रेवती रमन- अधूरे इश्क की पूरी कहानी - 2

“हमे कोई प्यार कर ले झूठा ही सही..........हममम हमममम” (रमन और उसके कुछ दोस्त इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के कैम्पस में बैठे कर कॉलेज के दिनों का सबसे सुन्दर समय व्यतीत कर रहे थे। कि तभी अचानक से भगदड़ मच जाती है। सब इधर से उधर भाग रहे होते है कुछ गुन्डे जैसे दिखने वाले लड़के हॉकी डंडा लिये कभी गमले तोड़ते तो कभी नारेबाजी करते।)

“अबे भागो न तो करिहांओ तोडं देहे ये सारे बाउराये गा आहां (भागों नही तो कमर तोड़ देंगे ये लोग पागल हो गये है)”- शुक्ला 

(भागते हुये रमन और उसके अन्य साथियों की तरफ आता है और सभी लोग उठकर भागने लगते है तभी भागते हुये रमन की टक्कर एक लड़की से हो जाती है।)

“देख के नही चल सकते हो क्या? अभी एक कन्टाप में दिमाग ठीक कर देंगे...अन्धा कहीं का.... सबके सब सब लड़के अन्धे होते है लड़की से टकराने का बहाना चाहिये बस और कुछ नही।”- रेवती
 (रेवती उठकर अपने कपड़े झाड़ते हुये खड़ी होती है और रमन को खूब बाते सुनाती है। रमन बस रेवती को एक टक देखता जाता है कुछ बोलता नहीं। रमन के दोस्त उसको वहाँ से खींच के ले जाते है।)

“का बे रमन , बौरा गये हो का ? ऊ लोगन यूनिवर्सिटी के बड़के बड़के गुन्डा हाउवन। हिंया कारेजा निकरे को आय गवा और तुम्हे मालबाजी सूझी रही। पेला जाबा ढंग से कौनो दिन। ई यूनिवर्सिटी आहे तोहार इन्टर कालेज नाय जौन तू चार लवन्डन के लेके जीत लेबा”- किशन ( रमन का दोस्त)

(रमन के दोस्त उसे इस तरह से बोलते जा रहे थे और वो चुपचाप बैठा मुस्काराये जा रहा था। तभी एक दोस्त ने रमन के पीठ पर जोर से मुक्का मारा)

“का है बे काहे कापार चाट रहे हो”- रमन

“तुमको सारे हुआ क्या है तबसे हम लोग बक बक कर रहे और तू जाने कौन लोक मे खोआ बाटा। का हुआ बे कौन रही ऊ छेड़(लड़की) जौन हमार भाय के कपार (सर) में अटक गाय बा ”- किशन

“का बाताई यार......लईकी रही के एक दम कटार । उज्जर (सफेद) और असमानी शूट में लिपट के हमार करेजा में उतर रही और ओकर गुलाब निमन होंठवा से तड़ तड़ गोलि चली और हमार करेजा छलनी काय दिहीस भाय। आँखिया बन्द करित है तौ देखात है खोले पर उही के देखै के मन होता”- रमन
(सारे दोस्त अचरज से रमन को देखते हुये।)

“हे भाय............... इ तो गयेन मोहब्बत में। इनके काम लाग गये एक तो पढ़े लिखे मा वैसे गोबर रहे अब इशक लाग गये तो इनके पास होयेब अब संगम के बड़के हनुमान जी ही कृपा करे तो ही होई”- हिमान्शु (रमन के ग्रुप का सबसे होनहार और पढाकू लड़का)

“काहो का नाम बा तोहार महबूबा के?”- शुक्ला

“नाय पता यार”- रमन

“ला इनका देखा गाँव बसाय लेहेन और जमीन दहेज में मिले...... गजब चूतिया मनई आहा बे”- शुक्ला

“नाऊ (नाम) का टेशन जिन ला हम कौन दिन काम आऊब”- मोहनी (आते हुये किशन की गर्लफेन्ड ने कहा)
“अरे हामार भौजी सेटिंग करवाय हमार भौजी”- रमन ने मोहनी से कहा

“बस बस माखन लगावे के ज्यादा जरूरत ना बा। रमन बाबू तोहार दिलरूबा के नाउ रेवती आहे कानपुर से आयी है अपनी बुआ के हियां (यहाँ) बी.एस.सी में बाटे (है) हमार सेक्सन में। लेकिन तोहार (तुम्हारी) दाल गली लागत(लगता) नाये(नही), काहे कि वो इन्टर में 95 प्रतिशत वाली है और तू 59 प्रतिशत कैसे बनी ई जोड़ा”- मोहनी

 “चला चला इतना नेगेटिब न सोचा हमार रमन लाखों में एक बा कुछ न कुछ होये जाई। लावा हो सबका चाय पियावा आज हमार तरफ से सबका चाय पार्टी”- शुक्ला

“ला भाय रमन चाय पिया”-शुक्ला( ये आवाज सुनकर रमन का ध्यान 5 साल पहले से आज के समय में वापस आ जाता है)

“तोहका हमार बिना चैन नही बा ना?”- रमन
“हम सोचे हो सकत आज रेवती  न आवे और तू मरे निकल पड़ा तौ बचावे आइ गये”-शुक्ला

“भक साले बिलार के मौसिया कभौ शुभ शगुन न बोलया तू”- रमन

“अरे हमार रमन बाबू हम मजाक करत रहे भाय(भाई)..........का करी भाय तोहार चिन्ता रही तो आइ गये। मन छोट न करा रेवती जरूर आइ हमका विशबास बा”- शुक्ला

(शुक्ला की बात सुनकर रमन की आंखो से आंशूओं की धारा बह चली और वो शुक्ला के गले लग गया)
(इन्तेजार करते करते दोपहर के 2 बज चुके थे रेवती न आयी  न उसकी कोई खबर, रमन की उम्मीद टूट रही थी वह कुछ बोल नही रहा था लेकिन शुक्ला उसके  दर्द को महसूस कर रहा था और बार बार उसे संतावना देने की कोशिश कर रहा था।)

“हे रमन चला रूम पे भाय अब लागत नाही की रेवती आयी”-शुक्ला

(रमन कुछ बोलता नाही और शुक्ला उसे वहाँ से जबजस्ती लेकर रूम पर जाता है रमन बाथरूम में जाता है और शॉवर और नल खोलकर फफक फफक कर रो पड़ता है। शॉवर और नल के शोर से रोने की आवाज शुक्ला तक नही पहुँच पाती है।)

ट्रिंग ट्रिंग ट्रिंग.............रमन के फोन पर किशन का फोन आता है शुक्ला उठाता है

“रमन.......!!! कहाँ हो? ”- किशन (घबराया हुआ)
“का हुआ बे इतना घबराये काहे हो........?”- शुक्ला
“अच्छा शुक्ला तुम हो अबे रेवती का एक्सीडेंट हुआ है वो यूनिवर्सिटी के बाहर कोई उसके हाथ पर चाकू मार दिया है बहुत खून बह गया है जाग्रति नर्सिंग होम लेकर गये है।  मोहनी का फोन आया था हालत बहुत सिरियस है रमन को ध्यान से बताना भाय”- किशन
(यह सुनकर शुक्ला बाथरूम की तरफ भागता है और रमन से बाहर आने को कहता है)

“रमन......रमन......रमन........!!! रेवती को कोई चाकू मार दिया बे जल्दी आओ बे”- शुक्ला

(यह सुनकर रमन जो अभी तक फफक फफक कर रो रहा था एक दम से फुर्ती से बाहर निकल कर आता और भीगे कपड़ों में ही बाइक की तरफ भागता है, शुक्ला और रमन नर्सिंग होम को रवाना हो जाते है.............)


 किसने मारा रेवती को चाकू और क्यों? क्या रेवती और रमन की प्रेम कहानी आगे परवान चढेगी............जाने आगे के अंको में

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