Sabyasachi - 1 in Hindi Fiction Stories by DINESH DIVAKAR books and stories PDF | सव्यसाची - भाग 1

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सव्यसाची - भाग 1

जैसे ही मेरी आंखें खुली तो मैंने अपने आप को अपने कमरे में नहीं बल्कि एक अलग दुनिया में पाया..!! वह दुनिया हमारी दुनिया से परे था वह सबसे अलग और बेहद खूबसूरत था ऐसा लग रहा था जैसे मैं स्वर्ग में आ गया हूं।

एक मिनट स्वर्ग...! इसका मतलब मैं स्वर्ग में हूं कहीं मेरी मृत्यु तो नहीं हो गया! मैं इस डर से वही गिर पड़ा थोड़ी देर बाद जब मुझे होश आया मैं अपने आप को चिकोटी काटा आह मुझे दर्द हुआ... इसका मतलब मैं जिंदा हूं। हे भगवान तुम्हारा शुक्रिया लेकिन अगर ये स्वर्ग नहीं है तो ये आखिर है क्या!

मैं यह सोचते सोचते आगे बढ़ रहा था। उस जगह की सुंदरता मुझे मोहित कर रहा था बहुत देर यूं ही चलते रहने से भी कुछ पता नहीं चला तो मैं वहीं थक कर बैठ गया।

तभी कुछ लोगों की आवाजें मेरे कानों पर पड़ी मैं खुश हो गया चलो कुछ लोग तो है यहां। मुझे मदद मिल जाएगा मैं उस तरफ मुड़कर देखने लगा वहां एक छोटा सा गांव जहां कुछ लोग काम कर रहे थे।

मैं उनके तरफ बढ़ने लगा एक आदमी के पीछे ही पहुंच गया था कि किसी ने मुझे अपनी ओर खींचा जैसे वो मुझे बचा रही हो.. उसने मेरा मुंह अपने हाथों से बंद कर दिया।

मैं उसकी तरफ देखा "वाह क्या लड़की है.. लड़की नहीं अप्सरा कहना ठीक रहेगा, ऐसा लग रहा है जैसे भगवान ने साल भर की छुट्टी लेकर उसे बनाया हो मैं तो उसकी खूबसूरती पर कायल हो गया।

तभी उस लड़की ने मुझसे कहा "ये क्या कर रहे थे तुम अगर वे लोग तुम्हें देख लेते तो तुम्हारा तो राम नाम सत्य हो जाता!"

लेकिन मैं तो उसके रूप पर मोहित था उसकी बात मुझे कहा सुनाई देता वो मुझे घुरकर बोली "क्या हुआ क्या देख रहे हो..??"

मैं हड़बड़ा कर बोला "वो बात ऐसी है कि...!!"

"हा हा ठीक है लेकिन तुम यहां क्यों आए ये मौत और छलावे की दुनिया है!" वो लड़की बोली।

"मैं मैं नहीं जानता मैं यहां कैसे आया"

"अच्छा छोड़ो इस बात को मेरा नाम अमृता है" वह लड़की बोली जिसका नाम अमृता है।

मैं बोला "और मेरा नाम...."

वो बीच में बोल पड़ी "पता है तुम्हारा नाम है सव्यसाची"

मैं "नहीं मेरा नाम दिवाकर हैं, न कि सव्यसाची"

अमृता "नहीं तुम सव्यसाची ही हो।"

ऐसा कहते ही उसका खुबसूरत चेहरा एकदम से बदल गया अब वो बेहद डरावनी और खतरनाक दिख रही थी मैं उसे देख कर चीख पड़ा और वो हंसते हुए अचानक से मेरे अंदर समा गई।

दिवाकर "नहीं छोड़ो मुझे, निकलो मेरे शरीर से..!!"

बेटा क्या हो गया तू ये क्या नींद में बडबडा रहा है कोई सपना देखा क्या "मां ने मुझे जगाते हुए बोली..??"

मुझे शांत होने में थोड़ा समय लगा मां ने फिर से पुछा "क्या हुआ बेटा...??"

मैं बहाना बनाते हुए बोला "कुछ नहीं मां, तेरा बेटा आज बाल बाल बचा है तेरी बहु ने मुझे पकड़ कर झप्पी के साथ दस बारह जोरदार पप्पीयां दे ही डाली थी।"

मां "हट पगले कुछ भी बोलता है"

"सच्ची मम्मी" मैं बोला।

मां "हा हा जैसे मैं तुम्हें जानती ही नहीं।"

तभी वहा एक लड़की प्रवेश हुई।

मां "अरे देख ना अनू ये कैसी बातें कर रहा है"

"इस मोटी को हमसे क्या ये तो दिन भर उस प्रतिलिपि पर दिनेश दिवाकर की कहानियां पढ़ती रहती है। मैं चिड़ते हुए बोला।

अनू "ओय सून, मेरे फेवरेट राइटर के बारे में खबरदार जो कुछ भी बोला... कभी उनकी कहानी पढ़ कर देख, तु भी उसका फैन हो जाएगा। अभी एक न‌ई कहानी 'वासना की भुखी चुड़ैल" आया है हारर सस्पेंस थ्रिलर से भरपूर उसी को पढ़ रहीं हूं।

"अच्छा जरा अपने इस भाई की भी तारीफ कर दिया कर" मैंने बोला।

अनू "तूने आज तक ऐसा किया ही क्या है जो तेरी तारीफ करूं।"

"मां इसे समझा दो पढ़ाई लिखाई पर ध्यान दें ये दिनेश की कहानी पढ़ पढ़कर पागल हो गई है।" मैं मम्मी की ओर देखता हुआ बोला।

अनू "डरपोक खुद हार गया तो मां को बोल रहा है"

"अच्छा बच्ची रूक तुझे अभी बताता हूं" मैं अनू को पकड़ने के लिए उसके पीछे दौड़ गया।

मां "अरे अरे रूको, इतने बड़े हो गए हो लेकिन हर वक्त एक दूसरे का टांग खिंचते रहते हो अभी भी बच्चे के बच्चे ही हो दोनों।"

हैलो दोस्तो मेरा नाम है दिवाकर, अनू यानी अनुष्का मेरी प्यारी बहन हम दोनों एक दूसरे से जितना झगड़ते हैं उतना ही प्यार भी करते हैं। मां से तो आप लोग मिल ही चुके हो और पापा अभी आफिस ग‌ए है।

मुझे बचपन से ही साइंस बहुत पसंद था मैं हर रोज नए नए रसायन तैयार करता था इसलिए आज मैं एक सैन्टिस्ट हूं और आज जो कुछ भी मैंने देखा ऐसा लग रहा था जैसे वो सपना नहीं हकिकत था।

मां "बेटा जा नहा लें मैंने गीजर आन कर दिया है"

"ओके मां" यह कहकर मैं नहाने चला गया। कपड़े उतार कर देखा तो मेरे हाथों पर चोट लगा था मैं उसे देख कर चौंक गया क्योंकि ये चोट तो जब वो लड़की ने मुझे अपने तरफ खींचा था तब लगा था और वो तो एक सपना था तो ये चोट... कही इसका मतलब...!!

तभी मेरे अंदर से आवाज आई "इसका मतलब वो सपना नहीं सच था हा हा हा....!!"

क... क... कौन...??🤒🤕

कौन है जो दिवाकर के शरीर में है...! क्या वह किसी बड़ी मुसीबत में पड़ गया है...! आखिर क्या है सव्यसाची का रहस्य....?

®®®Ꭰɪɴᴇꜱʜ Ꭰɪᴠᴀᴋᴀʀ"Ᏼᴜɴɴʏ"✍️

तो कैसे हैं आप लोग बताना कमेंट बॉक्स में... लिजिए मैं फिर हाजिर हुआ हूं एक नई कहानी के साथ इसके सभी भाग प्रकाशित हो चुके हैं... पढ़कर बताइएगा जरूर की कहानी कैसी लगी साथ ही अपने मन से कुछ सिक्के भी प्रोत्साहन कहानी को प्रदान 🤗😇🙏