Tera Lal Ishq - 16 in Hindi Crime Stories by Kaju books and stories PDF | तेरा लाल इश्क - 16

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तेरा लाल इश्क - 16

एक इंसान बेधड़क ऑफिस में घुस आता है और धड़ाम से  मुंह के बल गिर जाता हैं। अब आगे,,,,,

वो जो भी है टोपी वाले ब्लेक जैकेट पहने मुंह के बल नीचे गिरा पड़ा था जैसे ही उसके कानों में गन लोड होने की आवाज गई वो तेजी से जंप कर उठ खड़ी हुई। जिससे उसका जैकेट उतर गया सब आवाक रह गए अरे अरे तेजी देख कर नही,,,शक्ल देख कर,,,

आशना को छोड़ सभी हैरानी से "भीनी तुम,,,?" ये नाम सुनते ही कनंत और कृभिन हैरान रह गए और  सिक्रेट रूम से झट से बाहर निकल आए और आखें बड़ी बड़ी कर भीनी को देखने लगे।



भीनी वेद्द्यंत उम्र 21, दुनिया की नजरों में सबसे महान काबिल ए तारीफ बेस्ट डॉक्टर,,, न ना ना ऐसा मत समझना,,, इसमें आधा सच और आधा सरासर झूठ है,,, डॉक्टरी बेस्ट वेरी बेस्ट इनसे बेस्ट कोई नहीं,,,पर दुनिया की नजरो में एक साइको डॉक्टर से ज्यादा कुछ नहीं,,,इनके हाथों कोई मरीज ठीक न हो ऐसा हो ही नहीं सकता लेकिन ठीक होकर  बेहोश हो जाए इसकी 100% गेरेंटी हैं। अब ऐसा क्यों स्टोरी में आगे पढ़ने पर समझ आ जाएगा,,,,,

"हा मै,,,अब सराफत से सभी अपना अपना खिलौना अपने जेब में ठूसो " भीनी सभी को घूरते हुए बोली। 

"ये कौन सा तरीका है ऑफिस में आने का ?" कृभिन उसे अजीब तरह से घूरते हुए बोला। 

"ए चश्मिश चुप,,, कितना मिनट हुआ ये बता पहले" भीनी घबराते हुए उसे डपटकर बोली।

"दोपहर के 2 बजके चार मिनट 44 सैकेंड" कृभिन बिना घड़ी देखे फट से बोला।

कनंत उसे घूरते हुए"सिर्फ मिनट पूछा था,,,समय की कुंडली नही" 

कृषि भी उसका साथ देते हुए "हमे पता है तू जीनियस है,,,इसलिए इतना जीनियस गिरी झाड़ने की जरूरत नहीं" 
कृषभ दोनो को एक एक मुक्का पीठ पर जड़ "तुम दोनों उसे परेशान करने से अच्छा अपने ऊपर ध्यान दोगे तो ज्यादा बेहतर होगा" 

"सही कहा आपने लीडर,,, जासूस होकर दोनो लफंगे जैसा बिहेव करते हैं" रिहा और काशी मुंह बिचकाते हुए बोली।

"जैसे की तुम दोनो सती सावित्री हो" कृषि और कनंत भी उन्ही की नकल करते हुए बोले।

"ए तुम लोग अपना पंचायत बाद में करना,,, लीडर मैं सही समय पर पहुंच गई ना?" भीनी उन चारों को  डपट कर आशना से पूछी। 

आशना जो प्रतिलिपि पर "द सिक्रेट जासूस" स्टोटी पढ़ रही थी पांच मिनट खत्म होते ही या कहो फोकट का टाइम खत्म होते ही अपना फोन ऑफ कर  गुस्से में सबको घूरने लगी।

आशना भीनी को खा जाने वाली
नजरो से घूरते हुए "कृभिन ने बता तो दिया फिर क्यों,,, वही सवाल कर टाइम पास कर रही,,,? जाकर चुप चाप पेसेंट को देख,,,अगर वो टपक गया ना तो,,,,"

भीनी सीरियस लुक बनाकर "लीडर कहा है पेशेंट ?"

आशना आखें छोटी कर "अपने गोद में लेकर बैठी हु,,, जाहिल गवार डॉक्टर क्लिनिक क्यों बनाया है अपार्टमेंट में?"

भीनी घबराते हुए "ह हा समझ गई,,, शांत शांत शांति लीडर जा रही मै" 

"डॉक्टर होकर कैसा अजीब सवाल कर रही,,, पेशंट है तो   पेशंट क्लीनिक रूम में ही होगा ना" कृभिन भीनी को अजीब तरह से घूरते हुए मन में बोला।

भीनी आखें नचाकर "अब ऐसे घूर क्या रहे,,,? हटो जल्दी रास्ते से  वरना वो मर जाएगा" और उसे धकेल कर आगे बढ़ गई। 
कृभिन कनंत और कृषि की तरफ लुढ़क गया  वो दोनो भी उसे संभालने की जगह पीछे सरक गए। 
कृभिन जमीन पर पड़े दोनो को घूरने लगा वो दोनो खाली बत्तीस  दिखा दिए।

"अभी तक तो जिंदा है कही तुम्हे देख कर सच में न मर जाए" कृभिन उन दोनों को छोड़ भीनी को घूरते हुए बोला।

"कुछ बोले आप जीनियस चश्मिश ?" भीनी रुक कर पलट के डेंजर स्माइल कर उसे घूरते हुए बोली।

"नही,,,शायद आपका कान ज्यादा सुनता है" कृभिन खड़ा होते हुए बोला।

"पहले अंदर जो पड़ा है उसे निपटाती हु,,, फिर तुम्हे बताती कितना सुनती हु मै" ये बोल वो क्लिनिक रूम में घुस धड़ से दरवाजा लॉक कर दिया।

कृभिन शॉक में खड़ा रह गया उसके कान में एक ही शब्द गूंज रहे थे "निपटाती हु" 
वो बोला "मैं क्या किया जो ये ऐसे धमका के चली गई" 

सभी उसे घूरते हुए "गलत टाइम पर ही अपने मुंह से आग निकालना जरूरी है? " 

कृभिन कुछ बोलता की क्लिनिक रूम भीनी की आवाज आई "देखो इसके बचने की होने की दुआ मत मांगना कोई" 

सभी अजीब तरह से दरवाजे को घूरने लगे। जैसे आर पार देख सकते हो "क्यों ?" सभीने एक साथ सवाल किया।

"अगर मर गया तो जिम्मेदार तुम लोगो की दुआ होगी मतलब तुम लोग" सभी आंखे फाड़े दरवाजे को देखते तो कभी एक दूसरे को ऐसे ही सबका मुंह बन जाता हैं।

"कृषभ कितनी देर से खड़े हो बैठ जाओ" कृभीन ने कहा।

"नही मै ठीक हु" कृषभ ने कहा।

कनंत जबरदस्ती हस्ते हुए "ऐसे कैसे कितनी देर से खड़े हमारे चुगली मिशन को सुन रहे थे"

रिहा बोली "थक गए होंगे बैठ जाइए लीडर" 

कृषभ नॉर्मली बोला " नही अब ठीक हु "


कृभिन डरते हुए बोला "फि,, फिर भी बैठ ही
जा,,जाइए" 

"बोला ना मुझे नही बैठना" कृषभ थोड़ा सख्ती से बोला।

काशी घबराते हुए "बैठ जाओ लीडर बैठ जाओ,,,क्या बिगड़ जाएगा तुम्हारा???" 

"कुछ नही,,,मैं ठीक हु,,,तुम सब बैठ जाओ" कृषभ ऑर्डर देने के लहजे में बोला। 

कृषि कनंत डरते हुए एक दुसरे चिपक कर "अरे बैठ जाओ भाई वरना,,,,,,"

"वरना,,,? वरना क्या ?" कृषभ दोनों को कॉलर से पकड़ अलग कर गुस्से में सबको घूरते हुए बोला।

"वरना बहुत कुछ बिगड़ जाएगा आपका" सभी रोनी सूरत बनाकर पीछे देखने का इशारा करते हुए बोले।

उनका इशारा समझते ही कृषभ को अंदर ही अंदर भारी संकट आने का करंट लगा। वो जैसे ही पीछे मुड़ा आशना को एक पैरो में खड़ा पाया वो भी गुस्से में लाल 

"आश,,,,"  वो उसका पूरा नाम लेता की आशना उसे एक  पंच उसके मुंह पर जड़ दी बिचारा सोफे पर जाकर गिरा और भी  बैठने वाले पोज में सभी की हसी छूट गई आशना और कृषभ ने सभी की को खा जानें वाली नजरो से घूरा सभी एक दूसरे का मुंह चाप लिए। दस मिनट बीत गए एक अलग ही शांति छाई हुई थी या कहें तूफान के आने के पहले की शांति थी। 

"इतनी शांति क्यों है?" रिहा ने सवाल किया। 

"रुक जाओ पाच सैकेंड अभी महा अशांति फैल जाएगी" कृभीन की बात सुन सभी उसे को घूरते हैं। 

कृषि मुंह बनाकर "हो ही नहीं सकता,,,
कनंत "ज्यादा फेक मत समझा"
  इन दोनों की बात पर पांच  सेकेंड खत्म हुए और बचाओ बचाओ चिल्लाने की आवाज आई ये आवाज क्लिनिक रूम से आ रही थीं आशना को छोड़ कर सभी उस दरवाजे के पास गए। 

क्या हुआ होगा अंदर ? किसकी आवाज थी ये? भीनी की या उस मीडिया के आदमी की ??? या फिर है कोई और ? जानने के लिए बने रहे स्टोरी के साथ 🤗🤗😁मिलते हैं अगले भाग में by by 

भीनी भीनी खुशबू 🤭ये बहुत सियाप्पे करने वाली है आगे स्टोरी में 🤣🤣🤣बस आप पढ़ते रहिए। और अपनी समीक्षा दे।
🤗🤗🤩🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤩🤗🤗