Sunahara Dhokha - 5 in Hindi Fiction Stories by Brijmohan sharma books and stories PDF | सुनहरा धोखा - 5 - अंतिम भाग

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सुनहरा धोखा - 5 - अंतिम भाग

5

(तलाक)

शीला के जाने के बाद मोहन जैसे दुख के समुद्र में डूब गया |

उसकी की जिंदगी पूरी तरह तबाह हो चुकी थी | उसके पास कुछ नहीं बचा था | उसका परिवार पूरी तरह उजड़ चुका था | वह इस ब्ड़ी दुनिया में नितांत अकेला था | उसका दिन तो जैसे तैसे गुजर जाता था किन्तु रात में उसका दुख कई गुना बढ़ जाता था | वह अपने मासूम बच्चे को याद करके रात भर रोया करता था| उसका गम बांटने वाला अब कोई बचा नहीं था| उसे अपनी करनी पर भारी पश्चाताप हो रहा था | वह सोचता कि वह शीला को माफ कर देता तो अच्छा होता | वह उस पर हाथ नहीं उठाता,उसे गालियां नहीं देता तो अच्छा रहता | आखिर उसके रूखे व्यवहार के कारण शीला अन्य पुरुष की ओर आकर्षित हुई | वह खुद भी सारी घटना के लिए जिम्मेदार था | अपने बच्चे के लिए तो उसे सोचना था |

फिर उसे दूसरी तरह के विचार भी आते | शीला ने सदैव उसे दुख व कलंक ही दिया था | वह घर ग्रहस्थि के लायक औरत कदापि नहीं थी | हिन्दुस्तान में पतियों के हाथों करोउ़ों औरतें जुल्म सहती हैं तो क्या वे सरे आम दूसरे मर्द के साथ हो लेती हैं | कोई भी इज्जतदार औरत शीला के समान बेवफाई और धोखा नहीं करती | मेरे ही तकदीर खराब है |

अनाथालय

शीला घर से निकलकर सीधे अनाथालय पहुंची | वहां का अफसर उसके पहनावे व बातचीत से

से समझ चुका था कि वह घर कें झगड़े से तंग आकर यहां आना चाहती है | वह किसी बड़े घराने की लग रही थी |

उसने शीला को बहुत समझाया कि यह जगह उसके समान मध्यमवर्गीय औरतो के लिए नही है|

तब शीला ने अपनी पूरी दास्तान उसे सुनाई कि किस तरह उसका पति दिन रात उसका कत्ल करने का प्रयास कर रहा है | वह पीहर नही जा सकती क्योकि उसकी तीन बहनो का भविष्य संकट मे पड़ जाएगा| तब अनाथालय के आफीसर ने उसके पिता का पता लेकर उसे वहां भर्ती कर लिया|

उसने चुपके से शीला के घर फोन कर दिया |

इधर शीला की हालत वहां के गंदे माहौल मे खराब हो गई| वहां अधिकांश औरते जुर्म व वैश्यावृत्ति के कारण बंद थी | शीला ने वहां से अपने प्रेमी को संदेंश भिजवा दिया था किन्तु वह नही आया |

उसने शीला को इस महाविपत्ति व घोर संकट के समय अकेला छोड़ दिया था|

रात होते ही उसने अपने पति मोहन का इंतजार कियान | वह कितना ही कठोर हो किन्तु इस विपत्ति मे आकर वह उसे वहां से जरूर मनाकर ले जाएगा|

किन्तु मोहन भी नही आया|

इधर मोहन को जब शीला के अनाथालय मे होने की सूचना मिली तो वह बड़ा बैचेन हुआ और उसे वहां से लाने के तैयार हो गया | किन्तु मां ने उसे कठोर रुख अपनाते हुए मना कर दिया|

मां ने कहा-उसके मां बाप उस ले जाएंगे |करो और भुगतो| यार किसी के काम आज तक नही आए है”, माँ ने कहा  |

दूसरे दिन उसके माता पिता उसे आकर अपने घर ले गए|

पिता ने कहा- “अब मोहन को किसी भयानक सपने के समान भूल जाओ|”

शीला नर्स ट्रेनिंग करने लगी और पप्पू को एक अंग्रेजी स्कूल मे भर्ती कर दिया गया|

भेंट

दो़ वर्ष बाद,

एक दिन मोहन स्टेशन के पास से गुजर रहा था| उसे कोई परिचित आवाज सुनाई दी|

कोई उसे बुला रहा था| उसने मुड़कर देखा, शीला उसे सड़क पर पुकारते हुए दौड़ी चली आ रही थी|

वह मुड़ा और दोनो एक जगह बैठ कर एक दूसरे का हाल पूछने लगे|

मोहन की आंखों से आंसू बह निकले|

‘कैसी हो शीला, क्या कर रही हो?’

‘ मैं ठीक हूं, आप कैसे हो ? मै रतलाम मे नर्स ट्रेनिंग कर रही हूं| ’ शीला की आंखों से आंसू बह निकले|

मोहन बोला- ‘पप्पू कैसा है?’

शीला ने कहा- ‘पप्पू मर गया|”

‘कैसे?

‘उसे निमोनिया हो गया था|’

मोहन को बड़ा दुख हुआ|

‘इधर कैसे आई थी?’

‘मेरी बहिन से मिलने आई थी|’

‘शीला !अब जब भी आओ तो किसी तरह मुझे खबर दे दिया करो | कम से कम कभी कभार मिल तो लिया करे’ |

उसे रतलाम जाना था | उसकी ट्रेन आ चुकी थी|

मोहन ने उससे विदा ली | मोहन ने उसे अपने जेब मे जितने रूपये थे,सब दे दिए|

घर आकर उसने मां को शीला से भेंट के बारे मे बताया|

मां ने कहा-‘ बेटा शीला अपने यार से मिलने आई थी | खबरदार उससे ना मिलना |

तुझे उससे तलाक लेना है| मोहन को भी शीला पर शक हो गया | उसके दिल मे नफरत जाग उठी |

मोहन ने कहा- ‘ मां पप्पू मर गया’- उसने बताया|

‘कैसे?’

‘उसे टायफायड हो गया था| ’

मां ने कहा- ‘यार बाज रांडे बच्चे पर ध्यान नही देती हैं | उसकी लापरवाही से बच्चा मर गया|’

शीला को घर से गए बहुत ढाई साल बीत चुके थे |

ऐक रात पड़ौस की ऐक महिला ने कहा ‘ आपकी बहू हमारे यहां अपने बेटे के साथ आकर बैठी है | यदि आप उसे अपनाने को तैयार हों तो वह यहां आ सकती है |’

इस पर श्यामा ने कहा ‘ हमारा उससे कोई संबंध नहीं है |’

इस पर शीला पुनः अपने पिता के घर लौट गई |

मोहन तो उसे अपनाना चाहता था किन्तु श्यामा ने उसे सख्त चेतावनी देते हुए मना कर दिया |

शीला को घर छोड़े दो साल से अधिक समय बीत चुका था|

मोहन की मां उसकी दूसरी शादि करना चाहती थी किन्तु विधिवत कोर्ट से तलाक लिए बिना यह संभव नहीं था |

पहले तो मोहन ने शीला पर बेवफाई के आधार पर तलाक लेने का विचार किया |

उसने ऐक वकील भी कर लिया किन्तु वकील ने गवाह की मांग की|

अवैध सम्बन्ध के केस के सत्य होते हुए भी गवाह जुटाना बहुत मुश्किल होता है |

किसी महिला को किसी पर पुरूष के साथ देख लिए जाने मात्र से उसे दुष्चरित्रा साबित नहीं किया जा सकता है|

उसके पर पुरूष से शारीरिक संबंध को तो सिद्ध करना करीब असंभव है|

वह दुश्चरित्र होते हुए भी सिद्ध न कर पाने की स्थिति में आप पर मानहानि का मुकदमा करके जीवन भर अपने भरण पोषण के लिए क्लेम कर सकती है | वह पति से जीवन भर गुजारा भत्ता भी ले व अपने प्रेमी के साथ जीवन भर ऐश करे सो अलग | स्त्री के लिए तलाक अधिक फायदेमंद होता है | अतः आपसी रजा मंदी से तलाक लेना सबसे अच्छा उपाय है|

ऐक दिन मोहन भोपाल में शीला की एक रिश्तेदार के यहां पहुंचा |

जैसे ही उसने बेल बजाई ऐक सुंदर शोडषी कन्या ने दरवाजा खोला|

वह मीता थी | उसकी हाल में ही शादि हुई थीबी |

उसका बदन यौवन से गदराया हुआ था |

वह मोहन के दूर के रिश्ते की साली की बेटी थी |

मोहन को देखते ही वह खुशी सें चिल्ला उठी,’आइये जीजाजी, बड़े अच्छे समय पर आए हैं | घर में कोई नहीं है| ’

वह सेक्स से उबल रही थी| उसने मोहन का हाथ कस कर पकड़ लिया |

वह उसे अपने बेड की ओर खींचने का प्रयास कर रही थी|

मोहन इस अप्रत्याशित आक्रमण से स्तंभित रह गया| वह अचानक हुऐ इस परिवर्तन के लिए जरा भी तैयार नहीं था | वह अपनी पत्नि व बच्चे के गम में डूबा हुआ था | उसने मीता से अपना हाथ छुड़ा लिया व गंभीर होकर गेस्ट रूम मे बैठ गया | मीता उसे बड़ी देर तक सेक्स के लिए मनाती रही किन्तु न जाने क्यों मोहन प्रस्तरवत बनकर कुर्सी पर बैठा रहा |

इस पर मीता अपना आपा खोकर मोहन को गालियां देने लगी |

उसने कहा, ‘ जीजाजी ! आप नपुंसक हो | इतना बढ़िया मौका आपने छोड़ दिया | तभी शीला ने आपको छोड़ दिया| ’

वह क्रोधित नागिन सी फुफकार रही थी|

मोहन दुखी होकर उसका हर वार झेलने को मजबूर था|

कुछ समय बाद उसकी मां लीला ने कमरे मे प्रवेश किया |

मोहन ने मन ही मन ईश्वर को धन्यवाद दिया  |

उसने सोचा यदि वह मीता की बात मान लेता तो वह रंगे हाथ अजनबी स्थान में सेक्स करता पकड़ा जाता |

किसे पता उस कृत्य का क्या अंजाम होता ? ऐसी परिस्थिति में अपनी गलती छुपाने के लिऐ लड़कियां आदमी पर ही झूटा आरोप लगा देती है |

मोहन को देखते ही लीला ने पूरे उत्साह व उमंग से उसका स्वागत किया|

उसने अपनी बेटी से कहा, ‘ मीता ! तुमने जीजाजी को मिठाई खिलाई कि नहीं ? इनका स्वागत करो |’

मीता दौड़कर मिठाई लाई व झट गिरगिट की भांति रंग बदलकर इठलाते हुए कहने लगी,

‘ देखो न मम्मी मैं कब से जीजाजी से मिठाई खाने के लिए मनुहार कर रही हूं किन्तु ये बिना बात किए मौन होकर बैठे हैं| ’

ऐसा कहकर उसने हंसते हुए मोहन के मुंह में मिठाई का ऐक पीस ठूंस दिया|

मोहन उसके प्रतिक्षण बदलते तेवर देखकर हैरान था किन्तु वह कुछ नहीं बोला|

उसने मीता से शीला के विषय में पूछा,“ शीला कहां है ? वह क्या कर रही है ?”

लीला ने कहा, ‘ शीला इन दिनों नर्स ट्रेनिंग स्कूल से कोर्स कर रही है| आजकल किसी डाक्टर वर्मा के साथ उसका अफेअर चल रहा है| वह डाक्टर उसके कालेज दिनो का साथी है | वह उसी के साथ अपना शेष जीवन बिताना चाहती है | अपने कालेज के दिनों में ये दोनों घर से भाग चुके थे| ’

मोहन शीला की पास्ट हिस्ट्री सुनकर सन्न रह गया|

उसने कहा ‘ आपने मुझे शादी के पूर्व इशारा कर दिया होता लो मेरी जिंदगी ऐक दुष्चरित्रा के चक्कर में बर्बाद नहीं हुई होती | ’

मोहन ने पूछा , ‘ मेरा बेटा पप्पू तो मर चुका है, ऐसा शीला ने ऐक दिन मुझे बताया था| ’

इस पर लीला ने कहा, ‘ नहीं, पप्पू जीवित है | वह महाराजा स्कूल मे पढ़ता है| ’

यह सुनते ही मोहन का दिल खुशी से झूम उठा | वह अचानक खड़ा हो गया व लीला को अनेक धन्यवाद देते हुए महाराजा स्कूल की खोज में अपने बेटे से मिलने निकल पड़ा|

मोहन तत्काल अपने बेटे के स्कूल के ठिकाने को पूछता हुआ महाराजा स्कूल जा पहुंचा| वह शहर का बड़ा प्रसिद्ध स्कूल था |

उसने प्राचार्य को अपने पुत्र से मिलने की चिट्ठी पहुंचाई |

उसने प्राचार्या के कक्ष में पहुंचकर कहा,

‘मुझे अपने बेटे से मिलना है| ’

प्राचार्या ने उससे पूछा, आपका बेटा कौन सी क्लास में पढ़ता है ? ’

मोहन को इस विषय में कुछ ज्ञान नहीं था| उसने अंदाज से जबाब दिया,‘ वह सेकंड क्लास में है| ’

‘उसका नाम क्या है?’

‘ पप्पू ’

‘ यह तो घर का नाम है| स्कूल का नाम बताइये| ’

‘ मैं अपने बच्चे से दो वर्ष बाद मिल रहा हूं| उसकी मां से मेरा तलाक हो गया है|

इसलिए मुझे नहीं मालूम उसकी मां ने किस नाम से उसे यहां भर्ती किया है| ’

यह कहकर मोहन चुप हो गया|

उस स्कूल के सभी लोग मोहन को संदेह की नजर से देख रहे थे|

प्राचार्या भी उस पर शंका कर रही थी|

मोहन निराश हो चुका था |

फिर उसने प्राचार्या से कहा,

‘ मेडम मेरा नाम मोहन शर्मा है| मैं इंदौर के कालेज में प्रोफेसर हूं| ’

इतना कहने पर पूरा स्टाफ मोहन के प्रति सहानुभूति दिखाने लगा | प्राचार्या भी बच्चे को शीघ्रता से ढूंढने का आदेश देकर खुद भी बच्चे को ढूंढने निकल पड़ी | पूरा स्टाफ मोहन से प्रभावित होकर उसे सहायता देने के लिए जुट गया |

शासकीय प्रोफेसर शिक्षा विभाग में ऐक बड़ी पोस्ट होती है | फिर मोहन उनके प्रोफेशन का ही था | किन्तु बच्चा मिल नहीं रहा था|

इस पर मोहन ने कहा, ‘ मेरे बच्चे की मां नर्स है| ’

इतना सुनते ही एक शिक्षिका एक छोटे बच्चे को लेकर आई|

उसने कहा,‘ इस बच्चे की मां का नाम शीला है | वह नर्स है| ’

इतना सुनते ही मोहन ने बच्चे को अपनी गोद में बैठा लिया व उसे बार बार चूम कर रोने लगा| यद्यपि न तो बच्चा और न ही मोहन ऐक दूसरे को पहचान पा रहे थे किन्तु फिर भी प्यार की भाषा से दोनों ने ऐक दूसरे को पहचान लिया| उसकी आँखों से अनवरत आंसू बहने लगे |

बच्चे को बड़े दिनों बाद इतना उन्मादपूर्ण प्यार मिला था | मोहन के आंसुओं के द्वारा बच्चे पर स्नेह की बरसात हो रही थी| इस प्यार को पाकर बच्चा निहाल हो रहा था| वहाँ उपस्थित सभी लोग इस भावुक सीन को देखकर अपने आंसू बहा रहे थे|

कुछ देर बाद मोहन ने बच्चे से भारी मन से विदा ली तो बच्चा बोला, ‘ आप मुझसे मिलने आते रहना,अंकल ! ’

मोहन ने भरे गले से कहा,‘ मैं तुम्हारा पापा हूं बेटा ! अंकल नहीं| मैं तुमसे मिलने आता रहूंगा बेटा ! ’

दोनों पिता पुत्र की नजरे ऐक दूसरे से नहीं हट रही थी|

तलाक

मोहन शीला से मिलने रतलाम के नर्स ट्रेनिंग स्कूल पहुंचा|

गेट से निकलने वाली कुछ नर्सो से उसने पूछा- ‘ मुझे शीला से मिलना है वह कहां होगी ?’

इस पर सभी नर्सें उसे अजनबी समझकर उससे बात करने से बच रही थी |

वे उससे बात करने को राजी नही दिखी |

तब मोहन ने कहा-‘ मै शीला का पति हूं| ’

तब उनमे से एक ने ताना मारते हुए कहा- ‘ शीला हमेशा डा.वर्मा के यहां रहती है | वह वहीं मिलेगी| ’

इस पर मोहन दिन भर इधर उधर भटक कर शाम होने का इंतजार करने लगा|

अंधेरा होते ही वह डा.वर्मा के घर के बाहर छिपकर इंतजार करने लगा|

वह पहली मंजिल पर चढकर डॉक्टर के घर के सामने पहुंचा जो बंद था|

खिड़की पर पर्दा लगा हुआ था| उसने धीरे से पर्दा हटाया|

शीला उस घर मे डॉक्टर की पत्नि के समान रहकर गृह कार्य मे व्यस्त दिखी|

मोहन के मुंह से सहसा निकल गया- ‘शीला’

मोहन जल्दी से वहां से भागकर फिर नीचे आकर एक पेड़ के पीछे छिपकर बैठ गया|

उसने देखा कि शीला वहां बाहर आकर बहुत देर तक इधर उधर देखती रही|

फिर डॉक्टर दरवाजे के बहार आकर देखता रहा | किसी को वहां नही पाकर वे दोनो अंदर चले गए |

दूसरे दिन प्रातः मोहन शीला से मिलने हास्पिटल पहुंचा |

उसे कुछ नर्सें मुख्य द्वार से बाहर निकलती दिखाई दीं | उसने उनसे शीला के बारे में पूछा तो वे उसे फिर से संदेह करते हुए देखने लगी |

तभी शीला बाहर आती हुई दिखाई दी | मोहन को देखकर वह बहुत खुश दिखाई दी |

उसने मोहन से कहा ‘ आप सामने बगीचे मे बैठिये मैं थोड़ी देर में छुट्टी लेकर आती हूं| ’

इस पर मोहन बगीचे में एक बेंच पर जाकर बैठ गया | वहां तरह तरह के फूल लगे हुए थे | कई रंग बिरंगी झाड़ियां थीं व अनेक बउ़े पेड़ लगे हुए थे | बगीचे के बीच में देवी का एक मंदिर था | वहां बड़ी शांति थी |

कुछ देर बाद शीला मोहन के पास आकर बैठ गई | वह मोहन के सीने से लिपट गई |

उसने कहा ‘मैं अनेक दिनों से देवी से मन्नत मांग रही थी कि आपको एक बार मेरे पास भेज दे |’

मोहन ने कहा ‘ मेरा हर दिन तुम्हारी और पप्पू की याद में रोते हुए जाता है |’

बहुत देर तक शिकवे शिकायतें व उद्दाम प्यार का इजहार होता रहा | उन दोनों की आंखों से अनवरत आंसू बरसते रहे |

फिर मोहन ने कहा ‘ शीला मैं जानता हूं अब तुम डा.वर्मा के साथ रहती हो | तुम उनके साथ खुशी से रहो किन्तु मुझे तलाक दे दो |’

इस पर शीला ने कहा ‘मैं भी आपकी जिंदगी बरबाद नहीं करना चाहती | मैं तलाक देकर आपको दूसरे विवाह के लिए मुक्त कर देना चाहती हूं |

मोहनः ‘मैं कल तलाक के कागज तैयार करवाता हूं | तुम मजिस्ट्रेट के सामने दस्तखत कर देना |’

‘बहुत ठीक | मैं कोर्ट मे ठीक बारह बजे आ जाउंगी |’

दूसरे दिन मोहन ने कोर्ट मे एक वकील करके तलाक के सारे कागज तैयार करवा लिए | वह शीला का रास्ता देखने लगा |

बारह बजे, फिर दो बजे, अंत में कोर्ट का समय समाप्त हो गया किन्तु शीला नही आई |

निराश होकर मोहन इंदौर लौट गया | शीला ने एक बार फिर उसे धोखा दिया था |

एक माह बाद मोहन ने फिर एक बार तलाक के लिए शीला से संपर्क करने का विचार किया |

वह पुनः शीला के हास्पिटल पहुंचा |

इस बार शीला उसे दरवाजे पर ही मिल गई |

मोहन ने पूछा ‘ क्या आज तुम कोर्ट मे आ जाओगी ?’

शीला ने उसे फिर बगीचे मे इंतजार करने को कहा |

कुछ देर बाद शीला आई |

मोहन ने कहा, “ मै उस दिन शाम तक कोर्ट में तुम्हारा इंतजार करता रहा किन्तु तुम नहीं आई ?”

उसने कहा,” उस दिन एक्सिडेंट के इमर्जेंसी केस आ गए थे अतः वह कोर्ट नहीं आ सकी|”

‘ आज मैं आपके साथ यहां से ही चलूंगी |’

वे दोनो कोर्ट में पहुंचे व जज के सामने गवाही देकर सारी खानापूर्ति करके तलाक के कागजों पर दस्तखत कर दिए |

मोहन व शीला ने जीवन भर एक दूसरे का दोस्त बने रहने के वादे के साथ विदा ली |

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लेखक के प्रकाशित अन्य कहानियां उपन्यास आदि

गुजरात की सर्वश्रेष्ठ ebook प्रकाशन संस्था “ मात्रभारती.कॉम पर प्रकाशित ग्रन्थ :

1 भारत के गावों में स्वतंत्रता आन्दोलन (एक अनकही दास्तान) हिंदी व अंग्रेजी में

२ विद्रोहिणी ( हिंदी व अंग्रेजी )

३ पागल ४ शैतानियाँ ५ बुझे बचाओ (लड़कियों से, मीटू पुरुष )

४ सुनहरा धोखा ( हिंदी व इंग्लिश )

५ जुआरी फिल्म प्रोड्यूसर

६ अमृत बूटी

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लेखक परिचय

नाम : लेखक ब्रजमोहन शर्मा एम्.एस.सी. बी.एड. आयुर्वेद रत्न, ज्योतिष विशेषग्य, योग, आसन, ध्यान एक्युप्रेशर,आयुर्वेद रत्न, ४० वर्षों के दीर्घ अनुभव

पता : ७९१ सुदामानगर इंदौर (.म.प्र.) ४५२९००९ मो 919424051923, pho. 07312485512 present on

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लेखक की अन्य कहानियां : ( बेहतर विलल्प प्रथम छः अमेज़न पर प्रकाशित, जो हाल ही में हटा ली गई )

१ परम आनंद ( हिंदी) अमेज़न

२ The H|ghest Bl|ss ( Engl|sh)

3 Freedom struggle |n v|llage |nd|a  ( An untold story)

4  ग्रामीण भारत में स्वतंत्रता आन्दोलन ( एक अनकही दास्तान)

5 The Rebel Woman 6  विद्रोहिणी 7  Top Med|tat|ons of World

एवं एन्य अनेकों

लेखक की कविताएँ,१ फारेस्ट २ That shr|ll|ng साउंड  इंटरनेशनल प्रतियोगिता poetry.com २००० टॉप पोजीशन में सेलेक्ट हुई |

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सुनहरा धोखा, जुआरी फिल्म प्रोड्यूसर, अमृत बूटी की खोज, पागल आदि अनेकों