थी जिस पर उसके काले लम्बे और चमकीले बाल पड़े हुये थे । उसके सर पर काले रेशम का एक कपड़ा कुछ इस प्रकार लपेटा गया था कि देखने से बस यही लगता था जैसे फण काढ़े सर्प खड़ा हो । उसके दाहिने हाठ में एक बर्छा था जिसमें तीन फल निकले हुये थे ।

राजेश समझ गया कि यही मोबरानी हो सकती है, क्योंकि निशाता ने यही बताया था कि मोबरानी का कद छ: फीट है ।

मोबरानी के साथ ही नायक भी नजर आया था, मोबरानी और उसकी वेशभूषा में बस इतना ही अंतर था कि नायक के सर पर लाल रंग का कपड़ा बंधा हुआ था । वह चकित और विस्मित नजर आ रहा था ।

अचानक मोबरानी ने बर्छे वाला हाथ ऊपर उठाया और वह भीमकाय आदमी चीख पड़ा ।

“तमाशा रोक दिया जाय ।”

राजेश ने अपने साथियों को संकेत किया और खेल रुक गया ।

एक दम सन्नाटा छा गया । राजेश चिन्तित हो उठा था । उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर तमाशा क्यों रोक दिया गया जब कि भीमकाय आदमी कह चुका था कि मोबरान और मोबरानी तमाशा देखेंगे और वह दोनों आ गये थे ।

कुछ ही क्षण बाद राजेश को बेन्टो, लाल वस्त्र वाली वह औरत जिसने होटल कासीनो में आग का नाच प्रस्तुत किया था और जिसका नाम नायक ने साइकी बताया था, और वह विदेशी जिसने रात निशाता को उठा ले जाने का प्रयास किया था, नजर आये । इस समय साइकी चुस्त नारंगी वस्त्र में थी ।

उसको देखते ही नायक बेचैन नजर आने लगा ।

अचानक साइकी के अधरों पर मुस्कान नजर आई । उसने भीमकाय आदमी से धीरे से कुछ कहा और उसने आवाज लगायी ।

“तमाशा आरंभ किया जाये ।”

राजेश ने अपने साथियों को इशारा किया और तमाशा फिर आरंभ हो गया ।

जोली, मदन और राजेश अब भी अलग थलग थे ।

अचानक साइकी ने मोबरानी के ओर देख कर कुछ कहा और मोबरानी हाथ उठा कर बोली ।

“अब तुम तीनों भी कुछ कमाल दिखाओ ।”

“आप किस प्रकार का तमाशा देखना चाहती है ? ” राजेश ने वहीँ की भाषा में पूछा ।

“तुम्हारे तमाशें में हमारा भी एक आदमी शामिल होगा ।” मोबरानी ने कहा और बेन्टो की ओर देखा ।

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“ख़तरा ।” राजेश ने कहा “तुम अलग हट जाओ ।”

जोली और मदन हेट ही थे कि एक कटार सनसनाती हुई आई और राजेश की बगल से होती हुई निकल गई । कटार बेन्टो ने फेंकी थी ।

बेन्टो ने दूसरी कटार फेंकी जो राजेश के कपड़ों को छूती हुई निकल गई ।

कबायली इस तमाशे से खुश नहीं थे और मदन इत्यादि तो भौंचक्के हों रह गये थे । उनकी समझ में नहीं आ रहा था कि यह क्या होने लगा ।

बेन्टो ने बारी बारी करके पाँच कटारे फेंकी जो सब की सब खली गई, फिर उसने अपना हाथ रोक लिया और झुक कर साइकी की कान में कुछ कहा, फिर साइकी ने मोबरानी से कुछ कहा और मोबरानी ने तेज आवाज में पूछा ।

“तुम लोगों का सरदार कौन है ? ”

राजेश ने आगे बढ़ कर जोली की ओर संकेत करते हुये कहा ।

“यह है, मगर यह गूंगी है ।”

“तुम लोगों ने बड़ा अच्छा तमाशा दिखया, क्या इनाम चाहते हो ? ” मोबरानी ने पूछा ।

“एक एक कम्बल औए एक एक भेड़ ।” राजेश ने कहा ।

“दोनों वस्तुयें मिलेंगी मगर तुम लोगों को आज ही यहां से चला जाना होगा ।”

“वह क्यों ? ” राजेश ने पूछा ।

“हम अपने यहां किसी दूसरी जगह के लोगों को रहने नहीं देते ।” मोबरानी ने कहा ।

फिर साथ भेड़ें और सात कम्बल आ गये ।

राजेश ने अपने साथियों को वापस चलने का संकेत दिया ।

सब लोग वापस होने लगे । कबायली तो उसी समय खिसकने लगे थे जब तमाशा बंद करा दिया गया था ।

राजेश की नज़रों में यह तमाशा बेकार नहीं गया था । उसने दो बातें नोट की थी ।एक तो यह कि सफ़ेद इमारत में विदेशियों की संख्या अधिक नहीं है और दूसरी यह कि जिन लोगों की तलाश थी वह वहीँ थे ।

मगर उसकी टीम वालों को अपने चीफ पवन से सख्त शिकायत थी । वह आपस में यही बातें करते जा रहे थे कि अब क्या होगा ।यहां ठहरना खतरे से खली नहीं था और वापस जाने की सूरत में नायक यहीं रहा जाता था । यह भी परामर्श हो रहा था कि क्यों न सफ़ेद इमारत पर आक्रमण करके नायक को मुक्त करा लिया जाये ।

राजेश सब कुछ सुन रहा था पर मौन था ।

छोलदारियों तक पहुचते पहुंचते चार बज गये । वहां मोंटे और मेकफ मौजूद थे ।

धुप और परिश्रम के कारण सब लोग थक कर चूर हो गये थे । भूख अलग लगी हुई थी इसलिये सब कुछ भूल कर पहले तो उन्होंने डट कर भोजन किया फिर लेट गये, और फिर सो भी गये ।

अकेले मदन जाग रहा था । वह एक चट्टान की आड़ लिये हुये सफ़ेद इमारत पर नजरें जमाये हुये था, राजेश का कही पता नहीं था ।

सूरज डूब गया और धीरे धीरे अंधेरा फैलने लगा मगर टीमवालों की आँखे नहीं खुलीं । ठण्डी हवा के कारण मदन भी ऊँघने लगा था ।

और फिर बिल्कुल आकस्मिक तौर पर सब घेर लिये  गये और उनकी मुश्कें कासी जाने लगीं उन्हें उठने का भी अवसर नहीं मिल सका था ।

सबसे पहले मदन ही पकड़ा गया था । उन्हें घेरने वालों में मोबरानी के भी आदमी थे मगर उनकी अगुवाई बेन्टो कर रहा था ।

“हमारे साथ ज्यादती की जा रही है।” नींद कीं झोंक और भल्लाहट में मदन अंग्रेजी में बोल रहा था ।

“बनजारे अंग्रेजी नहीं बोलते मेरे बच्चे ! ” बेन्टो ने अट्टहास लगा कर कहा “तुम सन फ्राड हो, अगर किसी ने शरारत की तो भून डाला जायेगा ।”

फिर उसकी आज्ञा पर कबायलियो ने मशालें जला लीं और उनके प्रकाश में बेन्टो एक एक का चेहरा देखने लगा फिर उसने कहा ।

“राजेश कहां है ? ”

मदन सन्नाटे में आ गया । उसे आशा नहीं थी कि राजेश पहचान लिया जायेगा क्योंकि राजेश भी मेक अप ही में था और उसने ख़ुद ही अपना मेक अप किया था ।

“मैं तुम्ही से पूछ रहा हूँ कि राकेश कहां है ? ” बेन्टो ने मदन से पूछा ।

“मैं नहीं जानता ।” मदन ने झल्ला कर कहा “यही तो सो रहा था ।”

“जायेगा कहां ।” बेन्टो ने कहा और अपने हाथ में दबी हुई टामी गन से तड़ तड़ दो राउंड चलाये, उसने फायर चट्टानों पर किये थे, फिर चीख कर बोला “राजेश ! जहां भी हो सामने आ जाओ, वर्ना तुम्हारे सारे साथी भून डाले जायेंगे ।”

थोड़ी थोड़ी देर के बाद बेन्टो ने तीन बार यही वाक्य दुहराया मगर न राजेश सामने आया और न उसकी आवाज ही सुनाई दी । तब बेन्टो ने अपने आदमियों से कहा ।

“इन्हें हांक ले चलो । इनका मेक अप बिगाड़ कर इनके अस्ली शक्लें देखनी है ।”

“और राजेश ? ” किसी ने कहा ।

“वह जायेगा कहां ।” बेन्टो ने कहा “जहां भी होगा आयेगा अवश्य ।”

“यह आप कैसे कह सकते है ! ”

“वह अपने आदमियों को मौत के मुंह में छोड़ कर जा ही नहीं सकता ।” बेन्टो ने कहा ।

फिर सब सफ़ेद इमारत की ओर बढ़ने लगे ।

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