Chaar Din ka Pyar - 2 in Hindi Thriller by Jaidev chawariya books and stories PDF | चार दिन का प्यार - भाग 2

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चार दिन का प्यार - भाग 2

दो दिन बाद,

देव का हाथ अब काफी हद तक ठीक हो चुका था। वह दो दिन से अपने कमरे में ही बैठकर जयदेव चावरिया का ( माय फर्स्ट मर्डर केस ) उपन्यास पढ़ रहा था। देव को मर्डर मिस्ट्री उपन्यास बहुत पसंद थे। अभी वह उपन्यास में डूबा हुआ था। की जब ही दरवाजे पर किसी ने दस्तक दी, देव ने देखा की दरवाजे पर उसकी बहन पूजा थी। 

"देव! क्या में अंदर आ सकती हूं ?"

"अरे! बहन आप कैसे बात कर रही हो?

पूजा कमरे में अंदर आकर देव के बगल में बैठ गई। 

"देव! अब तुम्हारा हाथ कैसा हैं ? उम्मीद करती हूं, पहले से ठीक होगा।

"जी! देव ने हां में गर्दन हिलाई।

"देव! मुझे पता हैं की तुम किस दौर से गुजर रहे हो।" अभी एक साल पहले ही मम्मी हमें छोड़कर चली गई, वो जख्म जिंदगी ने ऐसा दिया। जिसे भरा कभी नहीं जा सकता। इतना कहने के बाद पूजा की आंखे नम हो गई। 

देव ने पूजा का हाथ पकड़ा और बोला, "बहन मुझे पता हैं की कुछ जख्म ऐसे होते हैं जो कभी नहीं भरा करते। देव की भी आंखे नम हो गई थी।"

"देव! वो ही तो कहना चाहती हूं।" की यह दर्द तो कम हो नहीं रहा, की अब मम्मी हमारे बीच नहीं रही । दूसरा दर्द तुम देने जा रहे हो, कभी सोचा हैं की तुम्हें कुछ हो जाता तो हमारा क्या होता ? चलो मेरी तो शादी हो जाती। में तो अपने ससुराल में अपनी गृहस्ती संभालती और पापा का क्या होता ? कभी सोचा हैं ? मम्मी के जाने के बाद पापा बिलकुल टूट गए। वह सिर्फ हमारी वजह से जी रहे हैं और हम उनके साथ क्या कर रहे हैं ? देव मेरे बारे में ना सही, एक बार पापा के बारे में तो सोच लेते । पापा को बस एक तुम्हारा ही सहारा हैं और तुम क्या कर रहे हैं तुम्हें ही नहीं पता ?

"बहन! उस समय मुझे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था।" की क्या सही क्या गलत ?

पूजा यही तो जानना चाहती थी की उसके भाई के साथ आखिर हुआ क्या था ? जो उसने मेरी सगाई वाले ही दिन खुदकुशी करने की सोची। पूजा इसलिए इमोशनल बाते कर रही थी की उसका भाई भावना में बहकर उसे सच बता दे ।

देव ने अपने आप को संभाला, उसे पता ही नहीं चला की वह कब भावना में बह गया। देव नहीं चाहता था की उसकी बहन को सच का पता चले। की उसके साथ आखिर हुआ क्या था ? जब ही देव ने दिमाग लगाया और कहने लगा बहन मेरे सिर में दर्द हो रहा हैं।

पूजा जानती थी की देव उसे हकीकत नहीं बतायेगा। इसलिए वह सिर दर्द का बहाना कर रहा हैं। 

"देव! यूं सचाई से मुंह मोड़ लेना।" ऐसे किसी समस्या का समाधान नहीं निकलता। क्या तुम अपनी बहन से थोड़ा सा भी प्यार नहीं करते । या फिर मुझे इस काबिल नहीं समझते, की में तुम्हारे दर्द को नहीं समझ सकती ?

"बहन! ऐसा मत कहो प्लीज।"

"क्यों आखिर ऐसी कौन सी बात हैं ? जो तुम होठों पर भी नहीं ला सकते ।"

"बहन प्लीज जिद मत करो।"

पूजा ने देव का हाथ अपने सिर पर रखा और बोली तुम्हें मेरी सिर की कसम हैं। 

देव ने अपनी दोनो आंखे बंद की, उसके माथे पर पसीना साफ छलाक रहा था। देव अपने आप से बात कर रहा था यह बहन ने मुझे कसम देकर कहा फंसा दिया।

देव ने बड़ी हिम्मत जुटाकर कहा, बात सगाई वाले दिन की हैं। जहां सब लोग एंजॉय कर रहे थे, उसी समय एक ऐसी घटना घटी जिसे में किसी को बता नहीं सकता ।

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