कहानी संग्रह - 3 - जय मां सरस्वती in Hindi Novel Episodes by Shakti Singh Negi books and stories Free | कहानी संग्रह - 3 - जय मां सरस्वती

कहानी संग्रह - 3 - जय मां सरस्वती

दीपक एक साधारण किसान था। उसके घर में कुल 15 सदस्य थे। उसका परिवार एक संयुक्त परिवार था। इनमें 3 बच्चे, चार स्त्रियां, पांच युवक व तीन वृद्ध थे। अचानक उसके परिवार में दो वृद्धों, दो स्त्रियों, एक युवक व एक बच्चे की एक दुर्घटना में मृत्यु हो गई। अब परिवार में मात्र 9 व्यक्ति ही बचे। अब दीपक परिवार का मुखिया बन गया।


   दीपक ने चकबंदी में हिस्सा लिया। घर के सभी बचे लोगों को खेती में लगा दिया। 8 गाय - भैंस आदि उसने ने बेच दी और प्राप्त धन में कुछ धन और मिलाकर उसने एक सुंदर उन्नत गाय ली। इन सब से उसने कुछ धन एकत्र कर लिया। कुछ धन रिजर्व रख दीपक ने बाकी धन से अपना मकान, गौशाला आदि की रिपेयरिंग, पेंटिंग आदि करवाई। फालतू का सामान कबाड़ी को दे दिया। घर के लिए वस्त्र, राशन, दवाई आदि की व्यवस्था की। अपने 105 वर्षीय दादाजी के लिए अलग कमरे की व्यवस्था की।


    खाली समय में दीपक पुस्तकें लिखने लगा। 5-6 नये बच्चों के जन्म से उसके परिवार में फिर से 15 सदस्य हो गये। दीपक ने अपने घर की अर्थ- व्यवस्था सुधार दी व जनसंख्या 15 पर ही स्थिर कर दी। अब उसने अपने घर की शिक्षा रहन-सहन आदि को उन्नत किया।







     मैं एक बार एक जंगल से होकर जा रहा था. अचानक एक साधू  प्रकट हुआ. उन्होंने बोला वत्स तुम बहुत अच्छे आदमी हो. तुम्हें मैं यह उड़ने की विद्या देता हूं. अचानक मेरे पीठ पर दो सुंदर - सुंदर पंख उग आए. मैंने साधु का धन्यवाद किया और पंखों का ट्रायल लेने का विचार किया. कुछ ही देर में मैं पंखों को साधना सीख गया. अब मैं ऊंची - ऊंची उड़ान भरने बैठ गया.


   अचानक मैं उड़ते - उड़ते एक सुंदर से चमकीले ग्रह पर पहुंच गया. जैसे ही मैं ग्रह पर नीचे उतरा. मैंने देखा कि ग्रह बहुत सुंदर चमकीला और हरा - भरा है. अचानक ही बहुत सी सुंदर - सुंदर परियां दौड़ती हुई आई और उन्होंने मुझे पकड़ लिया. वह मुझे पकड़कर जबरदस्ती अपने साथ ले गई. 


   उस परीलोक में कोई भी पुरुष नहीं था. अतः जबरन मुझे उन सब से शादी करनी पड़ी. मेरा समय वहां बहुत अच्छे ढंग से गुजर रहा था. अचानक मुझे अपने घर पृथ्वीलोक की याद आई और एक रात में चुपके से वहां से भाग कर और उड़ कर वापस पृथ्वी पहुंच गया. आपकी क्या राय है? मैंने सही किया या गलत? कृपया कमेंट कीजिए. धड़ाधड़ धड़ाधड़.






      महेश एक दलित था लेकिन उसने अपने दिमाग और पढ़ाई - लिखाई के बलबूते पर बहुत मेहनत की. आज वह विश्व के अरबपतियों में गिना जाता है. महेश एक बार अपने गांव आया तो उसने देखा कि उसकी जाति - बंधुओं की दशा तो बहुत सुधर गई है लेकिन अभी भी काफी कमी है. 


   महेश के गांव में उसका बहुत स्वागत हुआ. महेश ने अपने धन का 10% भाग गांव के विकास, आधुनिकीकरण, कॉलेज, हॉस्पिटल आदि बनाने में किया. उसने अपने गांव के सभी दलितों को भी विकसित बना दिया. उनके रोजगार की भी समुचित व्यवस्था की. इसके लिए उसने गांव के नजदीक ही कई मिलें, कारखाने आदि स्थापित किए.  


   कुछ ही समय में उसका गांव और गांव का दलित मोहल्ला बहुत विकसित, संपन्न और आधुनिक हो गया. आपकी क्या राय है?  महेश के बारे में आपके क्या विचार हैं?








   









   आज आपको मैं अपने बारे में थोड़ी सी जानकारी दे देता हूं. मैं एक पोस्ट ग्रेजुएट व्यक्ति  हूं. मैंने जिंदगी में बहुत उतार-चढ़ाव देखे हैं. बहुत मेहनत की है. उससे मैं आज कुछ ऊंचे मुकाम पर पहुंच गया हूं.  मेरी कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स से. 


   पर मैं एक सुंदर सुशील लड़की की के इंतजार में हूं. जिसे मैं अपनी गर्लफ्रेंड, अपनी विवाहिता बना सकूं. मैं धन कमाने के नये - नये तरीके ढूंढा करता हूं और धन भी कमाता हूं. लेकिन मैं कभी धन का घमंड नहीं करता हूं. हमारी हवेली बहुत विशाल है. और एक महल की तरह लगती है. कई लड़कियां मुझसे आकर्षित हैं. लेकिन मुझे वह चाहिए जिसके प्रति मैं आकर्षित होऊं. लड़की की उम्र 18 से 25 वर्ष तक होनी चाहिए. 


   जाति से मैं एक हिंदू राजपूत हूं. मैं बाहर से कठोर, स्मार्ट, सुंदर और व्यवहार - कुशल व हसमुख हूं. परंतु अंदर से मैं नारियल की तरह मुलायम हूं. यह समझ लीजिए जैसे नारियल बाहर से कठोर और अंदर से मुलायम होता है. वैसे ही मेरा व्यक्तित्व भी है. आपकी क्या राय है मेरे बारे में? कृपया कमेंट कीजिए धड़ाधड़ धड़ाधड़.









  दोस्तों पुस्तकों का मानव जीवन में बहुत बड़ा महत्व है। मेरे घर में बहुत सी पुस्तकें हैं मैंने सभी पुस्तकों को एक स्वच्छ कमरे में जमा किया और उनमें से महत्वपूर्ण और कीमती पुस्तकों को मरम्मत और बाइंडिंग करके अलमारियों में सजा दिया। निर उद्देश्य और फालतू पुस्तकों को एक कोने में रख दिया और उन्हें कबाड़ी को दे दिया। संरक्षित पुस्तकों को अच्छे तरीके से रखा और उनकी देखरेख की अच्छी व्यवस्था की।

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