Megha - 1 in Hindi Fiction Stories by Rajesh Kumar books and stories PDF | मेघा - 1

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मेघा - 1

कॉलेज के सुरुआती दिन है, मेघा इन दिनों कुछ असहज सी है क्योंकि कॉलेज का वातावरण स्कूल से एकदम अलग है। लड़के लड़कियों का आपस में वार्तालाप एक दूसरे के गले में हाथ डालकर कॉलेज के गेट पर टहलना खुलेपन के नाम पर बहुत कुछ देखकर उसे थोड़ा अजीब लगता। फिर घर से दूर शहर में जहाँ घरवाले भी नहीं है, रहना उसे और भी असहज बना रहा है। उसकी दोनों सहेलियां रीमा व सोनी खुले विचारों वाली मॉर्डन लड़की है और मेघा पैदा तो मॉर्डन जमाने में हुई है पर विचारों और संस्कारों से पुराने जमाने की आंटी😊😊 इसी बात को लेकर उसकी सहेलियां कभी कभार उसे चिढ़ाया करती है पर स्वभाव अलग होने पर भी तीनों बहुत अच्छी दोस्त है।

एक दिन मेघा क्लास में मैडम द्वारा पूछे गए प्रश्न का उत्तर दे रही थी उत्तर ठीक था मैडम ने मेघा को शाबाशी दी और ताना मारते हुए कहा अगर तुम सब बच्चे भी मेघा की तरह पढ़ाई करो तो पास होने में आसानी रहेगी।

तभी मैडम नेेे मुस्कुराते हुए बेटा मेघा तुम आज भी इस मॉडर्न जमाने में खुद को पुराने तरीके में कैसे ढाल पाती हो वैसे बेटा बहुत उच्च संस्कार है तुम्हारे इन्हें यूं ही बनाए रखना।

मैडम जी का मेघा के लिए ये कहना बाकी स्टूडेंट के लिए बहुत अजीब लगा। रोहित जो बहुत शरारती और निक्कमा लड़का है अपने दोस्त को कमेंट किया "आंटी लगती है ये तो" उनकी बात मोहिनी ने सुन ली और वो जोर से हँसी। मोहिनी जो रोहित की दोस्त है पढ़ने में अच्छी है पर मेघा जितनी नही इसीलिए वो मेघा से चिड़ती है। मोहिनी के हँसने पर मैडम ने मोहिनी से पूछ, क्या हुआ क्यों हँस रही हो?

मोहिनी- कुछ नही मैडम जी।

मैडम-फिर क्यों हँसी,मेरी क्लास में ये हरकतें मत किया करो।

मोहिनी-ठीक है मैडम जी।

क्लास समाप्त हुई सभी स्टूडेंट बाहर जाने लगे। पीछे से किसी ने जोर से बोला "आंटी" सभी पीछे की और देखने लगे कि कौन पुकारा मोहिनी बहुत तेजी से हँसी सभी को लगा कि किसी ने मोहिनी के लिए ही कमेंट किया है।

अगले दिन रीमा,सोनी, मेघा जैसे ही कॉलेज के पास वाले साइबरकैफ़े के पास से गुजर रहीं थी तब किसी ने कल की तरह जोर से "अरे आंटी" कहा तीनों एकदम से चोंक गयीं मानो किसी ने उन्हीं के लिए कमेंट किया हो उन्होंने आसपास देखा तो उनके आजूबाजू कोई भी लड़की नही थी हाँ, कुछ पीछे और कुछ स्टूडेंट उनसे ज्यादा दूरी पर आगे जा रहे थे। अब तीनों को लगा कि किसी ने उन्हीं को आंटी बोला है। लेकिन बोलने वाला कहाँ है दिख नही रहा था। उन्होंने साइबर कैफ़े वाले मकान पर देखा उन्हें वहां छत पर किसी के होने का अंदाज़ा हुआ क्योंकि बगल से सीढ़ियों से छत पर जाने वाला गेट खुला है। लेकिन तीनों ने इसे इग्नोर करना ही उचित समझा। वो चाहती थी कि बिना वजह कोई बतंगड़ ना बने। वैसे भी कॉलेज लाइफ का माहौल थोड़ा खराब होता है लोग क्या कहेंगे।

तीनों तेजी से आगे बढ़ गयी। क्लास में जाकर अपनी सीट पर बैठ गईं। अचानक मेघा को असहज महज महसूस होने लगा वो सोचने लगी कि कल जब मैडम ने उसकी तारीफ की और उच्च संस्कारों वाली बताया उसी चीज को लेकर ये "आंटी वाला कॉमेंट" मेरे लिए ही तो नही था, कहीं ये बात सभी को मालूम हो गयी तो....

शेष अगले भाग में......

आशा है आपको ये कहानी पसन्द आ रही होगी आगे ये और भी दिलचस्प होने वाली है। तो बने रहिये मेरे साथ।